Botham’s Ashes Part 2: “The Miracle of Headingley ’81”

जुलाई 21, 1981, हेडिंग्ली: चौथी पारी में 37वें ओवर की पहली गेंद। माइक्रोफोन पर रिची बेनो, “Bowled him. It’s all over and it is one of the most fantastic victories ever known in Test Cricket history… England have won this match after one of the most astonishing fightbacks you can ever see.”.

1981 में इंग्लैंड में हुई ऐशेज को “Botham’s Ashes” के नाम से जाना जाता है। इस श्रृंखला में इयन बोथम ने इंग्लैंड के लिए न केवल 36.27 की औसत और 93.22 की स्ट्राइक रेट से सर्वाधिक 399 रन बनाए, प्रत्युत, 20.58 की औसत से सर्वाधिक 34 विकेट भी लिए। वे श्रृंखला में सर्वाधिक रन बनाने वालों में ऐलन बॉर्डर (533) के बाद द्वितीय और सर्वाधिक विकेट लेने वालों में टेरी ऑल्डरमन (42) और डेनिस लिली (39) के बाद तृतीय स्थान पर रहे।

पहले 2 टेस्ट मैचों के पश्चात 0-1 से पिछड़ने के उपरांत 6 मैचों की यह श्रृंखला इंग्लैंड ने 3-1 से जीती। तीनों ही बार इयन बोथम मैन ऑफ द मैच रहे और अंत में मैन ऑफ द सीरीज।

किसी एक खिलाड़ी का एक लंबी टेस्ट श्रृंखला पर ऐसा प्रभाव कदाचित ही देखा गया हो पर बोथम के लिए इस श्रृंखला का आरंभ बहुत अच्छा नहीं हुआ था। उन्होंने ट्रेंट ब्रिज में पहले टेस्ट में मात्र 34 रन बनाए थे, वहीं लॉर्ड्स में दूसरे टेस्ट में वे “राज-युग्म” (King Pair) (दोनों पारियों में शून्य) पर आउट हुए थे। कप्तानी का बोझ उनके लिए बहुत भारी सिद्ध हो रहा था। पिछले 13 महीनों में इंग्लैंड ने 12 में से एक भी टेस्ट नहीं जीता था (4 में पराजित, शेष ड्रॉ)। पिछले 12 टेस्ट में उनकी बल्लेबाजी औसत 40.48 से 29.85 पर आ चुकी थी। इन 12 टेस्ट की 21 पारियों में उन्होंने 13.14 की औसत से मात्र 276 रन बनाए थे। पिछली 20 पारियों में 4 शून्य और कोई अर्धशतक नहीं।

लॉर्ड्स टेस्ट के पश्चात बोथम ने कप्तानी त्याग दी थी और माइक ब्रेयरली को कप्तान नियुक्त किया गया था।

ऑस्ट्रेलियाई कप्तान किम ह्यूज्स ने टॉस जीतकर बल्लेबाजी का निर्णय लिया। पहले दिन का खेल समाप्त होने पर स्कोर था 210/3, ब्रेयरली को एक भाग्यशाली और कुशल कप्तान माना जाता है, आज उनसे इन दोनों में से किसी बात का परिचय नहीं मिला। ब्रेयरली सोच रहे थे कि उन्हें वापस नहीं आना चाहिए था।

जॉन डाइसन के शतक और किम ह्यूज्स के 89 रनों के बलपर ऑस्ट्रेलिया ने दूसरे दिन 401/9 के स्कोर पर पारी घोषित की थी। दूसरे दिन के खेल की समाप्ति के समय इंग्लैंड का स्कोर था 7 रन बिना किसी विकेट के। ऑस्ट्रेलियाई तीव्र गेंदबाज इंग्लैंड पर हावी थे और ग्रेग चैपल की अनुपस्थिति में ऑस्ट्रेलियाई कप्तान बने किम ह्यूज्स का ऐशेज ट्रॉफी प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त हो गया था। ह्यूज्स ने कहा था कि इस पिच पर 401 रन किसी अन्य पिच पर एक हजार रनों के बराबर हैं।

कप्तानी के बोझ से मुक्त होने के बाद बोथम ने न केवल गेंद से भी अच्छा प्रदर्शन करते हुए 6 विकेट (6-95) लिए बल्कि पहली पारी में सर्वाधिक 50 रन बनाए। इंग्लैंड की पहली पारी मात्र 174 पर समाप्त हुई। ह्यूज्स की बात सत्य सिद्ध हो रही थी।

किम ह्यूज्स 227 रनों की बढ़त पाकर अत्यंत हर्षित थे। उन्होंने इंग्लैंड को फॉलोऑन खेलने के लिए आमंत्रित किया।

500-1:
स्विंग गेंदबाज टेरी ऑल्डरमन ने ट्रेंट ब्रिज टेस्ट में पदार्पण करते हुए 9 विकेट लिए थे। हेडिंग्ली टेस्ट के चौथे दिन जब उन्होंने इंग्लिश विकेटकीपर बॉब टेलर को शॉर्ट लेग पर कैच कराया तब इंग्लैंड का स्कोर हो गया, 135 पर 7 विकेट। अभी भी ऑस्ट्रेलिया के पहली पारी के स्कोर से 92 रन पीछे और मात्र 3 विकेट शेष।

बेटिंग और गैंब्लिंग कम्पनी “Ladbrokes” के अनुसार ऑस्ट्रेलिया की विजय के Odds थे 1–4, ड्रॉ के 5–2 और इंग्लैंड की विजय के 500–1. ये Odds पूर्व इंग्लिश और केंट विकेटकीपर गॉडफ्रे एवंस और कम्पनी के डायरेक्टर रॉन पॉलार्ड ने तैयार किए थे।

Dennis loves a bet:
डेनिस लिली ने मजे लेने के लिए इंग्लैंड की जीत पर 10 पाउंड और रॉड मार्श ने 5 पाउंड लगा दिए थे। लिली तो टीम के कोष से 50 पाउंड लगाना चाहते थे, टीम के अन्य सदस्य उनपर हँस पड़े पर लिली को मजे लेने का मन इतना अधिक था कि उन्होंने अपनी जेब से 10 पाउंड लगा दिए। ड्रेसिंग रूम में पूरी टीम हँस हँस के पागल हो रही थी। अन्य ख़िलाडियों ने दाँव पर चिल्लर लगाने शुरू किए। कोच पीटर फिलपॉट कहते हैं, “Lots of guys threw in their small change. I think I threw in a couple of bob myself. Everyone was killing themselves laughing.”

इस बात पर हम पोस्ट के अंत में लौटेंगे।

Graham Dilley attacks:
क्रमांक 9 पर आए 21 वर्षीय ग्रैहम डिली से आशाएँ लगाना कोई बुद्धिमानी नहीं थी। डिली के लिए यह श्रृंखला अच्छी नहीं रही थी और वे सोच रहे थे कि इस मैच के उपरांत तो उन्हें बाहर होना ही है। अतः डिली ने प्रत्येक गेंद पर प्रहार का निर्णय का विचार किया। अधिकतर गेंदों से बल्ले का संपर्क नहीं हो रहा था परंतु जब सम्पर्क होता तक गेंद बहुत तीव्र गति से कवर बाउंड्री की ओर निकल रही थी और दूसरे छोर पर खड़े बोथम हर बार यह देखकर हँस रहे थे। चायकाल तक इंग्लैंड का स्कोर हो गया था 176 पर 7 पर अभी भी पारी की पराजय बचाने के लिए 51 रन आवश्यक। अबतक 41 रनों की साझेदारी में डिली ने 25 रन बनाए थे।

Botham goes bonkers:
चौथा दिन, अंतिम सत्र: आक्रमण का विचार कर चुके बोथम और डिली अब बस बल्लेबाजी का आनंद ले रहे थे। चाय के बाद अगले आधे घण्टे में उन्होंने 60 रन जोड़ दिए। बोथम ने 57 गेंदों में अपने 50 रन पूरे किए। अगली गेंद पर उन्होंने इंग्लैंड को बढ़त दिला दी और पारी से पराजय का भय समाप्त कर दिया। ग्रैहम डिली ने डेनिस लिली को दो अविरत चौके लगाए। दोनों ही अद्भुत स्ट्रोक। इयन बोथम ने कहा है कि उस दिन डिली को देखकर लग रहा था मानो गैहम दिली नहीं बल्कि स्वयं (महान दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाज) ग्रैम पॉलक खेल रहे हों।

ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों ने ऑफ स्टम्प के थोड़ा बाहर की लाइन पकड़ रखी थी यह सोचकर कि कितनी देर ये दोनों ऐसे खेलेंगे, सीम और स्विंग अन्ततोगत्वा अपना काम कर ही जाएगी पर भाग्य आज इयन बोथम के साथ था, जो किनारे लग रहे थे वो स्लिप के ऊपर से निकल रहे थे।

इयन बोथम गुड लेंथ गेंदों को या तो गेंदबाज के पास से चौके के लिए भेज रहे थे या मिडविकेट क्षेत्र में। शॉर्ट गेंदों पर वे पुल, हुक, स्क्वेयर कट, लेट कट, स्लिप के ऊपर से स्लाइस जैसे सभी शॉट्स का प्रयोग कर रहे थे।

अबतक के सारे शॉट्स “Showman Shots” थे, अब आया बोथम का इस मैच का सर्वश्रेष्ठ स्ट्रोक। टेरी ऑल्डरमैन की एक गुड लेंथ गेंद को उन्होंने मिड ऑन के ऊपर से उठा दिया 6 रनों के लिए।

दर्शक दीर्घा में उपस्थित श्रीमती केथी बोथम बहुत उत्साहित और प्रसन्न थीं, उनके साथ बैठी दो अन्य महिलाओं को यह शॉट उतना प्रिय नहीं लगा था, इसका कारण यह हो सकता था कि वे दोनों ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों (ऐलन बॉर्डर और ग्रैहम वुड) की पत्नियाँ श्रीमती जेन बॉर्डर और श्रीमती एंजेला वुड थीं।

बोथम और डिली की साझेदारी ने ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों को दबाव में ला दिया था। यह तब स्पष्ट हो गया जब जेफ लॉसन ने बोथम को एक ही ओवर में दो बीमर फेंके। बोथम ने अपनी आत्मकथा में लिखा है, “I could accept one as an accident but two had to be more than coincidence. I stored them away in the memory banks for future reference.”

बोथम और डिली ने मात्र 80 मिनट की साझेदारी में 117 रन जोड़ दिए थे। इंग्लैंड की बढ़त अभी मात्र 25 की हुई थी कि टेरी ऑल्डरमन ने राउंड द विकेट जाकर डिली की गिल्लियाँ उड़ा दीं। डिली ने 75 गेंदों में 56 रन बनाए थे।

निश्चित रूप से अब मैच समाप्त हो चुका था। मात्र 25 रन की बढ़त और मात्र 2 विकेट हाथ में। कौन रोक सकता था ऑस्ट्रेलिया को ? कितना बड़ा चमत्कार चाहिए था मैच में किसी भी अन्य परिणाम के लिए ?

95 पर आ जाने के बाद जेफ़ लॉसन को दो अविरत चौके लगाकर बोथम ने अपना बल्ला ड्रेसिंग रूम में उपस्थित अपने साथियों की ओर दिखाया। बोथम का यह शतक मात्र 87 गेंदों में आया था। कप्तान माइक ब्रेयरली अब करतल ध्वनि बन्द करके बोथम की ओर उंगली से संकेत दे रहे थे। संदेश स्पष्ट था, “टिके रहो।” बोथम ने दो उंगलियों से V बनाते हुए कप्तान का उत्तर दिया। माइक्रोफोन पर रिची बेनो, “Mike Brearley is just giving him the word to stick around.”

बहुत देर तक गेंदबाजी कर चुके डेनिस लिली और टेरी ऑल्डरमन की टांगों में अब शक्ति शेष नहीं थी पर बोथम के कारण कप्तान किम ह्यूज्स स्पिनर रे ब्राइट को गेंद थमाने में डर रहे थे। (इंग्लिश तेज गेंदबाज बॉब विलिस ने कहा कि संभवतः बोथम ब्राइट की गेंद पर बाउंड्री पर कैच हो सकते थे। बोथम स्वयं इस बात से सहमत हुए।)

बोथम के 103 रन मात्र 87 गेंदों में आए थे। चायकाल के बाद वाले 64 रन में उन्होंने मात्र 2 सिंगल लिए थे (शेष 62 रन, 14 चौके और एक छक्के से)। ऐशेज में पिछले 60 वर्षों में पहली बार और बोथम के करियर में चौथी बार था उन्होंने टेस्ट मैच में शतक भी लगाया था और पारी में 5 (या अधिक) विकेट लिए थे और इस समय उनकी वय मात्र 25 वर्ष थी।

चौथे दिन का खेल समाप्त होने तक इंग्लैंड ने 124 रनों की बढ़त ले ली थी और बोथम 145 पर खेल रहे थे। अंतिम सत्र में इंग्लैंड ने 27 ओवरों में 175 रन बनाए जिसमें से 106 अकेले बोथम के थे। बोथम अबतक 26 चौके और एक छक्का लगा चुके थे। (10वें नम्बर पर आए क्रिस ओल्ड ने भी बोथम का अच्छा साथ देते हुए 29 रन बनाए थे। )

ऑस्ट्रेलियाई टीम बोथम के इस आक्रमण से कितनी प्रताड़ित हुई थी इसका पता इस बात से चलता है कि दिन के खेल की समाप्ति के पश्चात जब इंग्लिश विकेटकीपर बॉब टेलर ऑस्ट्रेलियाई ड्रेसिंग रूम में बैट साइन कराने गए तब आवाज़ आई, “F* off with your f*ing bats.”

Allsport के Adrian Murrell ने चौथे दिन के खेल के पश्चात ड्रेसिंग रूम में इयन बोथम का एक छायाचित्र लिया जो अब ऐतिहासिक और लोकगाथाओं का हिस्सा बन चुकी है। बोथम इसमें अपनी पूरी क्रिकेट किट पहने हुए मुँह में सिगार दबाए बैठे हैं।

अगले दिन बोथम ने मात्र एक चौका लगाया और नम्बर 11 बॉब विलिस के आउट होने के बाद वे 149 पर अविजित लौटे। 38 टेस्ट मैचों में यह बोथम का 7वाँ शतक और करियर का सर्वाधिक स्कोर था।

8वें विकेट के लिए 117, 9वें विकेट के लिए 67 और 10वें विकेट के लिए 37 रनों की साझेदारी के बाद इंग्लैंड की पारी 356 पर समाप्त हुई और ऑस्ट्रेलिया को 2-0 की बढ़त लेने के लिए 130 रनों का लक्ष्य मिला। (बोथम जब क्रीज पर आए थे तो इंग्लैंड का स्कोर था 105 पर 5 और पारी की हार से बचने के लिए 122 रन और बनाने थे।) बोथम के इस ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद भी अभी भी पलड़ा ऑस्ट्रेलिया का ही भारी था।

The Hero who almost didn’t play:


रॉबर्ट जॉर्ज डिलन विलिस अर्थात बॉब विलिस को इस टेस्ट मैच के लिए टीम में नहीं चुना जाना था। चयनकर्ताओं का मानना था वे फिट नहीं हैं। उन्होंने अपना स्ट्राइक बॉलर का पद गँवा दिया था और अत्यधिक नो बॉल फेंकने लगे थे, जिससे स्पष्ट था कि वे लय में नहीं हैं। पिछले दोनों टेस्ट में वे कुल 28 नो बॉल फेंक चुके थे। हेडिंग्ली टेस्ट की पहली पारी में उन्हें कोई विकेट नहीं मिला था। कप्तान माइकल ब्रेयरली ने पिछली रात मदिरापान के समय उन्हें नो-बॉल की चिंता न करके केवल तेज गेंदबाजी करने पर ध्यान देने को कहा था।

ऑस्ट्रेलियाई टीम बिना किसी कष्ट के लक्ष्य की ओर अग्रसर थी। स्कोर था 56 पर 1, मात्र 74 रनों की आवश्यकता। पहले पाँच ओवरों के स्पेल में बॉब विलिस को कोई विकेट नहीं मिला। प्रेस बॉक्स में बातें चल रही थीं कि बिना किसी चमत्कार के यह विलिस का इंग्लैंड के लिए अंतिम स्पेल हो सकता है।

भोजनावकाश से 20 मिनट पूर्व कप्तान ब्रेयरली ने विलिस का छोर बदला। (Rugby Stand End से Kirkstall Lane End) यह इस पारी में ब्रेयरली का संभवतः सबसे महत्वपूर्ण निर्णय था। छोर बदलते ही विलिस की गति बढ़ गई क्योंकि वे ढलान (Slope) की ओर गेंदबाजी कर रहे थे। विलिस की एक गेंद ने भयानक उछाल लिया और ट्रेवर चैपल के दस्ताने से लगकर हवा में उठ गई। विकेटकीपर बॉब टेलर के लिए एक सरल कैच। नम्बर 4 पर आए पिछली पारी में 89 बनाने वाले कप्तान किम ह्यूज्स, जो इस बार शून्य पर आउट हुए, उनका कैच बोथम ने तीसरी स्लिप में बायीं ओर डाइव लगाकर पकड़ा। BBC के लिए कॉमेंट्री कर रहे रिची बेनो के शब्द, “Everything is running for Botham. Runs, wickets and catches.” नए बल्लेबाज वामहस्त ग्रैहम यैलप, विलिस की एक और तीव्र बाउंसर, यैलप को चकित करती हुई, उनके बल्ले का आंतरिक किनारा लेकर शॉर्ट लेग की ओर गई। माइक गैटिंग ने अद्भुत हस्तलाघव का प्रदर्शन करते हुए कैच पकड़ा। विलिस ने मात्र 11 गेंदों में 3 विकेट ले लिए थे, इनमें से 2 तो लंच से ठीक पिछले ओवर में।

दूसरा सत्र: ढलान की ओर रन-अप लेते हुए बॉब विलिस से गेंदबाजी कराना नो-बॉल का संकट तो बढ़ा ही रहा था पर उन्हें फिर से दूसरे छोर से लाना कोई विकल्प ही नहीं था। ब्रेयरली ने विलिस से नो बॉल के बारे में विचार करना छोड़कर केवल तीव्र गति से गेंद करने पर ध्यान देने को कहा। विलिस अब इस पल में खो चुके थे, वे इंग्लैंड और अपना करियर दोनों को बचाने के लिए सब कुछ झोंक रहे थे।

माइक ब्रेयरली को अब विश्वास हो गया था कि बॉब विलिस लय में हैं और इसके पश्चात उनकी कप्तानी बिल्कुल उच्च स्तरीय रही। उन्होंने इसके बाद स्वयं को पहली स्लिप में ग्राहम गूच की जगह स्थापित कर दिया। गूच इस पूरी श्रृंखला में पहली स्लिप में फील्डिंग करते आ रहे थे और अपनी ओर आया लगभग हर कैच टपका चुके थे।

ऐलन बॉर्डर जो अब तक इस श्रृंखला में अच्छी बल्लेबाजी करते आए थे, तेज गेंदबाज क्रिस ओल्ड की एक गेंद को स्टम्प्स पर खेल बैठे। ऑस्ट्रेलिया का स्कोर 65 पर 5. ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजी क्रमांक में 4, 5 और 6 मात्र 20 गेंद खेलकर 0 का योगदान देकर पवेलियन लौट गए थे।

मैच में पहली बार ऐसा लग रहा था कि इंग्लैंड की विजय की संभावना बनी है। विलिस ने पहली पारी के शतकवीर जॉन डाइसन को विकेट के पीछे कैच कराया। विकेटकीपर बल्लेबाज रॉडनी मार्श बॉब विलिस को हुक करने के प्रयास में डीप फाइन लेग बाउंड्री पर कैच हुए। जेफ लॉसन (जो चोटिल थे) मात्र 2 गेंद टिक पाए। ऑस्ट्रेलिया का स्कोर 8 विकेट पर 75 रन, 55 रनों की आवश्यकता और मात्र 2 विकेट शेष। 58 मिनट में ऑस्ट्रेलिया ने मात्र 19 रन पर 7 विकेट गँवा दिए थे। इनमें से 6 विकेट बॉब विलिस के थे।

इंग्लैंड की टीम अब पहली बार इस मैच को जीतने के लिए फेवरेट थी परंतु ऑस्ट्रेलियाई आसानी से पराजय स्वीकार करने वाले नहीं थे। रे ब्राइट और डेनिस लिली की जोड़ी ने आक्रमण का विचार किया। लिली ने शॉर्ट गेंदों को स्लिप के ऊपर से अपर कट के माध्यम से चौके के लिए भेजना आरम्भ किया। ब्राइट ने क्रिस ओल्ड को दो चौके लगाए और मात्र 4 ओवरों में स्कोर 75 पर 8 से 110 पर 8 हो गया। इंग्लिश दल और दर्शकों में पुनः चिंता व्याप्त।

विलिस ने अब गेंद आगे फेंकनी आरम्भ की। विलिस की एक आउटस्विंगर को लिली ने फ्लिक करना चाहा पर पूरा सम्पर्क न होने के कारण गेंद हवा में उठ गई। मिड ऑन पर माइक गैटिंग गेंद के नीचे, हेडिंग्ली में उपस्थित सभी दर्शक साँस रोके प्रतीक्षारत। गैटिंग ने कैच को परखने में त्रुटि के पश्चात आगे आकर डाइव लगाकर किसी प्रकार कैच पकड़ा। लिली 15 गेंद में 17 रन बनाकर आउट। स्कोर 110 पर 9.

ब्रेयरली ने अब गेंद और मैच समाप्त करने का दायित्व इयन बोथम को सौंप दिया। नम्बर 11 टेरी ऑल्डरमन की स्थिति “Bunny in the headlamps” जैसी। बाहरी किनारा लगा पर तीसरी स्लिप में क्रिस ओल्ड ने कैच टपका दिया। अगली गेंद पर पुनः यही हुआ। क्या भाग्य इंग्लैंड को विजय के इतना निकट लाने के पश्चात छल करने वाला था ?

बॉब विलिस आज के दिन ऐसा कैसे होने दे सकते थे ! कर्कस्टॉल लेन एंड से विलिस अपने 16वें ओवर की पहली गेंद लेकर दौड़े। रे ब्राइट द्वारा ड्राइव का प्रयास, कोई संपर्क नहीं और मिडिल स्टम्प उखड़कर बाहर।

माइक्रोफोन पर रिची बेनो, “Bowled him. It’s all over and it is one of the most fantastic victories ever known in Test Cricket history… England have won this match after one of the most astonishing fightbacks you can ever see.”.

विलिस के इस सार्वकालिक महान स्पेल का इससे सुंदर अंत हो ही नहीं सकता था। ( पिछले 10.1 ओवर में विलिस ने 8 विकेट लिए थे। ) ऑस्ट्रेलियाई कोच पीटर फिलपॉट ने कहा, “Willis was producing some absolute bastard balls.”

रॉबर्ट जॉर्ज डिलन विलिस अब एक नैशनल हीरो थे । कप्तान माइक ब्रेयरली ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक “Phoenix From The Ashes” में लिखा है, “Bob Willis had come back from the borders of oblivion to set the Ashes alight.”

दर्शकों की भीड़ से बचने के लिए विलिस तुरन्त पवेलियन की ओर दौड़े, उनके साथी भी स्टम्प उखाड़कर उनके पीछे पीछे। ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज पिच पर किसी मूर्ति की भाँति खड़े थे। बालकनी में ऐलन बॉर्डर अकेले बैठे थे, सिर पर हाथ रखे हुए।

एक समय जिस टेस्ट में इंग्लैंड की जीत के Odds 500-1 थे, वह टेस्ट मैच इंग्लैंड ने 18 रनों के अंतर से जीत लिया था। 1928-29 में चौथे ऐशेज टेस्ट के बाद यह ऐशेज में इंग्लैंड की विजय का सबसे छोटा अंतर था।

ऑस्ट्रेलियाई कप्तान किम ह्यूज्स ने कहा, “We did nothing wrong except lose.”

“Mystery of Aussie Bets Coup”.
दो दिन बाद समाचारपत्र “The Sun” में यह फ्रंट पेज हेडलाइन थी। इसके अनुसार दो ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों ने हेडिंग्ली टेस्ट के लिए इंग्लैंड की विजय पर दाँव लगाकर £ 7500 कमाए थे। दोनों ने मिलकर मात्र 15 पाउंड (लिली 10, मार्श 5) लगाए थे। (15× 500= 7500). कप्तान किम ह्यूज़्स ने कहा, “Two of the lads gambled – not because they want to bet against their team but because the odds were too good to miss.” डेनिस लिली ने उस समय तो इस समाचार को असत्य बताया पर 1984 में रिटायरमेंट के बाद अपनी आत्मकथा “The Menace” में उन्होंने इसकी पुष्टि की। लंबे समय से उनके मित्र रहे रॉड मार्श इस बात से प्रसन्न नहीं हुए क्योंकि वे आशा कर रहे थे कि समय के साथ ये आरोप भुला दिए जाएंगे।

युवा तेज गेंदबाज जेफ़ लॉसन कहते हैं कि जब सब लोग बेट लगा रहे थे तब उन्होंने अपने ट्राउज़र की जेब टटोली पर कुछ मिला नहीं। कुछ चिल्लर मिल जाता तो विश्वविद्यालय का शुल्क और किराए के लिए धनराशि प्राप्त हो जाती।

बेटिंग और गैंब्लिंग कम्पनी “Ladbrokes” ने £25,000 की बेट्स प्राप्त कीं और मैच के बाद £40,000 चुकाए। Ladbrokes के डायरेक्टर रॉन पॉलार्ड ने “The Sun” से कहा, “हमें यह पूर्ण विश्वास था कि फॉलोऑन खेलने के बाद इंग्लैंड की टीम मैच जीत नहीं सकती। 1894 के पश्चात कोई भी टीम इस स्थिति से निकलकर मैच नहीं जीती थी।”

लॉर्ड्स टेस्ट की दोनों पारियों में 0 पर आउट होने वाले इयन बोथम हेडिंग्ली में मात्र एक बार आउट हुए और उन्होंने एक सार्वकालिक महान पारी सहित कुल 199 रन बनाए। उन्होंने मैच में 109 रन देकर 7 विकेट भी लिए। बोथम को मैन ऑफ द मैच चुनने वाले फ्रेड ट्रूमन ने कहा, “A captain’s performance that came one match too late.”

हेडिंग्ली 1981 इंग्लिश क्रिकेट के स्वर्णिम अध्यायों में से एक है। कप्तान माइक ब्रेयरली का योगदान स्कोरकार्ड देखकर समझ पाना असंभव है पर उनके बिना यह परिवर्तन संभव नहीं था। इंग्लैंड ने ऐशेज में वापसी कर ली थी, श्रृंखला 1-1 से बराबर हो चुकी थी। अगला टेस्ट एजबेस्टन में था जिसकी चर्चा Part 3 में।

साभार:

  1. Rob Steen और Alastair McLellan की पुस्तक “500-1 The Miracle of Headingley ’81”
  2. The Guardian में Rob Steen का लेख “500:1 The day England defied the odds.”
  3. माइक ब्रेयरली की द्वारा श्रृंखला पर लिखी गई पुस्तक “Phoenix From The Ashes”
  4. The Guardian में माइक ब्रेयरली का लेख “Ian Botham’s Ashes’: The myths, the legends and me.”
  5. ESPN Cricinfo पर मार्क निकलस का लेख “Botham, Willis, Brearley, magic: let’s cast our minds back to 1981”
  6. ESPN Cricinfo पर मार्टिन विलियमसन का लेख “The Hero who almost didn’t play.”
  7. क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया का युट्यूब वीडियो “Botham resurrects England”
  8. BBC की डॉक्यूमेंट्री “Botham’s Ashes”
  9. 2011 में आई डॉक्यूमेंट्री “From the Ashes”

चित्र: Getty Images

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