Botham’s Ashes Part 1: Ian Botham’s media trial and return of old skipper Mike Brearley.

31 मई 1980 को मिडिलसेक्स और समरसेट के काउंटी मैच से पूर्व मिडिलसेक्स के कप्तान माइक ब्रेयरली (जो इंग्लैंड के कप्तान भी थे) को इंग्लिश चयन समिति के प्रमुख ऐलेक बेड्सर का दूरभाष आया कि चयन समिति अब इयन बोथम को नेतृत्व सौंपना चाहती है।

ब्रेयरली ने फरवरी 1980 में ऑस्ट्रेलिया में 0-3 से पराजित होकर लौटने के पश्चात चयन समिति को सूचित कर दिया था कि वे भविष्य के टेस्ट टूर के लिए उपलब्ध नहीं होंगे। प्रथम कारण यह कि वे अपना “Psychoanalysis” का प्रशिक्षण पूर्ण करना चाहते थे। शीतकालीन क्रिकेट में व्यस्त रहने के कारण यह प्रक्रिया कई वर्षों से लंबित थी। दूसरा कारण यह कि उन्हें चयनकर्ता क्लैरी एलियट ने एक पत्र लिखकर इंग्लिश टीम के कप्तान के रूप में योगदान के लिए धन्यवाद दे दिया था।

1980 के इंग्लिश ग्रीष्मकाल के समय ब्रेयरली के स्थान पर 24 वर्षीय ऑलराउंडर इयन टेरेंस बोथम को कप्तान नियुक्त किया गया।

बोथम ने अबतक 25 टेस्ट के करियर में 40.48 की औसत से 6 शतक सहित 1336 रन बनाए थे और 18.53 की औसत से 139 विकेट लिए थे (13 बार पारी में 5 या इससे अधिक विकेट) वे इस समय इंग्लिश टीम के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी थे।

अगले 10 टेस्ट मैचों में 17 पारियों में उन्होंने 14.23 की औसत से मात्र 242 रन बनाए। बल्ले और गेंद दोनों से उनका प्रदर्शन गिर रहा था।

फरवरी-मार्च 1981 में वेस्ट इंडीज़ दौरे पर गई इंग्लैंड की टीम 4 मैचों की सीरीज 2-0 से पराजित होकर लौटी। बोथम ने श्रृंखला में 10.42 की औसत से 73 रन बनाए थे।

जुलाई-अगस्त 1981 में होने वाली ऐशेज श्रृंखला के प्रथम टेस्ट के लिए इयन बोथम ही इंग्लैंड के कप्तान चुने गए थे। चयनसमिति ने यह निर्णय लिया था कि बोथम की कप्तानी का आकलन मैच दर मैच किया जाएगा। बोथम को यह बात रुचिकर नहीं लगी थी परंतु इस समय उन्होंने यह स्वीकार कर लिया था।

The Ashes:
1981 की ऐशेज श्रृंखला के लिए जब ऑस्ट्रेलिया की टीम इंग्लैंड पहुँची तब इंग्लिश मीडिया ने इसे इंग्लैंड का दौरा करने वाली सबसे कमजोर ऑस्ट्रेलियाई टीम बताया। दोनों देशों का मीडिया ऐशेज से पूर्व ऐसे तरीके अपनाने के लिए जाना जाता रहा है पर इस बार बात सही थी। ऑस्ट्रेलिया के दो घातक तीव्र गति के गेंदबाज जेफ़ थॉमसन और लेनी पास्को चोटिल होने के कारण इस टीम का हिस्सा नहीं थे। आरंभिक बल्लेबाज डग वॉल्टर्स को भी टीम में नहीं चुना गया था। सबसे महत्वपूर्ण बात थी कि ग्रेग चैपल ने स्वयं को इस दौरे के लिए अनुपलब्ध घोषित किया था। इस कारण कप्तानी का भार 27 वर्षीय बल्लेबाज किम ह्यूज्स के कंधों पर रख दिया गया था। किम 1880 के बाद ऑस्ट्रेलिया के सबसे युवा कप्तान थे।

1st Test, Trent Bridge, Nottingham: तेज गेंदबाजों के लिए बनी ट्रेंट ब्रिज की पिच पर किम ह्यूज्स ने टॉस जीता और गेंदबाजी का निर्णय लिया। दोनों टीमों ने 4-4 तेज गेंदबाज खिलाए थे। ऑस्ट्रेलियाई स्विंग गेंदबाज टेरी ऑल्डरमन इस श्रृंखला में अपना टेस्ट करियर आरम्भ कर रहे थे। रॉडनी हॉग का यह पहला ऐशेज दौरा था। दोनों ने डेनिस लिली का भरपूर साथ दिया और इंग्लैंड को 185 पर ऑल आउट कर दिया।

इंग्लैंड के पास भी अच्छा गेंदबाजी आक्रमण था। बॉब विलिस, बोथम, ग्रैहम डिली और माइक हेंड्रिक की चौकड़ी ने ऑस्ट्रेलिया को इंग्लैंड से भी बुरी स्थिति में पहुँचा दिया।

Costly Drop: जब कप्तान किम ह्यूज्स आउट हुए तब ऑस्ट्रेलिया का स्कोर था 33 पर 4, नए बल्लेबाज ऑस्ट्रेलिया के भविष्य के कप्तान ऐलन बॉर्डर। ट्रेवर चैपल और ऐलन बॉर्डर के बीच एक अच्छी साझेदारी पनपने लगी। स्कोर 51/4, यहाँ माइक हेंड्रिक की गेंद पर पॉल डाउनटन ने ऐलन बॉर्डर का कैच टपका दिया। जहाँ कोई अन्य ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज 20 रन भी न बना सका वहाँ बॉर्डर ने 63 रनों की साहसी पारी खेली। बॉर्डर ने 8वें विकेट के लिए लिली के साथ 37 और 10वें विकेट के लिए टेरी ऑल्डरमन के साथ 26 रन जोड़कर ऑस्ट्रेलिया का स्कोर 179 तक पहुँचा दिया। इंग्लैंड की पहली पारी की बढ़त, जिसके 50 से अधिक होने की आशा थी, वह 6 पर सीमित हो गयी थी। इंग्लैंड की दूसरी पारी और भी दयनीय रही और मात्र 38.4 ओवरों में 125 ऑल आउट। डेनिस लिली और टेरी ऑल्डरमैन ने 5-5 विकेट लिए।

Australia Victorious:
ऑस्ट्रेलिया के समक्ष 132 रनों का लक्ष्य था, जो 6 विकेट खोकर प्राप्त कर लिया गया। 1948 की सर डॉनल्ड ब्रैडमन की अजेय टीम के बाद ट्रेंट ब्रिज में ऑस्ट्रेलिया की पहली विजय थी।

Skipper under pump:
कप्तान इयन बोथम पर दबाव में उत्तरोत्तर वृद्धि होती जा रही थी। हालाँकि वे अपने साक्षात्कारों में यह बात पूर्णरूप से स्वीकार नहीं कर रहे थे। बी.बी.सी के पीटर वेस्ट ने एक साक्षात्कार में उनसे पूछा कि एक एक टेस्ट मैच के लिए कप्तान बनाए जाना बड़ा विचित्र लगता होगा तब बोथम का उत्तर था, “मुझसे अधिक दबाव का अनुभव मेरा परिवार कर रहा है। मैं मानता हूँ कि एक कप्तान के रूप में मैं सदैव सुधार करता आ रहा हूँ। आशा है अगले मैच मैं अपने बल्ले से प्रदर्शन करूँगा और आलोचकों को चुप करा पाऊँगा।” इयन बोथम ऐसा करने में असफल रहे।

King Pair at Lord’s:
लॉर्ड्स में उन्हें पुनः एक मैच के लिए कप्तान बनाया गया। यह टेस्ट ड्रॉ रहा पर बोथम दोनों पारियों में शून्य पर आउट हुए।

बोथम ने लिखा है, “As I came back towards the pavilion gate not a soul among the Lord’s members mumbled `bad luck’ and not a single MCC member looked me in the eye.They all just sat there dumbstruck. Some picked up their papers and hid behind them, others rummaged in their bags. Needless to say, I was fuming.”

श्रीमती केथी बोथम भी इयन का समर्थन करते हुए कहती हैं, “I saw them as dark-suited vultures who had been waiting for the kill.”

Botham’s Resignation:
ट्रेंट ब्रिज टेस्ट के पश्चात पीटर वेस्ट के साथ साक्षात्कार में वे प्रसन्न दिखाई पड़ रहे थे परंतु लॉर्ड्स टेस्ट के पश्चात पीटर वेस्ट को ही दिए साक्षात्कार में उन्होंने कहा, “मैंने चयनसमिति के अध्यक्ष को सूचित कर दिया कि एक एक मैच के आधार पर मेरी कप्तानी का आकलन न्यायपूर्ण नहीं है। मुझे समझ नहीं आ रहा है कि यह क्या हो रहा है और न ही मेरी टीम को समझ आ रहा है। इसका कुप्रभाव मेरे खेल पर पड़ रहा है, अतः अब मैं कप्तान बने नहीं रहना चाहता।”

अपनी कप्तानी में 12 टेस्ट की 21 पारियों में बोथम ने 13.14 की औसत से 276 रन रन बनाए थे। करियर के तीसरे टेस्ट के बाद पहली बार उनकी औसत 30 से नीचे (29.85) आ गई थी जो कप्तान बनने से पूर्व 40.48 थी। अंतिम 20 पारियों में 4 बार शून्य और कोई अर्धशतक नहीं।

चयनसमिति के अध्यक्ष ऐलेक बेड्सर ने कहा कि चयनसमिति ने निर्णय कर लिया था कि तृतीय टेस्ट से पूर्व कप्तानी में परिवर्तन करना ही है। बेड्सर ने स्वीकार किया कि बोथम की कप्तानी में सुधार भी हो रहा था पर चयनसमिति उनके निजी प्रदर्शन को लेकर चिंतित थी। उनके साथ उनका परिवार भी दबाव में था। अतः उन्हें कप्तानी के बोझ से मुक्त करना उचित निर्णय था।

The Botham Trial:
लॉर्ड्स में एक समाचारपत्र का होर्डिंग देखने को मिला, “BOTHAM MUST GO.” BBC का कार्यक्रम “Newsnight” जो कभी खेलों से संबंधित समाचार में रुचि नहीं रखता था, “The Botham Trial” नामक कार्यक्रम चला रहा था जिसमें बोथम का मीडिया ट्रायल हो रहा था।

ऑस्ट्रेलियाई समाचारपत्र Sydney Sun के Frank Crook कहते हैं, “इंग्लैंड क्रिकेट टीम और इंग्लिश मीडिया के बीच संबंध बहुत तनावपूर्ण थे। अधिकांश इंग्लिश खिलाड़ी स्वदेशी पत्रकारों के स्थान पर मुझसे बात करने में प्रसन्न थे।”

“It looked like lobbing a hand grenade, with the pin long out, into the hands of the most promising recruit.”

Sunday Times के लिए Robin Marlar ने लिखा, “बोथम को कप्तानी समय से पूर्व दे दी गई थी। भूतकाल में देखने पर यह निर्णय और भी भयावह लगता है। मानो आपने हैंडग्रेनेड का पिन निकालकर उसे अपने सबसे क्षमतावान योद्धा की ओर उछाल दिया हो।”

पीटर वेस्ट ने इयन बोथम से पूछा कि यदि उन्हें अगला कप्तान चुनना हो तो वे किसे चुनेंगे तो बोथम का उत्तर बड़ा स्पष्ट था, “मैं इस समय इस देश में उपलब्ध सर्वश्रेष्ठ कप्तान को चुनूँगा। जिनकी कप्तानी में मैंने अपनी सर्वश्रेष्ठ क्रिकेट खेली है। जो अपने खिलाड़ियों से उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करवाना जानते हैं।”

Return of Mike Brearley:
इयन बोथम जिस व्यक्ति के गुणों का वर्णन कर रहे थे, वे कोई और नहीं बल्कि पूर्व कप्तान माइक ब्रेयरली थे। ब्रेयरली का एक बल्लेबाज के रूप में कीर्तिमान वर्णन करने योग्य नहीं है परंतु वे अद्भुत नेतृत्वक्षमता के धनी थे। 39 वर्ष की आयु में वे पुनः इंग्लैंड के कप्तान थे। उन्हें अगले 3 टेस्ट मैचों के लिए कप्तानी सौंपी गई थीं।

इंग्लिश क्रिकेट से जुड़े बहुत से लोगों का मानना था कि बोथम का टीम में स्थान ही नहीं बनता। भूतपूर्व इंग्लिश कप्तान Ray Illingworth ने “Sunday Mirror” में प्रकाशित अपने स्तम्भ में बोथम के विषय में लिखा, “Overweight, Overrated and Overpaid”

ऑस्ट्रेलियाई देख रहे थे कि इंग्लैंड की टीम बिखर रही है। वे ब्रेयरली को एक अच्छा कप्तान मानते थे पर ब्रेयरली को चुनने से उनकी अपेक्षा श्रेष्ठ इंग्लिश बल्लेबाज (बॉब वूल्मर) को बाहर बैठना पड़ेगा यह जानकर ऑस्ट्रेलियाई टीम प्रसन्न थी। (वूल्मर ने इस श्रृंखला की 4 पारियों में मात्र 30 रन बनाए थे।)

1888 के पश्चात ऑस्ट्रेलियाई टीम ने ऐशेज में बढ़त लेने के बाद कभी श्रृंखला नहीं गँवाई थी। क्या इस बार कुछ परिवर्तन होना था ? क्या माइक ब्रेयरली अपने इस अंतिम कार्यकाल में कुछ चमत्कार कर सकते थे ? क्या इयन बोथम कप्तानी से बोझ से मुक्त होकर डेढ़ साल पुराने बोथम की तरह खेल सकते थे?

साभार :

  1. BBC द्वारा निर्मित डॉक्यूमेंट्री “Botham’s Ashes.”
  2. माइक ब्रेयरली की इस श्रृंखला पर लिखी गयी पुस्तक “Phoenix From The Ashes”
  3. Rob Steen और Alastair McLellan की पुस्तक “500-1 The Miracle of Headingley ’81”
  4. The Guardian में प्रकाशित Steven Pye का लेख, “Ashes 1981: How Captain Beefy became Butterfingers Botham at Trent Bridge”
  5. ESPN Cricinfo पर Martin Williamson का लेख, “So nearly Botham’s annus horribilis”

चित्र: Getty Images

  1. इयन बोथम 1 रन पर टेरी ऑल्डरमन की गेंद पर बोल्ड।
  2. इयन बोथम द्वारा ऐलन बॉर्डर का कैच छूटना।
  3. ट्रेंट ब्रिज में मैन ऑफ द मैच डेनिस लिली।
  4. माइक ब्रेयरली और इयन बोथम।

To be continued….

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