महान खिलाड़ी कई होते हैं पर क्या आप उस समय अपनी महानता का प्रदर्शन कर सकते हैं, अपनी शक्तियों का आह्वान कर सकते हैं, जब मंच बड़ा हो, आपकी टीम संकट में हो, आपके साथी आपसे किसी चमत्कार की आशा कर रहे हों?
शेन वॉर्न ने ऐसा बारम्बार किया। जब भी ऐसे अवसर आए, शेन वॉर्न अधिकांश अवसरों पर अपनी टीम को विजय द्वार के पार ले गए। उनकी हथेली में जो जादू था वह तो था ही, उसके साथ साथ वे मानसिक रूप से भी काफी मजबूत खिलाड़ी थे। आत्मविश्वास ऐसा कि जहाँ टीम का हर सदस्य ड्रॉ या पराजय की सोच रहा हो वहाँ शेन वॉर्न विजय की सोच रहे होते थे।
ऐलन बॉर्डर, मार्क टेलर, स्टीव वॉ और रिकी पॉन्टिंग वे भाग्यशाली ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रहे जिनके पास शेन वॉर्न जैसा अस्त्र था। लेग स्पिनरों को लय में आने में दो तीन ओवर लगते हैं, शेन वॉर्न अपनी पहली गेंद से ही लय में होते थे, उनके पास अद्भुत नियंत्रण था।
विकेट चाहिए, गिव द बॉल टू वॉर्नी। रन रोकने हैं, गिव द बॉल टू वॉर्नी। हर समस्या का एक उपाय, गिव द बॉल टू वॉर्नी।
ऐडिलेड ऐशेज टेस्ट 2006 के चौथे दिन संध्याकाल तक मैच की तीसरी पारी में इंग्लैंड का स्कोर था 59/1, बढ़त 97 रनों की। यह मैच एक एक उबाऊ ड्रॉ की ओर बढ़ रहा था। विकेट अभी भी बल्लेबाजी के लिए बढ़िया थी। [इंग्लैंड ने पहली पारी में 551 रन पर पारी घोषित की थी, प्रत्युत्तर में ऑस्ट्रेलिया ने 513]
माइकल क्लार्क कहते हैं कि शेन वॉर्न ने उनसे कहा “हम यह मैच जीत रहे हैं।” क्लार्क सोच रहे थे कि किस प्रकार हम पहले इंग्लैंड को आउट करेंगे और उसके बाद क्या हमारे पास पर्याप्त समय होगा इस रन चेज के लिए। शेन वॉर्न को इंग्लैंड के विरुद्ध खेलने का बहुत लंबा अनुभव था, उन्होंने कहा मुझे इंग्लिश क्रिकेटरों की मानसिकता का पता है, वे ड्रॉ के लिए ही खेलेंगे। हमें बस इनके रन नहीं बनने देने। [इस मैच की पहली पारी में शेन वॉर्न को 53 ओवर में 167 रन देकर मात्र 1 विकेट मिला था। ]
अगले दिन के दसवें ओवर में ऐंड्रू स्ट्राउस के रूप में इंग्लैंड का पारी का दूसरा विकेट गिरा। तीन ओवर बाद इयन बेल रन आउट हुए पर जब शेन वॉर्न ने पहली पारी में 158 बनाने वाले केविन पीटरसन को पैरों के पीछे से बोल्ड कर दिया तब पूरा ऐडिलेड ओवल कोलाहल से व्याप्त हो गया। वॉर्न की ऊर्जा उनके साथियों में भी आ चुकी थी। ब्रेट ली ने शीघ्र ही फ्लिंटॉफ का विकेट लिया। भोजनावकाश तक स्कोर 89 पर 5. चायकाल तक इंग्लैंड 129 पर ऑल आउट। बढ़त 167 रनों की। शेन वॉर्न ने दोनों सत्र में लगातार गेंदबाजी की थी, उन्होंने 32 ओवरों में मात्र 49 रन देकर 4 विकेट लिए थे।
क्लार्क कहते हैं जैसे ही इंग्लैंड की टीम ऑल आउट हुई, वॉर्न ने उनसे कहा, “I told you we would win this test match.” ऑस्ट्रेलिया ने एकदिवसीय अंदाज़ में खेलते हुए 33वें ओवर में इस लक्ष्य को मात्र 4 विकेट की क्षति पर प्राप्त कर लिया। यह टेस्ट “Amazing Adelaide” के नाम से प्रसिद्ध है।
पूर्व कप्तान मार्क टेलर कहते हैं कि यदि आपकी टीम में शेन वॉर्न हों तो सदैव आपके पक्ष में कुछ न कुछ घटित होने की संभावना रहती है।
1996 विश्वकप का सेमीफाइनल ऑस्ट्रेलिया के हाथों से लगभग निकल चुका था। 208 के लक्ष्य का पीछा करते हुए वेस्ट इंडीज़ का स्कोर 41 ओवर में 165/2 था। अंतिम 9 ओवरों में 43 रनों की आवश्यकता और 8 विकेट शेष। यहाँ से ऑस्ट्रेलिया ने यह मैच 5 रनों से जीत लिया, मैन ऑफ द मैच शेन वॉर्न की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण रही, उन्होंने 9 ओवरों में 36 रन देकर 4 विकेट लिए।
1999 विश्वकप सेमीफाइनल में भी उनका प्रदर्शन उत्कृष्ट रहा। 214 के लक्ष्य का पीछा करते हुए दक्षिण अफ्रीका ने 12 ओवर में बिना विकेट के 48 रन बना लिए थे। 13वें ओवर में गेंदबाजी करने आए वॉर्न ने दूसरी ही गेंद पर हर्शल गिब्स को बोल्ड कर दिया और अगले ओवर में गैरी कर्स्टन और हैंसी क्रोनिए को आउट कर स्कोर 53/3 कर दिया। 45वें ओवर में शेन वॉर्न ने अच्छा खेल रहे शॉन पॉलक का विकेट लेकर ऑस्ट्रेलिया की स्थिति और सशक्त की। उन्होंने इस मैच में 10 ओवरों (जिनमें 4 मेडन थे) 29 रन देकर 4 विकेट लिए और मैन ऑफ द मैच रहे। फाइनल में उन्होंने पाकिस्तान के विरुद्ध 9 ओवरों में 33 रन देकर 4 विकेट लिए और पुनः मैन ऑफ द मैच रहे।
शेन वॉर्न क्रिकेट इतिहास के महानतम स्पिनर ही नहीं बल्कि महानतम गेंदबाज हैं। उनके आँकड़े तो अद्भुत थे ही पर वे आँकड़ों से कहीं बढ़कर थे। वे क्रिकेट के सबसे बड़े शो-मैन थे। शेन वॉर्न को खेलते देखना एक सुखद अनुभव था।
ॐ शांतिः 🙏
(चित्र: Getty Images)