नागपुर से पहले स्टीव वॉ की चर्चा करते हैं। 2001 ऐशेज शृंखला ऑस्ट्रेलिया ने पहले 3 मैचों के बाद ही 3-0 से जीत ली थी, तीसरे मैच में 36 वर्षीय स्टीव वॉ की पिंडली में 2 सेंटीमीटर का Tear हुआ था और वे शृंखला से लगभग बाहर थे, पर चूँकि यह इंग्लैंड में उनकी अंतिम शृंखला थी इसलिए वे अंतिम टेस्ट किसी भी हाल में खेलना चाहते थे। वे अभी भी पीड़ा का अनुभव कर रहे थे पर उन्होंने यह मैच खेला और अविजित 157 रन बनाए। ऑस्ट्रेलिया ने यह मैच पारी और 25 रनों से जीत लिया। स्टीव वॉ के खेलने या न खेलने से इस श्रृंखला के परिणाम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ना था परंतु उन्होंने केवल एक संदेश देने के लिए यह टेस्ट खेला कि ऑस्ट्रेलियाई टीम कितनी “Tough” है। (ऑस्ट्रेलियाई दल का मानना था कि इंग्लैंड के क़ई खिलाड़ी “छोटी मोटी” चोट के कारण ऐशेज जैसी शृंखला के मैचों से बाहर रह जाया करते थे, स्वयं कप्तान नासिर हुसैन उंगली में फ्रैक्चर के कारण दो टेस्ट से बाहर रहे थे।) https://crickettalesonline.sport.blog/2021/08/29/its-about-sending-a-message-a-monumental-effort-from-steve-waugh/
“Mate I will go to war with you.”
जब सेनापति की सोच ऐसी हो तो और टीम के प्रति उसका समर्पण इस स्तर का हो तो टीम उसके लिए क्या नहीं कर सकती?
पहुँचते हैं नागपुर:
“Looks like home, doesn’t it?”
नागपुर में विदर्भ क्रिकेट असोसिएशन (VCA) स्टेडियम की पिच का निरीक्षण करते हुए अम्पायर डेविड शेफर्ड ने कहा। पिच का रंगरूप वही था जो मई के महीने में ग्लूस्टरशर की पिच का होता है।
भारतीय कप्तान सौरव गांगुली पिच से संतुष्ट नहीं थे। उन्होंने क्यूरेटर किशोर प्रधान से पिच की घास हटाने को कहा था, उनकी इस यह माँग पूरी नहीं की गयी थी। गांगुली ने अपनी असंतुष्टि और क्रोध किसी से छुपाया नहीं था। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, “हम घर में खेल रहे हैं जहाँ हमारी शक्ति स्पिन गेंदबाजी है और इस प्रकार की पिच हमारी एडवांटेज हमसे छीन लेती है।” [अनिल कुंबले और हरभजन सिंह ने अबतक ऑस्ट्रेलिया के कुल 40 विकेटों में से 34 विकेट लिए थे, 16 बैंगलोर में और 18 चेन्नई में।]
क्यूरेटर किशोर प्रधान ने कहा कि जैसे जैसे खेल होगा पिच से टर्न भी मिलेगा और उन्हें ये समझ नहीं आ रहा है कि इतना हंगामा किस बात पर मचाया जा रहा है।
“but where was Ganguly?”
सचिन तेंदुलकर टेनिस एल्बो की चोट से उबरकर भारतीय एकादश में लौट रहे थे। उनके आने से भारतीय मध्यक्रम सशक्त हुआ था। यदि द्रविड़, गांगुली और लक्ष्मण लय में लौटे तो भारतीय टीम इस पिच पर भी रन बना सकती थी।
प्रश्न यह था कि सौरव गांगुली हैं कहाँ? यह प्रश्न ऑस्ट्रेलियाई कप्तान ऐडम गिलक्रिस्ट और मैच रेफरी रंजन मदुगले के अतिरिक्त स्टेडियम में उपस्थित सहस्रों दर्शकों और रेडियो या टेलीविजन पर प्रसारण सुन/देख रहे श्रोताओं/ दर्शकों के मन में भी था, क्योंकि टॉस के लिए सौरव गांगुली नहीं बल्कि राहुल द्रविड़ बाहर आए थे। डीन जोन्स ने उनसे पूछा कि सौरव कहाँ हैं, राहुल ने बताया कि कदाचित उनके पैर में खिंचाव है। राहुल द्रविड़ स्वयं ही इस को लेकर पक्के नहीं थे कि सौरव को हुआ क्या है?
भारतीय एकादश में तीन परिवर्तन हुए थे। युवराज सिंह के स्थान पर आकाश चोपड़ा को पुनः अवसर मिला (जो दूसरे टेस्ट में बाहर किए गए थे) सचिन तेंदुलकर क्रमांक चार पर, इरफान पठान के स्थान पर अजित अगरकर और दूसरा चौंकाने वाला परिवर्तन था हरभजन सिंह के स्थान पर मुरली कार्तिक। राहुल द्रविड़ ने बताया था कि हरभजन सिंह को फ्लू है।
सौरव गांगुली यह टेस्ट क्यों नहीं खेल रहे यह प्रश्न अब हर किसी की जिह्वा पर था। एक बात जो सबसे अधिक चल रही थी वह यह थी कि सौरव पिच से घास न हटाए जाने को लेकर नाराज हैं और इसी कारण उन्होंने यह मैच नहीं खेला।
ऑस्ट्रेलियाई कप्तान ऐडम गिलक्रिस्ट ने अपनी आत्मकथा “True Colors” में लिखा है कि जब उन्होंने टॉस के समय राहुल से पूछा कि सौरव कहाँ हैं तो राहुल कोई निश्चित उत्तर न दे सके तो उन्होंने इसका अर्थ यह निकाला कि संभवतः गांगुली ने घर में टेस्ट शृंखला में पराजित होने के भय से ऐसा किया है।
“When I got to the middle, Ganguly was not there. Dravid was in his blazer, ready for the toss. ‘Where’s Sourav,’ I said. Rahul couldn’t answer definitively. Between the lines I perceived that Sourav might have pulled out from fear of losing a home series.”
मैथ्यू हेडन ने अपनी आत्मकथा “Standing My Ground” में लिखा है कि सौरव और हरभजन मैच से से दो दिन पूर्व जब पिच का निरीक्षण कर रहे थे तब वे ऐसे लग रहे थे मानो ओलावृष्टि के उपरांत नष्ट हुई फसल देखते किसान हों। उन्होंने (ऑस्ट्रेलियाई टीम ने) अनुमान लगाया कि दोनों में से कोई ये मैच नहीं खेलेगा। उनके अनुसार दोनों को “ग्रीन-ट्रैकाइटिस” नामक बीमारी हुई थी, जिसमें आप हरी पिच के प्रति असहिष्णु हो जाते हैं क्योंकि इसमें स्पिन गेंदबाज के लिए कुछ होता नहीं और एक बल्लेबाज के रूप में आपके लिए बहुत सिरदर्द होता है।
“When Ganguly and Harbhajan went out to see the deck a couple of days before the game, they looked like farmers inspecting crops after a hail storm. We predicted neither would play and they did not. Ganguly withdrew with a leg-muscle injury that flared up suddenly and Harbhajan had an even more sudden dose of food poisoning. We put their ailments down to acute cases of ‘greentrackitis’, where you develop a severe intolerance to green wickets likely to give you nothing as a spin bowler and plenty of headaches as a batsman.”
सौरव गांगुली ने अपनी आत्मकथा “A Century is not enough” में इस विषय का कोई उल्लेख नहीं किया है।
सत्य क्या था सौरव के न खेलने का, यह शत प्रतिशत विश्वास के साथ कह पाना संभव नहीं है।
Politics:
अब चर्चा इस विषय पर करते हैं कि विदर्भ क्रिकेट असोसिएशन ने ऐसी पिच बनवाई क्यों?
BCCI के चेयरमैन जगमोहन डालमिया का कार्यकाल समाप्त हो रहा था और BCCI के नए चेयरमैन के लिए चुनाव हाल में ही सम्पन्न हुआ था। टक्कर BCCI के दो धड़ों के बीच थी। एक था डालमिया का धड़ा और दूसरा तत्कालीन केंद्रीय मंत्री शरद पवार का। डालमिया गुट के प्रत्याशी थे हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल के पुत्र और BCCI उपाध्यक्ष रणबीर सिंह महिंद्रा। चुनाव 15-15 से बराबर था पर जगमोहन डालमिया चूँकि BCCI चेयरमैन थे, अपने कास्टिंग वोट का प्रयोग करके उन्होंने रणबीर सिंह महिंद्रा को 16-15 से विजयी बना दिया।
ऐसे समाचार चल रहे थे विदर्भ क्रिकेट असोसिएशन के चेयरमैन शशांक मनोहर (जो शरद पवार के समर्थक थे) ने पवार की पराजय का बदला लेने के लिए नागपुर में हरी पिच बनवाई।
ऐसी बातों की कोई पुष्टि तो करता नहीं अतः हम बस अनुमान ही लगा सकते हैं कि ऐसी पिच क्यों बनी होगी।
Let’s play Cricket:
पिच कैसी भी हो, अब इसपर खेलना तो था ही। ऐडम गिलक्रिस्ट ने लगातार तीसरा टॉस जीतकर बल्लेबाजी का निर्णय लिया था। मैथ्यू हेडन और जस्टिन लैंगर ने शृंखला में बड़े स्कोर नहीं बनाए थे पर उन्होंने ऑस्ट्रेलिया को हर बार ठोस शुरुआत दी थी। आज भी उन्होंने यही किया पर बड़ा स्कोर उनसे दूर ही रहा। ज़हीर खान ने दोनों को आउट किया। जब साइमन कैटिच अनिल कुंबले की गेंद पर फॉरवर्ड शॉर्ट लेग पर कैच हुए तब स्कोर था 86 रन पर 3 विकेट।
Martyn again:
डेमियन मार्टिन और उपकप्तान डैरेन लीमन ने मोर्चा संभाला। नागपुर की पिच चेन्नई से बिल्कुल भिन्न थी पर डेमियन मार्टिन तो मानो अपनी चेन्नई वाली पारी ही आगे बढ़ा रहे थे, पर तीव्र गति से।
मार्टिन ने कुंबले की गेंद को आगे निकलकर सीधे उठाकर चौका प्राप्त किया, कुंबले ने अगली गेंद शॉर्ट फेंकी और इसपर मार्टिन ने कट से चौका प्राप्त किया। दो गेंद बाद वे पुनः आगे आए और सीधा चौका लगाया। मार्टिन अनिल कुम्बले को गेंदबाजी से हटाना चाहते थे।

दूसरी ओर लीमन भी तेज गति से रन बना रहे थे। आज उनका फुटवर्क उच्च स्तरीय था। वे स्पिन गेंदबाजों पर आगे निकलकर चौके लगा रहे थे। उन्होंने 62 गेंदों में शृंखला का अपना पहला अर्धशतक पूर्ण किया। 148 रनों की साझेदारी के बाद 70 रन बनाकर डैरेन लीमन मुरली कार्तिक की गेंद पर स्लिप में कैच हुए।
डेमियन मार्टिन 98 पर आ गए थे। अजित अगरकर की शॉर्ट गेंद को चार रनों के लिए पॉइंट और एक्सट्रा कवर के बीच से निकाल दिया। यह उनका 9वाँ, 2004 में चौथा और इस शृंखला में दूसरा शतक था।


ऑस्ट्रेलिया का स्कोर 300 के पार हो गया था, मार्टिन और क्लार्क मैच के पहले ही दिन भारतीय टीम को मैच से बाहर करने का प्रयास कर रहे थे। 73वें ओवर में मार्टिन ने कुम्बले की गेंद को आगे निकलकर पुनः उठा दिया। यह चेन्नई वाले शॉट की याद दिला रहा था जिसके माध्यम से उन्होंने अपना शतक पूरा किया था पर इस बार गेंद स्टेडियम की छत पर गिरी थी। दो गेंद बाद उन्होंने पुनः यही शॉट खेलने का प्रयास किया। गेंद ऊपर तो गयी पर दूर नहीं। अजित अगरकर ने कैच पकड़ा। कुछ ही मिनट बाद ऐडम गिलक्रिस्ट ने मात्र 2 रन बनाकर मुरली कार्तिक को रिटर्न कैच थमा दिया।
बैंगलोर टेस्ट के नायक माइकल क्लार्क ने कुम्बले के ओवर में तीन चौके लगाकर अपना अर्धशतक पूर्ण किया। दिन का खेल समाप्त होने तक ऑस्ट्रेलिया का स्कोर था 90 ओवर में 362 पर 7, क्लार्क 73 पर खेल रहे थे। अंतिम दिन वे आउट होने वाले अंतिम बल्लेबाज थे। वे अपने शतक से मात्र 9 रन दूर रह गए थे पर इस शृंखला में 300 रन पूरे करने वाले पहले बल्लेबाज बने थे। ऑस्ट्रेलियाई पारी 398 पर समाप्त हुई। एक समय पाँच सौ बनाने की ओर अग्रसर ऑस्ट्रेलिया ने पिछले 6 विकेट मात्र 84 रनों पर गँवा दिए थे।
वीरेंद्र सेहवाग ने पहले ही ओवर में गिलेस्पी को चार चौके जड़ दिए। ग्लेन मक्ग्रा के विरुद्ध भी उन्होंने यही करना चाहा पर गेंद बल्ले का बाहरी किनारा ले गयी। ऐडम गिलक्रिस्ट ने एक उत्कृष्ट कैच पकड़ा। यह ग्लेन मक्ग्रा का सौवाँ टेस्ट मैच था। वे सौ टेस्ट खेलने वाले पहले ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज बने थे। जेसन गिलेस्पी ने आकाश चोपड़ा को पहली स्लिप में शेन वॉर्न के हाथों कैच कराया और चोट के बाद वापसी कर रहे सचिन तेंदुलकर को एलबीडबल्यू करके भारत का स्कोर 49 पर 3 कर दिया।
जब भी राहुल द्रविड़ और लक्ष्मण एक साथ क्रीज पर होते थे, दिमाग में कोलकाता और ऐडिलेड ताजा हो जाते थे पर आज ऐसा कुछ नहीं होना था। शेन वॉर्न ने शृंखला में तीसरी बार लक्ष्मण को आउट किया। राहुल द्रविड़ आवश्यकता से अधिक रक्षात्मक बल्लेबाजी का प्रयास कर रहे थे, रन बिल्कुल बन्द थे और ऐसा करके उन्होंने अपने ऊपर दबाव बहुत बढ़ा लिया था। ग्लेन मक्ग्रा ने बहुत अनुशासित गेंदबाजी की थी और उसका पुरस्कार उन्हें द्रविड़ के विकेट के रूप में मिला जब उनकी गेंद द्रविड़ के बल्ले का बाहरी किनारा लेकर पहली स्लिप में शेन वॉर्न के हाथों में चली गयी। 140 गेंदों तक चली इस पारी में द्रविड़ मात्र 21 रन बना सके। दूसरे दिन के खेल की समाप्ति पर स्कोर 77 ओवरों में 146 पर 5 (रनों की गति दो से भी कम). तीसरे दिन पहले ही सत्र में भारतीय टीम 185 पर सिमट गई। मोहम्मद कैफ अर्धशतक बनाने वाले एकमात्र भारतीय बल्लेबाज रहे।
पहले ओवर में 16 रन देने के बाद भी जेसन गिलेस्पी के आँकड़े थे, 22.5 ओवरों में 56 रन देकर 5 विकेट। ग्लेन मक्ग्रा ने 25 ओवरों में मात्र 27 रन देकर 3 विकेट लिए। शेन वॉर्न को 2 विकेट मिले।
ऑस्ट्रेलिया के पास 213 रनों की बढ़त थी पर ऐडम गिलक्रिस्ट ने फॉलोऑन नहीं दिया। वे भारतीय टीम को वापसी का कोई अवसर नहीं देना चाहते थे। मैथ्यू हेडन मात्र 9 रन पर आउट हुए पर जस्टिन लैंगर और कैटिच के बीच 80 रनों की साझेदारी ने ऑस्ट्रेलियाई बढ़त 300 के पार पहुँचा दी। अपना मात्र 12वाँ टेस्ट खेल रहे कैटिच ने बैंगलोर टेस्ट में 81 रनों की पारी खेली थी, उनकी आज की पारी ऑस्ट्रेलिया को 35 वर्षों में पहली बार भारत में शृंखला विजय की ओर ले जा रही थी।
ऑस्ट्रेलिया की बढ़त चार सौ होने ही वाली थी, साइमन कैटिच 99 पर थे, तभी मुरली कार्तिक की एक सीधी गेंद पर वे बल्ला न लगा सके। गेंद पैड पर लगी और कैटिच अपने शतक से 1 रन दूर रह गए।
माइकल क्लार्क इस शृंखला में अनिल कुंबले पर हावी रहे थे। उन्होंने आगे निकलकर कुम्बले की गेंद पर कवर ड्राइव से चौका लगाकर बढ़त को 400 के पार पहुँचा दिया। पहले दो टेस्ट मैचों में 18 विकेट लेने वाले कुम्बले को इस मैच में मात्र 3 विकेट प्राप्त हुए और उन्होंने 4 से अधिक की औसत से रन दिए। तीसरे दिन के खेल की समाप्ति पर ऑस्ट्रेलिया की बढ़त 415 रन थी और अभी 7 विकेट शेष थे। क्रिकेट इतिहास में कभी भी चौथी पारी में इतने रन बनाकर कोई टीम विजयी नहीं हुई थी। डेमियन मार्टिन 43 पर खेल रहे थे और लगातार तीसरे शतक के लिए तैयार थे।
चौथे दिन सवेरे दोनों बल्लेबाजों ने आक्रमण कर दिया क्योंकि गिलक्रिस्ट अपने गेंदबाजों को 5 सत्र देना चाहते थे भारत को ऑल आउट करने के लिए।
मार्टिन ने अगरकर की शॉर्ट गेंद को हुक करके स्क्वेयर लेग सीमारेखा की ओर भेजा और ऑस्ट्रेलिया की बढ़त 500 रन कर दी, मार्टिन 83 पर आ गए थे और गिलक्रिस्ट उनका शतक होते ही पारी घोषित करने वाले थे। माइकल क्लार्क के लिए यह अवसर अपने एकदिवसीय क्रिकेट वाले शॉट दिखाने का था। क्लार्क मात्र 95 गेंदों में 73 रन बनाकर कुम्बले की गेंद पर आउट हुए।
97 के स्कोर पर ज़हीर खान की गेंद मार्टिन के बल्ले का किनारा लेकर गेंद पार्थव पटेल के दस्तानों में चली गयी। ऐडम गिलक्रिस्ट ने पारी घोषित कर दी। ऑस्ट्रेलिया ने आज सुबह 20 ओवरों में 127 रन बना दिए थे।
543 रनों के लक्ष्य का पीछा कर रही भारतीय टीम से मैच जीतने की आशा कट्टर प्रशंसकों को भी नहीं होगी। नागपुर से लेकर विषुवत रेखा तक वर्षा का कोई अनुमान नहीं था।
1969 में बिल लॉरी के नेतृत्व में आई ऑस्ट्रेलियाई टीम ने टाइगर पटौदी की भारतीय टीम पर 5 टेस्ट मैचों की शृंखला में 3-1 से विजय प्राप्त की थी। उसके बाद 1979-80 में 6 टेस्ट मैच खेलने आई किम ह्यूज़्स की ऑस्ट्रेलियाई टीम 0-2 से पराजित हुई। 1986-87 में ऐलन बॉर्डर की टीम 3 मैचों की शृंखला 0-0 से बराबर करके गयी। 1996 में दिल्ली में हुए एकमात्र टेस्ट में मार्क टेलर की ऑस्ट्रेलिया को पराजय मिली। 1998 में भी मार्क टेलर की टीम 1-2 से हारी और 2001 में स्टीव वॉ की टीम भी 1-2 से पराजित होकर गयी थी।
54वें ओवर में शेन वॉर्न की तीसरी गेंद। ज़हीर खान ने स्लॉग स्वीप खेला, मिडविकेट सीमारेखा पर डेमियन मार्टिन के लिए आसान सा कैच। ऐडम गिलक्रिस्ट की टीम ने वह कर दिखाया था जो ऑस्ट्रेलियाई टीमें 35 वर्ष से नहीं कर सकी थीं।
निकट इतिहास में इस विजय की तुलना यदि किसी मैच से की जा सकती थी तो वह था सबाइना पार्क 1995, जहाँ ऑस्ट्रेलिया ने 22 वर्षों में पहली बार वेस्ट इंडीज़ को उसके घर में टेस्ट शृंखला में पराजित किया था। 1995 वाली शृंखला में चारों टेस्ट मैचों में ऑस्ट्रेलिया की एक ही एकादश खेली थी, 2004 बॉर्डर गावस्कर शृंखला में भी अबतक इन 3 टेस्ट मैचों में ऑस्ट्रेलिया ने एकादश में कोई परिवर्तन नहीं किया था।
“Here mate, this is for you too.”
ऐलन बॉर्डर वेस्ट इंडीज़ के विरुद्ध अपनी अंतिम शृंखला (1992-93) में विजय के निकट पहुँचे थे पर ऐडिलेड टेस्ट मात्र 1 रन से हारने के कारण शृंखला 1-2 से हार गए थे। मार्क टेलर की टीम ने जब 1995 में ऐतिहासिक शृंखला जीती तब बॉर्डर कॉमेंट्री कर रहे थे। ऐलन बॉर्डर का ड्रेसिंग रूम में स्वागत करते हुए मार्क टेलर कहा था, “Here mate, this is for you too.” कुछ इसी प्रकार आज गिलक्रिस्ट की टीम ने स्टीव वॉ को फोन पर व्यस्त रखा था। वॉ कप्तान रहते भारत में शृंखला नहीं जीत पाए थे पर आज उनके खिलाड़ियों ने “Final Frontier” जीत लिया था।
मैन ऑफ द मैच पुरस्कार के 3 दावेदार थे। जेसन गिलेस्पी ने इस पारी में 4 और मैच में 9 विकेट लिए थे। माइकल क्लार्क ने पहली पारी में 91 और दूसरी में तेज 73 रन बनाए थे। यह पुरस्कार मिला पहली पारी में 114 और दूसरी में 97 रन बनाने वाले डेमियन मार्टिन को, मार्टिन मुम्बई में मैन ऑफ द सीरीज भी चुने गए।
Australian Middle Order:
माइकल क्लार्क ने अबतक 3 मैचों में 75 की औसत से 376 रन बनाए थे और रिकी पॉन्टिंग की कमी खलने नहीं दी थी। डेमियन मार्टिन ने 65 की औसत से 389 रन बनाए थे। कैटिच ने लगभग 54 की औसत से 268 रन बनाए थे। वीरेंद्र सेहवाग के अतिरिक्त किसी अन्य भारतीय बल्लेबाज का प्रदर्शन उल्लेखनीय नहीं था। सेहवाग ने शृंखला में अबतक 57 की औसत से 286 रन बनाए थे। उनके अतिरिक्त केवल पार्थिव पटेल (156) ऐसे भारतीय बल्लेबाज थे, जिनके 150 से अधिक रन थे।
राहल द्रविड़ 3 मैचों में 21.8 की औसत से 109 रन,
लक्ष्मण 3 मैचों में 10.6 की औसत से 53 रन,
सौरव 2 मैचों में 19.67 की औसत से 59 रन,
सचिन 1 मैच में 5 की औसत से 10 रन।
दोनों टीमों के मध्यक्रमों के प्रदर्शन में जमीन आसमान का अंतर था और यह निर्णायक सिद्ध हुआ।

ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों की जितनी प्रशंसा की जाए कम थी। जेसन गिलेस्पी ने अबतक 3 मैचों में 15.43 की औसत से 16 विकेट लिए थे और मक्ग्रा ने 26.54 की औसत से 11. कैस्प्रोविच ने सहायक तेज गेंदबाज की भूमिका अच्छी निभाई थी। शेन वॉर्न ने 14 विकेट लिए थे। यह भारत में टेस्ट शृंखलाओं में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था।
मुम्बई टेस्ट अब Dead Rubber था, इसके परिणाम का शृंखला पर कोई प्रभाव नहीं पड़ना था। रिकी पॉन्टिंग फिट होकर ऑस्ट्रेलियाई एकादश में लौटे, नागपुर टेस्ट की पहली पारी में हैमस्ट्रिंग खिंचवा चुके डैरेन लीमन की जगह। शेन वॉर्न के अंगूठे में फ्रैक्चर था, अतः ऑफ स्पिनर नेथन नौरिट्ज़ को अपना पहला टेस्ट खेलने का अवसर मिला। भारतीय टीम में भी परिवर्तन हुए। शृंखला में कई कैच टपकाने वाले विकेटकीपर पार्थिव पटेल के स्थान पर दिनेश कार्तिक ने टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया और आकाश चोपड़ा को पुनः बाहर करके गौतम गंभीर को पदार्पण का अवसर दिया गया। अजित अगरकर के स्थान पर हरभजन वापस आए। भारत ने यह टेस्ट 13 रनों से जीता। मुरली कार्तिक मैन ऑफ द मैच रहे।


2004 बॉर्डर गावस्कर शृंखला पर क्रिकेट टेल्स की यह तीन पोस्ट की शृंखला यहीं समाप्त हुई। धन्यवाद।
साभार:
1. 1993 से 2008 तक की ऑस्ट्रेलियाई टीम पर लिखी गयी Malcolm Knox की पुस्तक “The Greatest”
2. Guardian में Anand Vasu का लेख “Flak flies as India suffer”
3. इंडिया टूडे में सितंबर 2004 में छपा लेख “BCCI president election process: A reminder of everything that is wrong with Indian cricket”
4. यूट्यूब हाइलाइट्स,
5. ESPN Cricinfo स्कोरकार्ड.
चित्र: Getty Images





































































