Thank You MS Dhoni.

Mahendra Singh Dhoni

Father Time is Undefeated. समय अजेय है। समय से कोई नहीं जीत पाता। कितना भी बड़ा एथलीट हो, एक समय आता है जब उम्र उसकी उच्च स्तरीय प्रदर्शन करने की क्षमता पर प्रभाव डालने लगती है।

Railways की टीम के लिए ट्रायल देने गए MS धोनी को मात्र 3 गेंद कीपिंग कराने के बाद रिजेक्ट कर दिया था। वही MS धोनी भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल विकेटकीपर बल्लेबाज हुए। अमेरिकन फुटबॉल 🏈 लेजेंड Peyton Manning ने अपनी रिटायरमेंट स्पीच में कहा था, “Football 🏈 has taught me not to be lead by obstructions and setbacks but instead to be lead by dreams.” स्पोर्ट्स आपको बाधाओं और असफलताओं से घबराकर पीछे हटना नहीं बल्कि सपनों के साथ आगे बढ़ना सिखाते हैं। हर सफल खिलाड़ी की भाँति महेन्द्र सिंह धोनी ने भी यही किया।

महेन्द्र सिंह धोनी ने क्रिकेट में सब कुछ देखा है, टीम में आने के लिए संघर्ष से लेकर पहली ही सीरीज के बाद बाहर होने का भय उसके बाद अगली सीरीज में अचानक से सुपरस्टार बन जाना और फिर पीछे मुड़कर न देखना। 2007 वर्ल्ड कप में टीम का बाहर होना अपने पोस्टर जलते देखना, 6 माह बाद ही वर्ल्ड T20 जीतकर वापस लौटना और क्रिकेट इतिहास में अपना नाम स्वर्णाक्षरों में लिखवा लेना। तीनों फॉर्मेट की कप्तानी पा लेना और सचिन तेंदुलकर के बाद भारतीय क्रिकेट का सबसे ज्यादा सेलिब्रेटेड क्रिकेटर बन जाना। वन डे क्रिकेट में नम्बर 1 बल्लेबाज बनना। न्यूज़ीलैंड में टेस्ट और वन डे सीरीज जीतना। टेस्ट टीम को नम्बर 1 बनते देखना। 2011 वर्ल्ड कप विजेता टीम का कप्तान होकर सफलता के शिखर तक जाना और इसके बाद इंग्लैंड ऑस्ट्रेलिया में टीम का वाइटवॉश। इंग्लैंड के खिलाफ होम टेस्ट सीरीज में पराजय के बाद भारतीय टीम द्वारा ऑस्ट्रेलिया को 4-0 से वाइटवॉश करना। चैंपियंस ट्रॉफी की विजय और वर्ल्ड कप सेमीफाइनल। सफलता, असफलता, प्रशंसा, आलोचना, MS धोनी ने सब देखा है और सबसे सीखते हुए आगे बढ़े हैं। उन्होंने करियर में वह सब प्राप्त किया जो वे प्राप्त कर सकते थे।

एक कप्तान के रूप में महेन्द्र सिंह धोनी की बात होती है तो “Gut Feel” और “Intuition” जैसे शब्दों का प्रयोग बार बार होता है। प्रसिद्ध क्रिकेट पत्रकार और लेखक Jarrod Kimber ने इसे बकवास बताते हुए एक बड़ी रोचक तुलना की है। Kimber ने लिखा है, Dennis Rodman NBA बास्केटबॉल के इतिहास में सर्वश्रेष्ठ Rebounder थे। वे शूटर्स को गेंद शूट करते देखते थे और ध्यान रखते थे कि यदि शॉट मिस हो रहा है और बॉल Rim पर लग रही है तो कितनी उछल रही है, कितनी दूर जा रही है और Rebound कैच करने के लिए कितनी दूर खड़ा रहना होगा। Rodman का मानना था कि Rebounding का सबसे महत्वपूर्ण पार्ट शूटर को रीड करना है। इसी प्रकार MS धोनी ने भी कप्तानी को सीखा है, Step by step. जो निर्णय उन्होंने फील्ड पर लिए हैं वो मात्र Gut Feel और Intuition के सहारे सम्भव नहीं हैं, अतः ऐसी बातें करना उनकी Intelligence और Game Sense का महत्व कम आँकने जैसा है। Kimber ने लिखा है, “Dhoni is less magical and more like an extreme pragmatist, a living cricket algorithm.” उनके निर्णय पिछले परिणामों और Memory Recall पर आधारित रहे हैं।

महेन्द्र सिंह धोनी का अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में बड़ा नाम बनना और भारतीय टीम का रन चेज में एक उच्च स्तरीय टीम बनना यह दोनों साथ साथ हुए। नम्बर 3 पर MS के शानदार रिकॉर्ड के बाद भी राहुल द्रविड़ और ग्रेग चैपल को विश्वास रहा कि ये लड़का एक फिनिशर के रूप में ज्यादा बेहतर रहेगा। MS धोनी इस विश्वास पर खरे उतरे और वन डे क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ फिनिशर बने। धोनी अपनी पीक पर भारतीय क्रिकेट फैंस के लिए सुपरमैन की भाँति थे, जिसके विकेट पर रहते हुए विजय असंभव नहीं थी। हमेशा विश्वास रहता था, कभी कभी आवश्यकता से अधिक भी।

“मैं पल दो पल का शायर हूँ”, ये उनका फेवरेट गाना है। वे वर्तमान में रहना पसंद करते है। हर्ष भोगले कहते हैं, धोनी कभी इनसिक्योर नहीं रहे अपने स्थान या उपलब्धि को लेकर। 2007 वर्ल्ड टी ट्वेंटी विजय के बाद अपनी टी शर्ट एक बच्चे की ओर फेंकते हैं और फिर गायब। नाइंटीज किड्स ने 2003 में जो सपना टूटते देखा था वो 2011 में पूरा हुआ। 2011 की विश्वकप विजय के बाद मैदान पर सेलिब्रेशंस में MS दिखाई नहीं देते, कप्तान के रूप में नाम उनका ही आएगा पर उन्हें पता था कि ये मोमेंट सचिन तेंदुलकर का था। 2008 में नागपुर में जब सौरव गांगुली अपना आखिरी टेस्ट मैच खेल रहे थे तो अंतिम क्षणों में कप्तानी उनको सौंप दी। कोई इनसिक्योरिटी नहीं।

MS धोनी की बायोपिक में एक दृश्य है, जहाँ वे खड़गपुर में अपने दोस्तों के साथ रेलवे के क्वार्टर में 2003 का वर्ल्ड फाइनल देख रहे थे, सचिन के आउट होते ही चाय बनाने चले जाते हैं। एक दोस्त कहता है, “ई कैफ, मोंगिया, युवराज सब अपने महि के साथ के हैं न, सब वर्ल्ड कप खेल रहे हैं, पता नहीं महि का का होगा ?” वाकई किसी को पता नहीं रहा होगा कि महि (माही) अगले 8 साल में कहाँ पहुँचने वाला है.

महेंद्र सिंह धोनी के ट्रॉफी कैबिनेट में पड़ी ट्रॉफियाँ उन्हें निर्विवाद रूप से भारतीय क्रिकेट का महानतम कप्तान बनाती हैं। वन डे क्रिकेट में सबसे कम पारियों में दस हज़ार रन पूरे करने वाले बल्लेबाजों में महेंद्र सिंह धोनी छठे स्थान पर हैं। इस लिस्ट में धोनी इसलिए यूनीक हैं क्योंकि लिस्ट में उनसे ऊपर जितने भी बल्लेबाज हैं (विराट, सचिन, सौरव, पोंटिंग और कैलिस) सभी टॉप 3 (या तो ओपनर या वन डाउन) के बल्लेबाज हैं, जबकि धोनी ने अपनी 80% से अधिक पारियाँ नम्बर 5, 6, 7 पर खेली हैं। Sky Sports पर दो दिन पूर्व हुई Captaincy पर चर्चा में Shane Warne ने कहा कि रिटायरमेंट के बाद लोग खिलाड़ी को उसके आँकड़ों से याद नहीं करते बल्कि याद करते हैं कि उसने Game को कैसे खेला, लोग उन Iconic मोमेंट्स से याद करते हैं जिनमें वह शामिल रहा। MS धोनी के करियर में कई ऐसे मोमेंट्स हैं। इनमें सबसे बड़ा योगदान निश्चित रूप से 2011 फाइनल में उनकी 91 रनों की नॉट आउट पारी रही। पूरे वर्ल्ड कप में बल्ले से उन्होंने कुछ बताने लायक प्रदर्शन नहीं किया था पर फाइनल में 114/3 होने के बाद उन्होंने नम्बर 5 पर आकर अपने करियर की सबसे महत्वपूर्ण पारी खेली। महान 🏈 खिलाड़ी Shannon Sharpe के शब्दों में, “There are not many great players who can call upon their greatness on the biggest stage of the game when their team needs it the most”

अभी तो वे आईपीएल में दिखेंगे, पर जब खेल से पूरी तरह दूर होंगे और अपने Rearview Mirror में देखेंगे तो युवराज, रैना, सचिन के साथ साझेदारियाँ, अश्विन जडेजा की गेंदों पर स्टम्पिंग, विराट कोहली के साथ हुई वार्ताएँ अवश्य याद करेंगे। आप उनके इंस्टाग्राम वीडियो में देख ही चुके हैं कैसे हर प्रकार के पलों को उन्होंने सँजोकर रखा है !

“कल और आयेंगे नग्मों की खिलती कलियाँ चुननेवाले,
मुझसे बेहतर कहनेवाले, तुमसे बेहतर सुननेवाले” – धोनी के फेवरेट गाने की बड़ी सुंदर लाइनें है। धोनी के उत्तराधिकारी उनसे भी ज्यादा आगे बढ़ें, यही कामना करेंगे। MS धोनी ने जिन खिलाड़ियों में क्षमता देखी उन्हें पूरी तरह back किया। खिलाड़ी पर यह दबाव नहीं कि यदि इस मैच में अच्छा न किया तो टीम से बाहर। रोहित शर्मा, रवींद्र जडेजा जैसे खिलाड़ियों को back किया जाना (जब हर तरफ से इन्हें बाहर करने की आवाज़ें उठती थीं) टीम के Long Term हित में रहा।

Thank You MS Dhoni. Game of course goes on but take it from me without MS Dhoni it’s just not the same. Thank you for giving your team-mates and fans everything you had.

When Jim Laker’s historic performance annihilated Australia.

सर डॉनल्ड ब्रैडमैन की 99.94 की औसत के अलावा टेस्ट क्रिकेट में और कौन से ऐसे कीर्तिमान हैं जो आपको लगता है कि कभी नहीं टूटेंगे ? मुरलीधरन के 800 विकेट ? 26 पर ऑल आउट होने का न्यूज़ीलैंड का रिकॉर्ड ? ब्रायन लारा के एक पारी में 400 रन का रिकॉर्ड टूटना कठिन है पर असंभव नहीं।

1930 की ऐशेज़ में बना सर डॉनल्ड ब्रैडमैन का एक टेस्ट सीरीज में 974 रनों का रिकॉर्ड टूटना भी कठिन है पर जिस प्रकार स्टीव स्मिथ खेलते हैं, वे इसे तोड़ने में सक्षम हैं। (1989 में 6 टेस्ट मैचों की ऐशेज़ सीरीज में मार्क टेलर ने 839 रन बनाए थे, उसके बाद कोई भी बल्लेबाज एक टेस्ट सीरीज में 800 रन बनाने में सफल नहीं हुआ।) स्टीव स्मिथ ने ऐशेज़ 2019-20 में 5 में से 4 टेस्ट खेले और 774 रन बनाए। Headingley टेस्ट वे नहीं खेले और जिस प्रकार की फॉर्म में स्मिथ थे, उसके हिसाब से एक टेस्ट में 200 रन उनके लिए असंभव नहीं थे। 2014-15 बॉर्डर गावस्कर सीरीज में भी स्मिथ ने 4 टेस्ट में 769 रन बनाए थे।

एक पारी में 10 विकेट लेने का रिकॉर्ड England के Jim Laker का था, जिसे अनिल कुंबले ने 1999 में पाकिस्तान के विरुद्ध कोटला टेस्ट में बराबर किया था। Jim Laker का एक और रिकॉर्ड है वो उसी टेस्ट मैच में बना था जिसमें उन्होंने पारी में 10 विकेट लिए थे। यह रिकॉर्ड है टेस्ट मैच में 19 विकेट लेने का। इस रिकॉर्ड के बारे में कहा जा सकता है कि शायद ये कभी न टूटे। ये रिकॉर्ड बना था 1956 में इंग्लैंड में खेली गई ऐशेज़ सीरीज के चौथे टेस्ट में, जो Old Trafford, Manchester में खेला गया था। पहला टेस्ट ड्रॉ रहा था, दूसरा ऑस्ट्रेलिया ने जीता था और तीसरे टेस्ट में Jim Laker और Tony Lock की स्पिन जोड़ी ने इंग्लैंड के 20 में से 18 विकेट लिए थे। यह मैच इंग्लैंड ने पारी से जीता था। तीन टेस्ट मैचों के बाद सीरीज 1-1 से बराबर थी।

4th Test: इंग्लिश कप्तान Peter May ने टॉस जीतकर बल्लेबाजी की और उनके दोनों ओपनर्स Peter Richardson और Colin Cowdrey ने पहले विकेट के लिए 174 रनों की साझेदारी, Cowdrey 80 रन बनाकर आउट हुए पर Richardson और David Sheppard ने शतक बनाए और इंग्लैंड की पहली पारी 459 पर समाप्त हुई।

Jim Laker pulverizes the Aussies:
इंग्लिश ऑफ स्पिनर Jim Laker ने ऑस्ट्रेलियन ओपनर Colin McDonald के रूप में अपना पहला विकेट लिया। नम्बर 3 पर आए Neil Harvey बिना खाता खोले Laker की गेंद पर बोल्ड हो गए। दूसरे ओपनर Jim Burke लेफ्ट आर्म स्पिनर Tony Lock का शिकार बने। यहाँ से एक सिलसिला आरम्भ हुआ। अगले सातों ऑस्ट्रेलियाई विकेट Jim Laker के नाम रहे। Laker ने इस पारी में 16.4 ओवर में 37 रन देकर 9 विकेट चटकाए। अंतिम 7 विकेट तो उन्होंने अपनी 22 गेंदों में मात्र 8 रन देकर ले लिए। लेकिन इस मैच में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन आना अभी शेष था। ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी 84 पर समाप्त हुई। 375 रनों से आगे चल रही इंग्लिश टीम के कप्तान Peter May ने ऑस्ट्रेलिया को फॉलो ऑन के लिए आमंत्रित किया।

Perfect 10:
पहले दिन के खेल में इंग्लैंड ने बल्लेबाजी बहुत अच्छी की थी पर पिच पर मिल रहा टर्न देखकर इंग्लिश प्रेस ने लिख दिया था, “Laker and Lock must be licking their fingers at the prospect of bowling later in the match.” ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी में सभी विकेट स्पिनर्स को ही मिले, 9 अकेले Jim Laker को। ऑस्ट्रेलिया के पास भी दो अच्छे स्पिनर थे, कप्तान Ian Johnson और Richie Benaud, पर इन दोनों को Laker जैसी टर्न नहीं मिली थी। ऑस्ट्रेलियाई प्रेस ने दूसरे दिन की शाम से ही पिच की बुराई आरम्भ कर दी थी। ऑस्ट्रेलियाई लेजेंड Bill O’Reilly ने लिखा था, “This pitch is a disgrace. What lies in store for Test cricket if groundsmen are allowed to play the fool like this?”

ऑस्ट्रेलिया जब फॉलोऑन के लिए उतरने वाली थी तब पिच क्यूरेटर Bert Flack ने ऑस्ट्रेलियाई कप्तान Ian Johnson से पूछा कि वे पिच पर Roller कैसा लेना पसंद करेंगे, हल्का या भारी? Ian Johnson का उत्तर था, “Please your f***ing self.”
(Via: ESPN Cricinfo)

31 जुलाई 1956: टेस्ट मैच का अंतिम दिन।
दूसरी पारी में ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों ने खूँटा गाँड़ रखा था और हिलने का नाम नहीं ले रहे थे। हर बल्लेबाज द्वारा कितनी गेंद खेली गई, ये हिसाब तो उस समय रखा नहीं जाता था, पर अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है, ऑस्ट्रेलिया की दूसरी पारी में 150 ओवरों से अधिक का खेल हो चुका था, उस समय 8 गेंदों के ओवर होते थे, 6 गेंदों के हिसाब से ये 200 ओवर होते। Jim Laker 51 ओवर फेंक चुके थे और उनके स्पिन जोड़ीदार Tony Lock 55 ओवर।

The Record:
पारी का 151वाँ ओवर, Jim Laker की गेंद Len Maddocks के पैड पर लगी, कुछ सेकेंड सोचने के बाद अंपायर Emrys Davies ने अपनी उंगली उठा दी। Jim Laker के नाम एक अविश्वसनीय रिकॉर्ड दर्ज हो चुका था। यह रिकॉर्ड था पारी में सभी 10 विकेट लेने का।

दूसरी पारी के आँकड़े: 51.2 ओवर, 23 मेडेन, 53 रन देकर 10 विकेट।
मैच के आँकड़े: 57.6 ओवर, 27 मेडेन, 90 रन देकर 19 विकेट। इन 19 विकेटों की बात करते हुए सर डॉनल्ड ब्रैडमैन ने कहा था, “It is a feat unlikely to be equalled.”

इस टेस्ट मैच को “Laker’s Match” के रूप में याद किया जाता है। यहाँ इंग्लैंड को 2-1 की बढ़त मिली, अंतिम टेस्ट ड्रॉ रहा और इंग्लैंड के Ashes सीरीज Retain कर ली।

इस पूरी सीरीज में Jim Laker ने 9.60 रन प्रति विकेट की औसत और 37 गेंद प्रति विकेट की स्ट्राइक रेट से 46 विकेट लिए, एक टेस्ट सीरीज में सर्वाधिक विकेट के मामले में Jim Laker का यह प्रदर्शन क्रिकेट इतिहास में दूसरे नम्बर पर है। (पहले नम्बर पर हैं महान इंग्लिश गेंदबाज Sydney Barnes, जिन्होंने 1913-14 में अपने करियर की अंतिम टेस्ट सीरीज में दक्षिण अफ्रीका के विरुद्ध 4 टेस्ट मैचों में 49 विकेट लिए थे।)

कार्टूनिस्ट Roy Ullyett ने इस ऐशेज़ के परिणाम को एक चोटिल कंगारू के कार्टून से दर्शाया, इसपर कुछ पंक्तियाँ लिखी थीं-

“Here lie the Ashes of ’56,
skittled by Laker for next to nix.
Never forgotten,
sorry you thought our wicket rotten”
Signed “Love from the groundstaff.”

दूसरी पंक्ति ऑस्ट्रेलियाई टीम और प्रेस की शिकायतों पर व्यंग्य कर रही थी, जो ये कह रहे थे कि इंग्लिश स्पिनर्स की सहायता के लिए पिच से घास साफ कर दी गई है। ऑस्ट्रेलियाई टीम की शिकायत गलत नहीं थी। ESPN Cricinfo पर छपे Martin Johnson के लेख “When Laker skittked the Aussies” के अनुसार इस मैच के कुछ वर्ष बाद ओल्ड ट्रैफर्ड के क्यूरेटर Bert Flack ने यह भेद खोल दिया कि मैच की पूर्व संध्या पर इंग्लिश टीम के चेयरमैन ऑफ सेलेक्टर्स Gubby Allen ने उनसे पिच से घास हटा देने को कहा था। Flack ने बताया कि तब उन्होंने इसका विरोध करते हुए कहा था कि घास के नीचे की सतह मजबूत नहीं है, घास हटाने से ये बिखर जाएगी, और मैच तीन दिन भी नहीं चलेगा। पर अंत में उन्होंने Gubby Allen की बात मानकर घास हटा दी थी। Flack का संदेह ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी की पहली ही गेंद पर सत्य सिद्ध हो गया था जब इंग्लिश तेज गेंदबाज Bryan Statham की गेंद ने इतना उछाल लिया कि वो विकेटकीपर Godfrey Evans के ऊपर से निकल गई थी। यहीं से अनुमान लग गया था कि इस पिच पर आगे क्या होना है।

(चित्र Getty Images से – Jim Laker की गेंद पर बोल्ड होते Neil Harvey)

When Don’s last test ton ensured the first 400+ run chase in test cricket.

27 जुलाई 1948. आज से 72 वर्ष पूर्व टेस्ट क्रिकेट इतिहास के महानतम बल्लेबाज सर डॉनल्ड जॉर्ज ब्रैडमैन ने अपने करियर का 29वाँ और अंतिम शतक Headingley में लगाया था। डॉन के इस अंतिम शतक से टेस्ट क्रिकेट में पहली बार 400+ का स्कोर चेज हुआ।

ऑस्ट्रेलियाई अखबार “The Sydney Morning Herald” में 20 मार्च 2019 को Malcolm Knox का एक लेख छपा “How Australia became the Invincibles at wild, woolly Headingley”. इस पोस्ट का Content उसी लेख से लिया गया है।

सर डॉनल्ड ब्रैडमैन के नेतृत्व वाली ऑस्ट्रेलिया ने 1948 में इंग्लैंड का दौरा किया। ट्रेंटब्रिज में 8 विकेट से और लॉर्ड्स में 409 रनों से ऑस्ट्रेलिया ने विजय प्राप्त की थी। ओल्ड ट्रैफर्ड मैनचेस्टर में तीसरा टेस्ट ड्रॉ रहा था। यहाँ वर्षा ने ऑस्ट्रेलिया को पराजय से बचा लिया था। ब्रैडमैन ऑस्ट्रेलिया से यह सोचकर आए थे कि वे अपनी टीम को इंग्लैंड दौरे पर अजेय रहकर लौटने वाली पहली टीम बनाएंगे, जो न तो टेस्ट मैच हारेगी और न ही काउंटी टीमों से हुए मैच। ओल्ड ट्रैफर्ड में हुए ड्रॉ ने उन्हें शंका में डाल दिया था।

Headingley में चौथा टेस्ट जीतकर ऑस्ट्रेलिया इस सीरीज में 3-0 की अजेय बढ़त ले सकती थी, पर यह इतना आसान नहीं होने वाला था। इंग्लैंड की टीम ने चौथे दिन की संध्या तक 8 विकेट पर 362 रन बना लिए थे और उनकी लीड 403 की हो चुकी थी, इंग्लिश कप्तान सुबह बिना एक गेंद खेले भी पारी घोषित कर सकते थे पर इंग्लिश टीम ने दो ओवर और खेले क्योंकि कप्तान एक नियम का लाभ उठाना चाहते थे। दिन के खेल से पूर्व एक बार पिच पर रोलर चलाया जाता था और दोनों टीमों की इनिंग के बीच एक बार और। इंग्लैंड ने सुबह “Heavy Roller” लिया, दो ओवर खेल कर उन्होंने जब पारी घोषित की तब नियम के अनुसार एक और बार पिच पर Roller चला। इंग्लैंड के कप्तान Norman Yardley की सोच थी कि ऐसा करने से पाँचवें दिन की पिच अधिक टूटेगी और बिखरेगी और उनके स्पिनर ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों के लिए अधिक समस्या खड़ी करेंगे।

27 जुलाई 1948, यानी टेस्ट मैच के अंतिम दिन ऑस्ट्रेलिया को चौथी पारी में लक्ष्य मिला था 404 रनों का। टेस्ट क्रिकेट इतिहास में इससे पूर्व कभी 350 से अधिक रन चेज नहीं हुए थे। वो भी मात्र एक दिन में, 344 मिनट के खेल में।

डॉन ब्रैडमैन ने अपनी डायरी में लिखा है कि उस दिन उन्होंने अपने दोनों ओपनरों Lindsay Hassett और Arthur Morris से कहा, “Come on boys, we can win this match, we can do it,”

ऑस्ट्रेलिया का पहला विकेट ओपनिंग बल्लेबाज Lindsay Hassett के रूप में 57 रनों के स्कोर पर गिर गया। दूसरे ओपनर Arthur Morris इस सीरीज में सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज रहे थे। Morris का साथ देने आए इस मैदान पर अपना अंतिम टेस्ट खेल रहे 40 वर्षीय डॉन ब्रैडमैन, यह डॉन का 51वाँ टेस्ट मैच था।

पहले सत्र में इंग्लैंड के फील्डरों ने डॉन के दो कैच ड्रॉप किए। विकेटकीपर Godfrey Evans स्टम्पिंग के दो अवसर भी चूके। इस सत्र में ऑस्ट्रेलिया ने 121 रन बनाए और अगले दो सत्र में 283 रनों की आवश्यकता थी। ब्रैडमैन और मॉरिस घड़ी की सुई का ध्यान रखे हुए थे। इंग्लिश कॉमेंटेटर John Arlott ने कहा, ‘like well-planned trains to their time-runs schedule”

सुबह दो बार Heavy Roller लिए जाने से पिच बिखरी थी और काफी टर्न हो रही थी पर इंग्लैंड के पास कोई विशेषज्ञ Wrist स्पिनर नहीं था। कप्तान Norman Yardley ने Len Hutton और Dennis Compton की पार्ट टाइम स्पिन पर आवश्यकता से अधिक विश्वास कर लिया था। Arthur Morris ने लंच के बाद Compton की गेंदों पर कुछ अधिक ही निर्दयता दिखानी आरम्भ की। इंग्लैंड के महान गेंदबाजों में से एक सर एलेक बेडसर ने कहा, “Ate the unhappiest lunch of my career”

Lunch और Tea के बीच वाले सत्र में ऑस्ट्रेलिया का एक भी विकेट नहीं गिरा और 178 रन बने। ब्रैडमैन और मॉरिस दोनों के शतक पूरे हो चुके थे। ऑस्ट्रेलियाई लेजेंड Bill O’Reilly ने कहा कि यदि इंग्लैंड ने पहले घण्टे में ब्रैडमैन को आउट करने के अवसर न गँवाए होते तो चायकाल तक इंग्लैंड की टीम यह टेस्ट जीत जाती। अंतिम सत्र में ऑस्ट्रेलिया को 105 मिनट में 112 रनों की आवश्यकता थी।

When the impossible became inevitable- 404 रनों का असंभव माना जा रहा लक्ष्य अब कुछ ही समय में पूरा होने वाला था। ब्रैडमैन और आर्थर मॉरिस दूसरे विकेट के लिए 301 रनों की साझेदारी कर चुके थे। जब मॉरिस 182 रन के व्यक्तिगत स्कोर पर आउट हुए तब ऑस्ट्रेलिया का स्कोर था 358/2. जीत के लिए 50 से भी कम रनों की आवश्यकता रह गई थी। इंग्लिश कॉमेंटेटर John Arlott ने कहा, “Can’t believe it is possible for a cricket brain to conceive of any innings which could be greater.”

डॉन ब्रैडमैन और नील हार्वी ने खेल समाप्ति के तय समय से 15 मिनट पूर्व ऑस्ट्रेलिया को विजय दिला दी, हार्वी ने चौका लगाकर यह मैच समाप्त किया। डॉन ने 173 रन बनाए और अंत तक टिके रहे। इस रन चेज के बाद डॉन ब्रैडमैन की इस टीम को “Invincibles” कहा गया। सबको विश्वास हो गया था कि यह ऑस्ट्रेलियाई टीम किसी भी स्थिति से मैच जीत सकती है।

Headingley सर डॉन ब्रैडमैन के प्रिय क्रिकेट मैदानों में से एक रहा। यहाँ उन्होंने 192.60 की औसत से 963 रन बनाए हैं। उनके दोनों तिहरे शतक (334 और 304) इसी मैदान पर आए और करियर का अंतिम शतक भी।

अगला टेस्ट London के ओवल में था, जो उनका 52वाँ और अंतिम टेस्ट था। वे अबतक 6996 रन बना चुके थे। यहाँ सर डॉन को टेस्ट क्रिकेट में 100 की औसत के साथ रिटायर होने के लिए मात्र 4 रन बनाने थे, पर वे लेग स्पिनर Eric Hollies की गेंद पर शून्य पर आउट हो गए और उनकी औसत 99.94 रही।

नील हार्वी को बाद में पश्चाताप होता रहा कि क्यों उन्होंने Headingley में विजयी चौका लगाया, यदि वह डॉन को यह विजयी चौका लगाने देते तो टेस्ट क्रिकेट में डॉन 100 की एवरेज से रिटायर हुए होते, पर हार्वी की भी क्या गलती, उन्हें कैसे पता होता कि ओवल टेस्ट में डॉन 4 रन भी नहीं बना पाएंगे।

Birthday Special: Sir Garry Sobers’ sublime 254 at the MCG.

दक्षिण अफ्रीका पर प्रतिबंध लगने के कारण उनका ऑस्ट्रेलिया दौरा कैंसिल हो गया और उसी की भरपाई के लिए वर्ल्ड XI की टीम 5 टेस्ट मैच खेलने आई थी। इस टीम के कप्तान थे गैरी सोबर्स। ब्रिस्बेन में पहला टेस्ट ड्रॉ रहा था और दूसरे टेस्ट में पर्थ में डेनिस लिली की शानदार गेंदबाजी के दम पर ऑस्ट्रेलिया ने पारी से विजय से प्राप्त की थी। पहली पारी में डेनिस लिली ने 29 रन देकर 8 विकेट लिए थे और वर्ल्ड XI को 14.1 ओवर में 59 पर ऑल आउट कर दिया था। गैरी सोबर्स लिली की बाउंसर पर शून्य पर वापस लौट गए थे।

(इस पोस्ट का शेष कन्टेन्ट http://www.cricketcountry.com पर छपे Arunabha Sengupta के लेख से लिया गया है)

3rd Test MCG: तीसरा टेस्ट मेलबर्न में खेला जा रहा था। वर्ल्ड XI की पहली पारी मात्र 184 पर सिमट गई। डेनिस लिली की बाउंसर ने गैरी सोबर्स को उनकी पहली ही गेंद पर पवेलियन भेज दिया था। लिली ने 5 विकेट लिए। शाम तक ऑस्ट्रेलिया ने 1 विकेट पर 58 रन बना लिए।

उस मैच के ऑस्ट्रेलियाई कप्तान इयन चैपल बताते हैं कि दिन के खेल की समाप्ति के बाद जब ऑस्ट्रेलियाई टीम रात को बोतल खोलकर बैठी थी। उसी समय सोबर्स ऑस्ट्रेलियाई ड्रेसिंग रूम में गए, उन्होंने इयन चैपल से कहा, “You’ve got a boy here called Lillee. Every time I have gone in, all I have got from him is bouncers. I want you to tell him that I can bowl quick too, and I can bowl bouncers. So watch out for me when he comes in”

अगले दिन ऑस्ट्रेलियाई नम्बर 11 डेनिस लिली बल्लेबाजी पर आए तो सोबर्स ने भी उन्हें बाउंसर फेंकी और कुछ देर उनकी ओर देखते रहे मानो कह रहे हों, “I can bowl bouncers too.” अगली गेंद पर लिली ने बड़ा शॉट लगाने का प्रयास किया और मिड ऑफ पर कैच हो गए। सोबर्स ने कुल 3 विकेट लिए और ऑस्ट्रेलिया की पारी 285 पर समाप्त हुई, 101 रन की लीड के साथ। दूसरे दिन की शाम वर्ल्ड XI का स्कोर था 42 रन पर एक विकेट। सोबर्स फिर ऑस्ट्रेलियाई ड्रेसिंग रूम में गए और इस बार इयन चैपल ने उनसे बताया कि डेनिस लिली ने कहा है, “मैंने उस लिटिल बास्टर्ड (सोबर्स) को अभी तेज गेंद डाली कहाँ है, अगली पारी में दिखाउंगा तेज गेंद क्या होती है।” सोबर्स ने चैपल को उत्तर दिया, “Well, he’s got the ball, I’ve got the bat. I’ve never met the one who can scare me before, and I don’t think that I will.”

5 जनवरी 1972: अगले दिन वर्ल्ड XI की दूसरी पारी में नम्बर 5 पर खेलने आए गैरी सोबर्स। इस समय स्कोर था 146 पर 3. वर्ल्ड XI के पास मात्र 45 रन की लीड थी और मैच अभी ऑस्ट्रेलिया के पक्ष में झुका हुआ था। सोबर्स ने एक शक्तिशाली स्क्वेयर कट से शुरुआत की। इस शॉट ने इस पारी की टोन सेट कर दी। जब भी गेंद शॉर्ट और ऑफ स्टम्प के बाहर रही उन्होंने कट किया और जब गेंद आगे रही तो ड्राइव। जब गेंद उनके शरीर की ओर आई तो उन्होंने बैकफुट पर ज़ाक़र पुल और हुक किया। स्पिनर्स के विरुद्ध कदमों का बेहतरीन प्रयोग। डेनिस लिली, बॉब मैसी और टेरी जेनर के रूप में ऑस्ट्रेलिया के पास एक मजबूत गेंदबाजी आक्रमण था, इन सभी की गेंदों को सोबर्स ने MCG के हर क्षेत्र में भेजा।

स्टेडियम में उपस्थित हर व्यक्ति को पता था कि इस प्रकार का स्ट्रोक प्ले विश्व क्रिकेट में अन्य खिलाड़ियों की क्षमता और सोच से ऊपर का था और मात्र एक ही बल्लेबाज ऐसा कर सकने में सक्षम था।

लिली ने कहा कि उन्होंने ऑफ साइड में स्क्वेयर क्षेत्र में तीन फील्डर लगा रखे थे पर सोबर्स के ड्राइव और कट उनके बीच से निकल रहे थे।

दूसरी नई गेंद आते ही लिली ने एक तेज यॉर्कर ऑफ स्टंप पर फेंकी, सोबर्स ने इसे स्क्वेयर ड्राइव कर दिया और गेंद चौके के लिए गई। ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी John Benaud ने कहा, कोई अन्य खिलाड़ी होता तो इस गेंद पर बोल्ड हो जाता पर इस आदमी के पास बल्ले का फेस खोलकर स्क्वेयर की ओर खेलने का भी समय था। तीसरे दिन की शाम तक सोबर्स 139 पर नॉट आउट थे और वर्ल्ड XI का स्कोर था 344/7.

शाम को इयन चैपल वर्ल्ड XI के ड्रेसिंग रूम में गए, वे और सोबर्स दोनों अपनी अपनी ड्रिंक के साथ कोने में बैठे थे। सोबर्स ने कहा, “Prue (सोबर्स की पत्नी) मुझे छोड़कर चली गई है.” चैपल ने कहा इस बात का गुस्सा हमारी टीम पर क्यों निकाल रहे हो, कहो तो फोन करूँ।

पीटर पॉलक के साथ सोबर्स ने 8वें विकेट के लिए 186 रन जोड़े। तीसरी नई गेंद के साथ आए लिली पर सोबर्स ने ऐसा आक्रमण किया कि कप्तान चैपल ने कुछ ही ओवर में लिली को गेंदबाजी से हटा दिया।

सोबर्स ने इस पारी में 254 रन बनाए। सोबर्स जब भी किसी Milestone (100, 150, 200, 250) पर पहुँचे तब तब दर्शकों ने खड़े होकर तालियाँ बजाईं। जब सोबर्स आउट हुए तो ऑस्ट्रेलिया के सभी खिलाड़ी उनके पवेलियन में प्रवेश करने तक ताली बजाते रहे।

World XI की पारी 514 पर समाप्त हुई और ऑस्ट्रेलिया को 414 रनों का लक्ष्य दिया ऑस्ट्रेलिया की टीम 317 पर ऑल आउट जो गई और World XI ने यह मैच 96 रनों से जीता।

डेनिस लिली ने मैच के बाद गैरी सोबर्स से कहा, “I’ve heard about you and now I’ve got my tail cut properly.”

सर डॉनल्ड ब्रैडमैन दर्शक दीर्घा में बैठे थे, जिन्होंने कई महान पारियाँ खेली थीं और न जाने कितनी महान पारियाँ देखीं थीं। सर डॉन ने गैरी सोबर्स की इस पारी को ऑस्ट्रेलिया में खेली गई सर्वश्रेष्ठ पारी बताया।

गैरी सोबर्स ने टेस्ट क्रिकेट में 93 मैचों में 57.78 की औसत से 8032 रन बनाए, 26 शतक के साथ। वे टेस्ट क्रिकेट में 8 हज़ार रन पूरे करने वाले पहले बल्लेबाज बने। उनका सर्वाधिक स्कोर 365 नाबाद रहा, यह उस समय विश्व रिकॉर्ड था जो 36 साल तक उनके पास रहा। ब्रायन लारा ने 1994 में 375 बनाकर यह रिकॉर्ड तोड़ा। सोबर्स ने 235 विकेट भी लिए। वे लेफ्ट आर्म स्पिन, चाइनामेन और तेज गेंदबाजी सब कर लेते थे। सोबर्स मैदान में किसी भी स्थान पर उच्च कोटि की फील्डिंग कर सकते थे। सर्कल में फील्डिंग हो या स्लिप में, स्लिप कैचिंग से लेकर बाउंड्री से शानदार थ्रो फेंकना, वे ये सब कर सकते थे।

सर गैरी सोबर्स को जन्मदिन की शुभकामनाएँ।

The Ashes 2005-06: Greatest Ashes Series of all Time.Part-5

History: 1882 में ऑस्ट्रेलिया एक मात्र टेस्ट खेलने इंग्लैंड आई थी। London के ओवल में हो रहा यह टेस्ट एक Low Scoring मैच था। 29 अगस्त 1882, मैच के दूसरे ही दिन इंग्लैंड को विजय के लिए 85 रनों का लक्ष्य मिला था, एक समय 51/2 से इंग्लैंड 77 रन पर ऑल आउट हो गई। यह इंग्लैंड की अपनी जमीन पर पहली पराजय थी और ऑस्ट्रेलिया की इंग्लैंड में इंग्लैंड पर पहली विजय। अगले दिन “The Sporting Times” ने इंग्लिश क्रिकेट की Obituary छाप दी। लिखा गया था इंग्लिश क्रिकेट की मृत्यु हो चुकी है और उसका अंतिम संस्कार करके उसकी “राख” (Ashes) ऑस्ट्रेलिया ले जाई जाएगी। “The body will be cremated and the ashes taken to Australia” इस हेडलाइन ने स्पोर्ट्स देखने वालों को आकर्षित किया।

History: इंग्लैंड की टीम ऐशेज़ 1950 में 1-4 से हार गई थी। ऐशेज़ 1953 में पहले चारों टेस्ट ड्रॉ हुए थे और पाँचवाँ टेस्ट ओवल में जीतकर इंग्लैंड ने ऐशेज़ ट्रॉफी पुनः अपने नाम कर ली।

The Oval- 2005-06: London में लॉर्ड्स से आरम्भ हुई ऐशेज़ 2005-06 की यह यात्रा बर्मिंघम, मैनचेस्टर और नॉटिंघम होते हुए एक बार फिर London आ पहुँची थी, इस बार मैदान था ओवल। इंग्लिश Summer का अंतिम टेस्ट परंपरागत रूप से ओवल में ही खेला जाता रहा है। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद ऐशेज़ इतिहास में संभवत सबसे अधिक प्रतीक्षित टेस्ट मैच था। पिछले चारों टेस्ट मैचों की भाँति यहाँ भी स्टेडियम हाउसफुल।

इंग्लैंड की टीम में मात्र एक परिवर्तन था। साइमन जोन्स की इंजरी के कारण पॉल कॉलिंगवुड को उनका पहला ऐशेज़ टेस्ट खेलने का अवसर मिला। ऑस्ट्रेलियाई टीम में भी एक ही परिवर्तन था, ग्लेन मक्ग्रा की वापसी हो गई थी।

माइकल वॉन ने लगातार तीसरा टॉस जीता और बल्लेबाजी का निर्णय किया। विकेट बिल्कुल फ्लैट। मार्कस ट्रेसकॉथिक ने लगातार चौथे टेस्ट मैच में इंग्लैंड को ठोस शुरुआत दी। साढ़े चार की रन रेट के साथ खेलते हुए ट्रेसकॉथिक और ऐन्ड्रू स्ट्राउस की जोड़ी ने पहले विकेट के लिए 17.3 ओवर में 82 रन जोड़ लिए। शेन वॉर्न की गेंद पर मैथ्यू हेडेन ने पहली स्लिप में एक अद्भुत कैच लिया और ट्रेसकॉथिक को वापस भेजा।

इंग्लिश कप्तान माइकल वॉन मात्र 11 रन बनाकर एक शॉर्ट पिच गेंद को सीधे शॉर्ट मिडविकेट के हाथ में मार बैठे। इयन बेल को वॉर्न ने 0 पर आउट किया और केविन पीटरसन शेन वॉर्न की एक फ्लाइटेड गेंद पर बीट हुए, गेंद उनके बैट के पास से निकलती हुई ऑफ स्टम्प पर लगी। इंग्लैंड का स्कोर 33.3 ओवर में 4 विकेट पर 131 रन। पहला घण्टा इंग्लैंड के नाम रहने के बाद ऑस्ट्रेलिया ने पिछले 16 ओवरों में 49 रन पर 4 विकेट निकाल लिए थे।

Strauss and Flintoff stitching a partnership: ओपनर ऐन्ड्रू स्ट्राउस अभी भी डटे हुए थे और अपना अर्धशतक पूरा कर चुके थे। नम्बर 6 पर उनका साथ देने आए थे सीरीज में इंग्लैंड के हीरो ऐन्ड्रू फ्रेडी फ्लिंटॉफ। फ्लिंटॉफ के बल्ले से बैकफुट कवर ड्राइव, स्ट्रेट ड्राइव और कवर ड्राइव निकलने लगे। चायकाल तक का समय इन दोनों ने अब और कोई विकेट गिरे बिना निकाल दिया। इंग्लैंड का स्कोर 55 ओवर में 213/4.

तीसरे सत्र के दूसरे ही ओवर (57वें) में ब्रेट ली की गेंद पर पॉइंट क्षेत्र में चौका लगाकर स्ट्राउस 97 पर जा पहुँचे। 58वें ओवर में फ्लिंटॉफ ने शेन वॉर्न को तीन चौके लगातार लगाए। पहले दो शक्तिशाली स्वीप शॉट और तीसरा गेंदबाज के पास से स्ट्रेट ड्राइव। दूसरे चौके से ही फ्लिंटॉफ का अर्धशतक भी पूरा हो गया था और साझेदारी के 100 रन भी। अगले ओवर (59वें) में ब्रेट ली की दूसरी गेंद पर ऑन ड्राइव से चौका लगाकर ऐन्ड्रू स्ट्राउस ने सीरीज का दूसरा और अभीतक मात्र 19 मैचों के अपने टेस्ट करियर का 7वाँ शतक पूरा कर लिया।

71वें ओवर में ग्लेन मक्ग्रा की पहली गेंद पर फ्रेडी फ्लिंटॉफ पहली स्लिप में शेन वॉर्न द्वारा कैच कर लिए गए और इस प्रकार फ्लिंटॉफ और स्ट्राउस के बीच 5वें विकेट लिए 143 रनों की साझेदारी का अंत हुआ। फ्लिंटॉफ ने 72 रन बनाए। इस साझेदारी ने इंग्लैंड को इस अंतिम टेस्ट में संकट से निकालकर मजबूत स्थिति में पहुँचा दिया था। थोड़ी देर बाद 80वें ओवर में 129 रन की पारी खेलने के बाद ऐन्ड्रू स्ट्राउस इस पारी में शेन वॉर्न के 5वें शिकार बने। इस पारी में उन्होंने 17 चौके लगाए।

दिन का खेल समाप्त होने तक इंग्लैंड ने 88 ओवर में 7 विकेट पर 319 रन बना लिए थे।

इस फ्लैट पिच पर भी पहले दिन शेन वॉर्न ने 34 ओवर गेंदबाजी करके 5 विकेट निकाल लिए। अन्य गेंदबाज़ो से उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पाया। अगले दिन 106वें ओवर में शेन वॉर्न ने इंग्लैंड की पहली पारी 373 पर समाप्त कर दी।

Australian Response:
मैथ्यू हेडेन ने अभी तक इस सीरीज में एक भी अर्धशतक नहीं लगाया था। उन्हें टीम से बाहर करने की माँग उठने लगी थी। 5वें टेस्ट से पहले उन्होंने एक अभ्यास मैच में Assex काउंटी के विरुद्ध 150 रन बनाए। जस्टिन लैंगर की फॉर्म ठीक थी पर उनके बल्ले से भी कोई शतकीय पारी नहीं आई थी। इस Must Win मैच में दोनों ओपनरों का चलना बहुत आवश्यक था। इस मैच में अच्छा प्रदर्शन करने का दृढ़संकल्प करके उतरे मैथ्यू हेडेन ने बहुत धीमी शुरुआत की। छठे ओवर में लैंगर के बल्ले से ऑस्ट्रेलियाई पारी का पहला चौका आया। क्लासिक कवर ड्राइव, अच्छा फुटवर्क, सीधा बल्ला और गेंद बल्ले के बीचों बीच। 19वें ओवर में माइकल वॉन ने Ashley Giles को गेंद सौंपी। ओवर की दूसरी ही गेंद पर जस्टिन लैंगर ने कदमों का प्रयोग किया और जाइल्स की गेंद को Long On बाउंड्री के ऊपर से 6 रनों के लिए भेज दिया। चौथी गेंद पर लैंगर ने मिडविकेट के ऊपर से एक बार फिर जाइल्स को छक्का लगा दिया। इसी ओवर में उन्होंने अपने 50 रन भी पूरे कर लिए। हेडेन इस समय मात्र 13 पर थे। लैंगर के बल्ले से रन आते रहे और हेडेन दूसरे छोर पर मजबूती से खड़े रहे। दूसरे दिन चायकाल तक ऑस्ट्रेलिया का स्कोर 33 ओवर में 112/0. इसके बाद वर्षा ने दूसरे दिन खेल आगे नहीं बढ़ने दिया।

Justin Langer goes past Sir Donald Bradman with a fantastic hundred: वर्षा के कारण आउटफील्ड गीला रहा और तीसरे दिन के खेल का आरम्भ भी देरी से हुआ। 7 ओवर का ही खेल हुआ था और वर्षा एक बार फिर पधारी। वर्षा के बाद खेल पुनः आरम्भ हुआ और उसके बाद 137 गेंदों में हेडेन ने इस सीरीज में अपना पहला अर्धशतक पूरा किया। तीसरे दिन लंच तक का स्कोर 47 ओवर में 157/0, जस्टिन लैंगर 91 पर आ चुके थे। लंच के बाद लैंगर ने स्टीफन हार्मिसन की गेंद पर चौका लगाया और इस सीरीज में अपना पहला और अपने करियर का 22वाँ शतक पूरा किया। इसी के साथ वे करियर में 6996 रनों तक जा पहुँचे। यह टेस्ट क्रिकेट के महानतम बल्लेबाज सर डॉनल्ड ब्रैडमैन के टेस्ट क्रिकेट में बनाए कुल रनों की संख्या थी, जो ऑस्ट्रेलियन क्रिकेट में बहुत पवित्र आँकड़ा है।

अगले चौके के साथ लैंगर इस संख्या से आगे निकले और 7000 टेस्ट रनों तक जा पहुँचे। लैंगर और हेडेन के बीच 185 रन जोड़े जा चुके थे और यह इस सीरीज में किसी भी विकेट के लिए अबतक की सबसे बड़ी साझेदारी थी।

Light Meters are out:
दो गेंद बाद लैंगर के बल्ले का किनारा लगकर गेंद स्टाम्प पर लगी और 53वें ओवर में इंग्लैंड को पहली सफलता मिली। जस्टिन लैंगर जाते हुए बहुत निराश इसलिए दिख रहे थे क्योंकि इसी ओवर में बूंदाबांदी हो रही थी और अंपायरों ने खेल रोका नहीं था। जले पर नमक इस बात से छिड़का गया और कि उनके आउट होते ही वर्षा के कारण खेल रोक दिया गया बिना एक और गेंद फेंके। चायकाल तक खेल रुका रहा और दिन के खेल में 30 ओवर का नुकसान हो चुका था।

Hayden finally gets his ton: चायकाल के बाद हेडेन और पॉन्टिंग ने पारी को आगे बढाना आरम्भ किया। 65वें ओवर में हेडेन ने फ्लिंटॉफ को चौका लगाकर इस सीरीज में अपना पहला और अपने करियर का 21वाँ शतक पूरा कर लिया। यह पारी मैथ्यू हेडेन के बल्लेबाजी के स्वभाव के बिल्कुल विपरीत थी, हेडेन आक्रामक बल्लेबाजी के लिए जाने जाते थे, पर यहाँ उन्होंने अपनी बल्लेबाजी का दूसरा पक्ष भी दिखाया। इसी पारी में हेडेन ने अपने टेस्ट करियर के 6000 रन भी पूरे किए।

स्कोर 265/1. हेडेन 106 और पॉन्टिंग 35 पर खेल रहे थे। अभी आधा मैच शेष था और ऑस्ट्रेलिया इंग्लैंड के पहली पारी के स्कोर से मात्र 108 रन पीछे, 9 विकेट शेष। यहाँ 73वें ओवर में फ्लिंटॉफ की गेंद पर रिकी पॉन्टिंग के बल्ले का बाहरी किनारा लेकर गेंद गली में खड़े स्ट्राउस के हाथ में चली गई। यह ऑस्ट्रेलिया के लिए बहुत बड़ा झटका था। इससे आगे तीसरे दिन के खेल में मात्र 6 ओवर और हुए और अंपायरों ने लाइट मीटर बाहर निकाल लिया और खराब रौशनी के कारण दिन का खेल समाप्त। दिन में तीन बार वर्षा के कारण खेल बाधित हुआ था पर Crowd में कमी नहीं आई। स्कोर 77.4 ओवर में 277/2. मैच एक बोरिंग ड्रॉ की ओर बढ़ रहा था।

चौथे दिन डेमियन मार्टिन फिर जल्दी आउट हुए। 93वें ओवर में फ्लिंटॉफ की गेंद हेडेन के पैड पर लगी और अंपायर की रूडी कोर्टजन की उंगली सुपर स्लो मोशन में ऊपर उठ गई। 303 गेंदों की इस मैराथन पारी में हेडेन ने 138 रन बनाए थे। स्कोर 324/4. फ्लिंटॉफ ने अपने अगले ओवर में कैटिच को भी आउट करके स्कोर 325/5 कर दिया। ऑस्ट्रेलिया के लिए इसके बाद कोई और साझेदारी नहीं बन पाई और पूरी टीम 367 रनों पर ऑल आउट हो गई। इंग्लैंड को 6 रन की बढ़त। अंतिम 5 विकेट मात्र 11 रनों के भीतर गिर गए। बल्ले से 72 रन बनाने वाले ऐन्ड्रू फ्लिंटॉफ ने 34 ओवरों में 78 रन पर 5 विकेट लिए।

England’s 2nd Innings: इंग्लैंड को सीरीज जीतने के लिए मात्र ड्रॉ चाहिए था जबकि ऑस्ट्रेलिया को यह सीरीज ड्रॉ करने के लिए मैच जीतना था। ऑस्ट्रेलिया के लिए यह काम एक ही व्यक्ति कर सकता था… शेन वॉर्न। 3 ओवर के खेल के बाद रोशनी फिर खराब हुई और दोनों अंपायरों ने रिकी पॉन्टिंग से कहा कि यदि ब्रेट ली गेंदबाजी करेंगे तो गेंद दिखाई नहीं पड़ेगी और खेल रोकना होगा। पॉन्टिंग ने शेन वॉर्न को गेंद दे दी। वॉर्न ने अपने पहले ओवर की चौथी गेंद पर ही ऐन्ड्रू स्ट्राउस का विकेट ले लिया। स्कोर 1 विकेट पर 2 रन। कप्तान माइकल वॉन और ट्रेसकॉथिक ने 13.3 ओवर में स्कोर को 34 तक पहुँचाया और खेल दिन का खेल खराब रोशनी के कारण जल्दी समाप्त हो गया। इस दौरान मार्कस ट्रेसकॉथिक इस सीरीज में कुल 400 रन पूरे करने वाले पहले बल्लेबाजे बने।

Last day of Ashes 2005-06: सीरीज का अंतिम दिन, 98 ओवर का खेल शेष और मौसम सही रहने का अनुमान। माइकल वॉन आज अच्छी फॉर्म में दिख रहे थे, उन्होंने ट्रेसकॉथिक के साथ मिलकर स्कोर को 22 ओवर में 67 पर पहुँचा दिया था। ग्लेन मक्ग्रा पारी का 23वाँ ओवर लेकर आए। वॉन के बल्ले का बाहरी किनारा लगा और गिलक्रिस्ट के डाइव लगाकर एक शानदार कैच पकड़ा। वॉन ने 45 रन बनाए। अगली गेंद ने इयन बल्ले के बल्ले का किनारा लिया और फर्स्ट स्लिप में शेन वॉर्न ने कैच पकड़ा। इंग्लैंड की लीड 73, 7 विकेट शेष, दिन के खेल में 88 ओवर शेष। यह मैच अभी भी किसी ओर जा सकता था।

Kevin Pietersen- The Hero England needed: 5वें दिन की सुबह ग्लेन मक्ग्रा के स्पेल के बाद इंग्लैंड का स्कोर था 67/3. लीड 73 रन. मैच में 80 से अधिक ओवर शेष। ऑस्ट्रेलिया वापसी कर चुकी थी। नम्बर 5 पर बल्लेबाजी करने आए इंग्लैंड के नए सुपरस्टार केविन पीटरसन। लॉर्ड्स में डेब्यु करने वाले केविन पीटरसन पर एक बार फिर इंग्लैंड को संकट से निकालने का दायित्व था। पिछले दो टेस्ट में उनके बल्ले से कुछ खास प्रदर्शन नहीं हुआ था और “पारंपरिक” टेस्ट मैच बैटिंग के वकीलों ने उनपर प्रश्न उठाने आरम्भ शुरु कर दिए थे। फंकी हेयरस्टाइल, बॉडी पर टैटू वाले खिलाड़ी अकारण भी ऐसे निशाने पर रहते ही हैं। (आप भारतीय क्रिकेट में भी ऐसे उदाहरण देख चुके होंगे।)

आज केविन पीटरसन के टेस्ट करियर का अविस्मरणीय दिन होने वाला था।”Glenn McGrath on a hattrick.” खतरनाक बाउंसर, पीटरसन ने रोकने का प्रयास किया, गेंद बल्ले के पास से निकलते हुए कंधे से लगी और सेकेंड स्लिप में रिकी पॉन्टिंग ने उसे पकड़ा। जोरदार अपील पर नॉट आउट। थोड़ी देर बाद मक्ग्रा को पुल शॉट लगाकर KP ने अपना पहला चौका प्राप्त किया। ब्रेट ली की एक सीधी रही गेंद को KP ने पूरी शक्ति और कौशल के साथ गेंदबाज के पास से स्ट्रेट ड्राइव कर दिया। इसी ओवर में शेन वॉर्न ने पहली स्लिप में KP को वापस भेजने का एक “स्ट्रेट फॉरवर्ड” अवसर छोड़ दिया। इस ड्रॉप कैच का प्रभाव मैच, सीरीज और इतिहास तीनों पर पड़ना था।

शेन वॉर्न की गेंद पर KP ने घुटने पर बैठकर एक स्लॉग स्वीप खेली और गेंद मिडविकेट सीमारेखा के ऊपर से 6 रन के लिए चली गई, इसी के साथ इंग्लैंड के 100 रन पूरे हो गए। अगली गेंद पर भी वही शॉट और वही परिणाम। शेन वॉर्न ने एक खतरनाक लेग स्पिन हुई गेंद से मार्कस ट्रेसकॉथिक को आउट किया और इंग्लैंड का स्कोर हो गया 109/4.

ओवल के दर्शकों ने मैदान में आ रहे ऐन्ड्रू “फ्रेडी” फ्लिंटॉफ का तालियों की गड़गड़ाहट से स्वागत किया। फ्रेडी बहुत देर नहीं टिके और शेन वॉर्न को रिटर्न कैच देकर लौट गए स्कोर 126/5. ब्रेट ली की एक बाउंसर खेलने के प्रयास में गेंद KP के दस्ताने पर लगी और स्लिप में खड़े फील्डरों के ऊपर से निकल गई। केविन पीटरसन इस गेंद से बचने के क्रम में नीचे गिर पड़े। लंच तक स्कोर 39 ओवर में 127/5. लीड 133. सीरीज अभी भी जिंदा थी।

KP goes into BEASTMODE and defies conventional wisdom: लंच के बाद वाले स्पेल में ब्रेट ली बहुत तेज गेंदबाजी कर रहे थे। 95 मील प्रति घण्टा। उन्होंने KP को बाउंसर मारना जारी रखा। KP ने भी आक्रमण करने का विचार कर लिया था। 41वें ओवर में ब्रेट ली के बाउंसर को उन्होंने हुक शॉट द्वारा फाइन लेग सीमारेखा के पार 6 रन के लिए भेज दिया। ब्रेट ली के अगले ओवर (43वें) में KP ने ब्रेट ली के ओवर से 16 रन लिए, एक पुल शॉट डीप बैकवर्ड स्क्वेयर लेग के ऊपर से 6 रन और अगली दो गेंदों पर दो चौके, दूसरा चौका जिस गेंद पर आया उसकी गति थी 96.7 मील प्रति घण्टा। इंग्लैंड के डेढ़ सौ रन भी पूरे हो गए थे। इंग्लैंड को यह सीरीज जीतने के लिए मात्र ड्रॉ चाहिए था, यह विशेषज्ञ बल्लेबाजों की अंतिम जोड़ी थी, दूसरे छोर पर खड़े कॉलिंगवुड इस सीरीज में अपना पहला और करियर का तीसरा टेस्ट मैच खेल रहे थे, ऐसी स्थिति केविन पीटरसन का यह रवैया पारंपरिक क्रिकेट के विरुद्ध ही माना जाता।

Baseball Shot: 45वें ओवर में ब्रेट ली की एक शॉर्ट ऑफ लेंथ गेंद को केविन पीटरसन ने फ्लैट बैट से अंपायर के पास से खेल दिया चार रन के लिए, ये बिल्कुल बेसबॉल स्टाइल शॉट था। केविन पीटरसन पूरी तरह से One Day मोड में थे और क्रिकेट की मार्शल आर्ट्स का प्रदर्शन कर रहे थे।

Maiden Test Hundred for Kevin Pietersen: 57वें ओवर में बॉलिंग पर लाए गए शॉन टेट को KP ने दो चौके लगाए और इसी ओवर में 90s में पहुँचे। कॉलिंगवुड और गेरेन्ट जोन्स आउट हो चुके थे और KP के साथ थे Ashley Giles. लीड 205 रन और दिन में खेल में 55 ओवर शेष। ऑस्ट्रेलिया के पास अभी अवसर था अगले तीन विकेट जल्दी लेकर रन चेज का प्रयास करने का। केविन पीटरसन ऐसा होने देने वाले नहीं थे। 63वें ओवर में शॉन टेट की गेंद कर आक्रामक कवर ड्राइव से KP ने एक और चौका प्राप्त किया और इसी के साथ 124 गेंदों में उनके करियर का पहला टेस्ट शतक भी पूरा हुआ। मार्क निकलस ने कहा, “This is a fantastic batsman. A batsman who’s giving England another dimension altogether and Michael Vaughan knows it more than anybody. He’s an ‘in your face’ cricketer and he’s been right in the face of the Australians.”

पाँचवें दिन के चायकाल की घोषणा कर दी गई। स्कोर 63 ओवर में 221/7, लीड 227 और दिन के खेल में ओवर शेष। ऑस्ट्रेलिया के पास अब भी एक Outside Chance था। 71वें ओवर में ब्रेट ली की शॉर्ट गेंद को पीटरसन ने डीप बैकवर्ड स्क्वेयर लेग के ऊपर से दर्शक दीर्घा में भेज दिया, इसी के साथ इंग्लैंड की लीड ढाई सौ के पार। अगले ओवर में शेन वॉर्न की एक फ्लाईटेड गेंद को एक टांग बाहर निकालकर वॉर्न के सिर के ऊपर से ऊपर से उठा दिया 6 रनों के लिए। ड्रिंक्स ब्रेक के बाद पीटरसन ने 79वें ओवर में मक्ग्रा को भी दो चौके लगाए और 80वें ओवर में शेन वॉर्न की गेंद पर Long On के ऊपर से पीटरसन ने अपनी पारी का 7वाँ छक्का जड़ा और अगली गेंद पर कट शॉट से आए चौके से केविन पीटरसन के 150 रन पूरे हो गए। ज्योफ्री बॉयकॉट ने कहा “England under severe pressure and he’s played the innings of his life.”

158 रन (187 गेंदों में) बनाकर पीटरसन मक्ग्रा की गेंद पर बोल्ड हुए, इस समय तक वे मैच, सीरीज और इतिहास बदल चुके थे। मैच ड्रॉ कराने के लिए खेली गई इस पारी में 15 चौके और 7 छक्के थे। पीटरसन को Oval के दर्शकों से “Standing Ovation” मिली। इंग्लैंड का स्कोर था 308 पर 8, बढ़त 314 रन, मैच में मात्र कुछ ओवर शेष और ऑस्ट्रेलिया इस मैच से पूरी तरह बाहर। Ashley Giles ने भी 59 रन बनाए और इंग्लैंड 91.3 ओवर में 335 पर ऑल आउट। पहली पारी में 6 विकेट लेने वाले शेन वॉर्न ने दूसरी पारी में भी 6 विकेट लिए।

Regaining THE ASHES:
दिन के खेल में 5 ओवर शेष ऑस्ट्रेलिया के सामने 342 रनों का लक्ष्य। ऑस्ट्रेलिया का बल्लेबाजी के लिए उतरना एक औपचारिकता मात्र थी, पहली चार गेंद के बाद ही ये औपचारिकता समाप्त हो गई। खराब रौशनी के कारण खेल रुक गया और इसके बाद शुरु नहीं हुआ। अंपायर रूडी कोर्टजन ने जैसे ही खेल की समाप्ति की घोषणा के तौर पर गिल्लियाँ हटा दीं वैसे ही स्टेडियम में उपस्थित दर्शकों के शोर ने पूरे शहर को गुंजायमान कर दिया। “England have regained the Ashes” Michael Atherton के स्वर में प्रसन्नता और संतुष्टि दोनों थी। अपने 100 टेस्ट से अधिक के करियर में उन्होंने कभी इंग्लैंड को ऐशेज़ जीतते नहीं देखा था, आज कॉमेंट्री बॉक्स से देख रहे थे।

Michael Vaughan and his mates enter history books: ऐशेज़ ट्रॉफी 18 वर्ष की लंबी प्रतीक्षा के बाद पुनः इंग्लैंड के नाम हो चुकी थी। माइकल वॉन और उनके साथियों का नाम इंग्लिश क्रिकेट के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखा जाने वाला था। माइकल वॉन ने प्रेजेंटेशन सेरेमनी में कहा, “We all aged a few years.”

End of Richie Benaud’s “Marvellous” commentary stint in England: क्रिकेट के महानतम कॉमेंटेटर Richie Benaud का भी एक कॉमेंटेटर के रूप में यह अंतिम इंग्लैंड दौरा था, वे Channel 4 के लिए कॉमेंट्री कर रहे थे। मैच के दौरान प्रशंसक उनके नाम और चित्र वाले पोस्टर लिए मैदान में दिखाई दिए। उन्होंने लगभग 42 वर्ष तक England में कॉमेंट्री की थी, वे क्रिकेट को निःशुल्क टेलिविजन पर दिखाए जाने के पक्षधर थे। इंग्लैंड में क्रिकेट के प्रसारण का अधिकार Channel 4 से British Sky Broadcasting के पास चला गया था। इस कारण Oval Test Richie Benaud का इंग्लैंड में अंतिम मैच था।

Series Heroes for England:
सीरीज में 40 की औसत से 402 रन बनाने वाले और 27 की औसत से 24 विकेट लेने वाले फ्रेडी फ्लिंटॉफ मैन ऑफ द सीरीज चुने गए। उन्हें Compton-Miller मेडल से सम्मानित किया गया। [Dennis Compton और Keith Miller इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के दो महान खिलाड़ी] फ्लिंटॉफ का यह प्रदर्शन 1981-82 ऐशेज़ सीरीज में सर इयन बॉथम के प्रदर्शन की याद दिला रहा था।

ओवल टेस्ट में 158 रनों की पारी से ऑस्ट्रेलिया के सीरीज बराबर करने के अवसर समाप्त करने वाले केविन पीटरसन मैन ऑफ द मैच हुए और अपनी डेब्यु सीरीज में ही इंग्लैंड के ही नहीं बल्कि सीरीज के टॉप स्कोरर रहे। पीटरसन ने सीरीज में 52 की औसत से 473 रन बनाए।

मार्कस ट्रेसकॉथिक ने लॉर्ड्स टेस्ट के बाद सीरीज के प्रत्येक मैच में इंग्लैंड को बहुत ठोस और आक्रामक शुरुआत दी, वे 431 रन बनाकर सीरीज में सर्वाधिक रन बनाने में दूसरे स्थान पर रहे। ओवल टेस्ट न खेलने वाले साइमन जोन्स ने 21 की 🔥🔥 औसत से 18 विकेट लिए और इंग्लैंड की ओर से सर्वाधिक विकेट लेने में दूसरे स्थान पर रहे। साइमन जोन्स की बड़ी विशेषता यह भी रही कि उन्होंने कई बार ऑस्ट्रेलिया की मजबूत साझेदारियाँ तोड़ी और इंग्लैंड के लिए द्वार खोले। ऐन्ड्रू स्ट्राउस ने सीरीज में 2 शतक लगाकर 393 रन बनाए और सीरीज के 5वें टॉप स्कोरर रहे। स्ट्राउस सीरीज में 1 से अधिक शतक लगाने वाले अकेले बल्लेबाज रहे। 5 में से 4 टॉप स्कोरर इंग्लैंड के थे, यह दर्शा रहा था कि इंग्लिश बल्लेबाजों ने सीरीज को किस प्रकार डॉमिनेट किया था।

Shane Warne: वॉर्न ने सीरीज के 5 मैचों में 40 विकेट लिए, 19.93 रन प्रति विकेट। वे ऑस्ट्रेलिया के अकेले ऐसे खिलाड़ी रहे जिसने इंग्लैंड को हर मैच में परेशान किया, गेंद से भी और बल्ले से भी। वॉर्न ने 9 पारियों में 249 रन भी बनाए और कई अच्छी पारियाँ खेलीं जब ऑस्ट्रेलिया संकट में थी। शेन वॉर्न को ऑस्ट्रेलियाई टीम का मैन ऑफ द सीरीज चुना गया। यह शेन वॉर्न का अंतिम इंग्लैंड दौरा था, उन्होंने इसे अविस्मरणीय बनाया और अपने इस प्रदर्शन को अपना सर्वश्रेष्ठ व्यक्तिगत प्रदर्शन माना पर टीम को विजय न दिला पाने का उन्हें दुःख रहा। शेन वॉर्न ने एक इंटरव्यू में कहा था कि यदि ऑस्ट्रेलिया यह ऐशेज़ जीत जाती तो वे रिटायरमेंट ले लेते पर नहीं जीती इसलिए उन्होंने रिटायरमेंट का विचार टाल दिया।

गिलक्रिस्ट, लैंगर, हेडेन, मक्ग्रा, वॉर्न, ली, मार्टिन का यह अंतिम इंग्लैंड दौरा था। वे यहाँ विजय नहीं प्राप्त कर सके थे पर 15 महीने बाद जब इंग्लैंड अगली ऐशेज़ सीरीज के लिए ऑस्ट्रेलिया पहुँची तो इन सभी के पास अवसर था हिसाब बराबर करने के लिए। इस अगली ऐशेज़ को Revenge Series कहा जा रहा था। हम इसकी कहानी भी आप लोगों के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।

Ashes 2005-06 पर Cricket Tales की यह सीरीज यहीं समाप्त हुई। हम अपने सभी पाठकों का धन्यवाद करते हैं।

The Ashes 2005-06: Greatest Ashes Series of all Time.Part-4

Look, the mighty Aussies are celebrating a draw with England: इंग्लैंड के खिलाड़ियों और मीडिया ने ऑस्ट्रेलिया को Old Trafford में टेस्ट ड्रॉ कराकर जश्न मनाते देखा था। अंतिम गेंद के बाद कप्तान माइकल वॉन ने अपने साथियों को एकत्रित करके कहा, “देखो ऑस्ट्रेलियाई ड्रेसिंग रूम की बालकनी की ओर, वे इंग्लैंड के विरुद्ध एक टेस्ट ड्रॉ करके कितने हर्षित हो रहे हैं, क्या तुमने पहले कभी उन्हें ऐसा करते देखा है ?”

Is Cricket the new football? : इस ऐशेज सीरीज ने इंग्लैंड में क्रिकेट की लोकप्रियता को एक नवीन शिखर पर पहुँचा दिया था। एजबेस्टन में 2 रन से इंग्लैंड की विजय ने पूरे देश को क्रिकेटमय कर दिया था। ओल्ड ट्रैफर्ड टेस्ट के अंतिम दिन स्टेडियम तो हाउसफुल था ही, बाहर कम से कम 20 हज़ार लोग खड़े थे, जो स्टेडियम में प्रवेश नहीं पा सके थे। कई किलोमीटर तक सड़कों पर लोग जमा थे। लगभग 8 मिलियन लोगों ने ओल्ड ट्रैफर्ड टेस्ट के अंतिम दिन का खेल टेलीविजन पर देखा। पब, क्लब, प्ले-ग्राउंड हर जगह ऐशेज़ क्रिकेट पर चर्चा हो रही थी। समाचारपत्रों में, पत्रिकाओं में, न्यूज़ चैनलों पर क्रिकेट का खेल छाया हुआ था, हेडलाइन बन रही थीं, “Is Cricket the new football?”

ऐडम गिलक्रिस्ट की बल्लेबाजी के साथ साथ विकेटकीपिंग पर भी प्रश्न उठ रहे थे। ओल्ड ट्रैफर्ड में माइकल वॉन का कैच छोड़ना बहुत भारी पड़ा था ऑस्ट्रेलिया को। माइकल वॉन से जबरदस्त मार पड़ने के बाद जेसन गिलेस्पी का बाहर होना लगभग निश्चित माना जा रहा था। गिलेस्पी के स्थान पर 22 वर्षीय तेज गेंदबाज शॉन टेट को स्थान मिला। ग्लेन मक्ग्रा की कोहनी चोटिल होने के कारण माइकल कैस्प्रोविच को एक बार फिर ऐशेज़ टेस्ट खेलने का अवसर प्राप्त हुआ।

Game Day- 25 अगस्त 2005: ऐशेज़ क्रिकेट का कारवाँ बढ़ता हुआ रॉबिन हुड के शहर नॉटिंघम आ पहुँचा था। जहाँ ट्रेंट ब्रिज में सीरीज का चौथा टेस्ट खेला जाना था। इंग्लैंड की टीम लगातार चौथा टेस्ट बिना किसी बदलाव के खेल रही थी। यह बात सबको पता थी कि ट्रेंटब्रिज में गेंद स्विंग होती है, आकाश में बादल भी थे, वर्षा की संभावनाएँ भी। विकेट अच्छी थी, अतः माइकल वॉन ने टॉस जीतकर एक बार फिर बैटिंग करने का निर्णय लिया। तीसरे और चौथे टेस्ट के बीच 9 दिनों का ब्रेक था, अतः खिलाड़ियों को थकान से उबरने के लिए पर्याप्त समय मिला था।

History: ऑस्ट्रेलिया ने पिछली बार 1988 में कराची में पाकिस्तान के विरुद्ध फॉलोऑन खेला था, उसके पश्चात यह ऑस्ट्रेलिया का 191वाँ टेस्ट मैच था। उस समय ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड की वर्तमान टीमों में से किसी भी खिलाड़ी का करियर आरम्भ नहीं हुआ था।

England’s 1st Innings: ब्रेट ली और माइकल कैस्प्रोविच ने ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजी का आरम्भ किया। गेंद स्विंग हो रही थी। मार्कस ट्रेसकॉथिक पहली 20 गेंदों में एक रन भी नहीं बना पाए थे। 5वें ओवर में ब्रेट ली की गेंद पर स्क्वेयर लेग पर चौके के साथ ट्रेसकॉथिक ने खाता खोला। रिकी पॉन्टिंग ने दिन के 11वें ओवर के लिए शॉन टेट को गेंद सौंपी। टेट के दूसरे ओवर में ही मार्कस ट्रेसकॉथिक ने लगातार दो चौके लगाकर टेस्ट क्रिकेट में टेट का स्वागत किया।

It’s Edgbaston all over again: 21वें ओवर में ब्रेट ली की गेंद पर रन लेकर ट्रेसकॉथिक ने 77 गेंदों में अपने पचास रन पूरे किए और इसी ओवर में ब्रेट ली की हाफ वॉली पर चौका लगाकर ट्रेसकॉथिक ने इंग्लैंड के 100 रन और स्ट्राउस के साथ शतकीय साझेदारी भी पूरी की। यह सीरीज में दोनों के बीच दूसरी शतकीय साझेदारी थी। 109 रन की साझेदारी के बाद अगले ओवर में शेन वॉर्न की गेंद को स्वीप करने के प्रयास में गेंद ऐन्ड्रू स्ट्राउस के बल्ले से लगकर उनके बूट पर लगी और फर्स्ट स्लिप में खड़े मैथ्यू हेडेन के हाथों में चली गई। 25वें ओवर में अराउंड द विकेट से फेंकी गई ब्रेट ली की एक गेंद ट्रेसकॉथिक के बल्ले का अंदरूनी किनारा लेकर स्टंप्स पर लगी, ब्रेट ली सेलिब्रेट करने के लिए अपने साथियों की ओर दौड़ते रहे, उन्हें यह आभास नहीं था कि अंपायर अलीम डार ने नो-बॉल का इशारा किया है। ओल्ड ट्रैफर्ड में माइकल वॉन भी ग्लेन मक्ग्रा की गेंद पर बोल्ड हुए थे और वह भी नो-बॉल निकली थी, वॉन उस समय पचास पर भी नहीं थे और इसका लाभ उठाकर उन्होंने 166 बनाए। ट्रेंट ब्रिज में ब्रेट ली की नो-बॉल कितनी भारी पड़नी थी, यह पता लगना शेष था। अगली गेंद फिर से नो बॉल, इसपर ट्रेसकॉथिक का पुल और चौका।

ये पूरा सेशन एजबेस्टन टेस्ट की याद दिला रहा था। नम्बर 3 पर आए इंग्लिश कप्तान माइकल वॉन ने पहली ही गेंद पर शेन वॉर्न को चौका लगाकर खाता खोला और लंच के ठीक पहले वाले ओवर में ब्रेट ली को एक सुंदर स्ट्रेट ड्राइव लगाई। लंच तक इंग्लैंड का स्कोर हो गया 27 ओवर में 129/1. (एजबेस्टन में पहले दिन लंच के समय स्कोर था 27 ओवर में 132/1।) ऑस्ट्रेलिया ने इस सत्र में 18 नो बॉल फेंकी थी। लंच के बाद तेज वर्षा हुई और खेल देरी से आरम्भ हुआ। आरम्भ होने के 3 ओवर बाद पुनः वर्षा और चायकाल तक खेल अवरुद्ध।

जब खेल आरम्भ हुआ तो गेंद स्विंग हो रही थी। पारी का 31वाँ और शॉन टेट का 7वाँ ओवर, पाँचवीं गेंद, तेज इनस्विंगर, मार्कस ट्रेसकॉथिक का बल्ला गेंद के आसपास भी नहीं और क्लीन बोल्ड। 22 वर्षीय शॉन टेट का पहला टेस्ट विकेट। मार्कस ट्रेसकॉथिक 65 रन बनाकर वापस लौट रहे थे।

Number 300 for Adam Gilchrist: 35वें ओवर की पहली गेंद, शॉन टेट की सुंदर आउटस्विंग, गेंद इयन बेल के बल्ले का बाहरी किनारा ले गई और ऐडम गिलक्रिस्ट ने डाइव लगाकर एक अच्छा कैच पकड़ा। यह विकेट के पीछे ऐडम गिलक्रिस्ट का 300वाँ शिकार था।

Michael Vaughan turning it on: इंग्लैंड की पारी की रन रेट 4 से ऊपर थी और कप्तान माइकल वॉन एक बार फिर अच्छे टच में दिख रहे थे। 45वें ओवर में उन्होंने ब्रेट ली को एक दर्शनीय कवर ड्राइव लगाई। फ्रंट फुट आगे निकला, गेंद की पिच तक गए और गेंद बल्ले के स्वीट स्पॉट से लगी। किसी भी फील्डर को हिलने की भी आवश्यकता नहीं। “Michael Vaughan at his best.” वॉन ने ब्रेट ली को 49वें ओवर में दो और चौके लगाए और अपना अर्धशतक पूरा किया।

Skipper gets skipper: ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पॉन्टिंग किसी भी तरह विकेट चाहते थे। उन्होंने स्वयं को आक्रमण पर लगाया। उनके सारे गेंदबाज चार से ऊपर की रेट से रन दे रहे थे। पॉन्टिंग ने अपने पहले चार ओवर में मात्र चार रन दिए। पाँचवें ओवर की दूसरी गेंद, शॉर्ट ऑफ गुड लेंथ, हल्की सी बाहर निकलती हुई, वॉन ने इसे खेलने का प्रयास किया, गेंद बल्ले के किनारे को स्पर्श करती हुई ऐडम गिलक्रिस्ट के पास चली गई। रिकी पॉन्टिंग ने 6 वर्ष के बाद टेस्ट क्रिकेट में कोई विकेट लिया था और यह बहुमूल्य विकेट था। इंग्लिश कप्तान शानदार फॉर्म में थे और एक बार फिर शतक की ओर बढ़ते दिख रहे थे।

It’s that man again: नम्बर 6 पर बल्लेबाजी के लिए आए स्टार ऑलराउंडर ऐन्ड्रू “फ्रेडी” फ्लिंटॉफ। पॉन्टिंग के उसी ओवर में चौके के साथ उन्होंने खाता खोला। एजबेस्टन टेस्ट में यही जोड़ी थी जिसने पाँचवे विकेट की शतकीय साझेदारी से ऑस्ट्रेलिया को पस्त कर दिया था। केविन पीटरसन और ऐन्ड्रू फ्लिंटॉफ। पहले दिन का खेल समाप्त होने पर स्कोर था 60 ओवर में 228/4.

दूसरे दिन का आरम्भ फ्लिंटॉफ ने दिन की पहली ही गेंद पर ब्रेट ली को चौका लगाकर किया। ब्रेट ली ने दिन के 5वें ओवर में एक Away Swinger द्वारा पीटरसन को गिलक्रिस्ट के हाथों कैच कराया और 19 ओवर के परिश्रम के बाद मैच में अपना पहला विकेट प्राप्त किया। स्कोर 241/5.

विकेटकीपर गेरेन्ट जोन्स ने इस ऐशेज़ सीरीज में बल्ले से कोई विशेष प्रदर्शन नहीं किया था। उनका उच्चतम स्कोर था 42 जो ओल्ड ट्रैफर्ड में आया था। ऐन्ड्रू फ्लिंटॉफ के बल्ले से चौके आते जा रहे थे। 76वें ओवर में शेन वॉर्न को चौका लगाकर फ्लिंटॉफ ने साझेदारी को 50 के पार कर दिया।

80वें ओवर में शेन वॉर्न की अंतिम गेंद पर फ्रेडी फ्लिंटॉफ ने एक बार फिर टांग रखकर स्क्वेयर लेग के ऊपर से छक्का लगाया और अपना अर्धशतक पूरा किया। 81वें ओवर में रिकी पॉन्टिंग ने दूसरी नई गेंद ली और अपने दोनों सबसे तेज गेंदबाजों को आक्रमण पर लगा दिया। रेडक्लिफ रोड छोर से शॉन टेट और पवेलियन छोर से ब्रेट ली। 83वें ओवर में फ्लिंटॉफ ने टेट को तीन चौके लगाए, पहला शॉट मिडविकेट के ऊपर से पुल, दूसरा कवर ड्राइव और तीसरा एक और शक्तिशाली पुल शॉट। दूसरे दिन लंच तक इंग्लैंड का स्कोर 89 ओवर में 344/5.

ओवर संख्या 93. माइकल कैस्प्रोविच को फ्रेडी फ्लिंटॉफ के बल्ले से तीन चौके पड़े। पहला स्क्वेयर लेग की दिशा में पुल, दूसरा कवर-पॉइंट से ऊपर से कट और तीसरा फुलर लेंथ की गेंद पर कवर ड्राइव। इसी के साथ फ्लिंटॉफ 90s में आ पहुँचे। विकेटकीपर बल्लेबाज गेरेन्ट जोन्स बहुत महत्वपूर्ण सहायक भूमिका निभा रहे थे। अगले ओवर में उन्होंने भी अपना अर्धशतक पूरा कर लिया।

101वें ओवर में शेन वॉर्न की गेंद पर सिंगल के साथ ऐन्ड्रू फ्लिंटॉफ ने अपने करियर का 5वाँ और ऐशेज़ में अपना पहला शतक पूरा कर लिया था। यह शतक 121 गेंदों में आया था।

तीन ओवर बाद शॉन टेट की एक तेज इनस्विंगर को आड़े बल्ले से खेलने के प्रयास में फ्लिंटॉफ के बल्ले का गेंद से संपर्क नहीं हुआ, गेंद पैड पर लगी और अंपायर स्टीव बकनर की उंगली उठ गई। फ्लिंटॉफ ने विकेटकीपर जोन्स के साथ पाँचवें विकेट के लिए 177 रन जोड़े थे। 14 चौके और 1 छक्का लगाकर लौट रहे फ्लिंटॉफ ने अपनी टीम को इस अति महत्वपूर्ण टेस्ट मैच में मजबूत स्थिति में पहुँचाने के साथ साथ दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया था। डेब्यु कर रहे शॉन टेट का यह तीसरा विकेट था।

इंग्लैंड का स्कोर हो चुका था 450/6 और गेरेन्ट जोन्स भी अपने शतक की बढ़ रहे थे। 113वें ओवर में कैस्प्रोविच की गेंद जोन्स के बल्ले का किनारा लेकर उठ गई। कैस्प्रोविच ने डाइव लगाकर कैच पकड़ा और 30 ओवर की गेंदबाजी के बाद इस मैच में अपना पहला विकेट प्राप्त किया। शेन वॉर्न ने आखिरी तीनों विकेट जल्दी निकाल लिए और इंग्लैंड की पहली पारी 123.1 ओवर में 477 पर समाप्त हो गई। यह लगातार तीसरा टेस्ट मैच था, जहाँ इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए चार सौ से अधिक स्कोर बना दिया था। दूसरे दिन के चायकाल की घोषणा कर दी गई। ऑस्ट्रेलिया के चार प्रमुख गेंदबाजों में से तीन ने 100 से अधिक रन दिए। शॉन टेट ने 97 रन देकर 3 विकेट लिए और शेन वॉर्न ने 102 रन देकर 4.

Australia’s 1st Innings: ऑस्ट्रेलिया ने ट्रेंटबिज में स्विंग का लाभ भले न उठाया पर इंग्लैंड के मैथ्यू हॉगार्ड स्विंग के बहुत अच्छे गेंदबाज थे। पारी के दसवें ओवर में हॉगार्ड की इनस्विंगर को मैथ्यू हेडेन पढ़ नहीं पाए, गेंद ऑफ स्टम्प की लाइन में पड़कर पैड पर लगी और अंपायर अलीम डार की उंगली उठ गई। ज्योफ्री बॉयकॉट ने कहा, “It’s as plumb as you’ll get. Missing off. Missing leg. That’s knocking middle out half way up.” हॉक आई ने बॉयकॉट की बात की पुष्टि कर दी।

साइमन जोन्स ने ओल्ड ट्रैफर्ड टेस्ट की पहली पारी में रिकी पॉन्टिंग को मात्र 7 रन पर आउट किया था। ट्रेंट ब्रिज में भी उन्होंने यही किया। 11वें ओवर में जोन्स की इनस्विंगर ऑफ स्टंप की लाइन में पॉन्टिंग के फ्रंट फुट पर घुटने के नीचे लगी। स्टीव बकनर के मन में कोई संदेह नहीं। हॉक आई से स्पष्ट हुआ कि यह गेंद भी मिडिल स्टंप पर लग रही थी। रिकी पॉन्टिंग मात्र 1 रन पर वापस। स्कोर 21/2.

What can go wrong will go wrong: डेमियन मार्टिन की किस्मत खराब चल रही थी। एक तो उनकी फॉर्म खराब थी, ऊपर से अंपायर भी उनके विरुद्ध मोर्चा खोले दिखाई पड़ रहे थे। ओल्ड ट्रैफर्ड टेस्ट की दूसरी पारी में अंपायर स्टीव बकनर ने पहले बल्ले का अंदरूनी किनारा लगने के बाद भी उन्हें LBW आउट दे दिया। ट्रेंट ब्रिज में अलीम डार ने भी उनके साथ यही किया। 12वें ओवर में मैथ्यू हॉगार्ड की पहली गेंद बल्ले का अंदरूनी किनारे से लगकर मार्टिन के पैड पर लगी पर अंपायर ने उन्हें LBW दे दिया। 10 गेंदों में ऑस्ट्रेलिया अपने तीन महत्वपूर्ण विकेट गँवा चुकी थी। 22/3.

नम्बर 5 पर आए माइकल क्लार्क ने जस्टिन लैंगर के साथ साझेदारी बनानी आरम्भ की। दोनों ने 36 रन जोड़े, 20वें ओवर में हॉगार्ड की गेंद लैंगर के ग्लब्स से लगकर हवा में उठी, फॉरवर्ड शॉर्ट लेग पर खड़े इयन बेल ने डाइव लगाकर कैच पकड़ा। माइकल क्लार्क ने कुछ अच्छे शॉट खेले, साइमन कैटिच के साथ अगले 11 ओवर में उन्होंने 41 रन जोड़े। 31वें ओवर में स्टीफन हार्मिसन की एक गेंद पड़ने के बाद अंदर आई और क्लार्क के पैड पर लगी। यह इस पारी का चौथा LBW था। स्कोर 99/4 और दूसरे दिन का खेल समाप्त।

Is it Adam Gilchrist’s day ?
33वें ओवर में ऐडम गिलक्रिस्ट ने फ्लिंटॉफ को एक कवर ड्राइव से चौका लगाया, 36वें ओवर में उन्होंने हॉगार्ड की पहली गेंद को मिडविकेट के ऊपर से उठा दिया। ये एकदिवसीय क्रिकेट वाला स्लॉग था। अगली गेंद को गिलक्रिस्ट ने हॉगार्ड के सिर के ऊपर से उठा दिया 6 रन के लिए। गिलक्रिस्ट अच्छे टच में दिखाई दे रहे थे और अपना नैचुरल गेम खेल रहे थे। प्रश्न था, क्या आज उनका दिन होगा ? 38वें ओवर में हॉगार्ड की गेंद को पॉइंट बाउंड्री के बाहर भेजकर गिलक्रिस्ट ने 5वें विकेट की साझेदारी के 50 रन पूरे कर दिए। साइमन कैटिच के बल्ले से भी पिछले 3 ओवरों में 4 चौके आ चुके थे।

40वें ओवर में कप्तान माइकल वॉन ने साइमन जोन्स को गेंद सौंपी। तीसरे दिन यह जोन्स का पहला ओवर था। ओवर की दूसरी गेंद,ऑफ स्टंप के काफी बाहर, फुलर लेंथ गेंद, कैटिच का शॉट गली में खड़े ऐन्ड्रू स्ट्राउस के हाथों में चला गया। साइमन जोन्स के ओवर की तीसरी गेंद, पटकी हुई गेंद, शेन वॉर्न ने इसे रोकने का प्रयास किया गेंद बल्ले का किनारा लेकर हवा में उठ गई और कवर में खड़े इयन बेल के हाथों में चली गई। शेन वॉर्न ने पिछले मैच की पहली पारी में 90 रन बनाकर ऑस्ट्रेलिया को फॉलोऑन के संकट से उबारा था, पर ट्रेंट ब्रिज में वह ऐसा नहीं कर सके और पहली गेंद पर ही वापस लौट गए। “Simon Jones on a hattrick.” चार स्लिप्स, एक गली और कई फील्डर बल्ले के आसपास। ब्रेट ली स्ट्राइक पर। ब्रेट ली ने इस गेंद को सुरक्षात्मक ढंग से बल्ले के बीचो बीच रोका।

Unbelievable catch from Andrew Strauss: महान क्रिकेट फोटोग्रफर Patrick Eager ने अपने कई दशक लम्बे करियर में कई ऐतिहासिक घटनाओं को अपने कैमरे में कैद किया है। उनका लिया हुआ है एक चित्र है ऐन्ड्रू स्ट्राउस द्वारा अपनी बाईं ओर फुल लेंथ डाइव लगाकर एक हाथ से लिया गया ऐडम गिलक्रिस्ट का कैच। किसी भी कैच का इतना बढ़िया चित्र बहुत कम ही लिया गया होगा। इस चित्र में फ्लिंटॉफ अपने फॉलो थ्रू में हैं, गिलक्रिस्ट गेंद की ओर देख रहे हैं, ऐन्ड्रू स्ट्राउस किसी पक्षी की भाँति हवा में हैं और गेंद उनके बाएँ पंजे में। ऐसा लग रहा था मानो स्ट्राउस गेंद से कह रहे हों, “Where the hell are you going?” 43वें ओवर में ऐन्ड्रू फ्लिंटॉफ ने अराउंड द विकेट से शॉर्ट ऑफ गुडलेंथ गेंद की। गिलक्रिस्ट ने बल्ला लगाया, बाहरी किनारा लगा और गेंद दूसरी स्लिप में खड़े ऐन्ड्रू स्ट्राउस के बाईं ओर गई। कॉमेंट्री बॉक्स से आवाज़ आई, “Oh what a catch ! What a catch from Andrew Strauss. Full length diving away to his left and he’s plucked one out of the air to get rid of Adam Gilchrist.”

Brett Lee goes berserk: पिछले दो टेस्ट मैचों की अंतिम पारियों में सूझ बूझ से बल्लेबाजी करने वाले ब्रेट ली ने अब सम्भलकर खेलने का विचार छोड़ दिया था। अगले ओवर में साइमन जोन्स की गेंद पर माइकल कैस्प्रोविच के बोल्ड होने के बाद ब्रेट ली ने “Long Handle” के प्रयोग का निर्णय ले लिया। इसी ओवर में जोन्स को एक आकर्षक ऑन ड्राइव लगाया, ये बिल्कुल “Stand and deliver” शॉट था। अगले ओवर (45th) में स्टीफन हार्मिसन की गुडलेंथ से उठी गेंद पर ब्रेट ली ने बहुत तेज बल्ला चलाया, गेंद बाउंड्री के बाहर बहुत दूर जाकर गिरी। इसके अगले ओवर (46th) में साइमन जोन्स की गेंद को ब्रेट ली ने Long On के ऊपर से एक और छक्के के लिए उठा दिया। एक बार फिर “Stand and Deliver.” “He is a strong boy.”

49वें ओवर में स्टीफन हार्मिसन की गेंद पर आया इस मैच का सबसे लंबा छक्का। लेंथ बॉल, ब्रेट ली ने अपनी समस्त शक्ति लगाकर इस गेंद को मिडविकेट के ऊपर से उठा दिया, इस बार गेंद स्टेडियम के सबसे ऊँचे स्टैंड को पार करती हुई सड़क पर। “That’s gone many a mile.” जोन्स के अगले ओवर में ब्रेट ली थर्डमैन बाउंड्री पर कैच हुए और इसी के साथ ऑस्ट्रेलिया 218 पर ऑल आउट हो गई। यह साइमन जोन्स का इस पारी में पाँचवाँ विकेट था। उन्होंने ओल्ड ट्रैफर्ड में भी पहली पारी में 6 विकेट लिए थे। ब्रेट ली ने 44 गेंदों में 47 रन बनाकर इस पारी में ऑस्ट्रेलिया के टॉप स्कोरर रहे।

Warnie needs some sleep:
इंग्लैंड को 259 रनों की बढ़त मिली थी। माइकल वॉन ने ऑस्ट्रेलिया को फॉलोऑन खेलने को कहा। इतने भारी अंतर से पिछड़ने के बाद फॉलोऑन खेलना, यह पढ़कर आपको क्या याद आता है? जी हाँ, 2001, ईडन गार्डन्स, कोलकाता टेस्ट। शेन वॉर्न के मन में भी कुछ ऐसे ही विचार आ रहे थे। उन्होंने अपनी आत्मकथा “No Spin” में लिखा है कि जब वे पहली गेंद पर आउट हुए तो उसकी पिछली रात वो जागते रहे थे अतः आउट होने के बाद सोच रहे थे, काश फॉलोऑन मिल जाए तो कुछ नींद पूरी की जा सके। No Spin में शेन वॉर्न के शब्द हैं, “I just sort of sat there thinking, ‘Please make us follow on, Vaughany, I need some sleep. And if you do, and we bat better second time round, I promise to all Australia I will win us the game.’ He did, he put us back in! The first two things I thought were phew and Kolkata.”

ऑस्ट्रेलिया ने फॉलोऑन खेलना आरम्भ किया। तीसरे दिन लंच तक का समय दोनों ओपनरों ने सुरक्षित निकाल लिया। स्कोर 5 ओवर में 14/0. हेडेन और लैंगर ने 14वें ओवर में पचास रनों की साझेदारी पूरी कर ली पर एक बार फिर मैथ्यू हेडेन सेट होने के बाद लम्बी पारी नहीं खेल सके और 26 रन बनाकर ऐन्ड्रू फ्लिंटॉफ की गेंद पर आउट हो गए। नम्बर तीन पर आए कप्तान रिकी पॉन्टिंग और जस्टिन लैंगर के स्कोर को सौ के पार पहुँचाया। चायकाल से पहले लैंगर ने टेस्ट क्रिकेट में अपना 28वाँ अर्धशतक पूरा किया। यह पारी जस्टिन लैंगर के साहस और संकल्प का उदाहरण थी। फ्रेडी फ्लिंटॉफ की गेंद पर पुल शॉट से लगाए छक्के से दिख रहा था कि रिकी पॉन्टिंग भी अच्छी फॉर्म में हैं। चायकाल तक ऑस्ट्रेलिया का स्कोर था 115/1. चायकाल के बाद माइकल वॉन ने अपने स्पिनर Ashley Giles को गेंद सौंपी। Giles की एक गेंद ऑफ़ स्टम्प के बाहर पिच हुई, लैंगर ने अपना फ्रंट फुट आगे निकालकर इसे डिफेंड करने का प्रयास किया, गेंद में उछाल था, गेंद लैंगर के दस्ताने को स्पर्श करते हुए पैड से लगकर हवा में उठी और फॉरवर्ड शॉर्ट लेग पर खड़े इयन बेल ने अपने बाईं ओर डाइव लगा कर कैच पकड़ लिया। ढाई घण्टे के परिश्रम के बाद जस्टिन लैंगर 111 गेंदों में 65 रन बनाकर लौट रहे थे। ऑस्ट्रेलिया अभी भी इंग्लैंड के पहली पारी के स्कोर से 130 रन पीछे थी।

Controversy regarding substitute fieldsmen: इंग्लैंड ने इस पूरी सीरीज में अबतक “Substitute Rule” का पूरा लाभ उठाया था, जब भी तेज गेंदबाजों को आराम की आवश्यकता होती थी, उनके स्थान पर काउंटी क्रिकेट के स्पेशलिस्ट फील्डर लगा दिए जाते थे। ऑस्ट्रेलिया फॉलोऑन खेल रही थी उस समय स्टीफन हार्मिसन मैदान से बाहर गए और उनके स्थान पर इंग्लैंड में उपलब्ध सर्वश्रेष्ठ फील्डर Trevor Penny को लगाया गया। सीरीज के आरम्भ से ही ऑस्ट्रेलियाई टीम को इस बात से समस्या रही थी और उन्होंने इस विषय में अंपायरों से भी बात की थी।

England’s unlikely Ashes HERO : तीसरे दिन चायकाल के बाद Gary Pratt 12वें खिलाड़ी के रूप में ड्रेसिंग रूम से बाहर आए। साइमन जोन्स की एड़ी में चोट आई थी और वे स्कैन के लिए अस्पताल में थे। Gary Pratt डरहम काउंटी के लिए खेलते थे और आज उनके करियर का सबसे अच्छा दिन होने वाला था। स्कोर 44 ओवर में 155/2. रिकी पॉन्टिंग पूरी तरह सेट थे और 89 गेंदों में 48 रन पर खेल रहे थे। तीसरे टेस्ट में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया को पराजय से बचाया था, यहाँ भी वह ऐसा ही करने की ओर बढ़ते दिख रहे थे।

45वें ओवर में फ्लिंटॉफ की पहली गेंद, डेमियन मार्टिन ने इसे एक्स्ट्रा कवर की ओर खेला और दौड़ पड़े। Gary Pratt ने दौड़कर गेंद को रोका, उठाया और सीधे स्टम्प्स की ओर थ्रो कर दिया। “Direct Hit” इंग्लैंड के खिलाड़ियों ने Pratt को चारों ओर से घेर लिया। रिची बेनो कह रहे थे, “Quick.. quick… Oh… He’s gone, I think. What a pick up and throw.” रिकी पॉन्टिंग समझ चुके के थे कि वे समय पर क्रीज में नहीं पहुँचे पर वे तीसरे अंपायर के निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे थे। उन्होंने पवेलियन लौटने से पूर्व अंपायर अलीम डार से एक बार फिर Substitute Fielder को लेकर शिकायत की। टेलीविजन स्क्रीन पर दिखाई पड़ा कि पवेलियन की सीढ़ियां चढ़ते समय पॉन्टिंग ऊपर देखते हुए बालकनी में खड़े इंग्लैंड के कोच डंकन फ्लेचर को कुछ कहते जा रहे थे। उन्होंने क्या कहा यह सुनाई तो नहीं पड़ा, पर निश्चित रूप से यह “प्रभु स्तुति” नहीं रही होगी। (यूट्यूब लिंक कॉमेंट बॉक्स में है)

पॉन्टिंग ने बाद में क्षमा माँगी। Gary Pratt ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में एक मैच भी नहीं खेला लेकिन वे ऐशेज़ हीरो बन चुके थे। एक घण्टे और रिकी पॉन्टिंग का क्रीज पर टिकना यह मैच और सीरीज दोनों पलट सकता था। मार्क निकलस कह रहे थे, “That is a gigantic moment. Not just in the day or in the game but may be in the series.” स्कोर 155/3.

दो ओवर बाद फ्लिंटॉफ की गेंद डेमियन मार्टिन के बल्ले का बाहरी किनारा लेकर गेंद विकेटकीपर जोन्स के हाथों में चली गई। स्कोर 161 पर 4. नम्बर 5 पर आए ऑस्ट्रेलिया के भविष्य के कप्तान 25 वर्षीय माइकल क्लार्क और नम्बर 6 पर साइमन कैटिच। ऑस्ट्रेलिया को अभी भी इंग्लैंड की पहली पारी की लीड उतारने के लिए 98 रनों की आवश्यकता थी। तीसरे दिन के खेल में 20 से अधिक ओवर शेष थे, क्लार्क और कैटिच ने इस दिन अब और कोई विकेट नहीं गिरने दिया। दिन का खेल समाप्त होने तक स्कोर था 67 ओवर में 222 पर 4. माइकल वॉन ने ड्रेसिंग रूम की ओर लौटते समय ऐशेज़ में इंग्लैंड के नए हीरो Gary Pratt से टीम का नेतृत्व करने को कहा।

Rearguard Action from Clarke and Katich: Day 4, 83वें ओवर में Giles की गेंद पर दो रन लेकर माइकल क्लार्क ने 133 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया। मार्क निकलस ने कहा, “Mere fact that it has taken 133 balls and two and a half hours is a measure of how much he’s put in to the innings. Very important effort.” अगले ओवर में माइकल वॉन ने दूसरी नई गेंद ले ली। क्लार्क और कैटिच ने नई गेंद को सम्भलकर खेला और इंग्लैंड की पहली पारी की लीड समाप्त कर दी। दोनों ने 48 ओवरों में 100 रनों की साझेदारी करके स्कोर को 261/4 तक पहुँचा दिया था। ऑस्ट्रेलिया को दो रन की लीड मिल चुकी थी। लंच में अभी दो ओवर शेष थे। दो युवा बल्लेबाजों के अथक प्रयास के बाद ऑस्ट्रेलिया मैच में वापसी करती दिख रही थी, इंग्लैंड के पास एक गेंदबाज भी कम था, क्योंकि साइमन जोन्स आज फील्ड पर नहीं आए थे। इसके बाद फिर वही हुआ जो सीरीज में अबतक होता आ रहा था। 95वें ओवर में मैथ्यू हॉगार्ड की गुड लेंथ पर गिरी गेंद बाहर निकलती हुई, क्लार्क ने बल्ला लगाया, किनारा लगा और विकेटकीपर गेरेन्ट जोन्स ने कोई गलती नहीं की। माइकल क्लार्क ने पारी में अनेकों बार इस प्रकार की गेंदों को छोड़ा था पर इस बार उनसे गलती हो गई। साढ़े तीन घण्टे बल्लेबाजी और 170 गेंदें खेलने के बाद माइकल क्लार्क 56 रन बनाकर वापस लौट रहे थे।

लंच के बाद ऐडम गिलक्रिस्ट इस सीरीज में एक बाद फिर असफल रहे और मात्र 11 रन बनाकर हॉगार्ड की गेंद पर LBW हो गए ऑस्ट्रेलिया के पास मात्र 18 रन की लीड थी और मात्र 4 विकेट शेष थे। साइमन कैटिच ने 101वें ओवर में हॉगार्ड को चौका लगाकर 160 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया।

Warnie has caught some sleep and he’s looking good: पहली पारी से पहले रात भर जागने वाले शेन वॉर्न की नींद आज पूरी थी, यह उनकी बल्लेबाजी से भी पता लग रहा था। 106वें ओवर में वॉर्न ने फ्लिंटॉफ को 3 चौके लगाए। ऐसे शॉट जो किसी टॉप ऑर्डर बल्लेबाज को लज्जित कर दें। पहला चौका स्क्वेयर लेग की ओर पुल शॉट से आया, दूसरा पॉइंट क्षेत्र में कट शॉट से और तीसरा जो ओवर का सबसे दर्शनीय स्ट्रोक था। इस फुलर लेंथ की गेंद को शेन वॉर्न ने घुटने पर बैठ कर ड्राइव कर दिया कवर बाउंड्री की ओर।

ऑस्ट्रेलिया के 300 रन और 50 रनों की लीड पूरी हो चुकी थी। टेलीविजन स्क्रीन पर एक आश्चर्यजनक आँकड़ा दिखाया जा रहा था। 6ठा विकेट गिरने के बाद इस सीरीज में ऑस्ट्रेलिया के अंतिम चार विकेटों की बल्लेबाजी औसत थी 92.57 रन। ऑस्ट्रेलियाई टीम के समर्थकों को यह आँकड़ा राहत दे रहा होगा।

Was that fing out ?: दो ओवर बाद स्टीफन हार्मिसन की गेंद पर अंपायर अलीम डार ने साइमन कैटिच को LBW घोषित किया। कैटिच इस निर्णय से बहुत असंतुष्ट थे। गेंद लेग स्टम्प की लाइन के बाहर पिच हुई थी और बहुत ऊपर लगी थी। शेन वॉर्न ने No Spin में लिखा है, कैटिच ने लौटते हुए नॉन स्ट्राइकर एंड पर उनसे पूछा था, “Was that fing out?” वॉर्न ने कहा, “‘Er, no, don’t think so mate. It pitched outside leg and was too high.” कैटिच अंपायर की ओर देखकर “F**k you.” कहते हुए लौट गए। 4 घण्टे 20 मिनट की बल्लेबाजी और 183 गेंद खेलकर 59 रन बनाने के बाद इस प्रकार आउट दिए जाने पर क्रोध आना स्वाभाविक है। स्कोर 313/7.

कोई विशेषज्ञ बल्लेबाज शेष न देखकर शेन वॉर्न ने आक्रमण का विचार किया और क्रीज से बाहर निकलकर Ashley Giles को छक्के लगाने आरंभ किए। शेन वॉर्न के छक्के सीमारेखा से काफी दूर ज़ाक़र गिर रहे थे। वॉर्न का दूसरा छक्का टेस्ट क्रिकेट में Giles की गेंदों पर लगा 50वाँ छक्का था। किसी भी इंग्लिश गेंदबाज को इतने छक्के नहीं पड़े थे। ऑस्ट्रेलिया की लीड 80 के पार जा चुकी थी। Giles ने अगली ही गेंद पर वॉर्न को स्टंप कराकर ऑस्ट्रेलिया की उम्मीदों को एक और झटका दे दिया। शेन वॉर्न ने 42 गेंदों पर 45 रन बनाए और सीरीज में एक बार फिर बल्ले से बहुमूल्य योगदान दिया। स्कोर 342/8. ब्रेट ली ने नाबाद 26 रन बनाए और ऑस्ट्रेलिया की पारी 387 पर 128 की लीड के साथ समाप्त हुई। इस पारी में पूरी ऑस्ट्रेलियाई टीम ने कुछ न कुछ योगदान दिया था।

सीरीज में 2-1 की बढ़त लेने के लिए इंग्लैंड को 129 रन बनाने थे। समय की कोई कमी नहीं थी। मार्कस ट्रेसकॉथिक ने आते ही चौके लगाने शुरू कर दिए। पहले पाँच ओवरों के बाद स्कोर 32/0. ट्रेसकॉथिक 21 गेंद में 27.

Shane Warne does it again for Australia:
रनों का प्रवाह थमता न देख रिकी पॉन्टिंग के धैर्य का बांध टूट गया और उन्होंने 6ठे ओवर में ही गेंद टीम के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी को सौंप दी। ज्योफ्री बॉयकॉट ने कहा, “If Shane Warne is coming in now then Ricky Ponting is obviously not happy with his seamers.” अराउंड द विकेट से शेन वॉर्न की पहली गेंद ऑफ स्टंप के बाहर गिरी, ट्रेसकॉथिक ने फॉरवर्ड डिफेंस का प्रयास किया और पैड से लगकर बल्ले का किनारा लेती हुई गेंद सिली पॉइंट पर कप्तान रिकी पॉन्टिंग के हाथों में चली गई। स्कोर 32/1. शेन वॉर्न के अगले ओवर की पहली गेंद ओवर द विकेट से। शेन वॉर्न की चिर परिचित “Drift” के साथ गेंद लेग स्टम्प की लाइन के बाहर पिच हुई, माइकल वॉन ने इसे लेग साइड की ओर खेलना चाहा, गेंद टर्न हुई और बल्ले का लीडिंग एज लेकर पहली स्लिप में मैथ्यू हेडेन के पास चली गई। स्कोर 36/2. “That’s great bowling, fantastic cricketer this guy is.” इंग्लिश कप्तान माइकल वॉन 0 पर वापस। मात्र 7 गेंदों में शेन वॉर्न ने इंग्लिश ड्रेसिंग रूम को भयभीत कर दिया होगा। मार्क निकलस कह चुके थे, “Warne has two and butterflies are suddenly in England’s camp.”

13 ओवर के बाद स्कोर हो चुका था 57/2. इंग्लैंड को जीत के लिए 72 रनों की आवश्यकता। बल्लेबाज के चारों ओर चार फील्डर स्लिप, लेग स्लिप, सिली पॉइंट और बैकवर्ड शॉर्ट लेग। 14वें ओवर में शेन वॉर्न ने अराउंड द विकेट से एक बार फिर गेंद ऑफ स्टंप के बाहर फेंकी, स्ट्राउस ने इसे फाइन लेग की ओर खेलना चाहा और लेग स्लिप में माइकल क्लार्क ने जमीन से कुछ सेंटीमीटर पूर्व कैच पकड़ा। Game On. शेन वॉर्न के एक स्पेल ने ऑस्ट्रेलिया को मैच में वापस ला दिया था।

अगले ओवर में ब्रेट ली की पहली गेंद, बढ़िया बाउंसर, इयन बेल ने हुक करने का प्रयास किया और फाइन लेग पर माइकल कैस्प्रोविच ने कैच पकड़ा। स्कोर 57 पर 4. प्रश्न “Are England crumbling under pressure ?”

अब क्रीज पर इंग्लैंड के दो युवा सुपरस्टार एक साथ थे। केविन पीटरसन और ऐन्ड्रू फ्लिंटॉफ। दोनों ने साझेदारी बनानी आरम्भ की, बीच बीच में चौके आते रहे और आवश्यक रन अब 50 से कम रह गए थे। 23वें ओवर में शॉन टेट की फुलटॉस गेंद केविन पीटरसन के पैड की ओर, इसपर चौके के साथ इंग्लैंड का स्कोर सौ के पार हो गया। शेन वॉर्न के पहले स्पेल के झटके झेलने के बाद इंग्लैंड की टीम अब एक आसान जीत की ओर बढ़ती दिख रही थी।

Final throw of the dice and Brett Lee strikes: स्कोर 103/4. रिकी पॉन्टिंग एक बार फिर अपने सुपरफास्ट गेंदबाज ब्रेट ली को आक्रमण पर लगाया। ब्रेट ली की पहली गेंद, Away Swing, KP ने ड्राइव का प्रयास किया, बाहरी किनारा और ऐडम गिलक्रिस्ट ने डाइव लगाकर कैच पकड़ा। ली के अगले ओवर की चौथी गेंद, Fast and furious और ऐन्ड्रू फ्लिंटॉफ का ऑफ स्टंप टेढ़ा हो गया। स्कोर 111/6. ब्रेट ली के दो ओवरों ने इंग्लैंड के दोनों सेट बल्लेबाजों को वापस भेज दिया था और इंग्लैंड को अभी भी 18 रनों की आवश्यकता थी।

विकेटकीपर गेरेन्ट जोन्स ने पहली पारी में महत्वपूर्ण 85 रन बनाए थे, यहाँ उन्होंने शेन वॉर्न की एक गेंद को आगे निकलकर उड़ाने का प्रयास किया, गेंद बल्ले पर सही नहीं आई और Long Off पर माइकल कैस्प्रोविच ने एक आसान कैच पकड़ा। स्कोर 116/7. यह शेन वॉर्न का चौथा विकेट था, गेरेन्ट जोन्स को ड्रेसिंग रूम में कप्तान और कोच ने कितनी शाबाशी दी होगी इसकी कल्पना नहीं की जा सकती। सीरीज में बढ़त लेने के लिए 13 रन चाहिए, चार विकेट हाथ में और आप क्रिकेट इतिहास के महानतम गेंदबाज की गेंद पर ऐसे मजाक कर रहे हैं। इंग्लैंड को अभी भी 13 रन चाहिए थे और मात्र 3 विकेट शेष थे। “Ashes Cricket at it’s best.”

Giles and Hoggard seal a thrilling victory for England: अब इंग्लैंड के पास कोई विशेषज्ञ बल्लेबाज शेष नहीं था। ब्रेट ली 92-94 मील प्रति घण्टे की गति से गेंदबाजी कर रहे थे। जाइल्स और हॉगार्ड एक एक रन जुटाते रहे। 31वें ओवर में यॉर्कर के प्रयास में ब्रेट ली ने फुलटॉस फेंक दी ऑफ स्टंप के काफी बाहर और मैथ्यू हॉगार्ड ने इसे कवर बाउंड्री के बाहर भेज दिया। इसके दो गेंद बाद एक डबल आया।अब इंग्लैंड को मात्र दो रनों की आवश्यकता थी। इंग्लैंड के दर्शकों और Barmy Army ने अपने गाने आरम्भ कर दिए थे।

32वें शेन वॉर्न की तीसरी गेंद, इस फुलटॉस को जाइल्स ने लेग साइड में खेला और ये शॉर्टलेग पर खड़े साइमन कैटिच के पैर पर लगी। बालकनी में खड़े माइकल वॉन का कलेजा मुँह में आ गया था। अगली गेंद पर जाइल्स बोल्ड होने से बचे। इंग्लिश ड्रेसिंग रूम की बालकनी में सबकी साँसें एक बार फिर थम गईं। 5वीं गेंद को जाइल्स ने लेग साइड में खेलकर इंग्लैंड को ऐशेज़ में 2-1 की बढ़त दिला दी। हॉगार्ड और जाइल्स गले मिल रहे थे वहीं बालकनी में वॉन, फ्लिंटॉफ और पीटरसन भी एक दूसरे को गले लगाते दिख रहे थे।

एजबेस्टन के मैन ऑफ द मैच ऐन्ड्रू “फ्रेडी” फ्लिंटॉफ ट्रेंट ब्रिज में भी मैन ऑफ द मैच हुए। सर इयन टेरेंस बोथम के बाद इंग्लैंड को पहली बार ऐसा ऑल राउंडर मिला था।

Devastating end of Simon Jones’ career: इस ऐशेज़ में इंग्लैंड के गेंदबाजी साइमन जोन्स का टेस्ट करियर ट्रेंटबिज़ टेस्ट के बाद समाप्त हो गया। दूसरी पारी में उन्होंने मात्र 4 ओवर किए थे और एड़ी में चोट के कारण अस्पताल चले गए थे। इस ऐशेज़ में साढ़े तीन टेस्ट मैचों में उन्होंने 18 विकेट लिए थे, 21 रन प्रति विकेट की औसत से। 5वाँ टेस्ट न खेलने के बाद भी वे सीरीज में सबसे अधिक विकेट लेने वालों की सूची में 5वें नम्बर पर थे और इंग्लैंड की ओर से दूसरे नम्बर पर।

ऑस्ट्रेलियाई टीम यह टेस्ट मैच अवश्य हारी थी पर फॉलोऑन खेलने के बाद उन्होंने जो फाइट दी और इंग्लैंड को 129 के छोटे से लक्ष्य की प्राप्ति में भी नाकों चने चबवा दिए। यह एक और उदाहरण है यह बताने के लिए कि क्यों यह टीम एक दशक से विश्व क्रिकेट में शीर्ष पर थी, पर आज का दिन इंग्लैंड का था। इंग्लैंड की इस युवा टीम ने लगातार तीसरे टेस्ट में शानदार प्रदर्शन किया था और खेल के हर क्षेत्र में ऑस्ट्रेलिया पर भारी पड़ी थी।

अब सीरीज का एक मात्र टेस्ट शेष था जो ओवल में खेला जाना था, यह टेस्ट दोनों टीमों के लिए महत्वपूर्ण होने वाला था। ऑस्ट्रेलिया इसे जीतकर सीरीज 2-2 से बराबर कर सकती थी और ऐशेज़ ट्रॉफी Retain कर सकती थी, वहीं इंग्लैंड इसे ड्रॉ कराकर या जीतकर ऐशेज़ ट्रॉफी 18 वर्ष बाद अपने नाम कर सकती थी।

To be continued.

The Ashes 2005-06: Greatest Ashes Series of all Time.Part-3

History: Old Trafford, Manchester में कई अविस्मरणीय और ऐतिहासिक ऐशेज़ टेस्ट हुए हैं। जैसे, 1902 में ऐशेज़ का चौथा टेस्ट जहाँ विक्टर ट्रम्पर ने एक शानदार शतक बनाया था। Hugh Trumble और Jack Sounders ने इंग्लैंड को 123 का लक्ष्य भी प्राप्त नहीं करने दिया था और 86 पर ऑल आउट करके ऑस्ट्रेलिया को विजय दिलाई थी। 1956 का चौथा टेस्ट जहाँ इंग्लिश गेंदबाज जिम लेकर ने 19 विकेट लिए थे, पहली पारी में 9 और दूसरी में दस और इंग्लैंड को पारी से जीत दिलाई थी। 1993 में इसी मैदान पर शेन वॉर्न ने अपने करियर के पहले एशेज टेस्ट की पहली गेंद पर “Ball of Century” द्वारा माइक गैटिंग को आउट किया था। 1997 में सीरीज के तीसरे टेस्ट में स्टीव वॉ ने दोनों पारियों में शतक लगाया था और ऑस्ट्रेलिया को जीत दिलाकर 1-1 से सीरीज बराबर की थी।

शेन वॉर्न ने अपनी ऑटोबायोग्राफी “No Spin” में लिखा है, 1989 से 2003 तक ऐशेज़ में ऑस्ट्रेलिया इतने भारी अंतर से जीत रही थी कि ऐशेज़ के परिणाम का पूर्वानुमान लगाना कठिन नहीं था। “We knew we’d win, they knew we’d win.” पहली बार वे ऐसी इंग्लिश टीम को देख रहे थे, जो ये सोच रही थी कि वह ऑस्ट्रेलियाई टीम को पराजित कर सकती है। “For the first time that I’d known, they definitely thought they could beat us.”

एजबेस्टन टेस्ट से यह स्पष्ट हो गया था कि इंग्लैंड की यह टीम ऐशेज़ जीतने में सक्षम है।

सीरीज 1-1 से बराबर थी। तीसरा टेस्ट Old Trafford, Manchester में खेला जा रहा था। यह भी एक बढ़िया बैटिंग विकेट थी। पिछले दो टेस्ट मैचों में टॉस हार चुके इंग्लिश कप्तान माइकल वॉन ने इस बार टॉस जीता और उन्होंने वह गलती नहीं की, जो रिकी पॉन्टिंग ने एजबेस्टन में की थी। माइकल ने कहा, “we’re gonna have a bat.” इंग्लिश टीम में कोई परिवर्तन नहीं हुआ था। ऑस्ट्रेलियाई टीम में मात्र एक परिवर्तन हुआ माइकल कैस्प्रोविच ने इंजरी से लौटे ग्लेन मक्ग्रा के लिए जगह खाली की।

पहले ओवर की दूसरी ही गेंद पर मार्कस ट्रेसकॉथिक ने ग्लेन मक्ग्रा को एक बैकफुट कवर ड्राइव लगाई और पारी का पहला चौका प्राप्त किया। Richie Benaud ने कहा, “It gives us a good idea about the pace of the ball, over the outfield.”

150 for Brett Lee: पारी के आठवें ओवर में ब्रेट ली की एक तेज बाउंसर स्ट्राउस के हेलमेट पर लगी। इस बाउंसर से ब्रेट ली अपने अगले ओवर की तैयारी कर चुके थे, अगले ओवर में उन्होंने एक बेहतरीन स्लोअर यॉर्कर डाली, ऐन्ड्रू स्ट्राउस भाँप नहीं पाए और यह गेंद उनका ऑफ स्टम्प ले उड़ी। यह टेस्ट क्रिकेट में ब्रेट ली का 150वाँ विकेट था।

Skipper under pressure:
नम्बर 3 पर आए इंग्लिश कप्तान माइकल वॉन। अबतक इस सीरीज में वॉन के स्कोर थे 3, 4, 24, 1. कॉमेंट्री बॉक्स में मार्क निकलस कह रहे थे, “He knows it. We know it. Michael Vaughan needs runs. All sorts of opinions offered about his technique from all over the world.”

जेसन गिलेस्पी के पहले ओवर में वॉन के बल्ले से दो चौके आए। दोनों में से एक भी बल्ले के बीच से नहीं आया था। कुछ देर बाद माइकल वॉन के खेल में आत्मविश्वास दिखाई पड़ने लगा, 20वें ओवर में उन्होंने जेसन गिलेस्पी की गेंद पर एक बैकफुट कवर ड्राइव खेली, Michael Atherton ने कहा, “That’s just about Michael Vaughan at his very best.” गिलेस्पी के अगले ओवर में वॉन ने फिर से दो चौके लगा दिए। पहला कट शॉट जो गली के पास से गया और दूसरी एक सुंदर बैकफुट कवर ड्राइव। 28वें ओवर में मार्कस ट्रेसकॉथिक ने भी गिलेस्पी को स्ट्रेट ड्राइव से चौका लगाकर अपना 26वाँ अर्धशतक पूरा कर लिया।

Captain gets lucky: 29वें ओवर में ग्लेन मक्ग्रा की गेंद पर ऐडम गिलक्रिस्ट ने माइकल वॉन का कैच छोड़ दिया, इस पारी में यह गिलक्रिस्ट द्वारा दूसरा कैच ड्रॉप था, इससे पहले वो मक्ग्रा की ही गेंद पर ट्रेसकॉथिक का कैच छोड़ चुके थे। ड्रॉप कैच को भुलाकर मक्ग्रा ने अगली गेंद फेंकी और माइकल वॉन का ऑफ स्टम्प उखड़कर बाहर, बिल्कुल एजबेस्टन टेस्ट की दूसरी पारी की तरह, पर अंपायर स्टीव बकनर का इशारा नो बॉल। माइकल वॉन को भाग्य का जो साथ चाहिए था वह उन्हें इस ओवर में मिल चुका था। उन्होंने इसके बाद किसी ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज को कोई अवसर नहीं दिया। मक्ग्रा के इसी ओवर में वॉन ने 61 गेंदों में अपने 50 रन पूरे किए। 35वें ओवर में वॉन के बल्ले से मक्ग्रा को 2 चौके पड़े। फुलर लेंथ की गेंद को भी वॉन ने बैकफुट पर रहकर ही ड्राइव कर दिया कवर बाउंड्री की ओर।

Number 600 for the Wizard:
वॉन और ट्रेसकॉथिक के बीच दूसरे विकेट के लिए 137 रनों की साझेदारी हुई। 43वाँ ओवर, स्कोर 163/1, शेन वॉर्न की फुल लेंथ गेंद। ट्रेसकॉथिक ने स्वीप करने का प्रयास किया गेंद उनके बैट पैड ग्लब सब को स्पर्श करते हुए ऐडम गिलक्रिस्ट के पैर पर लगी और उछली, गिलक्रिस्ट ने इसे कैच कर लिया और कॉमेंट्री बॉक्स से मार्क निकलस की आवाज़ आई, “Yesss.. out.. Six Hundred Test Match Wickets for Shane Warne.” शेन वॉर्न टेस्ट क्रिकेट इतिहास में 600 विकेट लेने वाले पहले गेंदबाज बने। लॉर्ड्स में ग्लेन मक्ग्रा के 500वाँ टेस्ट विकेट बनने के बाद ओल्ड ट्रैफर्ड में शेन वॉर्न के 600वाँ टेस्ट विकेट बने ट्रेसकॉथिक ने 63 रन बनाए।

चायकाल के समय इंग्लैंड का स्कोर हो चुका था 54 ओवर में 195/2.

It’s Michael Vaughan Show at Old Trafford: 56वें ओवर में शेन वॉर्न की गेंद पर चौका लगाकर माइकल वॉन 99 पर जा पहुँचे। 57वें ओवर में ग्लेन मक्ग्रा की गेंद पर तीन रन लेकर उन्होंने अपने करियर का 15वाँ शतक पूरा किया। यह एक कप्तान के रूप में उनका 6ठा और ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध चौथा शतक था। यह ऐशेज़ 2005-06 में किसी भी बल्लेबाज द्वारा लगाया गया पहला शतक था।

पारी के 64 ओवर पूरे हो चुके थे। जेसन गिलेस्पी के अबतक के आँकड़ें थे, 11-2-47-0. 12वें ओवर में गिलेस्पी ने माइकल वॉन को एक शॉर्ट गेंद फेंकी। वॉन का पुल शॉट, गेंद मिडविकेट बाउंड्री के बाहर 6 रन। “Michael Vaughan at his best.” अगली गेंद पर चौका। गिलेस्पी को इसके बाद हर ओवर में वॉन के बल्ले से चौके पड़ रहे थे। पारी का 70वाँ ओवर जो गिलेस्पी का 15वाँ था, पहली तीन गेंदों पर माइकल वॉन के बल्ले से तीन चौके निकले। पहली गेंद हाफ वॉली गेंदबाज के बगल से स्ट्रेट ड्राइव, चार रन। दूसरी गेंद पर मिड ऑन और मिडविकेट फील्डर के बीच से ऑन ड्राइव। इसी के साथ माइकल वॉन के 150 रन पूरे। तीसरी गेंद शॉर्ट, वॉन का पुल और चौकों की हैट्रिक। गिलेस्पी के पिछले चार ओवरों में 42 रन आ चुके और अब उनके आँकड़े थे, 15-2-89-0.

Against the run of play: स्कोर 290/2. 75वें ओवर में पार्ट टाइम स्पिनर साइमन कैटिच की फुलटॉस गेंद को बाउंड्री पार कराने के प्रयास में माइकल वॉन का शॉट Long On पर ग्लेन मक्ग्रा के हाथों में चला गया। साइमन कैटिच ने पहले भी ऐसी गेंदों पर विकेट ली थी। डेढ़ साल पहले उन्होंने मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में 195 रन बना चुके वीरेन्द्र सेहवाग को ऐसी ही फुलटॉस पर आउट किया था। सेहवाग भी छक्का लगाने के प्रयास में Long On पर ही कैच हुए थे। 215 गेंदों में 166 रन बनाकर लौटने से पहले माइकल वॉन इंग्लैंड को इस टेस्ट और इस सीरीज में एक मजबूत स्थिति में पहुँचा चुके थे। वॉन ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन भी किया था और 20 चौके और एक छक्का लगाया था।

इयन बेल ने 59, पिछले मैच के हीरो ऐन्ड्रू फ्लिंटॉफ ने 46 और विकेटकीपर गेरेन्ट जोन्स ने 42 रन बनाए और इंग्लैंड की पारी 444 पर समाप्त हुई। जनवरी 1995 के बाद से ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध पहले बल्लेबाजी करते हुए किसी भी टीम का चौथा सबसे बड़ा स्कोर था। ब्रेट ली और शेन वॉर्न दोनों ने चार चार विकेट लिए।

Australia’s 1st Innings: जस्टिन लैंगर और मैथ्यू हेडेन ने अच्छी शुरुआत की। पहले विकेट के लिए 58 रन की साझेदारी होने के बाद लैंगर 31 रन बनाकर Ashley Giles की गेंद पर आउट हुए। फॉरवर्ड शॉर्ट लेग पर इयन बेल का शानदार कैच।

Simon Jones becomes an Ashes Hero: तेज गेंदबाज साइमन जोन्स ने अपने चौथे ओवर की पहली गेंद शॉर्ट लेंथ पर की, गेंद ने खतरनाक उछाल लिया। शॉर्ट पिच बॉलिंग के सबसे शानदार खिलाड़ियों में से एक रिकी पोंटिंग ने इसे रोकने का प्रयास किया। गेंद बल्ले के ऊपरी हिस्से में लगी और हवा में उठ गई। गली में खड़े इयन बेल ने एक आसान सा कैच पकड़ा। माइक पर Michael Atherton की आवाज़, “What a start after tea. Simon Jones has found the shoulder of Australian captain’s bat.” ऑस्ट्रेलिया के सबसे प्रमुख बल्लेबाज और कप्तान मात्र 7 रन पर वापस पवेलियन में।

Aussie Collapse and Shane Warne’s brilliance, this time with the bat: 58 पर 0 से ऑस्ट्रेलिया अगले 20 ओवरों के खेल के बाद 129 पर 5 हो गई। लेफ्ट आर्म स्पिनर Ashley Giles 3 विकेट ले चुके थे। (11-2-36-3)। नम्बर 7 पर आए शेन वॉर्न ने ऐडम गिलक्रिस्ट के साथ 53 रनों की साझेदारी की। यहाँ साइमन जोन्स की एक गेंद पर गिलक्रिस्ट का कैच विकेटकीपर गेरेन्ट जोन्स ने पकड़ा। 197 के स्कोर पर साइमन जोन्स की गेंद पर माइकल क्लार्क के रूप में 7वाँ विकेट गिरने के साथ ऑस्ट्रेलिया पर फॉलोऑन का संकट मंडराने लगा था। फॉलोऑन बचाने के लिए अभी भी 48 रन बनाने थे और मात्र 3 विकेट शेष थे। दूसरे दिन का खेल समाप्त होने पर शेन वॉर्न 45 रन पर खेल रहे थे और ऑस्ट्रेलिया का स्कोर था 56 ओवर में 210/7. तीसरे दिन शेन वॉर्न ने तेज गेंदबाजों को तो सम्भलकर खेला पर Ashley Giles की गेंदों पर बाउंड्री लेते रहे। 59वें ओवर में उन्होंने Giles की गेंद पर सिंगल के साथ 70 गेंदों में अपने 50 रन पूरे किए। 64वें ओवर में Giles को दो चौके लगाकर शेन वॉर्न ने ऑस्ट्रेलिया का स्कोर 245/7 कर दिया और फॉलोऑन का संकट समाप्त कर दिया। तीसरे दिन का खेल समाप्त होने पर ऑस्ट्रेलिया का स्कोर 70 ओवर में 264/7. तीसरे दिन वर्षा के कारण मात्र 14 ओवर का खेल हो सका था। चौथे दिन शेन वॉर्न अपने पहले टेस्ट शतक की ओर बढ़ रहे थे। वे 90 पर थे और गिलेस्पी के साथ 90 रन की साझेदारी भी कर चुके थे। जिसमें बस 13 रन गिलेस्पी के थे। साइमन जोन्स ने एक बार फिर से साझेदारी तोड़ी, उनकी शॉर्टपिच गेंद पर हुक करने के प्रयास में शेन वॉर्न बाउंड्री पर कैच हो गए। साइमन जोन्स ने इसके बाद अगले दो विकेट भी जल्दी निकाल लिए और ऑस्ट्रेलिया 84.5 ओवर में 302 पर ऑल आउट हो गई। साइमन जोन्स ने 53 रन देकर 6 विकेट लिए थे।

England’s 2nd Innings: 142 रन की लीड के साथ उतरी इंग्लैंड को मार्कस ट्रेसकॉथिक ने फिर से तेज शुरुआत दी, पहले विकेट की 64 की साझेदारी में ट्रेसकॉथिक ने 41 रन बनाए। दूसरे ओपनर ऐन्ड्रू स्ट्राउस ने पिछली पाँच पारियों में कुछ खास नहीं किया था, यहाँ उन्होंने शतक लगाया और 106 रनों की पारी खेली। पिछले दो टेस्ट में शानदार प्रदर्शन करने वाले केविन पीटरसन को मक्ग्रा ने पहली गेंद पर आउट कर दिया। इयन बेल ने दूसरी पारी में भी अच्छी बल्लेबाजी करते हुए 65 रन बनाए। गेरेन्ट जोन्स ने 62वें ओवर में ग्लेन मैक्ग्रा को दो छक्के और एक चौके के साथ 4 गेंदों में 16 रन ठोक दिए और इंग्लैंड ने अपनी दूसरी पारी 61.5 ओवर में 280/6 पर घोषित कर दी।

ऑस्ट्रेलिया के सामने दो विकल्प थे, 108 ओवरों में 423 रन चेज करे या 108 ओवर में ऑल आउट न हो और मैच ड्रॉ करे। चौथे दिन की शाम ऑस्ट्रेलिया को 35 मिनट तक खेलना था। हेडेन और लैंगर ने यह समय सुरक्षित निकाल लिया। चौथे दिन की समाप्ति पर ऑस्ट्रेलिया का स्कोर 10 ओवर में 24/0. अंतिम दिन 98 ओवरों में 399 रनों की आवश्यकता।

Captain Courageous: अंतिम दिन के दूसरे ओवर में ही मैथ्यू हॉगार्ड ने जस्टिन लैंगर का विकेट लेकर दिन की शानदार शुरुआत की। कप्तान रिकी पॉन्टिंग क्रीज पर आए। अभी तक उनके बल्ले से इस सीरीज की 5 पारियों में मात्र 1 अर्धशतक आया था। अबतक उनके स्कोर थे- 9, 42, 61, 0, 7. आज उनके पास अवसर था। इंग्लैंड की पहली पारी में माइकल वॉन ने शतक लगाकर फॉर्म में वापसी की थी, उसी तरह ऑस्ट्रेलिया को इस मैच में पराजय से बचाने के रिकी पॉन्टिंग को कप्तानी पारी खेलनी थी। पॉन्टिंग ने अपना पहला चौका मैथ्यू हॉगार्ड की गेंद पर ऑन ड्राइव से लगाया।

महान बल्लेबाजों के ट्रेडमार्क शॉट होते हैं, जिनसे कई बार यह भी पता चलता है कि बल्लेबाज फॉर्म में है या नहीं। रिकी पॉन्टिंग का पुल शॉट ऐसे ही ट्रेडमार्क शॉट्स में से एक है। क्रिकेट इतिहास में उनसे बेहतर पुल करने वाला खिलाड़ी कोई नहीं हुआ। 20वें ओवर की तीसरी गेंद, फ्लिंटॉफ की शॉर्ट गेंद, पॉन्टिंग के शरीर की ओर, शरीर का भार बैकफुट पर डालकर पॉन्टिंग ने इसे पुल कर दिया, स्क्वेयर लेग बाउंड्री के ऊपर से 6 रन. ऑस्ट्रेलियाई ड्रेसिंग रूम और दर्शकों ने अपने कप्तान का यह शॉट देखकर चैन की साँस ली होगी कि आज शायद ये फॉर्म में हैं। हेडेन और पॉन्टिंग सम्भलकर खेलते रहे और ऑस्ट्रेलिया का स्कोर बढाते रहे। दोनों के बीच 18 ओवर में 71 रन जोड़े जा चुके थे। ड्रिंक्स ब्रेक के कुछ देर बाद ऐन्ड्रू फ्लिंटॉफ ने मैथ्यू हेडेन को क्लीन बोल्ड कर दिया। पॉन्टिंग और मार्टिन ने लंच तक और कोई विकेट गिरने नहीं दिया और स्कोर हुआ 38 ओवर में 121/2. डेमियन मार्टिन एक बार पुनः असफल रहे और लंच के थोड़ी देर बाद ही 19 रन बनाकर आउट हो गए।

रिकी पॉन्टिंग ने 46वें ओवर में साइमन जोन्स की गेंद पर 3 रन लेकर 104 गेंदों में अपना अर्धशटक पूरा किया। जाइल्स के अगले 2 ओवरों में पॉन्टिंग ने 3 चौके लगाए। चौथे विकेट के लिए कैटिच के साथ एक अच्छी साझेदारी बननी शुरू हुई ही थी कि फ्लिंटॉफ ने कैटिच को भी पवेलियन भेज दिया। रिकी पॉन्टिंग एक ओर डटे हुए थे और दूसरी ओर से विकेट गिरते जा रहे थे। 57वें ओवर में ऐन्ड्रू फ्लिंटॉफ ने जब ऐडम गिलक्रिस्ट को आउट किया तो स्कोर था 182 पर 5.

माइकल क्लार्क नम्बर 7 पर आए और अपने कप्तान के साथ साझेदारी बनानी आरम्भ कर दी। चायकाल की घोषणा से ठीक पहले सिंगल के साथ रिकी पोंटिंग 90 पर पहुँचे और चाय के बाद स्टीफन हार्मिसन को कवर ड्राइव से चौका लगाकर उन्होंने अपने करियर का 23वाँ और इंग्लैंड के विरुद्ध 5वाँ शतक पूरा किया।

75 ओवर के बाद स्कोर 263/5. 33 ओवर शेष थे। ऑस्ट्रेलिया को 160 रन चाहिए थे और इंग्लैंड को 5 विकेट। इंग्लैंड का पलड़ा अब भी भारी था क्योंकि यह विशेषज्ञ बल्लेबाजों की अंतिम जोड़ी थी। ऑस्ट्रेलिया भी मैच से बाहर नहीं कही जा सकती थी क्योंकि रिकी पॉन्टिंग 111 और माइकल क्लार्क 39 पर खेल रहे थे।

Blunder from Michael Clarke and breakthrough for England: 76वें ओवर में साइमन जोन्स की गेंद ऑफ स्टम्प के बाहर गिरने के बाद अंदर आई। अविश्वसनीय रिवर्स स्विंग। क्लार्क ने सोचा था, यह बाहर निकलेगी, उन्होंने गेंद छोड़ दी और ऑफ स्टम्प उखड़कर बाहर। माइकल क्लार्क हतप्रभ होकर देख रहे थे। महान कॉमेंटेटर रिची बेनो कह रहे थे, “What a great piece of reverse swing.” इंग्लैंड के सारे खिलाड़ी साइमन जोन्स को घेरकर खड़े हो गए। अगले ओवर में हॉगार्ड ने गिलेस्पी को 0 पर आउट कर दिया, स्कोर 264/7. अब ऑस्ट्रेलिया के पास मैच जीतने का प्रयास करने का विकल्प नहीं रह गया था। अब बस मैच बचाना था।

Operation Rescue Australia: इंग्लैंड के पक्ष में सबसे बड़ी बात यह थी कि “Second New Ball” मात्र 3 ओवर दूर थी। 81वें ओवर में माइकल वॉन ने मैथ्यू हॉगार्ड को नई गेंद दे दी। अभी 28 ओवर का खेल शेष था और इंग्लैंड की विजय निश्चित लग रही थी। इंग्लैंड के रास्ते में सबसे बड़ा अवरोध बनकर खड़े थे ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी थॉमस पॉन्टिंग। 83वें ओवर में माइकल वॉन ने दोनों छोर से अपने दोनों सबसे तेज गेंदबाजों को आक्रमण पर लगा दिया, ऐन्ड्रू फ्लिंटॉफ और स्टीफन हार्मिसन। पॉन्टिंग और शेन वॉर्न ने नई गेंद को सावधानी से खेला और अगले 15 ओवर सुरक्षित निकाल लिए। 98वें ओवर में साइमन जोन्स की पहली गेंद पर पॉन्टिंग ने दो रन लेकर अपने 150 रन पूरे कर लिए। ऑस्ट्रेलिया का स्कोर हो चुका था, 98 ओवर में 340/7. पॉन्टिंग और वॉर्न के बीच 21 ओवरों में 76 रनों की साझेदारी हो चुकी थी। अब मैच में दस ओवर शेष रह गए थे।

It’s that man again: एजबेस्टन टेस्ट के हीरो फ्रेडी फ्लिंटॉफ अपने होम ग्राउंड पर खेल रहे थे। अभी तक इस पारी में वो तीन विकेट ले चुके थे। 99वें ओवर की दूसरी गेंद पर फ्लिंटॉफ ने शेन वॉर्न को विकेटकीपर गेरेन्ट जोन्स के हाथों कैच करा दिया। एजबेस्टन टेस्ट में भी ऐसे ही एक महत्वपूर्ण अवसर पर फ्लिंटॉफ ने शेन वॉर्न का विकेट लिया था। पहली पारी में 90 रन बनाने वाले शेन वॉर्न ने दूसरी पारी में भी 69 गेंदें खेलकर 34 रन बनाए।

रिकी पॉन्टिंग का साथ देने ब्रेट ली मैदान में आए। ब्रेट ली ने एजबेस्टन टेस्ट में बहुत अच्छी बल्लेबाजी की थी और ऑस्ट्रेलिया को विजय द्वार तक ले गए थे, बस द्वार खोल नहीं पाए थे। ली ने फ्लिंटॉफ के इस ओवर की शेष पाँच गेंदें रोक लीं। अगले ओवर में पॉन्टिंग ने 5 गेंदें खेली, पाँचवीं पर उन्होंने सिंगल लिया था। इसके अगले ओवर में पॉन्टिंग ने फ्लिंटॉफ की सभी 6 गेंदें खेल लीं। फ्लिंटॉफ का अगला ओवर भी पॉन्टिंग ने पूरा खेल लिया। पारी में 103 ओवर का खेल हो चुका था, अब मैच में मात्र 5 ओवर शेष थे। स्कोर 350/8.

Heartbreak for Ricky Ponting: स्टीफन हार्मिसन की तीसरी गेंद पर पॉन्टिंग ने स्क्वेयर लेग पर फ्लिक के द्वारा चौका लगाया, स्कोर 354/8. 104वें ओवर की अंतिम गेंद, शॉर्ट पिच गेंद, पॉन्टिंग ने इसे लेग साइड में खेलने का प्रयास किया, गेंद उनके ग्लब्स को स्पर्श करते हुए विकेटकीपर जोन्स के हाथों में चली गई। जोरदार अपील और अंपायर बिली बाउडेन ने उंगली उठा दी। “Ricky Ponting cannnot believe it. He cannot believe that he’s touched it. But he has and England are on the brink.” रिकी पॉन्टिंग को पता था उनके विकेट का अर्थ, अभी दिन के खेल में 4 ओवर शेष थे, ऑस्ट्रेलिया के पास मात्र एक विकेट था। पॉन्टिंग बहुत देर तक क्रीज पर खड़े रहे। 411 मिनट बल्लेबाजी करके 275 गेंदें खेलकर 156 रन बनाने के बाद भी डर यह था कि क्या यह पारी बर्बाद हो जाएगी। पूरा स्टेडियम जोश में, इंग्लैंड के दर्शक खिलाड़ी सभी हर्षोल्लास में मग्न, मानो अब तो टेस्ट मैच जीत लिया। रिकी पॉन्टिंग धीमे कदमों से पवेलियन लौट रहे थे और कॉमेंट्री बॉक्स से आवाज़ आ रही थी, “What an innings, standing ovation from this Old Trafford crowd.”

Lee and McGrath save the day for Australia: नम्बर 11 ग्लेन मक्ग्रा क्रीज पर आए। स्ट्राइक ब्रेट ली के पास थी। ली ने फ्लिंटॉफ का पूरा ओवर स्वयं खेला। अगले ओवर में इंग्लैंड के स्ट्राइक बॉलर स्टीफन हार्मिसन बनाम ऑस्ट्रेलियाई नम्बर 11 ग्लेन मक्ग्रा। दोनों पक्षों के समर्थकों की साँसें अटकी हुईं। मक्ग्रा ने ये ओवर पूरा खेल लिया। फ्लिंटॉफ का अगला ओवर ब्रेट ली को. ली ने पहली तीन गेंदे रोक लीं। अब गेंदें सिंगल डिजिट में थीं। ओवर की अंतिम गेंद पर चौका आया।

मैच का अंतिम ओवर, Stephen Harmison to Glenn McGrath. पहली गेंद डॉट, दूसरी गेंद डॉट, तीसरी पर सिंगल और ब्रेट ली स्ट्राइक पर। ब्रेट ली ने अगली दो गेंदों को डिफेंड किया। स्टीफन हार्मिसन के पास एक गेंद थी इंग्लैंड को सीरीज में 2-1 की बढ़त दिलाने के लिए। ब्रेट ली को अपना विकेट बचाना था, पराजय से बचने के लिए। अंतिम गेंद, यॉर्कर के प्रयास में फुलटॉस। ली ने इसे स्क्वेयर लेग की ओर खेल दिया और अपनी मुट्ठी हवा में उठा ली, गेंद चौके के लिए गई पर इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। मैच ड्रॉ हो चुका था। ब्रेट ली जो काम एजबेस्टन में नहीं कर पाए थे, वह उन्होंने ओल्ड ट्रैफर्ड में कर दिखाया।

चौथी पारियों की महानतम पारियों में से एक खेलने वाले रिकी पॉन्टिंग मैन ऑफ द मैच हुए। उन्होंने कहा, “We were outplayed for the first four days. We dug in deep on the last day.”

To be continued.

The Ashes 2005-06: Greatest Ashes Series of all Time.Part-2

History: 5 टेस्ट की सीरीज में 0-2 से पीछे होने पर टेस्ट क्रिकेट इतिहास में मात्र एक टीम ने वापसी करके सीरीज जीती थी, वह टीम थी सर डॉनल्ड जॉर्ज ब्रैडमैन के नेतृत्व वाली ऑस्ट्रेलिया, जिसने ऐशेज़ 1936-37 में ब्रिस्बेन में 322 रन से और सिडनी में पारी और 22 रन से सीरीज के पहले दो टेस्ट हारने के बाद अगले तीन टेस्ट लगातार जीतकर ऐशेज़ सीरीज में 3-2 से विजय प्राप्त कर ली। सीरीज के तीसरे टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया की दूसरी पारी में सर डॉनल्ड ब्रैडमैन ने 270 रनों की सीरीज पलट देने वाली पारी खेली जिसे Wisden ने टेस्ट क्रिकेट इतिहास की सर्वश्रेष्ठ पारी माना है।

Edgbaston 2005: इंग्लैंड के लिए सीरीज का दूसरा टेस्ट मैच बहुत महत्वपूर्ण था, यहाँ पराजय होने का अर्थ था सीरीज में 0-2 से पीछे हो जाना और फिर सीरीज जीतना लगभग असंभव हो जाता। लॉर्ड्स में पहला टेस्ट 239 रनों से जीतने के बाद ऑस्ट्रेलिया की टीम बर्मिंघम पहुँची। सीरीज का दूसरा टेस्ट यहाँ एजबेस्टन में खेला जाना था।

टॉस के कुछ समय पहले लॉर्ड्स टेस्ट के हीरो ग्लेन मक्ग्रा का पैर वॉर्म अप के दौरान एक गेंद पर पड़ गया और उनकी एड़ी में मोच आ गई। उनकी जगह माइकल कैस्प्रोविच को टीम में रखा गया।

Blunder by Ricky Ponting: एजबेस्टन जैसी बैटिंग विकेट पर टॉस जीतकर सदैव बैटिंग ली जाती है, यदि कोई विशेष कारण न हो तो, ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पॉन्टिंग ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने टॉस जीतकर गेंदबाजी चुनी। शेन वॉर्न ने कुछ दिन पूर्व दिए एक इंटरव्यू में इसे बहुत खराब निर्णय बताया और कहा, “मैं सोचता था 2002-03 ऐशेज़ में ब्रिस्बेन में नासिर हुसैन ने जो टॉस जीतकर गेंदबाजी का निर्णय लिया था, वो अबतक का सबसे खराब निर्णय था, पर ब्रिस्बेन में पहले दिन कम से कम गेंद स्विंग तो होती है, एजबेस्टन तो बिल्कुल पाटा विकेट थी।”

रिकी पॉन्टिंग का ये निर्णय मैच के पहले सत्र में ही गलत सिद्ध हो गया जब मार्कस ट्रेसकॉथिक ने इंग्लैंड को धमाकेदार शुरुआत दे दी। ट्रेसकॉथिक और ऐन्ड्रू स्ट्राउस साढ़े चार रन प्रति ओवर की गति से बल्लेबाजी कर रहे थे। 24 ओवर के बाद स्कोर था 111/0. शेन वॉर्न को 6 ओवरों में 37 रन पड़ चुके थे। लंच से कुछ मिनट पूर्व पारी के 26वें ओवर में शेन वॉर्न ने ऑस्ट्रेलिया को पहली सफलता दिलाई, जब उन्होंने ऐन्ड्रू स्ट्राउस को बोल्ड किया। 27वाँ ओवर इस सत्र का आखिरी ओवर था। Brett Lee to Marcus Trescothick. मार्कस ने इस ओवर में 3 चौके और 1 छक्का लगाकर ये सत्र समाप्त किया। 27 ओवर 132 रन पर 1 विकेट। रन रेट 4.88 प्रति ओवर।

33वें ओवर में लंच के बाद मार्कस ट्रेसकॉथिक 90 रन बनाकर माइकल कैस्प्रोविच की गेंद पर आउट हो गए। इसी ओवर में इयन बेल के विकेट के बाद स्कोर 170 पर 3 हो गया।

Counter-attack by KP and Freddie: अपने पहले ही टेस्ट में दोनों पारियों में टीम के टॉप स्कोरर रहे केविन पीटरसन नम्बर 5 पर आए। 37वें ओवर में कप्तान माइकल वॉन के आउट होने के बाद स्कोर हो गया 187/4 और नम्बर 6 पर आए ऑलराउंडर ऐन्ड्रू “फ्रेडी” फ्लिंटॉफ। मैच अभी बराबरी पर चल रहा था, इंग्लैंड की रन रेट अवश्य 5 से ऊपर पर पिछले 23 रनों में 3 विकेट गिर चुके थे। यहाँ से एक और विकेट ऑस्ट्रेलिया की पकड़ मजबूत कर देता। फ्लिंटॉफ बल्ले के साथ लॉर्ड्स टेस्ट की दोनों पारियों में असफल रहे थे। फ्लिंटॉफ ने अपनी पारी की चौथी गेंद पर वॉर्न को एक इनसाइड आउट कवर ड्राइव लगाई और अपना पहला चौका प्राप्त किया।

पारी के 42वें ओवर में शेन वॉर्न को उन्होंने Long On के ऊपर से छक्का लगाया। 44वें ओवर में उन्होंने टांग रखकर शेन वॉर्न की गेंद को मिडविकेट के ऊपर से दर्शक दीर्घा में भेज दिया। अद्भुत शक्ति प्रदर्शन। 49वें ओवर में ब्रेट ली की गेंद पर फ्लिंटॉफ का शॉट, हाफ पुल हाफ हुक, पता नहीं क्या ? पर गेंद स्क्वेयर लेग बाउंड्री के बाहर 6 रन। 50वें ओवर में शेन वॉर्न ने गेंद को थोड़ी ज्यादा फ्लाइट दी, ऑफ स्टम्प की लाइन के बाहर पड़ी इस गेंद को फ्रेडी फ्लिंटॉफ ने Long Off के ऊपर से छक्के के लिए भेज दिया, शेन वॉर्न की गेंदों पर फ्लिंटॉफ का ये तीसरा छक्का था। वॉर्न के अगले ओवर की पहली गेंद पर चौके के साथ फ्रेडी ने 48 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया। इस सत्र के सेकेंड लास्ट ओवर में ब्रेट ली से फ्लिंटॉफ ने 14 रन लिए, दो चौके और एक छक्का। आखिरी गेंद पर आए चौके के साथ फ्लिंटॉफ और पीटरसन के बीच 5वें विकेट के लिए मात्र 96 गेंदों में शतकीय साझेदारी पूरी हो गई। इसमें 68 रन फ्लिंटॉफ के थे (55 गेंदों में)।

चायकाल के समय इंग्लैंड का स्कोर था 54 ओवर में 289/4. 5.35 रन प्रति ओवर। शेन वॉर्न के आँकड़ें हो चुके थे, 17 ओवर में 1 मेडेन, 89 रन और एक विकेट। सवा पाँच की इकॉनमी रेट। ब्रेट ली का हाल और बुरा था, उनके आँकड़ें थे 11-1-72-1, साढ़े छः की इकॉनमी। दिन के दूसरे सत्र में इंग्लैंड ने 27 ओवरों में 157 रन बनाए थे, लगभग 6 की रन रेट से।

चायकाल के तुरन्त बाद फ्लिंटॉफ जेसन गिलेस्पी की गेंद पर आउट हो गए। यह जेसन गिलेस्पी का टेस्ट क्रिकेट में 250वाँ विकेट था। इसके बाद अबतक सहायक भूमिका निभा रहे केविन पीटरसन ने आक्रमण संभाला। 63वें ओवर में KP ने ब्रेट ली को तीन चौके लगाए। 67वें ओवर में ब्रेट ली ने शॉर्ट गेंद की, KP का पुल शॉट… Shot of the match. 6 रन। ब्रेट ली के इसी ओवर में KP ने एक और छक्का लगाना चाहा पर डीप स्कवेयर लेग पर साइमन कैटिच ने कैच पकड़ लिया। 76 गेंद में 71 रन बनाकर केविन पीटरसन 8वें विकेट के रूप में आउट हुए। ऑस्ट्रेलिया के स्कोर था 348/8. इंग्लैंड के आखिरी दो विकेट ने 59 रन जोड़े और पारी 79.2 ओवर में 407 पर समाप्त हुई। रन रेट 5 से ऊपर। दिन के खेल में द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद यह किसी भी इंग्लिश टीम की सबसे तेज रन रेट थी। इंग्लिश बल्लेबाजों ने अपना काम कर दिया था।
ब्रेट ली: 17-1-111-1 (ER 6.52)

Australian Response: मैथ्यू हेडेन का विकेट तो 0 के स्कोर पर ही गिर गया, नम्बर 3 पर आए कप्तान रिकी पॉन्टिंग ने काउंटर अटैक किया, ऑस्ट्रेलिया ने 9वें ओवर में 50 रन पूरे कर लिए। रिकी पॉन्टिंग और लैंगर के बीच 88 रनों की साझेदारी गई। पॉन्टिंग ने 76 गेंदों में 61 रन बनाए। लॉर्डस टेस्ट की दूसरी पारी में 91 रन बनाने वाले माइकल क्लार्क एजबेस्टन में भी अच्छी फॉर्म में दिख रहे थे। 44 ओवर के बाद ऑस्ट्रेलिया का स्कोर 194 पर 3 था। पहली पारी में इंग्लैंड की स्थिति भी कुछ कुछ ऐसी ही थी। यहाँ Ashley Giles की गेंद पर माइकल क्लार्क के 40 रन पर आउट होने से इंग्लैंड को फिर एक अवसर मिला। 62वें ओवर में ऑस्ट्रेलिया का स्कोर हो चुका था 262/5. जस्टिन लैंगर 82 और ऐडम गिलक्रिस्ट 25 पर खेल रहे थे और ऑस्ट्रेलियाई टीम इंग्लैंड के पहली पारी के स्कोर की ओर बढ़ती दिख रही थी। एक घण्टे इस जोड़ी के खेल जाने का अर्थ माइकल वॉन को अच्छे से पता था। युवा गेंदबाज साइमन जोन्स ने जस्टिन लैंगर का विकेट लेकर ऑस्ट्रेलिया को फिर से नीचे बिठा दिया। इस पारी में जब भी ऐसा लगा कि ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजी मैच पर पकड़ बनाने की ओर अग्रसर है। कोई न कोई इंग्लिश गेंदबाज Break Through दिला देता। चाहे 88/1 हो, 194/3 हो या 262 पर 5 हो। ऑस्ट्रेलिया के पुछल्ले बल्लेबाज इंग्लैंड के पुछल्ले बल्लेबाजों की भांति योगदान भी नहीं दे पाए और टीम 308 पर ऑल आउट हो गई। ऐडम गिलक्रिस्ट 49 पर नॉट आउट रहे। बल्ले से 68 रन बनाने वाले फ्रेडी फ्लिंटॉफ ने गेंद से भी बढ़िया प्रदर्शन किया और 3 विकेट लिए।

Magic from Warne and Aussies strike back: इंग्लैंड की टीम 99 रनों की लीड के साथ दूसरी पारी खेलने उतरी। ऑस्ट्रेलिया के “Never say die” ऐटिट्यूड का एक और उदाहरण यहाँ देखने को मिला। 6 ओवर के बाद इंग्लैंड का स्कोर था 25/0. दूसरे दिन का अंतिम ओवर शेष था। कप्तान रिकी पॉन्टिंग ने गेंद अपने सबसे विश्वसनीय गेंदबाज के हाथों में सौंपी। Shane Warne to Andrew Strauss. Around the Wicket. शेन वॉर्न ने गेंद ऑफ स्टम्प के बहुत बाहर फेंकी। स्ट्राउस ने अपना फ्रंट फुट ऑफ साइड की ओर बाहर निकाला और पैड लगाने का प्रयास किया, गेंद ने खतरनाक स्पिन लेते हुए पैड को बीट किया और एंड्रू स्ट्राउस के नज़रों के सामने से गुजरते हुए लेग स्टम्प पर जा लगी। माइकल स्लेटर जोश में आ गए, “Bowled him… How about it. Absolutely brilliant from Shane Warne.” पूर्व इंग्लिश कप्तान Michael Atherton ने कहा, “He’s made a few batsmen look a bit foolish over the years. There’s is no disgrace in Andrew Strauss looking a bit foolish.”

पहली पारी में ब्रेट ली को बहुत मार पड़ी थी, दूसरी पारी में वे हिसाब बराबर करने के मूड में थे। तीसरे दिन के अपने तीसरे ओवर में उन्होंने मार्कस ट्रेसकॉथिक और माइकल वॉन को आउट कर दिया। माइकल वॉन के विकेट का वीडियो आज भी सोशल मीडिया पर घूमता रहता है। 90 मील प्रति घण्टे की ये गेंद वॉन के डिफेंस को परास्त करते हुए ऑफ स्टम्प पर लगी और स्टम्प उखड़कर Cartwheel करता हुआ पीछे। अगले ओवर में ब्रेट ली ने पिछले दिन के नाइट वॉचमैन मैथ्यू हॉगार्ड का विकेट लेकर इंग्लैंड का स्कोर 31/4 कर दिया।

सीरीज में लगातार 3 अर्धशतक लगा चुके केविन पीटरसन ने शेन वॉर्न को दो छक्के लगाकर फिर से खतरनाक मूड में होने का संकेत दिया पर इस बार वॉर्न ने उन्हें मात्र 20 रन पर आउट कर दिया। इंग्लैंड का स्कोर था 72/5 और लीड 171. ऑस्ट्रेलिया को वापसी की उम्मीद दिखाई पड़ने लगी थी। तीसरे दिन लंच तक इंग्लैंड का स्कोर था 95/6. टोनी ग्रेग कह चुके थे, “Boy this is trouble.” लंच के बाद ब्रेट ली ने यह स्कोर 101/7 कर दिया और 45वें ओवर में शेन वॉर्न ने दो विकेट लेकर इसे 131/9 कर दिया।

It’s that man again: फ्रेडी फ्लिंटॉफ एक बार फिर से इंग्लैंड की सबसे बड़ी शक्ति बनकर सामने आए। उनके इर्द गिर्द विकेट गिरते रहे पर उन्होंने रन बनाना जारी रखा। पिछली पारी की फॉर्म वो साथ लेकर आए थे। 135/9 होने के बाद ऑस्ट्रेलिया को एक सुनहरा अवसर मिल गया था लीड को 240 के अंदर सीमित करने का। फ्लिंटॉफ ने ऐसा होने नहीं दिया। 46वें ओवर में उन्होंने माइकल कैस्प्रोविच को मिडविकेट के ऊपर से छक्का लगाया। दो गेंद बाद पुनः वही शॉट और गेंद पुनः दर्शक दीर्घा में। इसी शॉट के साथ फ्लिंटॉफ का अर्धशतक पूरा हो गया।

50वें ओवर में ब्रेट ली की एक स्लोअर गेंद। फ्लिंटॉफ क्रीज में अंदर गए, अगला पैर सामने से हटाया और long on के ऊपर से गेंद को स्टेडियम के सबसे ऊपरी हिस्से में भेज दिया। यह इस मैच का सबसे लंबा छक्का था। अगली गेंद पर फ्लिंटॉफ का कट और चौका। ब्रेट ली की अगली गेंद ओवरपिच की हुई, फ्लिंटॉफ़ ने दो गेंद पहले खेला गया शॉट फिर खेला और एक और छक्का। यह फ्लिंटॉफ का इस पारी का चौथा और इस मैच में उनका 9वाँ छक्का था। आखिरी विकेट के लिए फ्लिंटॉफ ने साइमन जोन्स के साथ 51 रन जोड़ दिए, जिसमें 35 उन्होंने स्वयं बनाए। 53वें ओवर में शेन वॉर्न वॉर्न की गेंद को आगे निकलकर बाउंड्री पार कराने में प्रयास में फ्लिंटॉफ चूके और शेन वॉर्न को इस पारी का 6ठा विकेट मिल गया। यह शेन वॉर्न के टेस्ट करियर का 599वाँ विकेट था। शेन वॉर्न ने 23.3 ओवर में 46 रन देकर 6 विकेट लिए थे। फ्लिंटॉफ ने 86 गेंदों में 73 रन बनाए थे और इंग्लैंड की लीड को 281 तक पहुँचा दिया था।

The Run-Chase: 282 रनों के लक्ष्य का पीछा कर रही ऑस्ट्रेलिया ने ठोस शुरुआत की और 12 ओवरों में बिना विकेट के 47 रन बना लिए। कप्तान माइकल वॉन ने इस मैच के हीरो ऐन्ड्रू फ्लिंटॉफ को गेंद सौंपी। पहली पारी में ऑस्ट्रेलिया के आखिरी दोनों विकेट फ्लिंटॉफ ने लगातार दो गेंदों पर लिए थे। इस पारी की अपनी पहली गेंद फेंकते समय वे हैट्रिक पर थे। हैट्रिक तो नहीं मिल सकी पर फ्लिंटॉफ ने अपनी दूसरी गेंद पर जस्टिन लैंगर को बोल्ड कर दिया।

Flintoff to Ponting: नम्बर 3 पर आए कप्तान रिकी पॉन्टिंग। फ्लिंटॉफ के ओवर में अभी चार गेंदें शेष थीं। पहली गेंद पर LBW की जोरदार अपील, दूसरी पर पॉन्टिंग के बल्ले का बाहरी किनारा लगकर गेंद गली में। कॉमेंटेटर बात कर रहे थे कि इस ओवर में अभी कुछ न कुछ होगा। तीसरी गेंद ऑफ स्टम्प की लाइन के बाहर टप्पा खाकर तेजी से अंदर आई और पैड पर लगी। फ़िर से LBW की जोरदार अपील पर अंपायर बिली बाउडेन ने कहा “नॉट आउट”. ओवर की आखिरी गेंद ऑफ स्टम्प ऑफ स्टम्प के काफी बाहर, रिकी पॉन्टिंग ने इसे खेलने का प्रयास नहीं किया, पर यह नो-बॉल निकली, जिसका अर्थ ये कि फ्लिंटॉफ को इस ओवर में एक गेंद और करनी होगी। यह एक अतिरिक्त गेंद “Blessing in disguise” सिद्ध हुई। एजबेस्टन में उपस्थित इंग्लैंड के सारे समर्थक फ्लिंटॉफ का उत्साह बढाते हुए, अंतिम गेंद, 142.1 KPH, गुडलेंथ पर टप्पा खाकर बाहर निकलती हुई, पॉन्टिंग के बल्ले का बाहरी किनारा लेकर विकेटकीपर गेरेन्ट जोन्स के दस्तानों में। ऑस्ट्रेलियाई रिकी पॉन्टिंग शून्य पर पवेलियन वापस। बल्ले से मैच बदलने वाले फ्लिंटॉफ अब गेंद से भी चमत्कार कर रहे थे।

Aussie Collapse: मैथ्यू हेडेन और डेमियन मार्टिन ने स्कोर को 82 तक पहुँचाया। अब जीत के लिए 200 रन चाहिए थे और 8 विकेट हाथ में थे। समय की कोई कमी नहीं, अभी तीसरे दिन का दूसरा सत्र ही चल रहा था। साइमन जोन्स की आउटस्विंगर पर कवर ड्राइव लगाने के प्रयास में मैथ्यू हेडेन के बल्ले का किनारा लगा और पहली स्लिप में खड़े मार्कस ट्रेसकॉथिक ने बाईं ओर डाइव लगाते हुए शानदार कैच पकड़ लिया।

कोई बड़ी साझेदारी बन नहीं रही थी, 25, 27 ऐसी ही साझेदारियाँ बन रही थीं। 107 पर चौथा (डेमियन मार्टिन) और 134 पर (साइमन कैटिच) 5वाँ विकेट गिरा। 136 रन पर छठे विकेट के रूप में ऐडम गिलक्रिस्ट के आउट होने के बाद ऑस्ट्रेलिया के पास एक मात्र विशेषज्ञ बल्लेबाज शेष था माइकल क्लार्क के रूप में। 137 पर 7वाँ विकेट भी गिर गया जेसन गिलेस्पी के रूप में। अब प्रश्न “If” नहीं “When” का था। लगने लगा था यह टेस्ट मैच तीसरे दिन ही समाप्त हो जाएगा, क्योंकि अभी दिन के खेल में कम से कम 10 ओवर शेष थे।

Stephen Harmison’s Staggering Gamble: माइकल क्लार्क और शेन वॉर्न के बीच एक साझेदारी पनपनी आरम्भ हुई। 43 ओवर बाद स्कोर जा पहुँचा 174/7. दिन का अंतिम ओवर कर रहे थे स्टीफन हार्मिसन। क्लार्क ने तीन गेंदे सम्भलकर खेल ली थीं। हार्मिसन की चौथी गेंद, स्लोअर गेंद और क्लार्क बोल्ड। कॉमेंट्री में मार्क निकलस की आवाज़ आई, “Oh Stephen Harmison. With the slower ball. One of the great balls. Given the moment, given the match and given the batsman. That is a staggering gamble.” तीसरे दिन का खेल यहीं समाप्त और स्कोर 175/8.

My name is Warne, Shane Warne: दूसरी पारी में 6 और मैच में 10 विकेट लेने वाले शेन वॉर्न 7वाँ विकेट गिरने के बाद बल्लेबाजी करने आए थे। तीसरे दिन उन्होंने Ashley Giles को 2 छक्के भी लगाए थे। चौथे दिन का खेल आरम्भ होने पर किसी को ऐसा नहीं लगता होगा कि ये मैच ऑस्ट्रेलियाई टीम जीत सकती है। ऑस्ट्रेलिया को 107 रन चाहिए थे और इंग्लैंड को मात्र 2 विकेट। ऑस्ट्रेलियाई टीम हार मानने के लिए जानी नहीं जाती। शेन वॉर्न 20 रन पर खेल रहे थे। वॉर्न और ली ने 9वें विकेट की साझेदारी शुरू कर दी। दिन की पहली 28 गेंदों में दोनों ने 38 रन जोड़ दिए और ऑस्ट्रेलिया का स्कोर 200 के पार कर दिया। 52 ओवर के बाद स्कोर हो चुका था 220/8. साझेदारी हो चुकी थी 45 रन की और अब इंग्लिश खेमे में भी चिंताएँ बढ़ने लगी थीं। शेन वॉर्न 42 पर खेल रहे थे और ब्रेट ली 18 पर।

जैसा इस मैच में अबतक होता आया था एक बार फिर वही हुआ। जैसे ही ऑस्ट्रेलिया की उम्मीदें जागनी आरम्भ हुईं, फ्रेडी फ्लिंटॉफ की गेंद शेन वॉर्न के लेग स्टम्प पर जा लगी। Back and Across मूवमेंट के दौरान वॉर्न ने लेग स्टम्प पूरी खुली छोड़ दी थी। यह फ्लिंटॉफ का इस पारी में चौथा और मैच में 7वाँ विकेट था।

Last Wicket Stand: 220/9. अभी भी 62 रनों की आवश्यकता। 55वें ओवर में 9 और 56वें में 13 रन आए, इस दौरान 4 चौके लगे। स्कोर 249/9, ऑस्ट्रेलिया को 33 रनों की आवश्यकता। इंग्लैंड की टीम अभी भी फेवरेट थी पर यह मैच Nail Biting होता जा रहा था। 59वें ओवर में 7 रन आने के साथ ऑस्ट्रेलिया को अब मात्र 20 रन चाहिए थे। 61वें ओवर में ब्रेट ली ने हार्मिसन को एक चौका लगाया और 62वें ओवर में ऐन्ड्रू फ्लिंटॉफ ने एक गेंद लेग स्टम्प के इतने बाहर फेंकी कि विकेटकीपर के पास कोई अवसर न रहा। इस ओवर में 9 रन आए। स्कोर 276/9. आवश्यक रन अब सिंगल डिजिट में आ चुके थे। 63वें और 64वें ओवर में एक एक रन आए और अब ऑस्ट्रेलिया को मात्र 4 रन चाहिए थे।

The End: 65वाँ ओवर स्टीफन हार्मिसन कर रहे थे। पहली गेंद ऑफ स्टम्प के बाहर फुलटॉस, ब्रेट ली की स्क्वेयर ड्राइव, एक रन। गेंद बड़ी तेजी से फील्डर की ओर गई। शेन वॉर्न ने अपनी ऑटोबायोग्राफी “No Spin” में लिखा है, A couple of yards either way and it would have been over.”

ओवर की तीसरी गेंद, माइकल कैस्प्रोविच स्ट्राइक पर, शॉर्ट गेंद, कैस्प्रोविच ने Duck करने का भी प्रयास किया और गेंद को रोकने का भी, दोनों प्रयास अधूरे. गेंद दस्ताने पर लगी, कीपर गेरेन्ट जोन्स ने लेग साइड की ओर डाइव लगाई और कैच पकड़ा। अंपायर बिली बाउडेन ने उंगली उठा दी और इंग्लैंड ने यह टेस्ट मैच दो रन से जीत लिया।

माइकल कैस्प्रोविच निराश होकर क्रीज के बाहर बैठ गए, दूसरे छोर पर ब्रेट ली का हाल भी यही था। ऐन्ड्रू फ्लिंटॉफ द्वारा ब्रेट ली को सान्त्वना देने वाली फोटो सबने देखी है। शेन वॉर्न ने अपनी किताब में लिखा है, “These days, DRS would have overturned it because the glove the ball hit was just off the handle.”

मैच की चारों पारियों में बल्ले और गेंद दोनों से ऐतिहासिक प्रदर्शन करने वाले ऐन्ड्रू फ्लिंटॉफ मैन ऑफ द मैच घोषित हुए। फ्लिंटॉफ ने कहा, “We’ve got to believe we can go on and win the Ashes.” इंग्लिश समर्थकों में लॉर्ड्स टेस्ट के बाद छाया निराशा का वातावरण समाप्त हो गया था।

सीरीज 1-1 से बराबर हो चुकी थी और ओल्ड ट्रैफर्ड, ट्रेंट ब्रिज और ओवल टेस्ट शेष थे।

To be continued.

The Ashes 2005-06: Greatest Ashes Series of all Time.Part-1

Flashback: Mike Gatting के नेतृत्व में इंग्लैंड की टीम ने 1986-87 में ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया और 2-1 से ऐशेज़ सीरीज इंग्लैंड के नाम कर दी। 1989 में महान ऑस्ट्रेलियाई कप्तान Allan Border के नेतृत्व में ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड ज़ाक़र ऐशेज़ 4-0 से जीत ली। इसके उपरांत ऑस्ट्रेलिया की टीम खेल के हर क्षेत्र में अपनी कुशलता में वृद्धि करती गई और इंग्लैंड को हर ऐशेज़ में एक के बाद पटखनी देती रही।

18 वर्षों तक अनवरत यह ऐशेज ट्रॉफी इंग्लैंड की टीम से दूर रही। इसी कालखंड में क्रिकेट इतिहास के महानतम गेंदबाज (Arguably) शेन वॉर्न ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया। स्टीव वॉ एक महान बल्लेबाज बने। मार्क टेलर, मार्क वॉ, माइकल स्लेटर, जस्टिन लैंगर, रिकी पॉन्टिंग, मैथ्यू हेडेन, डेमियन मार्टिन जैसे बल्लेबाज और ग्लेन मक्ग्रा, जेसन गिलेस्पी, ब्रेट ली जैसे गेंदबाज टीम में आए। टेस्ट क्रिकेट इतिहास के महानतम विकेटकीपर बल्लेबाज ऐडम गिलक्रिस्ट का पदार्पण भी इसी कालखंड में हुआ। ऑस्ट्रेलिया ने 1989-90 से लेकर 2002-03 तक हुई 8 ऐशेज़ सीरीज लगातार जीती, 4-0, 3-0, 4-1, 3-1, 3-2, 3-1, 4-1-4-1 से।

New England: इंग्लैंड में होने वाली ऐशेज़ सीरीज 2005-06 के समय ऑस्ट्रेलिया विश्व की नम्बर 1 टेस्ट टीम थी और इंग्लैंड नम्बर 2. माइकल वॉन के नेतृत्व वाली इस इंग्लिश टीम में अधिकतर खिलाड़ी ऐसे थे, जिन्हें ऐशेज़ सीरीज हारने का अनुभव नहीं था, क्रिकेटिंग टर्म्स में कहें तो कोई “Past Baggage” नहीं था। इंग्लैंड के पास एक उच्च कोटि का तेज गेंदबाजी आक्रमण था। स्टीफन हार्मिसन, मैथ्यू हॉगार्ड, ऐन्ड्रू फ्लिंटॉफ और साइमन जोन्स। बल्लेबाजी में केविन पीटरसन जैसे आक्रामक बल्लेबाज को इस टीम का हिस्सा बनाया गया था। ऐशेज़ आरम्भ होने पूर्व इंग्लैंड ने अपने पिछले 18 में से 14 टेस्ट जीते थे और लगातार 6 टेस्ट सीरीज जीती थीं।

ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पॉन्टिंग ने सीरीज आरम्भ होने से पूर्व ही कह दिया था 1989 के बाद यह Closest Ashes Series होगी। रिकी पॉन्टिंग के नेतृत्व में ऑस्ट्रेलिया पहली बार ऐशेज़ खेल रही थी। उनके पूर्ववर्ती दो कप्तानों मार्क टेलर और स्टीव वॉ ने अपनी कप्तानी में कभी ऐशेज़ हारी नहीं थी।

The fun begins: 21 जुलाई 2005। सीरीज का पहला टेस्ट लॉर्ड्स में खेला जा रहा था। स्टेडियम बिल्कुल हाउसफुल। रिकी पॉन्टिंग ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का निर्णय लिया और पहले दिन ही ऑस्ट्रेलिया की टीम 40.2 ओवरों में मात्र 190 पर चायकाल से पूर्व ऑल आउट हो गई। स्टीफन हार्मिसन ने 43 रन देकर पाँच विकेट लिए। मैच की दूसरी ही गेंद जस्टिन लैंगर की कोहनी में लगी, लैंगर और मैथ्यू हेडन शॉर्ट पिच बॉलिंग और बाउंसरों के सामने असहज दिखे, हेडन के आउट होने पर आए रिकी पॉन्टिंग को स्टीफन हार्मिसन की गेंद लगी और उनके गाल से खून बहने लगा। सीरीज के पहले ही सत्र में इस New England ने संदेश दे दिया था कि इस टीम को पहले वाली इंग्लैंड न समझा जाए।

Number 500 for the great man:
गेंदबाज तो ऑस्ट्रेलिया के पास भी थे। चायकाल के बाद फेंकी गई पहली गेंद के साथ ही क्रिकेट इतिहास के महानतम तेज गेंदबाजों में से एक ग्लेन मक्ग्रा ने पारी के सातवें ओवर में मार्कस ट्रेसकॉथिक को पवेलियन भेज दिया और करियर का 500वाँ टेस्ट विकेट पूरा किया। इसी ओवर में उन्होंने दूसरे ओपनर ऐन्ड्रू स्ट्राउस का विकेट भी लिया। 17वें ओवर में इंग्लैंड के स्कोर था 21 रन पर 5 विकेट, सभी 5 ग्लेन मक्ग्रा के नाम। ट्रेसकॉथिक 4, स्ट्राउस 2, कप्तान माइकल वॉन 3, इयन बेल 4 और स्टार ऑल राउंडर ऐन्ड्रू फ्लिंटॉफ 0 पर वापस लौट चुके थे।

The Arrival of Kevin Pietersen (KP): केविन पीटरसन जैसा कोई बल्लेबाज इंग्लैंड की क्रिकेट में अभी तक नहीं आया था। लॉर्ड्स में ऐशेज़ सीरीज में अपना टेस्ट डेब्यू कर रहे पीटरसन ने विकेटकीपर गेरेन्ट जोन्स के साथ 6ठे विकेट के लिए 58 रन जोड़े। यह इस पारी की सबसे बड़ी साझेदारी सिद्ध हुई। दूसरे दिन के पहले सत्र में शेन वॉर्न की गेंद पर जब 101 के स्कोर पर इंग्लैंड का 8वाँ विकेट गिरा तब KP ने आक्रमण का विचार किया। अभी तक वे 81 गेंदों में 36 पर खेल रहे थे। अगले ही ओवर में उन्होंने ग्लेन मक्ग्रा को एक क्लब लेवल के बॉलर की भाँति ट्रीट करते हुए लगातार 3 बाउंड्री लगाई, 4,6,4. पहली गेंद को KP ने गेंदबाज के पास के स्ट्रेट बाउंड्री के बाहर भेज दिया, दूसरी गेंद पर आया इस पारी का सबसे शानदार शॉट, KP ने गेंद की पिच तक पहुँचकर उसे मक्ग्रा के सिर के ऊपर से उठा दिया, गेंद आकाश में बहुत ऊपर तक गई और सीमारेखा के पार हो गई। तीसरी गेंद पर केविन ने कवर ड्राइव करके चौका लगाया और अपनी पहली ही ऐशेज़ पारी में पचास रन पूरे कर लिए। अगले ओवर में KP ने शेन वॉर्न को मिडविकेट के ऊपर से छक्का जड़ा, अगली गेंद को फिर से दर्शक दीर्घा में भेजने के प्रयास में KP का शॉट मिडविकेट और Long On के बीच सीमारेखा से कुछ मीटर पहले कैच कर लिया गया।

दसवें विकेट के लिए 33 रन की साझेदारी के बाद इंग्लैंड की टीम 155 रनों पर ऑल आउट हो गई। 35 रन की लीड के साथ उतरी ऑस्ट्रेलिया ने दूसरी पारी में भी अपना पहला विकेट शीघ्र ही गँवा दिया। मैथ्यू हेडेन (34) और कप्तान रिकी पॉन्टिंग (42) के योगदानों ने स्कोर को 100 तक पहुँचाया।

Michael Clarke answers his critics:
माइकल क्लार्क को लॉर्ड्स में सीरीज का पहला ही टेस्ट खेलने का अवसर तो मिल गया था पर पहली पारी में वे मात्र 11 रन पर आउट हो गए थे। ऑस्ट्रेलियाई टीम में उनका स्थान संकट में था और ब्रैड हॉज को उनके स्थान पर लाने की बातें होने लग गई थीं। माइकल क्लार्क ने दूसरी पारी में नम्बर 5 पर खेलते हुए दबाव में होते हुए भी आक्रामक बल्लेबाजी की, 106 गेंदों में उन्होंने 15 चौकों के साथ 91 रन बनाए और डेमियन मार्टिन (65) के साथ चौथे विकेट के लिए 155 रन जोड़कर इस मैच में ऑस्ट्रेलिया को ड्राइविंग सीट पर बिठा दिया। साइमन कैटिच ने भी 67 रनों का योगदान दिया और ऑस्ट्रेलिया की पारी 384 पर समाप्त हुआ।

इंग्लैंड को यह मैच जीतने के लिए विश्व रिकॉर्ड बनाने की आवश्यकता थी। आजतक टेस्ट क्रिकेट में चौथी पारी में कभी 420 रन चेज नहीं हुए थे। ट्रेसकॉथिक और स्ट्राउस ने पहले विकेट के लिए 80 रन जोड़े पर शेन वॉर्न के एक शानदार स्पेल के बाद स्कोर शीघ्र ने 119 पर 5 हो चुका था। इस पारी में भी केविन पीटरसन इंग्लैंड के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज रहे, उन्होंने 79 गेंदों में 64 रन बनाए और नॉट आउट रहे। पहली पारी में शुरुआती 5 विकेट लेने वाले मक्ग्रा ने दूसरी पारी में पुछल्ले बल्लेबाजों का सफाया किया और फिर से 4 विकेट लिए। पारी के 59वें ओवर में मक्ग्रा की गेंद पर शेन वॉर्न ने फर्स्ट स्लिप में इंग्लैंड के नम्बर 11 साइमन जोन्स के कैच पकड़ा और ऑस्ट्रेलिया को 239 रनों से टेस्ट मैच जीता दिया। ऑस्ट्रेलियाई टीम एक बार फिर से ऐशेज़ सीरीज में 1-0 की बढ़त ले चुकी थी।

मैच में 9 विकेट लेने वाले ग्लेन मक्ग्रा मैन ऑफ द मैच चुने गए। महान कॉमेंटेटर और पत्रकार Peter Roebuck ने इस टेस्ट के पहले दिन 5 विकेट लेने वाले मक्ग्रा के लिए लिखा था, “In theory he cannot blow out a candle. And yet he might as well have been sending down hand grenades.”

माइकल वॉन की New England को एक करारा झटका लग चुका था, पर उनकी इस टीम में वापसी करने की क्षमता थी।

To be continued.

The Greatest and most thrilling ODI of all time.

दो दशक तक प्रतिबंध झेलने के पश्चात दक्षिण अफ्रीका ने वर्ष 1991 में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी की और वर्ष 1992 में विश्वकप सेमीफाइनल तक पहुँची। वर्षा से दक्षिण अफ्रीका क्रिकेट टीम की शत्रुता इसी मैच में सबको पता चली। डकवर्थ लुइस नियम का शिकार होकर Proteas को इस विश्वकप से बाहर होना पड़ा।

1996 में दक्षिण अफ्रीका विश्वकप की सर्वश्रेष्ठ टीम थी, लीग स्तर पर इसने अपने सभी पाँच मैच जीते थे पर क्वार्टरफाइनल में इस टीम के सामने आए ब्रायन चार्ल्स लारा। ब्रायन के बल्ले से निकली विश्वकप इतिहास की महान पारियों में से एक ने टूर्नामेंट की अबतक की सर्वश्रेष्ठ टीम को विश्वकप से बाहर कर दिया।

1999: दक्षिण अफ्रीका के पास एक बार फिर से एक शक्तिशाली टीम थी। गैरी कर्स्टन, हर्शल गिब्स, जैक कैलिस, हैंसी क्रोनिए, जोंटी रोड्स, मार्क बाउचर, शॉन पॉलक, लैंस क्लूज़नर और ऐलन डॉनल्ड जैसे खिलाड़ी। दक्षिण अफ्रीका 5 में से 4 मैच जीतकर ग्रुप A में शीर्ष पर रही, Super Six में दक्षिण अफ्रीका ने 5 में से 3 मैच जीते और सेमीफाइनल में पहुँची।

13 जून 1999 को Headingley में हुए Super Six के आखिरी मैच में दक्षिण अफ्रीका ने ऑस्ट्रेलिया के सामने 273 रनों का लक्ष्य रखा। हर्शल गिब्स ने शतक बनाया था और लैंस क्लूजनर ने अंतिम ओवरों में 21 गेंदों में 36 रन बनाए थे। रन चेज के दौरान ऑस्ट्रेलिया 12वें ओवर में ही 48 पर 3 विकेट गँवा कर संकट में थी। नम्बर 5 पर आए स्टीव वॉ। स्टीव वॉ ने कई बार ऑस्ट्रेलिया को संकट की स्थिति से उबारा था, आज पुनः उनके पास यही दायित्व था। ऑस्ट्रेलिया के लिए यह एक Must Win मैच था सेमीफाइनल में पहुँचने के लिए। स्टीव वॉ ने रिकी पॉन्टिंग के साथ चौथे विकेट के लिए 126 रन की साझेदारी की। पारी के 31वें ओवर में स्टीव वॉ ने क्लूज़नर की गेंद को मिडविकेट की ओर फ्लिक किया। हर्शल गिब्स ने गेंद को पकड़ तो लिया पर सेलिब्रेट करने के लिए गेंद को हवा में उछालने की जल्दी में गेंद उनके हाथ से निकल गई।

टेलीविजन कॉमेंट्री में David Gower: “That’s out.”

Tony Greig: “Oh he’s dropped it, it’s unbelievable. He was throwing it up. He thought he had it. It was a little lolly-pop.”

ऐसी बातें सुनी जाती हैं कि स्टीव वॉ ने गिब्स से कहा, “You’ve just dropped the World Cup son.”

इस समय ऑस्ट्रेलिया का स्कोर था 152 पर 3. स्टीव वॉ ने इसके आगे दक्षिण अफ्रीका को कोई अवसर नहीं दिया और 110 गेंदों में 120 नॉट आउट रन बनाए और 50वें ओवर में 273 का लक्ष्य प्राप्त कर लिया। इस समय किसी को अनुमान नहीं रहा होगा कि इस मैच में स्टीव वॉ का कैच छोड़ना दक्षिण अफ्रीका को कितना भारी पड़ेगा। 4 दिन बाद 17 जून को एजबेस्टन में सबको पता चल गया।

17 जून 1999, एजबेस्टन: विश्वकप सेमीफाइनल। दक्षिण अफ्रीका vs ऑस्ट्रेलिया। SuperSix में ऑस्ट्रेलिया से पराजित होने के उपरांत भी दक्षिण अफ्रीका की टीम इस सेमीफाइनल में फेवरेट थी। हैंसी क्रोनिए ने टॉस जीतकर गेंदबाजी का निर्णय लिया। शॉन पॉलक ने पहले ही ओवर में मार्क वॉ को 0 पर आउट कर दिया। 17वें ओवर की समाप्ति पर जब ऑस्ट्रेलिया 68 रन पर 4 विकेट खो चुकी थी।

क्रोनिए का पहले गेंदबाजी का निर्णय एकदम सही लग रहा था। स्टीव वॉ ने एक बार फिर टीम को संभाला और माइकल बेवन के साथ 5वें विकेट के लिए 90 रनों की साझेदारी की। स्टीव ने 76 गेंदों में 58 और बेवन ने 101 गेंदों में 65 रन बनाकर जैसे तैसे स्कोर को 213 तक पहुँचाया।

शॉन पॉलक ने 9.2 ओवरों में 36 रन देकर 5 और ऐलन डॉनल्ड ने 10 ओवरों में 32 रन देकर 4 विकेट लिए।

SuperSix में स्टीव वॉ का कैच छोड़ने वाली त्रुटि सुधारने उतरे हर्शल गिब्स ने दक्षिण अफ्रीका को बढ़िया शुरुआत दी। उन्होंने गैरी कर्स्टन के साथ मिलकर पहले विकेट के लिए 48 रन जोड़ लिए। अब लगने लगा था कि 4 दिन पहले Headingley में उन्होंने सिर्फ कैच ड्रॉप किया था, वर्ल्ड कप नहीं।

Shane Warne: The Magician.
3 वर्ष पूर्व 1996 में मोहाली में हो रहे विश्वकप सेमीफाइनल जब वेस्ट इंडीज़ 208 रनों का पीछा करते हुए 165 पर 2 थी, तब स्पिन के जादूगर शेन वॉर्न की चमत्कारी गेंदबाजी के आगे वेस्ट इंडीज़ टीम टिक नहीं पाई। वॉर्न 4 विकेट लेकर मैन ऑफ द मैच रहे।

1999 विश्वकप सेमीफाइनल में भी शेन वॉर्न ने यही किया। 13वें ओवर में गेंदबाजी पर आए वॉर्न ने पहले ही ओवर में हर्शल गिब्स को बोल्ड कर दिया। लेग स्टंप की लाइन के बाहर पिच हुई इस गेंद ने गिब्स को पूरी तरह से नचाते हुए ऑफ स्टंप को हिट किया। शेन वॉर्न की गेंदों को मिलती “Drift” को देखकर यह स्पष्ट हो चला था कि यह रन चेज दक्षिण अफ्रीका के आसान नहीं होने वाली।

वॉर्न ने अगले ओवर की पहली गेंद पर स्वीप शॉट खेलते गैरी कर्स्टन को बोल्ड किया और उसी ओवर में कप्तान हैंसी क्रोनिए को पहली स्लिप में मार्क वॉ के हाथों कैच कराकर मैच की दिशा ही परिवर्तित कर दी। (हालाँकि Replay से पता लगा कि गेंद बल्ले पर लगी नहीं थी, पर अंपायर डेविड शेफर्ड के त्रुटिपूर्ण निर्णय ने दक्षिण अफ्रीका को तीसरा झटका दे दिया।) 14 गेंदों में दक्षिण अफ्रीका का स्कोर 48/0 से 53/3 हो चुका था, जो थोड़ी देर बाद डैरिल कलीनन के रन आउट होने पर 61/4 हो गया।

5वें विकेट के लिए जैक कैलिस और जोंटी रोड्स ने 84 रन जोड़े। जोंटी के आउट होने के बाद कैलिस ने शॉन पॉलक के साथ मिलकर दक्षिण अफ्रीका का स्कोर 44 ओवर के बाद 161 तक पहुँचाया। अभी 5 विकेट शेष थे, टूर्नामेंट के हीरो लैंस क्लूजनर का आना शेष था। कैलिस और पॉलक आराम से खेल रहे थे, ऐसा लगने लगा था कि जो 1992 और 1996 में न हो सका वो 1999 में अवश्य होगा।

45वें ओवर में गेंद एक बार पुनः शेन वॉर्न के हाथों में आई। शेन वॉर्न के अबतक के आँकड़े थे– 9 ओवर, 4 मेडन, 14 और 3 विकेट। उनकी पहली ही गेंद पर पॉल राइफल में कैलिस का न सिर्फ कैच छोड़ा, बल्कि 3 रन भी दे दिए। अगली गेंद पर शॉन पॉलक ने बाहर निकलकर Long On के ऊपर से एक लम्बा छक्का लगा दिया। तीसरी गेंद पर पॉलक की इनसाइड आउट कवर ड्राइव से चार रन आए और चौथी गेंद पर सिंगल। इन चार गेंदों में शेन वॉर्न ने इतने रन दे दिए थे जितने उन्होंने अपने पिछले 9 ओवर में दिए थे। मैच की दिशा परिवर्तित करने के लिए अभी भी उनके पास दो गेंदें थीं। ओवर की 5वीं गेंद पर वॉर्न ने कैलिस को कवर में खड़े स्टीव वॉ के हाथों कैच करा दिया। अपने हिस्से के 10 ओवर पूरे करने के बाद उनके आँकड़े थे, 10-4-29-4.

The collapse: कैलिस के विकेट के अगले ओवर में ही शॉन पॉलक भी डेमियन फ्लेमिंग की गेंद पर बोल्ड हो गए। 49वें ओवर में ग्लेन मक्ग्रा ने मार्क बाउचर का मिडिल स्टम्प उखाड़ दिया।

इसी ओवर की चौथी गेंद पर क्लूज़नर को स्ट्राइक देने के प्रयास में दूसरा रन लेते स्टीव एल्वर्दी के रन आउट होने के साथ स्कोर 198 पर 9 हो गया।

The Lance Klusener Show: 9वाँ विकेट गिरने के बाद दक्षिण अफ्रीका को 8 गेंदों में 16 रनों की आवश्यकता थी। नम्बर 8 पर बल्लेबाजी करने आए लैंस क्लूजनर ने इस विश्वकप में अबतक 7 पारियों में 250 रन बनाए थे। टूर्नामेंट में एक बार फिर मैच जीताने का दायित्व क्लूजनर पर था। 49वें ओवर में मक्ग्रा की पाँचवीं गेंद को क्लूज़नर ने Long On के ऊपर से सीमारेखा के बाहर भेजना चाहा। Long On पर खड़े पॉल राइफल ने न सिर्फ कैच छोड़ा बल्कि गेंद उनके हाथ से लगकर 6 रन के लिए चली गई, क्लूज़नर ने अंतिम गेंद पर सिंगल लिया और स्ट्राइक अपने पास रखी। कई लोगों ने पॉल राइफल के लिए अवश्य कहा होगा, “You’ve just dropped the World Cup son.”

अंतिम ओवर में दक्षिण अफ्रीका को फाइनल में पहुँचने के लिए 9 रन चाहिए थे। डेमियन फ्लेमिंग के हाथों में गेंद थी। पहली गेंद, Fleming to Klusener: “That’s a tremendous shot for four.” पूरा कॉमेंट्री बॉक्स जोश में था। क्लूज़नर की कवर ड्राइव ने बाउंड्री पर खड़े फील्डर को कोई अवसर नहीं दिया। स्कोर 209 पर 9. 5 गेंदों में 5 रनों की आवश्यकता। अगली गेंद Fleming to Klusener: “Tremendous blow again and that’s four more. What a stroke from Klusener. What can you say about it.” एक बार फिर उसी दिशा में क्लूज़नर के दूसरे चौके ने स्कोर बराबर कर दिए। क्लूज़नर जब क्रीज पर आए थे तो दक्षिण अफ्रीका को 31 गेंदों में 39 रन बनाने थे, इनमें से 31 रन लैंस क्लूज़नर मात्र 14 गेंदों में बना चुके थे।

स्कोर 213 पर 9, फाइनल में पहुँचने के लिए 4 गेंदों में 1 रन की आवश्यकता। टाई की स्थिति में ऑस्ट्रेलिया फाइनल में। स्टीव वॉ ने सभी फील्डरों को सर्कल में बुला लिया।

The disappointment: तीसरी गेंद पर क्लूजनर का शॉट मिड ऑन की ओर गया, Non Striker End पर ऐलन डॉनल्ड रन आउट होने से बचे। अगली गेंद पर ऐसा न हो सका। क्लूजनर ने गेंद को सामने खेला और दौड़ पड़े। डॉनल्ड थोड़े सोच में पड़कर रुक गए, शायद उन्हें लगा कि गेंदबाज फ्लेमिंग अपने फॉलो थ्रू में ही गेंद को पकड़ लेंगे, उन्होंने वापस घूमकर अपनी क्रीज में बैट रखा। क्लूज़नर उनसे दौड़ने को कहते रहे। डॉनल्ड के दौड़ना आरम्भ करने से पूर्व ही क्लूजनर उनके पास आ चुके थे। दोनों के दोनों बल्लेबाज Non Striker End पर एक साथ। लैंस क्लूज़नर समझ चुके थे कि डॉनल्ड ये रन पूरा नहीं कर पाएंगे। क्लूजनर क्रीज में घुसने के बाद आगे बढ़ते चले गए, बिना पीछे देखे पवेलियन की ओर बढ़ने लगे। डॉनल्ड अपना बैट Non Striker End पर क्रीज में ही छोड़कर भागे। मिड ऑफ़ से दौड़कर आए मार्क वॉ का थ्रो गेंदबाज डेमियन फ्लेमिंग के पास आया और जिसे फ्लेमिंग ने विकेटकीपर ऐडम गिलक्रिस्ट को भेज दिया । डॉनल्ड के आधी पिच क्रॉस करते करते गिलक्रिस्ट ने स्टम्प बिखेर दिए थे। डॉनल्ड आधी पिच से ही वापस लौटने लगे। मैच टाई हो गया था। यह विश्वकप इतिहास का पहला टाई मैच था।

SuperSix में दक्षिण अफ्रीका से Head To Head मैच जीतने के कारण ऑस्ट्रेलियाई टीम फाइनल में पहुँच गई। दक्षिण अफ्रीका एक बार फिर से फेवरेट होते हुए भी विश्वकप से बाहर हो गई। कप्तान हैंसी क्रोनिए को सब याद आ रहा होगा, Super Six में स्टीव वॉ का कैच छूटना, क्रोनिए का स्वयं डेविड शेफर्ड ने गलत निर्णय का शिकार होना और डॉनल्ड का रन आउट होना।

आज भी इस मैच “Greatest ODI of all time.” माना जाता है।

मैन ऑफ द मैच शेन वॉर्न ने अपने प्रदर्शन को तीन वर्ष पूर्व मोहाली में सेमीफाइनल के प्रदर्शन से बेहतर बताया। शेन वॉर्न ने फाइनल में फाइनल में पाकिस्तान के विरुद्ध भी 9 ओवर में 33 रन देकर 4 विकेट लिए और फाइनल में भी मैन ऑफ द मैच रहे। शेन वॉर्न इस टूर्नामेंट में 18.05 की औसत से सर्वाधिक 20 विकेट लिए।

लैंस क्लूज़नर 16 गेंद में 31 पर नॉट आउट रह गए थे। पूरे टूर्नामेंट में 122+ की स्ट्राइक रेट से 281 रन बनाने और 17 विकेट लेने के कारण उन्हें मैन ऑफ द टूर्नामेंट पुरस्कार दिया गया।

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