ऐलन बॉर्डर रिटायर हो चुके थे। एक कमजोर ऑस्ट्रेलियन टीम को वर्ल्ड कप चैंपियन बनाने के बाद उनका सपना था वेस्टइंडीज को टेस्ट सीरीज में हराना, तमाम प्रयासों के बाद भी वो पूरा न हो सका था। 1993 में एडिलेड में एक रन से टेस्ट मैच हारना उनका सपना तोड़ गया था।
1995 में मार्क टेलर की ऑस्ट्रेलिया वेस्ट इंडीज़ दौरे पर आई चार टेस्ट मैचों की सीरीज के लिए। वेस्ट इंडीज़ की टीम अभी भी खासी मजबूत थी भले ही कुछ बड़े नाम रिटायर हो चुके थे। टीम में रिची रिचर्डसन, ब्रायन लारा, कार्ल हूपर, वाल्श और एम्ब्रोस जैसे बड़े नाम थे। कप्तान रिची रिचर्डसन ने सीरीज से पहले कहा था कि ये ऑस्ट्रेलियाई टीम वेस्टइंडीज़ आने वाली सबसे कमजोर ऑस्ट्रेलियाई टीम है। उन्होंने क्या सोचकर ऐसा कहा था पता नहीं क्योंकि ऑस्ट्रेलिया की बैटिंग अच्छी खासी थी…. मार्क टेलर, माइकल स्लेटर, डेविड बून, दो दो वॉ… गेंदबाजी जरूर थोड़ी कम अनुभवी थी। रिची को पता नहीं था कि इस सीरीज में क्या होने वाला है।
पहला टेस्ट ब्रिजटाउन में था…. ऑस्ट्रेलिया ने मात्र 3 दिनों में ये टेस्ट दस विकेट से जीत लिया। टेस्ट क्रिकेट में उस समय की बेस्ट टीम के लिए ये एक बहुत बड़ा झटका था। दूसरा टेस्ट ड्रॉ रहा।
सीरीज जीत की उम्मीद बनाये रखने के लिए वेस्ट इंडीज़ का तीसरा टेस्ट मैच जीतना बहुत जरूरी था। तीसरा टेस्ट मैच पोर्ट ऑफ स्पेन की हरी पिच पर था। वाल्श और एम्ब्रोस की जोड़ी ने कहर ढा दिया। ऑस्ट्रेलिया पहले ही दिन मात्र 47 ओवरों में 128 पर ऑल आउट हो गई, स्टीव वॉ ने 65 नाबाद रन बनाए, उनके अलावा कोई भी एम्ब्रोस के सामने खड़ा नहीं हो पा रहा था।
एक ओवर में एम्ब्रोस को लगा कि स्टीव वॉ ने उन्हें गाली दी है, वो स्टीव वॉ की ओर बढ़े, उस समय के TV फुटेज देखकर आपको ऐसा लगेगा मानो वो किसी भी क्षण स्टीव वॉ को पीटना शुरू कर सकते हैं। रिची रिचर्डसन ने एम्ब्रोस को खींचकर अलग किया, एम्ब्रोस ने कुछ साल बाद एक इंटरव्यू में (मजाक करते हुए) कहा कि उस दिन वो स्टीव वॉ को इतना पेलते कि ऑस्ट्रेलिया एक महान क्रिकेटर खो देता।
अब वापस आते हैं खेल पर, इस पारी में कोई और खिलाड़ी 20 रन भी नहीं बना सका। एम्ब्रोस ने 5 विकेट लिए, वाल्श ने तीन। अब बारी थी वेस्ट इंडीज़ की, इनका भी यही हाल रहा, मात्र 60 ओवरों में 136 पर ऑल आउट, ग्लेन मैक्ग्रा 6 विकेट….. ऑस्ट्रेलिया की दूसरी पारी भी 105 पर ही निपट गई, एम्ब्रोस 4 विकेट…. वेस्ट इंडीज़ ने 98 रन का टारगेट एक विकेट पर ही पूरा कर लिया….
बाकी था जमैका में चौथा और ऐतिहासिक टेस्ट मैच, ऐतिहासिक इस लिहाज से नहीं कि ये कोई रोमांचक टेस्ट मैच था या दोनों टीमों के बीच बड़ी जोरदार टक्कर हुई, बल्कि इस लिहाज से कि इस मैच ने विश्व क्रिकेट में वेस्ट इंडीज़ की दो दशक से चली आ रही डॉमिनेन्स को समाप्त कर दिया। एक बल्लेबाज के रूप में स्टीव वॉ का कद बहुत ज्यादा बढ़ गया। मैच की शुरुआत बड़ी जबरदस्त हुई थी, वेस्ट इंडीज़ ने 103 रन तक केवल एक विकेट खोया था, यहाँ से ब्रायन लारा का आउट होना वेस्ट इंडीज़ की उम्मीदों के लिए बहुत बुरा साबित हुआ। कप्तान रिची ने हर सम्भव प्रयास किया और शतक बनाया लेकिन इंडीज़ 265 पर सिमट गई।
ऑस्ट्रेलिया की बल्लेबाजी ने भी अभी तक सीरीज में कोई बड़ा स्कोर नहीं बनाया था, इसलिए 265 का स्कोर बहुत कम नहीं माना जा रहा था। 73 पर 3 विकेट खो चुकी ऑस्ट्रेलियाई टीम भी संकट में थी।
यहाँ क्रीज़ पर एक साथ थे दो भाई, मार्क और स्टीव….. दोनों ने जबरदस्त बल्लेबाजी करते हुए 230 रन जोड़े और वेस्ट इंडीज़ को मैच से बाहर कर दिया। मार्क 126 रन बनाने के बाद एक उटपटांग शॉट खेलने में आउट हो गए, मार्क वॉ हमेशा काम खत्म होने के बाद आउट होने के नए नए तरीके इज़ाद करने के लिए प्रसिद्ध रहे। शायद यही कारण रहा कि वो कभी दोहरा शतक नहीं बना पाए। मार्क हमेशा से अपने भाई स्टीव से ज्यादा आकर्षक बल्लेबाज थे। बेहद स्टाइलिश और गिफ्टेड स्ट्रोकप्लेयर…. लेकिन स्टीव वॉ एक फाइटर थे…. उन्होंने पिछले टेस्ट में भी अकेले लड़ाई लड़ी थी और यहाँ भी 200 रन बनाए जो उनके करियर के अंत तक उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर रहा।
266 की लीड लेने के बाद ऑस्ट्रेलिया 531 पर ऑल आउट हो गई। वेस्ट इंडीज़ के बल्लेबाज हार मान चुके थे, टीम 213 पर सिमट गई। पारी और 53 रनों से टेस्ट जीतकर मार्क टेलर की टीम ने वो काम कर दिखाया था जो पिछले 15 साल में कोई टीम न कर सकी थी, ये काम था वेस्ट इंडीज़ को टेस्ट सीरीज में हराना।
रिची रिचर्डसन के पास शब्द नहीं थे कहने को, उनके अनुसार मार्क टेलर की जो टीम वेस्ट इंडीज़ आने वाली सबसे कमजोर ऑस्ट्रेलियन टीम थी उसने वेस्ट इंडीज़ को 2-1 से हरा दिया था। इस हार के बाद वेस्ट इंडीज़ कभी भी क्रिकेट में वो ताकत नहीं रह गई जो पिछले 15 सालों में थी। ब्रायन लारा, कार्ल हूपर और चंद्रपॉल के अलावा कोई भी बल्लेबाज वेस्ट इंडीज़ की महान बल्लेबाजी परंपरा को आगे नहीं बढ़ा सका। हर चीज़ का अंत होता है, वेस्ट इंडीज़ की डॉमिनेंस का अंत भी होना ही था। ऐलन बॉर्डर न सही मार्क टेलर सही।
Gloucester Park, Perth में उस दिन तापमान था 42 डिग्री सेल्सियस। दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाज Barry Richards को बल्लेबाजी के लिए ऐसा मौसम भाता था।
World Series Cricket सीजन 1977-78 का 5वाँ Supertest. 27 जनवरी 1978. WSC Australia vs WSC World. इयन चैपल जानते थे कि उन्होंने “Bastard of a toss” हारी है।
World XI के लिए दक्षिण अफ्रीका के Barry Anderson Richards और वेस्ट इंडीज़ के Gordon Greenidge ओपनिंग के लिए आए। ये दोनों हैम्पशायर काउंटी के लिए भी ओपन करते थे। दोनों ने 100 से ऊपर की साझेदारी कर ली थी और दोनों ही जबरदस्त स्ट्रोकप्ले दिखा रहे थे। कुछ देर बाद टीम का स्कोर था 234/0 और दोनों बल्लेबाज 114 रन पर थे। गॉर्डन ग्रीनिज हैमस्ट्रिंग में खिंचाव की बात कहके ड्रेसिंग रूम में चले गए। ऑस्ट्रेलियन तेज गेंदबाज Max Walker बताते हैं कि ग्रीनिज अक्सर ऐसा करते थे जब उन्हें लगता था कि उन्हें थोड़े आराम की आवश्यकता है। लेकिन Barry को ऐसी कोई आवश्यकता नहीं थी।
बैरी रिचर्ड्स का साथ देने क्रीज पर आए आइजैक विवियन अलेक्जैंडर रिचर्ड्स अर्थात विव रिचर्ड्स। Max Walker ने बताया कि अखबारों में प्रश्न उठते थे कि इन दोनों में बेहतर रिचर्ड्स कौन है? श्वेत या अश्वेत। दोनों में से इस समय विश्व का सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज कौन था, यह बता पाना कठिन था। जब विव बल्लेबाजी करने आए तो बैरी पहले ही 114 पर थे। अतः Max Walker यह मान रहे थे कि विव कम से कम दोहरा शतक तो बनाएंगे।
बैरी ने 1970 में दक्षिण अफ्रीका पर प्रतिबंध लगने के कारण मात्र 4 टेस्ट ही खेले लेकिन सर डॉनल्ड ब्रैडमैन का मानना था कि बैरी क्रिकेट इतिहास के महान बल्लेबाजों में से एक हैं। अपनी पहली और आखिरी टेस्ट सीरीज में बैरी ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 4 टेस्ट में 72.57 की औसत से 508 रन बनाए थे, जिसमें दो शतक थे। बैरी इसके बाद कभी टेस्ट क्रिकेट नहीं खेले।
WSC के लिए जब Barry Richards को Kerry Packer का ऑफर आया तो उन्होंने तुरंत स्वीकार कर लिया क्योंकि वे विश्व के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के साथ खेलने का ये अवसर खोना नहीं चाहते थे। दक्षिण अफ्रीका पर प्रतिबंध लगने के बाद Barry का अधिकांश करियर इंग्लैंड में Hampshire के लिए काउंटी क्रिकेट और ऑस्ट्रेलिया में साउथ ऑस्ट्रेलिया के लिए शेफ़ील्ड शील्ड खेलते हुए बीता था। बैरी की आक्रामक बल्लेबाजी का अंदाज़ा आप इस बात से लगाएं कि शेफ़ील्ड शील्ड में एक बार वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध उन्होंने एक दिन के खेल में 325 रन बना दिए थे। इस पारी में उन्होंने 381 गेंद पर 356 रन बनाए जिसमें 48 चौके और एक छक्का था। ये कोई साधारण बॉलिंग अटैक नहीं था, डेनिस लिली और ग्राहम मैकेंजी जैसे गेज गेंदबाजों का सामना करना पड़ा था बैरी को। इस पूरे ऑस्ट्रेलियन सीजन में उन्होंने 109.85 की औसत से 1538 रन बनाए जिसमें 6 शतक थे। प्रथम श्रेणी करियर में पाँच बार ऐसे अवसर आए जब बैरी ने मैच के पहले दिन लंच से पहले शतक बना दिया।
Gloucester Park, Perth में विव के साथ बल्लेबाजी करते हुए Barry को अपने दक्षिण अफ्रीका के लिए खेले हुए मैच याद आ रहे थे, जहाँ वो Graeme Pollock के साथ यादगार साझेदारियाँ कर चुके थे। Pollock के बारे में Barry ने कहा है कि वे ओवर की सभी गेंदों पर चौके लगाने के बाद भी आखिरी गेंद पर सिंगल लेने का प्रयास करते थे चाहे आखिरी गेंद कैसी भी हो। जबकि विव की मानसिकता सभी गेंदों पर बाउंड्री लगाने की होती थी (यदि गेंद वैसी मिले तो)।
इस साझेदारी में बैरी की बल्लेबाजी ऐसी थी कि विव भी उनके सामने हल्के नज़र आ रहे थे। इस साझेदारी में बैरी रिचर्ड्स ने 93 रन बनाए और विव ने 41. 207 रन के व्यक्तिगत स्कोर पर एक छक्का लगाने के प्रयास में Barry ने ग्रेग चैपल को कैच दे दिया। उनके 136 रन सिर्फ चौके छक्के से आए थे।
दिन का खेल खत्म होने तक World XI का स्कोर था 433/1. Barry के बाद विव के मोर्चा संभाला और 177 रन ठोक दिए। World XI के 625 के जवाब में WSC ऑस्ट्रेलिया की ओर से ग्रेग चैपल को छोड़कर कोई न चल सका। चैपल ने पहली पारी में 174 रन बनाए पर उनकी टीम यह मैच पारी और 73 रन से हार गई।
बैरी रिचर्ड्स की पारी देखने वाले इस बात पर विचार कर रहे थे यदि दक्षिण अफ्रीका पर बैन न लगा होता तो बैरी रिचर्ड्स के टेस्ट रिकॉर्ड कितने शानदार होते।
To be continued.
(कुछ बातों के अलावा लगभग सभी जानकारियाँ प्रसिद्ध ऑस्ट्रेलियन क्रिकेट पत्रकार और लेखक Gideon Haigh की किताब “The Cricket War” से )
Andy Roberts की गेंद से जबड़ा टूटने के बाद कई हफ्ते तक क्रिकेट से दूर रहे 22 वर्षीय युवा ऑस्ट्रेलियन स्टार David Hookes वापसी कर रहे थे। यह World Series Cricket की वन डे प्रतियोगिता इंटरनेशनल कप का फाइनल था जो ग्रेग चैपल की WSC Australia और क्लाइव लॉयड की WSC West Indies के बीच Sydney Showground पर खेला जा रहा था। WSC वेस्ट इंडीज़ मात्र 124 रन पर ऑल आउट हो गई थी।
19,000 दर्शक यह मैच देख रहे थे। VIP Area में Coonan & Denly (C&D) कंपनी के मालिक Tony Henson भी बैठे थे, जिनकी कंपनी WSC के लिए हेलमेट बनाने पर काम कर रही थी। इसी समय Austin Robertson ने Henson से कहा, “Marshy (Rod Marsh) wants to see you.”
ऑस्ट्रेलिया के ओपनर Bruce Laird के हाथ में फ्रैक्चर के कारण विकेटकीपर Rod Marsh ओपन करने के लिए तैयार हो रहे थे। Tony Henson ने देखा कि Marsh C&D हेलमेट को पहनकर खड़े थे और सिगरेट फूँक रहे थे। Marsh ने Henson से कहा कि आज के मैच में वे यह हेलमेट पहनकर खेलना चाहते हैं। Henson ने कहा, “No way, you can’t do that. It’s only a prototype.” C&D का यह हेलमेट अभी पूर्णरूप से तैयार नहीं हुआ था, यह एक डिजाइन मात्र था। Henson जानते थे कि यह हेलमेट पहनकर Andy Roberts, Wayne Daniel और Joel Garner का सामना करना हेलमेट की संकल्पना के हित में नहीं है, क्योंकि यदि इस हेलमेट को पहनने के बाद भी सिर में चोट लगी तो C&D का नाम तो खराब होगा ही हेलमेट की संकल्पना भी ठंडे बस्ते में चली जाएगी। लेकिन रॉड मार्श नहीं माने।
तीसरा विकेट गिरने के बाद David Hookes बल्लेबाजी के लिए आए। Hookes मोटरबाइक हेलमेट जैसा दिखने वाला हेलमेट पहनकर खेल रहे थे। इसमें Visor भी लगा था। ऐसा ही हेलमेट इंग्लिश बल्लेबाज Dennis Amiss पहनते थे। इसमें समस्या यह थी कि यह कानों को इस प्रकार से ढक लेता था कि नॉन स्ट्राइकर एंड पर खड़े बल्लेबाज की आवाज़ ठीक से सुनाई नहीं देती थी, जिससे रन आउट की आशंका बढ़ जाती थी। इसलिए यह वाला हेलमेट बहुत से खिलाड़ी पहनना नहीं चाहते थे।
David Hookes
दो महीने पहले जिन Andy Roberts ने David Hookes का जबड़ा तोड़ा था, उन्हीं Roberts की दो लगातार शॉर्टपिच गेंदों पर हुक शॉट से छक्के लगाकर अपनी वापसी की घोषणा कर दी। कॉमेंट्री बॉक्स में बैठे महान कॉमेंटेटर Richie Benaud ने दूसरे शॉट के बारे में कहा, “One of the best shots you will ever see.”
Hookes और ग्रेग चैपल के बीच हुई साझेदारी ने WSC ऑस्ट्रेलिया को विजय से मात्र 49 रनों की दूरी पर खड़ा कर दिया था।
Hookes के विकेट ने Tony Henson को एक बार पुनः चिंतित कर दिया। यह चिंता WSC Australia के मैच हारने की आशंका से नहीं बल्कि Rob Langer को बल्लेबाजी के लिए आता देखकर हुई थी, जो रॉड मार्श का हेलमेट पहनकर आ रहे थे। Henson बताते हैं कि यहाँ उन्हें ध्यान आया कि अलग अलग आकार के हेलमेट बनाने की आवश्यकता होगी। Langer का सिर Marsh से बड़ा था और वो हेलमेट में फिट नहीं हो रहा था। 2 ओवरों के बाद हेलमेट को एडजस्ट करने के प्रयास में असफल रहे लैंगर ने अंततः हेलमेट उतारने का निर्णय लिया, जो Tony Henson के लिए बहुत बड़ी राहत की बात थी।
जोएल गार्नर ने जल्दी जल्दी रॉब लैंगर, ग्रेग चैपल और डग वाल्टर्स को आउट किया। उसके बाद Wayne Daniel ने पुछल्ले बल्लेबाजों को चलता करके WSC ऑस्ट्रेलिया को 99 पर ही ऑल आउट कर दिया और वेस्ट इंडीज़ को 25 रनों से विजयी बनाया। इस इंटरनेशनल कप फाइनल में Poetry कहीं नहीं थी, सिर्फ Motion ही था।
Greg Chappell trapped LBW by Joel Garner
सबसे अधिक प्रसन्न Tony Henson थे क्योंकि उनकी कंपनी का नाम खराब होने से बच गया था और हेलमेट की संकल्पना भी कई वर्ष पीछे जाने से बच गई थी।
To be continued.
(प्रसिद्ध ऑस्ट्रेलियन क्रिकेट पत्रकार और लेखक Gideon Haigh की किताब “The Cricket War” से)
वेस्ट इंडीज़ के इंग्लैंड दौरे का पहला वन डे Old Trafford, Manchester में खेला जा रहा था। अच्छी विकेट पर टॉस जीतकर क्लाइव लॉयड ने बैटिंग चुनी। उनके दोनों ओपनर गॉर्डन ग्रीनिज और डेसमंड हेन्स बॉब विलिस का सामना करने के लिए मैदान में आ चुके थे। थोड़ी देर के बाद ही लॉयड का निर्णय गलत सा लगने लगा था, ऐसा भी नहीं था कि पिच अचानक से गेंदबाजी के लिए बेहतर हो गई थी।
गॉर्डन ग्रीनिज और डेसमंड हेन्स दोनों 11 रन के स्कोर पर पवेलियन लौट गए। नम्बर 3 पर आए युवा बल्लेबाज रिची रिचर्डसन सिर्फ 6 रन बनाकर बॉब विलिस को रिटर्न कैच थमा बैठे, उनके बाद आए लैरी गोम्स मात्र 4 रन बना सके और जब कप्तान क्लाइव लॉयड 8 रन बनाकर आउट हुए तो वेस्ट इंडीज़ का स्कोर मात्र 89 रन था 5 विकेट पर। विकेटकीपर बल्लेबाज जेफरी डूजॉन खाता भी नहीं खोल सके। ऑलराउंडर ऐल्डाइन बैप्टिस्ट जब क्रीज पर आए तो स्कोर था 102 पर 7. इन सात में से किसी बल्लेबाज ने दहाई का आँकड़ा भी नहीं छुआ था। वेस्ट इंडीज़ के विरुद्ध सीरीज में इंग्लैंड के दर्शक इससे बढ़िया आरम्भ की आशा नहीं कर सकते थे।
वेस्ट इंडीज़ के लिए आशा की एकमात्र किरण थी। नम्बर 4 पर आए विश्व क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज Isaac Vivian Alexander Richards अभी भी क्रीज पर थे। वे 65 रन बना चुके थे और किसी भी परिस्थिति में अकेले ही मैच की दिशा बदलने की क्षमता रखते थे।
विव ने एल्डाइन बैप्टिस्ट के साथ आठवें विकेट के लिए 59 रन जोड़कर स्कोर को 150 के पार पहुँचाया। बैप्टिस्ट 26 रन बनाकर इयन बॉथम की गेंद पर आउट हो गए। उनके बाद आए जोएल गार्नर भी मात्र 3 रन बना कर लौट गए। स्कोर था 166 पर 9, विव का स्कोर 90 से ऊपर था पर उनका साथ देने के लिए केवल नम्बर 11 माइकल होल्डिंग रह गए थे जबकि पारी में अभी 14 ओवर शेष थे।
इयन बॉथम की गेंद पर मिडविकेट पर चौका लगाकर विव ने 112 गेंदों में अपना शतक पूरा कर लिया, अब चुनौती थी टीम को एक सम्मानजनक स्कोर तक ले जाने की। विव ने हर एक ओवर में 4-5 गेंदे खेलनी शुरू कर दीं और होल्डिंग को आख़िरी 1-2 गेंद रोकने के लिए कहा।
The Guardian ने लिखा है कि विव अपने Duncan Fearnley Magnum बल्ले का प्रयोग तलवार की भाँति कर रहे थे। विव रिचर्ड्स ऐसी लय में थे कि इस समय उन्हें कोई नहीं रोक सकता था। इयन बॉथम की गेंद को फ्लिक के सहारे स्क्वेयर लेग बाउंड्री के पार करने के बाद विव ने तेज गेंदबाज नील फोस्टर का नम्बर का लगाया। लेग साइड की बाउंड्री पूरी तरह से पैक कर दी गई थी, लेकिन विव एक असाधारण स्ट्रोक प्लेयर थे, विव ने तीनों स्टंप खुली छोड़कर रूम बनाया और गेंद को Long Off बाउंड्री के पार कर दिया। थोड़ी देर बाद तेज गेंदबाज डेरेक प्रिंगल की ओवरपिच गेंद Long On बाउंड्री के बाहर 6 रन के लिए पहुँचा दी गई। 49वें ओवर में प्रिंगल की गेंद पर ही Long Off के ऊपर से छक्का लगाकर विव ने अपने 150 रन पूरे किए। इंग्लैंड के सबसे तेज गेंदबाज बॉब विलिस ने सबसे बढ़िया गेंदबाजी की पर उन्हें भी कवर के ऊपर से छक्का पड़ा।
विव और माइकल होल्डिंग के बीच आखिरी विकेट के लिए 100 रनों की साझेदारी हो चुकी थी। होल्डिंग ने एक इंटरव्यू में कहा, हर ओवर के बाद दोनों पिच के बीच में आकर सलाह करते थे, उनकी बातें क्रिकेट के अलावा अन्य विषयों पर भी होती थीं। “He just kept me calm and he blasted the ball all over the park.”
55वें ओवर (ये मैच 55 ओवर का था) की आखिरी गेंद पर स्ट्रेट बाउंड्री पर चौके के साथ होल्डिंग और विव के बीच 106 रनों की साझेदारी हो चुकी थी, मात्र 84 गेंदों में। इसमें से 93 अकेले विव रिचर्ड्स के थे 57 गेंदों पर। माइकल होल्डिंग ने भी इस साझेदारी में 12 रन बनाए 27 गेंदों पर। उनके रनों से अधिक महत्वपूर्ण बात यह रही कि वो अंत तक विव के साथ खड़े रहे।
विव ने 170 गेंदों पर कुल 189 रन (नॉट आउट) बनाए, इस पारी में 21 चौके और 5 छक्के लगे। अंतिम 58 गेंदों पर विव ने 86 रन बनाए (9 चौके और 5 छक्के). यह बात T20 युग से तीन दशक पहले की है। विव का यह स्कोर 13 वर्ष तक वन डे क्रिकेट में सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर रहा।
वेस्ट इंडीज़ का फाइनल स्कोर था 272/9. इसमें से 69.48% रन अकेले विव के थे, जो आज भी विश्व कीर्तिमान है। इंग्लैंड की टीम 50 ओवरों में मात्र 168 पर ऑल आउट गई हो गई और वेस्ट इंडीज़ ने ये मैच 104 रनों से जीत लिया, महत्वपूर्ण बात यह है कि वेस्ट इंडीज़ की आखिरी विकेट की साझेदारी ने 106 रन जोड़े थे।
Wisden ने फरवरी 2002 में वन डे क्रिकेट की सर्वश्रेष्ठ पारियों की सूची निकाली थी, उसमें Sir Vivian Richards की यह पारी नम्बर 1 पर थी। आज भी इसे वन डे इतिहास की सर्वश्रेष्ठ पारी माना जाता है।
WSC से पहले क्रिकेट प्रसारण के लिए 4 कैमरों का प्रयोग होता था। पैकर को यह बात पसंद नहीं थी कि गेंदबाजी छोर बदलने के कारण दिन के आधे ओवरों का प्रसारण बैट्समैन के पीछे से हो। वे चाहते थे हर गेंद की फिल्मिंग गेंदबाज की Arm के पीछे से हो। इसलिए WSC में 8 कैमरों का प्रयोग हो रहा था।
पैकर जानते थे कि यदि मैच के दौरान खिलाड़ियों के बीच हो रही बातचीत सुनाई पड़े तो दर्शक और बढ़ेंगे इसके लिए Stump Mic का प्रबंध किया गया। इससे पहले Stump Mic का चलन नहीं था।
WSC को रोचक बनाने के लिए Kerry Packer क्रिकेट के कुछ नियमों में परिवर्तन करना चाहते थे। उनकी इच्छा थी कि वन डे क्रिकेट में डीप में रहनेवाले फील्डरों की संख्या तय की जाए, ऐसा न हो कि सारे फील्डर डीप में ही लगा देने की छूट हो। उस समय 8 गेंद के ओवर होते थे, पैकर चाहते थे कि दो नई गेंदों के बीच 65 की बजाय 75 ओवर फेंके जाएँ (आजकल 6 गेंदों के ओवर होते हैं, और नई गेंद 80 ओवर के बाद ली जा सकती है)। फ्रंट फुट नो बॉल के विषय में वो तेज गेंदबाजों के लिए थोड़ी रियायत चाहते थे। Richie Benaud ने उन्हें समझाया कि क्रिकेट के नियमों के कॉपीराइट MCC के पास हैं यदि उन्हें बदला गया तो कानूनी पचड़े में पड़ सकते हैं। $12 मिलियन लगाने के बाद यह खतरा मोल लेना सही नहीं होगा। पैकर मान गए। Richie Benaud की एक प्रसिद्ध लाइन है, “If you f**k it up, we could lose the lot– the whole $12 Million.”
2 दिसम्बर 1977 को आरम्भ हुए भारत-ऑस्ट्रेलिया ब्रिस्बेन टेस्ट में दर्शकों की उपस्थिति लगभग 32000 (Aggregate) रही और VFL पार्क मेलबर्न में हो रहे WSC Supertest में सभी दिन मिलाकर दर्शकों की संख्या मात्र 13,000. जबकि पैकर ने अनुमान लगाया था कि पहले दिन 15,000 दर्शक होंगे VFL पार्क में।
दर्शक कम होने के कारण भी थे, VFL पार्क मेलबर्न शहर से काफी दूर पड़ता था, $5 की एंट्री फीस भी ज्यादा थी। VFL पार्क के पास ही डेविस कप टेनिस टूर्नामेंट चल रहा था, जहाँ ऑस्ट्रेलिया लगातार इटली को पराजित कर रही थी। टेनिस की लोकप्रियता ऑस्ट्रेलिया में बहुत अधिक थी। सबसे बड़ी बात यह कि Christmas के पहले मेलबर्न में बड़े स्तर पर टेस्ट क्रिकेट होती नहीं थी। ऑस्ट्रेलियन Summer में मेलबर्न में टेस्ट मैच Christmas के बाद Boxing Day को ही आरम्भ होते हैं।
लेकिन WSC की स्थिति यही नहीं रहने वाली थी, क्योंकि पैकर एक जिद्दी बिजनेसमैन थे और WSC को सफल करने के लिए हर संभव प्रयास करने को तैयार थे।
WSC वर्ल्ड और WSC ऑस्ट्रेलिया के बीच एक 40 ओवर का मैच फ्लडलाइट में कराने का विचार चल रहा था। इसका टेलीविजन प्रसारण नहीं हो रहा था क्योंकि यह Official मैच नहीं था, WSC प्रतियोगिता का। पहले यही माना जा रहा था कि फ्लडलाइट में तेज गेंदबाजों के सामने बैटिंग करना असंभव है। यह एक नया प्रयोग था। रिस्क कम करने के लिए इस मैच में बाउंसरों का प्रयोग मना किया गया था।
सूर्यास्त होते ही VFL पार्क में 14,000 वाट जगमगा उठे। पहली बार फ्लडलाइट्स में क्रिकेट खेली जा रही थी। Ian Chappell ने Rick McCosker के साथ पहले विकेट के लिए 104 रन जोड़ लिए थे। वहीं पैकर WSC कैलेंडर में PRIME TIME में प्रसारण हेतु VFL पार्क में इस प्रकार के और मैच (डे-नाइट) कराने के लिए डेट खोज रहे थे। Kerry Packer प्रफुल्लित थे, उन्हें यह प्रयोग भा गया था। पैकर को विश्वास था कि फ्लडलाइट्स में खेली जा रही क्रिकेट दर्शकों को स्टेडियम तक लाने में बहुत कारगर सिद्ध होगी, शाम को दफ्तरों से लौटकर लोग परिवार के साथ आकर क्रिकेट का आनंद लेना चाहेंगे और टेलीविजन रेटिंग्स भी बढ़ेंगी।
Age अखबार की फ्रंट पेज हेडलाइन थी, “The Atmosphere was ELECTRIC.” स्पोर्ट्स पेज पर रिपोर्ट थी “Night Cricket switches on the crowd.” पत्रकार Eric Beecher ने अपनी किताब The Cricket Revolution में लिखा है, “Just as the sun seemed to be setting on WSC’s first disaster filled season, someone turned on the lights.”
Sydney Showground में हो रहे दूसरे SuperTest में सात हजार से अधिक दर्शक 22 वर्षीय साउथ ऑस्ट्रेलियन सुपरस्टार David Hookes को वेस्ट इंडियन तेज गेंदबाजों के सामने जबरदस्त स्ट्रोक्स खेलते देख रहे थे। यदि आप यूट्यूब पर David Hookes की WSC वाली हाइलाइट्स देखें तो उनके पुल और हुक शॉट्स में आपको उनका फैन बना देने की क्षमता है। Joel Garner के एक ओवर में 17 रन बने और होल्डिंग के एक ओवर में 5 चौके लग चुके थे। दो घण्टे में 14 चौके के साथ 81 रन बना चुके Hookes के विकेट के किए कप्तान Clive Lloyd ने Andy Roberts को गेंद सौंपी और कहा “Just three overs Andy… Fast.” Roberts की शॉर्ट पिच गेंद जबरदस्त उछाल लेती हुई हुक शॉट के लिए जाते David Hookes के जबड़े पर लगी। Richie Benaud ने कॉमेंट्री बॉक्स में कहा, “He’s in trouble.” केरी पैकर स्वयं अपनी कार चलाकर Hookes को अस्पताल ले गए, जहाँ पता चला कि उनका जबड़ा टूट गया है और ठीक होने में कम से कम 6 सप्ताह लगेंगे।
यह सप्ताहांत क्रिकेट के इतिहास में बहुत महत्वपूर्ण रहा। व्यापारी Tony Henson ने Coonan & Denly नामक कंपनी खरीदी थी यह कंपनी घुड़सवारों के लिए टोपी बनाने में दक्ष थी, Henson ने रेडियो पर David Hookes की इंजरी की खबर सुनी, उन्होंने यह भी सुना था कि Kerry Packer विदेशों में भारी भरकम ऑर्डर देने वाले हैं, Henson ने अपने साथी Arthur Wallace को WSC से संपर्क साधने को कहा। Wallace ने Austin Robertson और Rod Marsh से मीटिंग की और लौटकर कहा, “It can’t be done Tony”. वे ऐसा हेलमेट चाहते हैं जो 100 मील प्रति घण्टा की गति से फेंकी गई ईंट का प्रहार झेल सके, यदि ऐसा करना है तो उन्हें अंतरिक्ष यात्रियों वाले हेलमेट की आवश्यकता होगी।
Henson जानते थे कि हेलमेट की आवश्यकता मात्र गेंद के प्रहार को “Deflect” करने के लिए है, उसे “Absorb” करने के लिए नहीं। सुरक्षा आवश्यक थी परंतु क्रिकेट के सौंदर्य से समझौता किए बिना। हेलमेट के आ जाने से कई खिलाड़ियों का सिर में प्राणघातक चोट लगने का भय कम हुआ।
ऐसा नहीं था कि इसके पहले खिलाड़ियों ने हेलमेट पहनने पर विचार नहीं किया था। Eng Vs WI 1976 की प्रसिद्ध टेस्ट सीरीज के दौरान माइकल होल्डिंग की एक गेंद इंग्लिश बल्लेबाज Dennis Amiss के सिर के पिछले भाग में लगी थी। उन्होंने कहा, “It was the first time in my career that I had felt really frightened.” Amiss को World Series Cricket में Holding, Roberts और Wayne Daniel को खेलना था। अतः उन्होंने मोटरबाइक के हेलमेट जैसे दिखने वाले हेलमेट का प्रबंध किया था। हेलमेट की लोकप्रियता David Hookes की इंजरी के बाद तो बहुत बढ़ गई।
23 वर्षीय ऑस्ट्रेलियन ओपनर John Dyson एक मेडिकल चेकअप के लिए एक क्लिनिक में थे। डॉक्टर ने उनसे पूछा कि वे हेलमेट के बारे में क्या सोचते हैं। Dyson ने अपनी बैटिंग टेक्निक का बखान करते हुए बताया कि किस प्रकार वे सुरक्षित ढंग से फ़ास्ट बोलिंग खेलते हैं। डॉक्टर ने कहा कि आपलोग अपने अंडकोष की सुरक्षा पर तो खर्च कर लेते हैं पर सिर की सुरक्षा पर विचार भी नहीं। “You know it never ceases to amaze me. You guys will spend $4 or $6 on buying a tin or a plastic box to protect your nuts, but you won’t consider protecting a far more important part of your anatomy. Do you know how vulnerable the temple is?”
WSC ऑस्ट्रेलिया और WSC वेस्ट इंडीज़ के बीच हुए 3 SuperTest में पहले दो WSC वेस्ट इंडीज़ ने और तीसरा WSC ऑस्ट्रेलिया ने जीता था। इयन चैपल, रॉड मार्श और डेनिस लिली एक विषय को लेकर चिंतित थे। फुटबॉल पार्क एडिलेड में तीसरा SuperTest WSC ऑस्ट्रेलिया ने 220 रनों से जीता था, लेकिन चार दिन में कुल मिलाकर मात्र 15,210 दर्शक जुटे। जबकि दो साल पहले एडिलेड ओवल जो ऑस्ट्रेलिया के पारंपरिक टेस्ट क्रिकेट ग्राउंड्स में से एक है, वहाँ ऑस्ट्रेलिया और वेस्ट इंडीज़ के बीच हुए टेस्ट मैच को देखने 135,000 दर्शक आए थे। पैकर भी इस बात पर विचार कर रहे थे। अंततः निर्णय यह हुआ कि फ़ुटबॉल पार्क एडिलेड को WSC की Venue List से डिलीट कर दिया जाए। इस फुटबॉल पार्क को क्रिकेट खेलने योग्य बनाने में क्यूरेटर John Maley को हज़ारों घण्टे का परिश्रम लगाना पड़ा था।
14 जनवरी 1978 को Sydney Showground में WSC सीजन 1977-78 का चौथा SuperTest WSC Australia और WSC World XI के बीच आरम्भ हुआ।14,833 दर्शक इयन चैपल और टोनी ग्रेग को टॉस करते देख रहे थे। यह पूरी ऑस्ट्रेलियन Summer में पहला अवसर था जब किसी और शहर में कोई Test नहीं हो रहा था जो लोगों को टेलीविजन सेट्स के आगे रोककर रखे। इतने सारे दर्शक अभीतक कोई भी WSC टेस्ट देखने नहीं आए थे। WSC और पैकर के समर्थकों के लिए ये बहुत हर्ष का विषय था। ग्रेग चैपल ने कहा कि यह पिच WACA से भी तेज थी। दूसरे दिन जब 12,612 दर्शक मैच देखने आए तो WSC की असफलता चाहने वालों को डर लगा। अभीतक जो लोग सोच रहे थे कि दर्शक पारंपरिक क्रिकेट मैच से जुड़ाव के कारण WSC का विरोध करेंगे, उन्हें अब सत्य का सामना करना था।
Viv Richards (वेस्ट इंडीज़ के खिलाड़ी WSC में WI के साथ साथ World XI के लिए भी खेल रहे थे) की 119 रनों की शानदार पारी के दम पर World XI ने यह मैच 4 विकेट से जीत लिया था पर ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ियों के लिए सबसे खुशी की बात यह थी कि अब उनके दर्शक मैदान तक आने शुरु हो गए थे। यहाँ से WSC की सफलता की कहानी आरम्भ हो चुकी थी।
To be continued.
(प्रसिद्ध ऑस्ट्रेलियन क्रिकेट पत्रकार और लेखक Gideon Haigh की किताब “The Cricket War” से)
Kerry Packer ऑस्ट्रेलिया में चैनल-9 के मालिक थे और चाहते थे कि में ऑस्ट्रेलिया में क्रिकेट के प्रसारण का अधिकार उनके पास हो। इस समय यह अधिकार ABC (Australian Broadcasting Corporation) के पास था। 1975-76 सीजन में क्रिकेट बोर्ड और ABC के बीच का ये कॉन्ट्रैक्ट समाप्त हो रहा था।
Packer के लिए यह सही अवसर था, उन्होंने क्रिकेट बोर्ड से बात की और तीन साल के एक्सक्लूसिव कॉन्ट्रैक्ट के बदले $1.5 मिलियन का प्रस्ताव रखा। इतनी अधिक धनराशि किसी ब्रॉडकास्टर ने ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट बोर्ड को ऑफ़र नहीं की थी। ये राशि क्रिकेट बोर्ड के वार्षिक Surplus के बराबर थी। लेकिन मीटिंग में Packer को यह पता लग चुका था कि ABC और बोर्ड के बीच एक साठगाँठ हैं और Packer को प्रसारण अधिकार नहीं मिलेंगे।
Kerry Packer ने JP स्पोर्ट्स के John Cornell और Austin Robertson से संपर्क स्थापित किया। इनके साथ मीटिंग में Packer ने स्पष्ट कर दिया था कि वो विश्व के सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर्स और ऑस्ट्रेलिया के सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर्स के बीच मैच कराना चाहते हैं। Packer की यह पहल World Series Cricket (WSC) के नाम से प्रसिद्ध हुई।
JP स्पोर्ट्स के Austin Robertson ने पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान इयन चैपल से बात शुरु की। चैपल को 12 हफ्तों के लिए $20,000 से $30,000 तक ऑफर किए गए। चैपल ने पिछले सीजन कुल मिलाकर क्रिकेट से $5,000 ही कमाए थे। अतः वे मान गए। इन सब बातों की अभी बोर्ड को बिल्कुल भनक नहीं थी। चैपल ने एक लिस्ट बनाई जिसमें उन खिलाड़ियों के नाम थे, जो WSC में खेल सकते थे। पैकर की चेकबुक और चैपल की लिस्ट के सहारे खिलाड़ियों को WSC में लाने की प्रक्रिया आरम्भ हुई। Rod Marsh, Dennis Lillee, Rick McCosker, Ian Davies, Len Pascoe, David Hookes, Greg Chappell समेत 18 ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों को साइन किया गया।
दक्षिण अफ्रीका उस समय वहाँ की सरकार की रंगभेद की नीति के कारण अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से बहिष्कृत थी लेकिन वहाँ के क्रिकेटर इंग्लैंड में काउंटी और ऑस्ट्रेलिया में शेफ़ील्ड शील्ड में खेलने आया करते थे। इयन चैपल जब दक्षिण अफ्रीका घूमने गए थे तो उन्होंने वहाँ के क्रिकेटर्स से WSC की बात बताई। दक्षिण अफ्रीकी ग्रैम पॉलॉक ने अपने हमवतन माइक प्रॉक्टर से कहा कि ऑस्ट्रेलिया में अभी कोई नया कॉन्ट्रैक्ट साइन मत करना, वहाँ कुछ ऐसा होने वाला है जो तुम्हें बहुत आकर्षित करेगा। दक्षिण अफ्रीका के चार खिलाड़ी Barry Richards, Mike Protor, Eddie Barlow और Graeme Pollock World Series Cricket के लिए तैयार थे।
अब बारी थी वेस्ट इंडीज़ की। कप्तान क्लाइव लॉयड 3 वर्षों के लिए $90,000 का कॉन्ट्रैक्ट सुनकर चौंक गए थे। उन्हें पता था कि Barbaros की करेंसी पर भले ही पूर्व कप्तान सर फ्रैंक वॉरेल की फोटो हो पर आजतक कोई वेस्ट इंडियन खिलाड़ी क्रिकेट खेलकर अमीर नहीं बना था। गॉर्डन ग्रीनिज को ज्ञात हो गया था कि $20,000 प्रतिवर्ष की राशि कैरेबियाई देशों की प्रति व्यक्ति आय की 40 गुना थी। एन्टीगा के दोनों सुपरस्टार विव रिचर्ड्स और ऐंडी रॉबर्ट्स ने भी कॉन्ट्रैक्ट स्वीकार कर लिए थे। वेस्ट इंडियन लेखक और कॉमेंटेटर Tony Cozier ने कहा, “When you put the fee in front of them, their first reaction would have been: THAT’S IMPOSSIBLE”. माइकल होल्डिंग की एकमात्र शर्त यह थी कि यदि उन्हें किसी ऐसे दक्षिण अफ्रीकी खिलाड़ी के साथ रूम शेयर करना पड़ा जो काउंटी क्रिकेट में नहीं है तो उन्हें जमैका के प्रधानमंत्री Michael Manley से आज्ञा दिलवानी पड़ेगी। पैकर इस बात के लिए भी तैयार थे।
ऑस्ट्रेलियन विकेटकीपर रॉड मार्श उन दिनों क्रिकेट खेलने के अतिरिक्त Realty Development Corporation के कर्मचारी भी थे। उनकी वार्षिक आय $ 12,000 थी। (जबकि उनके भाई ग्राहम मार्श जो प्रोफेशनल गॉल्फर थे, उनकी वार्षिक आय US $120, 354 थी।) डेनिस लिली की वार्षिक कमाई $8,000 थी। Rick McCosker क्रिकेट खेलने के अतिरिक्त एक बैंक में काम करते थे। 1975 में एक टेस्ट मैच की फीस $200 से बढ़ाकर $400 की गई थी पर क्रिकेट खिलाड़ी क्रिकेट की कमाई से अपना काम नहीं चला सकते थे। इसलिए Kerry Packer का ऑफर ठुकरा पाना इनके लिए असंभव था।
ऐसा भी था कि ऑस्ट्रेलिया के जिन तेज गेंदबाजों ने कम टेस्ट मैच खेले थे, वे WSC में शामिल होने को लेकर डेनिस लिली की भाँति अधिक उत्सुक नहीं थे। उन्हें लगता था टेस्ट क्रिकेट अधिक महत्वपूर्ण है। वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया के Wayne Clark ने कहा कि WSC में पैसा अच्छा था और वे बहुत धनी भी नहीं थे लेकिन उसी समय ऑस्ट्रेलियन क्रिकेट बोर्ड (ACB) ने उन्हें सूचित किया था कि उनके टेस्ट क्रिकेट के खेलने की 95% संभावना है। विक्टोरिया के Alan Hurst ने कहा “The offer would have been unbelievable really” लेकिन ऑस्ट्रेलिया के लिए कम से कम एक टेस्ट खेलने का अवसर वो खोना नहीं चाहते थे।
ऑस्ट्रेलियन क्रिकेट बोर्ड ने स्पष्ट कर दिया था कि जो भी खिलाड़ी WSC में हिस्सा लेगा वह कभी ऑस्ट्रेलिया के लिए क्रिकेट नहीं खेल सकेगा। इसके बाद भी 18 ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी WSC का हिस्सा बन चुके थे। इनके अतिरिक्त 17 विदेशी खिलाड़ी भी WSC के लिए साइन कर चुके थे। तीन टीमें बननी थीं। WSC Australia, WSC West Indies और WSC World. इंग्लिश कप्तान टोनी ग्रेग को भी $90,000 में WSC के लिए तैयार कर लिया गया था। इंग्लैंड के Allan Knott, Derek Underwood पाकिस्तान के Imran Khan, Majid Khan जैसे खिलाड़ी WSC World XI का हिस्सा थे।
तीन टीमों के लिए खिलाड़ी जुटाए जा चुके थे। अब प्रश्न था कि यह World Series Cricket खेली कहाँ जाएगी। ऑस्ट्रेलिया के पारंपरिक टेस्ट क्रिकेट ग्राउंड जैसे MCG और SCG चलानेवालों ने अपने क्रिकेट ग्राउंड देने से मना कर दिया था। Packer ने VFL (Victorian Football League) के Boss Allen Aylett से बात की और VFL पार्क जो मेलबर्न शहर से 25 किलोमीटर की दूरी पर था, उसे तीन वर्षों के लिए $8,25,000 में प्राप्त कर लिया। इसी तरह से सिडनी, पर्थ और एडिलेड में भी क्रिकेट ग्राउंड की व्यवस्था की गई।
अब बात थी पिच तैयार करने की। ग्रेग चैपल ने Queensland के John Maley का नाम सुझाया। Austin Robertson ने Maley से संपर्क किया और $50,000 में 3 वर्ष तक क्रिकेट पिच बनाने के लिए तैयार कर लिया।
अंपायरों को WSC का हिस्सा बनने के लिए तैयार करना भी सरल नहीं था। प्रतिष्ठित ऑस्ट्रेलियन अंपायर Lou Rowan एवं Max O’Connell और इंग्लिश अंपायर Dickie Bird और David Constant सबने WSC के लिए मना कर दिया था। रिटायर्ड मैच रेफरियों Gary Duperouzel, Peter Enright, Jack Collins और Douglas Sang Hue को इस काम के लिए मनाया गया।
2 दिसम्बर 1977 वो दिन था जिसके लिए इतने समय से तैयारी चल रही थी। इसी दिन VFL पार्क में WSC Australia और WSC West Indies के बीच पहला “Supertest” आरम्भ हुआ। इसी दिन ऑस्ट्रेलिया और बिशन सिंह बेदी की भारतीय टीम के बीच ब्रिस्बेन में 5 मैचों की सीरीज का पहला टेस्ट खेला जा रहा था। ऑस्ट्रेलिया के लगभग सभी रेगुलर टेस्ट खिलाड़ी WSC में जा चुके थे, अतः कप्तानी का भार 10 साल पहले रिटायर हो चुके Bobby Simpson को मिला था।
World Series Cricket जिसके बारे में यह कहा गया था कि यह हो पाना असंभव है। Guardian के John Arlott ने इसे “Packer Circus” का नाम दिया था। कहा गया कि खिलाड़ी छोड़कर चले जाएंगे, लेकिन यह World Series Cricket अब वास्तव में हो रही थी।
To be continued.
(प्रसिद्ध ऑस्ट्रेलियन क्रिकेट पत्रकार और लेखक Gideon Haigh की किताब “The Cricket War” से)
US ओपन 2007 के फाइनल में वर्ल्ड नम्बर 1 रॉजर फेडरर के सामने था एक 20 वर्षीय युवा खिलाड़ी जो रैंकिंग में नम्बर 3 पर था। मैच का परिणाम वही हुआ जिसकी सबको आशा थी। रॉजर ने ये मैच सीधे सेटों में जीता।
जनवरी 2008 में इसी खिलाड़ी ने मेलबर्न में ऑस्ट्रेलियन ओपन सेमीफाइनल में वर्ल्ड नम्बर 1 रॉजर फेडरर को सीधे सेटों में (7-6, 6-3, 7-6) हरा दिया, इसके बाद फाइनल में फ्रांस के जो-विल्फ्रेड सोंगा को पराजित किया। यह नोवाक जोकोविच के करियर का पहला ग्रैंड स्लैम टाइटल था, लेकिन अगले तीन साल तक नोवाक को ऐसी कोई सफलता नहीं मिली।
सेमीफाइनल या फाइनल तक पहुँचना और वहाँ हार जाना, 2010 तक यही चलता रहा। 2010 US ओपन फाइनल में नडाल के हाथों मिली हार के बाद अखबारों में आर्टिकल आने आरम्भ हो गए थे कि क्या नोवाक का करियर भी पूर्व वर्ल्ड नम्बर 1 मरात साफ़िन की राह पर है जिन्हें उनकी क्षमता के अनुरूप सफलता नहीं मिली।
2011 वो वर्ष था जिसमें इस प्रकार की सभी आशंकाओं पर विराम लग गया। मेलबर्न में ऑस्ट्रेलियन ओपन फाइनल में Andy Murray को हराकर नोवाक ने करियर का दूसरा ग्रैंड स्लैम जीता और इसके बाद उन्हें कोई रोक नहीं पाया।
रॉजर फेडरर की Peak खत्म हो चुकी थी। हालाँकि वो अभी भी एक बेहतरीन टेनिस खिलाड़ी थे लेकिन अब वो खिलाड़ी नहीं रहे थे जो 2004 से 2008 के बीच लगातार 237 हफ्तों तक वर्ल्ड नम्बर 1 रैंकिंग पर रहा।
यहाँ से आरंभ हुई इस दशक की और टेनिस इतिहास की सर्वश्रेष्ठ राइवलरी। राफेल नडाल और नोवाक जोकोविच। ये दोनों खिलाड़ी एक ही उम्र के थे, नडाल की Peak चल रही थी और नोवाक अपनी Peak पर आ रहे थे। 2010 में राफेल नडाल ने फ्रेंच ओपन, विम्बलडन और US ओपन तीनों जीत लिए थे। 2011 में जोकोविच ने ऑस्ट्रेलियन ओपन, विम्बलडन और US ओपन के रूप में तीन ग्रैंड स्लैम जीत लिए।
राफेल नडाल ने 2011 के फ्रेंच ओपन फाइनल में लाल मिट्टी पर अपनी पुरानी आदत कायम रखते हुए रॉजर फेडरर को हराया। इसके बाद अगले 4 ग्रैंड स्लैम के फाइनल में जोकोविच और नडाल ही आमने सामने रहे। फ्रेंच ओपन 2011 के बाद तीन ग्रैंड स्लैम जोकोविच ने लगातार जीते। विम्बलडन 2011, US ओपन 2011 और ऑस्ट्रेलियन ओपन 2012. विम्बलडन 2011 के फाइनल में वर्ल्ड नम्बर 1 राफेल नडाल पर विजय प्राप्त करने के साथ ही जोकोविच ने करियर में पहली बार ATP रैंकिंग में नम्बई 1 स्थान पाया। 2011 में नडाल और जोकोविच 6 फाइनल्स में भिड़े और प्रत्येक मुकाबला नोवाक जोकोविच ने जीता।
2011 US ओपन सेमीफाइनल में 5वें सेट में नोवाक जोकोविच 5-3 से पीछे थे, रॉजर फेडरर के पास 2 मैच पॉइंट थे। रॉजर को सिर्फ एक शॉट की आवश्यकता थी। यहाँ से नोवाक ने वापसी की और यह सेट 7-5 से जीत लिया। नोवाक एक ही ग्रैंड स्लैम में रॉजर फेडरर और राफेल नडाल दोनों को हराने वाले गिने चुने खिलाड़ियों में हैं।
2012 की शुरुआत भी नोवाक के लिए 2011 जैसी ही थी। 6 घण्टों तक चले ऑस्ट्रेलियन ओपन फाइनल में उन्होंने राफेल नडाल को 5 सेटों में हराया। ये ऐसा मैच था जिसमें थोड़ी थोड़ी देर पर लीड एक्सचेंज होती रही। एक समय नडाल ने 5वें सेट के 6ठे गेम में नोवाक की सर्विस ब्रेक करके 4-2 की बढ़त बना ली थी, इस 5वें सेट के 7वें गेम में राफ़ा अपनी Serve पर 30-15 से आगे थे। उन्हें केवल अपनी Serve होल्ड करनी थी यह मैच जीतने के लिए। नोवाक जोकोविच के अतिरिक्त कोई ऐसा खिलाड़ी नहीं था जो राफ़ा के सामने यहाँ से वापसी कर सके, एक बार मैच पकड़ में आ जाने के बाद राफेल नडाल आपको वापसी के अवसर नहीं देते, पर नोवाक ने वापसी की। 5-5 होने के बाद नोवाक ने नडाल की Serve ब्रेक की और इसके बाद कोई अवसर नहीं दिया। ये टूर्नामेंट फाइनल्स में नोवाक की नडाल पर लगातार 7वीं विजय थी।
2012 के फ्रेंच ओपन फाइनल में नडाल ने पराजयों का क्रम तोड़ा और नोवाक को 4 सेटों में पराजित किया। पेरिस में नडाल के दबदबे का अनुमान इस बात से लगा सकते हैं कि 2006 से लेकर 2019 तक उन्होंने 12 बार यह ग्रैंड स्लैम जीता और यहाँ सिर्फ 2 मैच हारे हैं।
यह नोवाक के करियर का पहला फ्रेंच ओपन फाइनल था और एकमात्र यही ग्रैंड स्लैम ऐसा था जो नोवाक ने नहीं जीता था। इसे जीतने के लिए अभी उन्हें प्रतीक्षा करनी थी।
2012 फ्रेंच ओपन से लेकर 2014 फ्रेंच ओपन तक जोकोविच 7 बार ग्रैंड स्लैम फाइनल में पहुँचे और सिर्फ 2 बार विजयी हुए। 2012 US ओपन में Andy Murray ने नोवाक को हराकर करियर का पहला ग्रैंड स्लैम जीता। 4 महीने बाद ही 2013 ऑस्ट्रेलियन ओपन फाइनल में जोकोविच ने Andy को हराकर हिसाब बराबर करते हुए करियर का 6ठा ग्रैंड स्लैम जीत लिया। इसी साल विम्बलडन फाइनल में Andy Murray ने नोवाक को एक बार फिर से हराया और अपना दूसरा ग्रैंड स्लैम जीता।
2013 फ्रेंच ओपन सेमीफाइनल में नडाल और जोकोविच ने एक थ्रिलर मैच खेला, साढ़े चार घण्टे से अधिक चले इस मैच में नडाल पाँचवें सेट में 9-7 से जीते। 2013 US ओपन और 2014 फ्रेंच ओपन फाइनल में नोवाक को हराकर राफेल नडाल ने अपना वर्चस्व फिर से कायम कर दिया था और वर्ल्ड नम्बर 1 रैंकिंग भी प्राप्त कर ली थी।
2014 विम्बलडन से नोवाक जोकोविच की विजय यात्रा पुनः आरम्भ हुई। विम्बलडन फाइनल में रॉजर फेडरर को हराकर उन्होंने करियर का 7वाँ ग्रैंड स्लैम जीता।
2015 नोवाक के करियर का सर्वश्रेष्ठ वर्ष कहा जा सकता है इस वर्ष उन्होंने चारों ग्रैंड स्लैम फाइनल खेले और 3 (Aus ओपन, विम्बलडन, US ओपन) जीते। दो बार फाइनल में रॉजर फेडरर को हराया। ग्रैंड स्लैम के अतिरिक्त टेनिस में हर वर्ष 9 Masters 1000 टूर्नामेंट होते हैं जिसमें से नोवाक ने 8 के फाइनल खेले और 6 जीते। वर्ल्ड टूर फाइनल भी जीता, टॉप 10 रैंकिंग वाले खिलाड़ियों के खिलाफ उन्होंने इस साल 31 मैच जीते। अपने 3 सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ियों फेडरर, नडाल और ऐंडी मरे के खिलाफ उनका रिकॉर्ड 15-4 था। (नडाल के खिलाफ 4-0, मरे के खिलाफ 6-1 और फेडरर के खिलाफ 5-3). इस वर्ष उनका रिकॉर्ड 82-6 था।
इसी साल नोवाक फ्रेंच ओपन फाइनल में भी पहुँचे पर एक बार फिर असफलता ही हाथ लगी। ये असफलता इसलिए भी अधिक निराश करने वाली थी क्योंकि इस साल नोवाक ने क्वार्टरफाइनल में राफेल नडाल को भी हरा दिया था, वो भी सीधे सेटों में, जिसके बाद नोवाक का टूर्नामेंट जीतना लगभग तय माना जा रहा था। वे करियर की सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में थे, फाइनल में पहला सेट भी जीत चुके थे, लेकिन स्टैन वावरिंका ने अगले तीनों सेट जीतकर बहुत बड़ा उलटफेर किया। मैच हारने के बाद नोवाक जोकोविच के आँसू निकलते बहुत कम देखे जाते हैं लेकिन उस दिन आँसू निकले और बहुत निकले। ये उनका तीसरा फ्रेंच ओपन फाइनल और इसमें तीसरी पराजय थी।
नोवाक जोकोविच को हार मानने के लिए नहीं जाना जाता। उन्होंने फ्रेंच ओपन 2015 के बाद लगातार चार ग्रैंड स्लैम फाइनल खेले। विम्बलडन 2015, US ओपन 2015, Aus Open 2016 जीत लिए, इन सबके बाद एक बार फिर सामने था फ्रेंच ओपन फाइनल 2016….. 2012, 2014 और 2015 में तीन फ्रेंच ओपन फाइनल हारने के बाद इस बार वो हारने को तैयार नहीं थे, पहला सेट हारने के बाद भी उन्होंने Andy Murray को लगातार तीन सेट हराए और करियर में पहली बार फ्रेंच ओपन जीत लिया और करियर स्लैम पूरा किया अर्थात अब ऐसा कोई ग्रैंड स्लैम नहीं था जो उनके पास नहीं था। इस विजय के साथ ही उन्होंने वह उपलब्धि प्राप्त की जो उनके किसी भी प्रतिद्वंद्वी ने प्राप्त नहीं की थी। यह उपलब्धि थी कैलेंडर स्लैम, अर्थात चारों ग्रैंड स्लैम लगातार जीत लेना। 60 के दशक में ऑस्ट्रेलियन रॉड लेवर के बाद किसी खिलाड़ी ने चारों मेजर टूर्नामेंट लगातार नहीं जीते थे।
नोवाक जोकोविच 12 ग्रैंड स्लैम जीत चुके थे। इस समय रॉजर फेडरर के 17 ग्रैंड स्लैम थे और नडाल के 14।
2016 फ्रेंच ओपन जीतने के बाद नोवाक की फॉर्म भी खराब हुई और इंजरी भी हुई। लगातार 2 वर्ष तक उन्होंने कोई ग्रैंड स्लैम नहीं जीता।
Return of Novak Djokovic
2017 में विम्बलडन के दूसरे राउंड में इंजरी के कारण मैच से रिटायर होने के बाद नोवाक ने 6 महीने का ब्रेक लिया।
विम्बलडन 2018 से पहले वह ATP रैंकिंग में 22वें स्थान पर थे। विम्बलडन सेमीफाइनल में उनका मुक़ाबला एक बार फिर से चिरप्रतिद्वंद्वी और वर्ल्ड नम्बर 1 राफेल नडाल से था। सवा 5 घण्टे तक चला यह मैच टेनिस इतिहास के सबसे क्लासिक मैचों में से एक था, पाँचवें सेट में 7-7 होने के बाद नडाल के पास दो ब्रेक पॉइंट थे, नोवाक ने दोनों बचाए और एक में तो उन्होंने Nadal के Cross Court Backhand के जवाब में अपना ट्रेडमार्क Passing Shot खेला और मैच में बने रहे। 5वें सेट के इस 15वें गेम में 5 Deuce (40-40) हुए और नोवाक ने कुल तीन ब्रेक पॉइंट सेव किए। अपनी सर्व पर 9-8 की लीड लेने के बाद उन्होंने नडाल की सर्विस ब्रेक की औऱ यह मैच जीतकर विम्बलडन फाइनल में जगह पक्की की। केविन ऐंडरसन के विरुद्ध फाइनल नोवाक के लिए एक बेहद आसान मैच रहा और सीधे सेटों में मामला निपट गया। नोवाक पिछले दो वर्षों का हिसाब एक साथ करने की तैयारी में थे और उन्होंने US ओपन भी आसानी से जीत लिया। 2018 के अंत में नोवाक जोकोविच एक बार फिर से रैंकिंग में नम्बर 1 थे। यह 5वीं बार था जब जोकोविच Year End World Number 1 थे। पीट सैम्प्रस सर्वाधिक 6 बार Year End World Number 1 रहे हैं।
2019 में ऑस्ट्रेलियन ओपन फाइनल में एक बार नडाल और जोकोविच आमने सामने थे। ये मैच बिल्कुल एकतरफा रहा और जोकोविच ने 6-3, 6-2, 6-3 से विजय प्राप्त की। पहली बार ग्रैंड स्लैम फाइनल में किसी ने राफेल नडाल को इस प्रकार डॉमिनेट किया था। इसी साल विम्बलडन फाइनल में जोकोविच और फेडरर के बीच एक और क्लासिक मैच हुआ। पाँचवें सेट में फेडरर 8-7 से आगे थे। अपनी सर्व पर उनके पास 2 चैंपियनशिप पॉइंट थे, इस समय यह मैच फेडरर के एक Ace से खत्म हो सकता था। लेकिन नोवाक जोकोविच की बात अलग है, उन्होंने वो दोनों मैच पॉइंट बचाए और एक बार फिर से अपना वही ट्रेडमार्क Passing shot खेला जो साल भर पहले विम्बलडन में ही नडाल के सामने खेला था। 12-12 होने के बाद ये सेट टाई-ब्रेकर तक पहुँचा और जिसे जीतकर जोकोविच ने करियर का 16वाँ ग्रैंड स्लैम और 5वाँ विम्बलडन टाइटल प्राप्त किया। जनवरी 2020 ऑस्ट्रेलियन ओपन फाइनल में डॉमिनिक थीम को 5 सेटों में हराकर नोवाक ने अपना 8वाँ ऑस्ट्रेलियन ओपन और 17वाँ ग्रैंड स्लैम जीता।
नोवाक अब रॉजर फेडरर से बस तीन और नडाल से 2 ग्रैंड स्लैम दूर हैं। जोकोविच अकेले खिलाड़ी हैं जिन्होंने रॉजर को चारों ग्रैंड स्लैम में हराया है, इसी तरह रॉजर अकेले खिलाड़ी हैं जिन्होंने जोकोविच को चारों ग्रैंड स्लैम में हराया है। तीनों प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ियों के विरुद्ध नोवाक का विनिंग रिकॉर्ड है। नडाल के विरुद्ध 29-26, फेडरर के विरुद्ध 27-23 और ऐंडी मरे के विरुद्ध 25-11…. ग्रैंड स्लैम फाइनल्स में रॉजर के विरुद्ध 4-1, ऐंडी मरे के विरुद्ध 5-2 और राफ़ा के विरुद्ध 4-4. इस प्रकार अपने 17 में से 13 ग्रैंड स्लैम फाइनल जोकोविच ने अपने 3 सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ियों से जीते हैं। 17 में से 13 ग्रैंड स्लैम फाइनल ऐसे रहे हैं जब उन्होंने उन खिलाड़ियों को हराया जिन्होंने पहले ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट जीत रखे थे। जोकोविच ने 34 Masters 1000 टूर्नामेंट भी जीते हैं। सभी 9 Masters 1000 टाइटल जीतने वाले भी वो विश्व के अकेले खिलाड़ी हैं।
नोवाक जोकोविच ने मैच और टूर्नामेंट तो बहुत जीते लेकिन उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वो मानसिक रूप से सबसे मजबूत टेनिस खिलाड़ी हैं। इसीलिए वो किसी भी मैच सिचुएशन में हिम्मत नहीं हारते, 5 सेट तक गए मैचों में उनका रिकॉर्ड (31-10) अपने सभी प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ियों से बेहतर है। उनको मिलने वाला क्राउड सपोर्ट रॉजर या राफ़ा के आसपास भी नहीं है। रॉजर फेडरर से हुए विम्बलडन फाइनल 2019 में क्राउड सपोर्ट लगभग एकतरफा था, रॉजर तो रॉजर, यहाँ तक कि वान मार्टिन डेल पोत्रो से हुए 2018 US ओपन फाइनल में भी ज्यादा क्राउड सपोर्ट डेल पोत्रो के पास था, लेकिन नोवाक को ऐसे मैचों में मजा आता है जहाँ क्राउड उनके खिलाफ हो।