1972, म्यूनिख, पश्चिमी जर्मनी: USA और USSR (सोवियत संघ) के बीच ओलिम्पिक फाइनल मैच ओलिम्पिक इतिहास की सबसे नाटकीय घटनाओं में से एक है।
उल्लेखनीय है कि यह शीत युद्ध का दौर था। संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) और सोवियत संघ (USSR) एक दूसरे को मिसाइलों की धमकियाँ देते रहते थे। इस मैच से साढ़े तीन महीने पहले ही 26 मई 1972 को US प्रेसिडेंट Richard Nixon और USSR की कम्युनिस्ट पार्टी के जनरल सेक्रेटरी Leonid Breznev के बीच क्रेमलिन में SALT 1 (Strategic Arms Limitation Talks) संधि हुई थी।
1936 में बर्लिन में जब पहली बार बास्केटबॉल को ओलिम्पिक्स में शामिल किया गया, तब से लेकर अबतक USA ने एक भी मैच नहीं हारा था और लगातार 7 स्वर्ण पदक (1936, 1948, 1952, 1956, 1960, 1964, 1968) जीते थे वो भी तब जब NBA खिलाड़ियों को ओलिम्पिक्स में खेलने की अनुमति नहीं थी। USA की टीम में आमतौर पर कॉलेज स्तर के खिलाड़ी ही होते थे। 1972 में म्यूनिख गई अमेरिकी टीम अबतक की सबसे युवा अमेरिकी टीम थी। सोवियत संघ की टीम भविष्य के हॉल ऑफ फेमर Sergei Belov के नेतृत्व में खेल रही थी। USA की टीम के पास मात्र 12 अंतर्राष्ट्रीय मैचों का अनुभव था तो वहीं सोवियत टीम के पास चार सौ से अधिक मैचों का।
40 मिनट के इस मैच में 10 सेकेंड से भी कम का खेल शेष था और सोवियत टीम 49-48 से आगे थी, तभी केविन जॉयस ने एक सोवियत पास को Deflect किया। डग कॉलिन्स ने यह पास कलेक्ट किया और बास्केट की ओर बढ़े पर एक सोवियत खिलाड़ी ने फ़ाउल किया और कॉलिंस को दो फ्री थ्रो दिए गए। कॉलिन्स का सिर रिम से टकराया था और कुछ क्षण के लिए वे होश में नहीं थे। कोच Hank Iba ने कहा यदि कॉलिंस केवल चल भी सकते हैं तब भी वे दोनों फ्री थ्रो शूट करेंगे।
3 सेकेंड शेष थे, कॉलिंस ने दोनों फ्री थ्रो सफलतापूर्वक शूट करके दो पॉइंट प्राप्त किए और USA को 50-49 से बढ़त दिला दी। अमेरिकन समर्थक स्टैंड्स में नाचने गाने लगे। समय समाप्त हो चुका था और अमेरिकी खिलाड़ियों ने लगातार 8वें स्वर्ण पदक का जश्न मनाना आरम्भ कर दिया था। अमेरिकन समर्थक कोर्ट पर भी आ चुके थे लेकिन FIBA (अंतर्राष्ट्रीय बास्केटबॉल महासंघ) के ब्रिटिश सेक्रेटरी जनरल डॉ. विलियम जोन्स ने Game Clock को Re-Set करके मैच में 3 सेकेंड का समय शेष कर दिया। (जोन्स ने बाद में स्वीकार किया कि उनके पास ऐसा करने की अथॉरिटी नहीं थी।)
Re Set किए जाने के बाद पहले 3 सेकेंड में स्कोर में कोई परिवर्तन न हुआ, इसके बाद ये 3 सेकेंड फिर से खेले गए, यह कहकर कि Game Clock ठीक से Re Set नहीं हुई। इन 3 सेकेंड में सोवियत खिलाड़ी इवान इदेश्को ने सेंटर ऐलेक्जैंडर बेलोव को एक Court Length पास किया और बेलोव ने दो US डिफेंडरों जिम फ़ोर्ब्स और केविन बॉयस को छकाते हुए एक Lay-Up शूट करके 2 निर्णायक पॉइंट प्राप्त किए। इन 2 पॉइंट ने USSR को 51-50 की बढ़त और विजय दिला दी।
इस बार यह परिणाम अंतिम था। अमेरिकी टीम ने विरोध करते हुए अपील की। Jury में 5 लोग थे, जिनमें से 3 कम्युनिस्ट देशों सोवियत संघ, क्यूबा और पोलैंड से थे। (ध्यान रहे यह शीत युद्ध का कालखंड था, इसलिए Jury के निर्णय का FIBA के नियमों से कम और शीत युद्ध की राजनीति से अधिक लेना देना था।) तीनों ने सोवियत संघ के पक्ष में निर्णय दिया और USA की टीम 3-2 से यह अपील हार गई। अमेरिकन्स क्रोध में थे। कप्तान केनी डेविस ने स्पष्ट शब्दों में कह दिया, “William Jones felt it was stifling international basketball for the Americans to keep winning.”
मैच के स्कोरर Hans Tenschert ने कहा कि जब मैच रोका गया तो मात्र एक सेकेंड का समय शेष था, रेफरी ने “Judge’s Table” पर उपस्थित तीनों लोगों से बात की थी और किसी ने नहीं कहा था कि 3 सेकेंड फिर से खेले जाएँ।
अपील की सुनवाई के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमेरिकन टीम के असिस्टेंट मैनेजर Herbert Mols और अपील कमिटी के प्रेसिडेंट हंगरी के Ferenc Hepp के बीच काफी कहासुनी हुई।
अमेरिकी टीम के पास सामने अब दो मार्ग थे या तो अपनी निराशा और आत्मसम्मान को भूलकर रजत पदक स्वीकार कर लें या पदक लेने जाएँ ही नहीं। उन्होंने बाद वाला विकल्प चुना। यह पहली बार था जब ओलिम्पिक पोडियम पर एक जगह खाली रह गई थी।
इस मैच ने ओलिम्पिक्स में USA का लगातार 63 मैचों में विजय और 7 स्वर्ण पदक का क्रम तोड़ दिया था।
USA के कप्तान केनी डेविस ने तो अपनी वसीयत में भी लिख दिया कि उनके परिवार से कोई ये रजत पदक स्वीकार न करे। “I devise and bequeath at my death that my wife, Rita, and children Jill and Bryan never accept a silver medal from the 1972 Games in West Germany.”
सोवियत के लिए मैच विनिंग Lay Up स्कोर करने वाले ऐलेक्जैंडर बेलोव का 1978 में मात्र 26 वर्ष की आयु में निधन हो गया, उन्हें उनके गोल्ड मेडल के साथ दफनाया गया।
2002 में विंटर ओलिम्पिक्स में “Skating Scandal” की जाँच के बाद IOC (इंटरनेशनल ओलिम्पिक्स कमिटी) ने दो कनैडियन खिलाड़ियों को सिल्वर की बजाय डुप्लिकेट गोल्ड मेडल जारी किए। इसी को आधार बनाकर टॉम मैक्मिलन ने (जो USA टीम का हिस्सा रहे थे और बाद में US कांग्रेस के सदस्य भी बने) 2002 में इंटरनेशनल ओलिम्पिक्स कमिटी के समक्ष 1972 के परिणाम में सुधार करने की अपील की और USA को सह-विजेता घोषित करने की घोषित करने की माँग की कहा पर IOC ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
1972 के बाद USA बास्केटबॉल ने इस टीम के खिलाड़ियों से क़ई बार पुनर्विचार करते हुए सिल्वर मेडल स्वीकार करने को कहा पर टीम ने कभी विचार नहीं बदला। 2012 के री-यूनियन में इस टीम के कप्तान केनी डेविस ने कहा, “बास्केटबॉल में केवल एक विजेता होता है और नियमों के अनुसार हम जीते थे।”



















