Rudra Pratap Singh: India’s World Cup Hero

किंग्समीड, डरबन, 20 सितंबर 2007: सुपर 8 में यह भारत का अंतिम मैच था। भारत सुपर 8 में अपना पहला मैच न्यूज़ीलैंड से हार गया था। दूसरे मैच में इंग्लैंड के विरुद्ध युवराज सिंह की अविस्मरणीय पारी आई और भारत ने 18 रनों से मैच जीत लिया। तीसरा और अंतिम मैच दक्षिण अफ्रीका के विरुद्ध था। पिछले मैच के नायक युवराज कोहनी की चोट के कारण इस मैच से बाहर थे।

डरबन की इस पिच पर घास थी और दक्षिण अफ्रीका के पास सशक्त तेज गेंदबाजी आक्रमण था। जिसका परिणाम कुछ देर में ही सबके सम्मुख था। 10.3 ओवर में भारतीय टीम का स्कोर मात्र 61 रन पर 4 विकेट हो चुका था।

विश्वकप में भारतीय आशाओं को जीवंत रखने का दायित्व था इस टूर्नामेंट में पहली बार बल्लेबाजी कर रहे 20 वर्षीय प्रतिभाशाली बल्लेबाज रोहित शर्मा और कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के कंधों पर। धोनी ने पाकिस्तान के विरुद्ध लीग मैच में भी रॉबिन उथप्पा के साथ ऐसी ही संकट की स्थिति (7 ओवर में 36/4) से टीम को बाहर निकाला था। रोहित और धोनी ने सम्भलकर खेलते हुए पारी को आगे बढ़ाना आरम्भ किया।

दोनों के बीच अगले 9 ओवरों में 85 रनों की साझेदारी हुई। अंतिम 5 ओवरों में 56 रन बने। कप्तान धोनी 33 गेंद में 45 रन बनाकर अंतिम ओवर में रन आउट हुए वहीं रोहित 40 गेंद में 50 रन बनाकर अविजित रहे। अंतिम गेंद पर रोहित के छक्के से उनका अर्धशतक भी पूर्ण हुआ और भारत का स्कोर भी डेढ़ सौ के पार पहुँचा। (153/5)

इंग्लैंड अपने तीनों सुपर 8 मैच हारकर पहले ही इस टूर्नामेंट से बाहर हो चुकी थी। भारत, दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड तीनों में से कौन सी दो टीमें सेमीफाइनल में जाएंगी यह इस मैच के परिणाम पर निर्भर करता था। SA की विजय का अर्थ था कि SA और न्यूज़ीलैंड दोनों सेमीफाइनल में और भारत बाहर। SA की नेट रन रेट इतनी अच्छी थी कि सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई करने के लिए उसे 126 के स्कोर तक पहुँचना था। ऐसा होने पर SA और भारत सेमीफाइनल में जाते और न्यूजीलैंड बाहर हो जाती। अतः भारत के पास विजय के अतिरिक्त कोई अन्य विकल्प नहीं था।

एक दिन पूर्व दक्षिण अफ्रीका ने इसी मैदान पर न्यूज़ीलैंड के विरुद्ध बिल्कुल यही लक्ष्य (154) सफलतापूर्वक प्राप्त किया था। भारत को सेमीफाइनल में पहुँचाने का दायित्व अब युवा भारतीय तेज गेंदबाजों पर था।

RP Singh’s night at the Kingsmeed:
श्रीशांत के पहले ओवर में 11 रन आने के बाद पारी का दूसरे ओवर लेकर आए 21 वर्षीय रुद्र प्रताप सिंह। बाएँ हाथ से ओवर द विकेट, RP की पहली ही गेंद इन्स्विंगर, हर्शल गिब्स के पैड पर लगी, जोरदार अपील और अंपायर बिली डॉक्ट्रोव की उंगली उठ गई। कॉमेंट्री बॉक्स में नासिर हुसैन के स्वर “Perfect left armer’s dismissal.”

“They say that Dinesh Karthik is two extremes. He drops dollies and he takes some spectacular catches.” ये शब्द थे नासिर हुसैन के जब RP सिंह की चौथी गेंद पर ग्रैम स्मिथ ने कवर ड्राइव का प्रयास किया और बाहरी किनारा लगकर गेंद स्लिप में खड़े दिनेश कार्तिक के बाईं ओर गई। दिनेश कार्तिक ने फुल स्ट्रेच डाइव लगाई और एक अद्भुत कैच पकड़ किया। यह एक अजीब सी फील्डिंग पोजिशन थी तीसरी स्लिप और गली के बीच, कार्तिक को एक गेंद पूर्व ही वहाँ खड़ा किया गया था।

श्रीशांत ने अगले ओवर में AB डिविलियर्स को LBW करके स्कोर 12/3 पर दिया। दक्षिण अफ्रीका के पास अभी भी सक्षम बल्लेबाज थे जो ये लक्ष्य प्राप्त कर सकते थे। इनमें से एक थे नम्बर 4 पर आए जस्टिन केम्प, विशाल कद काठी वाले शक्तिशाली स्ट्रोक खेलने की क्षमता के धनी बल्लेबाज। केम्प ने एक दिन पूर्व न्यूज़ीलैंड के विरुद्ध 154 की रन चेज में 2 विकेट शीघ्र गिरने के बाद 56 गेंद में 6 छक्कों सहित अविजित 89 रनों की पारी खेलकर मैच जीताया था। आज वे समय ले रहे थे।

पारी का छठा ओवर, बाउचर ने गेंद को हल्के हाथों से खेला और सिंगल के लिए दौड़े। एक्स्ट्रा कवर से रोहित शर्मा गेंद की ओर दौड़े। One handed pick up and throw सब एक ही मोशन में। थ्रो के समय रोहित का शरीर हवा में, डायरेक्ट हिट। “They think they’ve got him.” अंपायर साइमन टॉफल ने निर्णय तीसरे अंपायर के पास भेज दिया पर मैदान में उपस्थित हर खिलाड़ी को पता था कि निर्णय क्या होगा। भारतीय क्षेत्ररक्षक रोहित को घेर चुके थे और जस्टिन केम्प धीमे कदमों से पवेलियन की ओर लौट रहे थे। स्कोर 30/4.

“This is mayhem for South Africa. What is happening at the Kingsmeed?”
RP के इस ओवर में अभी 2 गेंदें शेष थीं। नए बल्लेबाज शॉन पॉलक स्ट्राइक पर। इस बार राउंड द विकेट से RP सिंह, गेंद अंदर आई, बल्ले को पीछे छोड़ती हुई लेग स्टम्प ले उड़ी। स्कोर 31/5.

3 ओवर 11 रन और 3 विकेट। RP सिंह के इस स्पेल ने दक्षिण अफ्रीका की विजय की संभावनाओं को बहुत क्षीण कर दिया था।

5 विकेट मात्र 31 पर खो चुकी दक्षिण अफ्रीकी टीम ने अपने लक्ष्य में परिवर्तन कर लिया था, अब वह 154 नहीं 126 की ओर भी देख रही थी, पर अभी भी ऐल्बी मॉर्कल शेष थे जो इस टूर्नामेंट में अच्छी हिटिंग फॉर्म में थे। बाउचर और ऐल्बी ने सम्भलकर खेलते हुए पारी को आगे बढ़ाया और 17वें ओवर में दक्षिण अफ्रीका का स्कोर 100 रनों तक पहुँचा दिया। सेमीफाइनल में पहुँचने हेतु 21 गेंदों में 26 रनों की आवश्यकता। श्रीशांत अपना अंतिम ओवर कर रहे थे। चौथी गेंद बाउचर के बल्ले का किनारा लेती हुई गिल्ली उड़ा गई। 4 ओवर में 23 रन पर 2 विकेट। श्रीशांत ने अपने शानदार स्पेल का अंत किया। अगले ओवर में हरभजन सिंह ने फिलैंडर का विकेट लिया और मात्र 5 रन दिए। दक्षिण अफ्रीका को सेमीफाइनल में जाने के लिए 2 ओवर में 20 रन बनाने थे और मात्र 3 विकेट हाथ में थे।

महेंद्र सिंह धोनी ने इस मैच में अपने सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज को एक बार पुनः गेंद सौंपी। ओवर की चौथी गेंद, RP का यॉर्कर, मॉर्कल सम्पर्क नहीं कर सके और क्लीन बोल्ड। 4-0-13-4, RP ने भी अपना स्पेल समाप्त किया। SA के लिए अब 126 भी लगभग असंभव दिख रहा था। अंतिम ओवर में 17 रनों की आवश्यकता थी पर बने मात्र 7. जो दक्षिण अफ्रीका मैच से पूर्व तालिका में शीर्ष पर थी, वह तीसरे स्थान पर आ गई और टूर्नामेंट से बाहर हो गई। भारतीय टीम ने यह मैच 37 रनों से जीता।

22 सितंबर 2007, किंग्समीड, डरबन: सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध रुद्र प्रताप सिंह ने महत्वपूर्ण अवसर पर मैच जिताउ गेंदबाजी की।

RP अपने पहले स्पेल में 3 ओवरों में 28 रन दे चुके थे, उनके तीसरे ओवर में 17 रन आए थे। ऑस्ट्रेलिया को अंतिम 2 ओवर में 27 रन चाहिए थे, माइकल हसी और ब्रैड हैडिन क्रीज पर थे, दोनों सक्षम हिटर। अंतिम ओवर जोगिंदर शर्मा को करना था, जो अबतक 2 ओवर में 31 रन दे चुके थे। अतः RP इस ओवर में 10-12 से अधिक रन नहीं दे सकते थे। RP ने यहाँ मात्र 5 रन दिए और जोगिंदर के अंतिम ओवर के लिए 22 रन छोड़े। जोगिंदर ने भी अच्छा ओवर किया और भारत 15 रनों से मैच जीता। केवल 4 ओवर के आँकड़े देखकर आप इस मैच में RP सिंह के योगदान का अनुमान नहीं लगा सकते थे।

24 सितंबर 2007 को जो-बर्ग में हुए फाइनल में भी RP सिंह ने अद्भुत प्रदर्शन किया। भारतीय टीम ने पाकिस्तान को 158 का लक्ष्य दिया था। भारतीय टीम को शीघ्र विकेट चाहिए थे। RP ने अपने पहले ही ओवर में हफ़ीज़ का विकेट लिया। अगले ओवर में श्रीशांत को 21 रन पड़े और मोमेंटम दूसरे पाले में चला गया पर इसके बाद RP ने अपने दूसरे ओवर में कामरान अकमल का ऑफ स्टम्प उखाड़ दिया। पहले स्पेल में 3 ओवर में 21 रन पर 2 विकेट।

Thriving under extreme pressure:
यह लगातार तीसरा मैच था जब RP को सेकेंड लास्ट ओवर करना था। सेमीफाइनल में उन्होंने यह काम सफलतापूर्वक किया था। फाइनल में भी स्थिति कठिन थी, एक तो यह फाइनल था, ऊपर से पाकिस्तान के विरुद्ध था। पिछले 2 ओवरों में 34 रन बने थे। पाकिस्तान को अंतिम 2 ओवरों में 20 रनों की आवश्यकता थी। RP सिंह मात्र 21 वर्ष के थे पर इस अकल्पनीय दबाव में भी उन्होंने स्वयं को नियंत्रित रखा और पहली 4 गेंदों में मात्र 3 रन दिए। 8 गेंदों में 18 रनों की आवश्यकता। RP की 5वीं गेंद, उमर गुल का स्टम्प उखड़कर बाहर। अंतिम गेंद पर बाहरी किनारा लगकर चौका गया और इस प्रकार RP ने फिर से जोगिंदर के अंतिम ओवर के लिए 13 रन छोड़ दिए। अंतिम ओवर में क्या हुआ यह आप सब सैकड़ों बार टेलीविजन और युट्यूब पर देख चुके हैं। फाइनल में RP के आँकड़े, 4 ओवर, 28 रन और 3 विकेट।

टूर्नामेंट के आँकड़े:
vs Pak 4 ओवर 23 रन 1 विकेट,
vs NZ 4 ओवर 29 रन 2 विकेट,
vs Eng 4 ओवर 28 रन 2 विकेट,
vs SA 4 ओवर 13 रन 4 विकेट,
vs Aus 4 ओवर 33 रन 0 विकेट,
vs Pak 4 ओवर 28 रन 3 विकेट।

रुद्र प्रताप सिंह इस विश्वकप में भारतीय टीम के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी सिद्ध हुए थे, वे फाइनल के भी मैन ऑफ द मैच हो सकते थे और दक्षिण अफ्रीका वाले मैच के भी (ये अर्थ कतई न निकाला जाए कि जिन्हें मिला उन्हें गलत मिला) होने को तो RP मैन ऑफ द टूर्नामेंट भी हो सकते थे… पर कोई बात नहीं। उन्होंने इस विश्वकप में 12 विकेट लिए (भारत के लिए सर्वाधिक और टूर्नामेंट में संयुक्त रूप से द्वितीय स्थान पर) 12.66 रन प्रति विकेट की औसत, 6.33 रन प्रति ओवर की इकॉनमी रेट और 12 गेंद प्रति विकेट की स्ट्राइक रेट से। ये आँकड़े अद्भुत हैं पर इस विश्वकप में RP का योगदान इन आँकड़ों से कहीं बढ़कर था।

RP सिंह भारत के सबसे अधिक Unsung विश्वकप हीरो हैं।

आज 2007 टी-ट्वेंटी विश्वकप विजय के 14 वर्ष पूर्ण होने पर Cricket Tales की ओर से सभी भारतीय क्रिकेट समर्थकों को हार्दिक शुभकामनाएँ।

चित्र: Getty Images

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