छायाकार विलियम वेस्ट द्वारा लिया गया क्रीज के अंदर पेट के बल पड़े स्टीव वॉ का बिना स्टिकर वाला बैट उठाए हुए यह चित्र वॉ के करियर को परिभाषित करने वाला चित्रों में से एक है।
ट्रेंटब्रिज, नॉटिंघम 2001: स्टीव वॉ ने शरीर का भार पिछले पाँव पर रखकर गेंद को लेग साइड की ओर खेला और फिर रन के लिए दौड़े। उन्होंने अपनी बायीं पिंडली (Calf: घुटने के पीछे का निचला माँसल हिस्सा) में तत्काल अतिशय पीड़ा का अनुभव किया जिस कारण उनका बल्लेबाजी करते रह पाना असंभव था। उन्हें स्ट्रेचर पर मैदान से बाहर लाया गया।

MRI स्कैन से पुष्टि हुई कि उनकी पिंडली में एक Tear 5 सेंटीमीटर का था और दूसरा 2 सेंटीमीटर का। स्टीव वॉ कहते हैं, “ऐसा लगा जैसे किसी ने मेरे पैर पर Shotput फेंक कर मारा हो। मुझसे चला भी नहीं जा रहा था।”
स्पोर्ट्स मेडिसिन जगत में यह चोट इसलिए भी रुचि और चर्चा का विषय थी क्योंकि यह प्रथम उदाहरण था जब ठीक वह क्षण कैमरों द्वारा भिन्न भिन्न कोणों से छविबद्ध कर लिया गया जब यह चोट लगी थी।

स्टीवेन रॉजर वॉ नॉटिंघम के एक चिकित्सालय में व्हील चेयर पर बैठे थे, उधर ट्रेंट ब्रिज में मार्क वॉ और डेमियन मार्टिन 158 रनों के लक्ष्य को पूरा कर रहे थे। तीन टेस्ट मैचों के पश्चात 3-0 की बढ़त के साथ ऑस्ट्रेलिया ने लगातार 7वीं बार ऐशेज श्रृंखला जीत ली थी। यह पिछले 21 टेस्ट मैचों में ऑस्ट्रेलिया की 19वीं विजय थी।
36 वर्षीय स्टीव वॉ को पूर्णतः फिट होने में 4 से 6 माह का समय लगना था अतः उनके लिए यह ऐशेज श्रृंखला समाप्त हो चुकी थी।
शाम को उन्होंने सिडनी में फोन लगाया और अपनी पत्नी लिनेट को इस बात की सूचना दी। “अब मेरे यहाँ रुकने का कोई औचित्य नहीं। अंतिम टेस्ट (ओवल में) 19 दिन बाद आरम्भ होगा। हम ऐशेज जीत चुके हैं। मैं कम से कम 4 माह तक टीम से बाहर रहने वाला हूँ। मुझे लगता है अब घर वापस आ जाना चाहिए।”
लिनेट की ओर से जो उत्तर आया, स्टीव वॉ उसकी अपेक्षा नहीं कर रहे थे। “नहीं, तुम नहीं आ रहे हो। तुम्हें ओवल की बालकनी पर ऐशेज ट्रॉफी उठानी है… बस” (अंतिम टेस्ट ओवल में था)
स्टीव वॉ कहते हैं, विवाहित पुरुषों के पास अधिक विकल्प नहीं होते। पत्नी जो कहे मानना ही पड़ता है।
“Let’s try to produce a miracle.” यह बात स्टीव वॉ ने टीम के फिजियोथेरेपिस्ट एरोल एल्कॉट से कही। अगले 19 दिनों तक स्टीव और एल्कॉट साथ साथ रहे। एल्कॉट कम से कम दिन के 10 घण्टे स्टीव के साथ बिताते थे। जिनमें से 5 घण्टे चोटिल पिंडली की मासंपेशियों को पुनः जोड़ने हेतु मसाज में लगते थे। स्टीव वॉ ने अपनी ऐशेज 2001 की डायरी में लिखा है कि इन 19 दिनों तक उनकी दिनचर्या में दो पूल सेशन, स्ट्रेचिंग, पैदल चलना, जिम और एक घण्टे का “Deep Friction” (जो बहुत ही कष्टदायक था) शामिल थे। प्रत्येक दिन वे आकलन करते रहे कि उनके ओवल टेस्ट खेलने की सम्भावनाओं में कितनी वृद्धि हो रही है। कभी भी संभावनाएं “फिफ्टी – फिफ्टी” से ऊपर न रहीं।
[वॉ की अनुपस्थिति में इंग्लैंड ने हेडिंग्ली में हुए चौथे टेस्ट की चौथी पारी में मार्क बूचर 173 अविजित रनों के बलपर 315 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए 6 विकेट से विजय प्राप्त की और ऐशेज वाइटवॉश का भय समाप्त किया।]
ओवल टेस्ट के आरम्भ से चार दिन पूर्व स्टीव वॉ को लगने लगा कि वे वाकई ओवल टेस्ट खेल सकते हैं पर मैच की सुबह दौड़ने के पश्चात ही यह पक्का हो पाया कि वे खेलेंगे। वॉ कहते हैं कि वे कभी ऐसा नहीं चाहते थे कि उनका यह निर्णय टीम के लिए हानिकारक हो क्योंकि यदि मैच के दौरान यह चोट और बढ़ी तो ऑस्ट्रेलिया के पास एक बल्लेबाज कम हो जाएगा।
23 अगस्त 2001: ओवल की पाटा विकेट पर स्टीव वॉ ने टॉस जीता और किसी को संशय नहीं था कि वे क्या करने वाले हैं। मैथ्यू हेडेन और जस्टिन लैंगर बल्लेबाजी के लिए उतरे। लैंगर ने अबतक इस श्रृंखला में कोई मैच नहीं खेला था और 1993 में अपनी पदार्पण श्रृंखला के पश्चात टेस्ट क्रिकेट में कभी ओपनिंग नहीं की थी। यह टेस्ट मैच उनके करियर के लिए भी ऐतिहासिक रहा। ओवल टेस्ट मैच के पहले उन्होंने एक शानदार शतक बनाकर अपने ऊपर लटक रही तलवार हटा दी और अगले साढ़े पाँच वर्ष के लिए इस महान ऑस्ट्रेलियाई टीम के अभिन्न अंग बन गए।
फिलहाल पोस्ट के विषय पर आते हैं। हज़ारों दर्शकों ने खड़े होकर करतल ध्वनि से वॉ का स्वागत किया। दर्शकों की यह प्रतिक्रिया दो कारणों से थी, प्रथम तो यह कि ऐसी चोट के साथ खेलने का निर्णय लेना वॉ के साहस का परिचय दे रहा था और दूसरा कि यह संभवतः इंग्लैंड में उनका अंतिम टेस्ट था। 73वें ओवर में बल्लेबाजी करने आए स्टीव वॉ पहले दिन 12 रन पर नॉट आउट रहे। दूसरे दिन का अभ्यास सत्र स्टीव के लिए बहुत अच्छा रहा। लगभग प्रत्येक गेंद बल्ले के मध्यभाग से लगी। स्टीव वॉ लिखते हैं कि पहले दिन नॉट आउट रहने से उन्हें बहुत प्रोत्साहन मिला और लगा कि सब कुछ ठीक होगा।
दूसरा दिन: स्टीव ने 20 रन का स्कोर पार ही किया था कि उन्हें पुनः पीड़ा का अनुभव हुआ। कुछ देर बाद एक तेज सिंगल लेने के प्रयास में उनके दाएँ कूल्हे में खिंचाव का अनुभव हुआ, बाएँ पैर की पिंडली में चोट पहले से थी।
“मैं टीम के प्रति अपने दायित्व से अवगत था, मुझे पता था कि यद्यपि मैं संघर्ष कर रहा हूँ परंतु टीम के लिए यहाँ खड़े रहना आवश्यक है। वॉ कहते हैं, “यह आश्चर्यजनक है कि एक इंजरी कैसे आपका ध्यान आपकी क्रिकेट पर केंद्रित कर देती है। आप सारी बातें छोड़ केवल अधिक से अधिक रन बनाने के बारे में सोचने लगते हैं।”
स्टीव ने अपने भाई मार्क से कहा कि वापस जाना कोई विकल्प नहीं है क्योंकि मैं टीम से कह चुका हूँ कि मैं फिट हूँ पर मैं दौड़ नहीं पाऊंगा इसलिए तेज सिंगल मत लेना। अब केवल बाउंड्री ही लगानी है और रन ऐसे ही लेने हैं जो पैदल चलकर लिए जा सकें। 99 रन तक पहुँचने तक स्टीव ने इस नियम का पालन किया। एक संख्या स्टीव वॉ जैसे अनुभवी और सफल खिलाड़ी के दिमाग के साथ क्या कर सकती है इसका उदाहरण अब देखने को मिला।
स्टीव वॉ ने डैरेन गॉफ़ की गेंद को शॉर्ट मिडविकेट की ओर खेला। मिस्फील्ड हुई देखकर स्टीव रन के लिए निकले। मिस्फील्ड होकर गेंद मिड ऑन पर स्थित फील्डर के बायीं ओर आई। स्टीव जैसे तैसे क्रीज के पास पहुँचे। लग रहा था उनके पैरों ने उनका साथ छोड़ दिया हो। एड्रेनलिन का प्रवाह। उन्होंने डाइव लगाई और क्रीज में पहुँचे। कॉमेंटेटर के स्वर, “He’s got it. He’s flat down. He’s raising his bat with a big smile. That is a monumental effort from Steven Waugh.”

क्रीज के अंदर पेट के बल लेटे हुए स्टीव वॉ की बिना स्टिकर वाला बैट उठाए चित्र ऐतिहासिक है। यह स्टीव वॉ के करियर को परिभाषित करने वाला चित्रों में से एक है। स्टीव वॉ ने यह शतक टीम के फिजियोथेरेपिस्ट एरोल एल्कॉट को समर्पित किया। वॉ कहते हैं, “एरोल के बिना मैं यह टेस्ट नहीं खेल पाता। यह शतक जितना मेरा था, उतना ही एल्कॉट का।”
जस्टिन लैंगर और मार्क वॉ के बाद यह इस ऑस्ट्रेलियाई पारी का तीसरा शतक था और स्टीव वॉ के महान टेस्ट करियर का 27वाँ। [ शतकों के मामले में अब केवल दो बल्लेबाज उनसे आगे थे। सर डॉनल्ड ब्रैडमैन (29) और सुनील गावस्कर (34) ]
स्टीव और मार्क ने 197 रनों की साझेदारी की। शतक के बाद स्टीव वॉ के अगले 50 रन मात्र 54 गेंदों में आए। 641/4 के स्कोर पर ऑस्ट्रेलिया की पारी घोषित करते हुए स्टीव वॉ स्वयं 157 पर नॉट आउट लौटे। शेष मैच शेन वॉर्न और ग्लेन मक्ग्रा के नाम रहा। दोनों ने मिलकर इंग्लैंड के 20 में से 18 विकेट लिए। इसी मैच में वॉर्न 400 विकेट लेने वाले पहले ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज बने। ऑस्ट्रेलिया ने यह मैच पारी और 25 रनों से जीता और श्रृंखला 4-1 से।
27 अगस्त 2001: लिनेट वॉ टेलीविजन स्क्रीन पर स्टीव वॉ को ओवल की बालकनी में ऐशेज ट्रॉफी उठाए हुए देख रही थीं।
यह स्टीव वॉ का इंग्लैंड में अंतिम टेस्ट मैच था और उनके उपरांत कोई भी ऑस्ट्रेलियाई कप्तान आजतक इंग्लैंड में ऐशेज सीरीज जीतने में सफल नहीं हुआ। (टिम पेन की 2019 वाली टीम ने 2-2 से श्रृंखला बराबर की थी)
वॉ की यह पारी उनके प्रशंसकों के लिए यह इस बात का प्रतीक थी कि स्टीव वॉ को अपनी “Baggy Green Cap” पर कितना गर्व था और वे इसके लिए कुछ भी कर सकते थे। स्वयं स्टीव वॉ कहते हैं कि वे इंग्लैंड की टीम को संदेश देना चाहते थे ऑस्ट्रेलियाई टीम कितनी “Tough” है। (ऑस्ट्रेलियाई खेमे का मानना था कि इंग्लैंड के क़ई खिलाड़ी “छोटी मोटी” चोट के कारण ऐशेज जैसी सीरीज के मैचों से बाहर रह जाया करते थे, स्वयं कप्तान नासिर हुसैन उंगली में फ्रैक्चर के कारण दो टेस्ट से बाहर रहे थे।)
स्टीव वॉ के खेलने या न खेलने से इस श्रृंखला के परिणाम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ना था परंतु उन्होंने केवल एक संदेश देने के लिए यह टेस्ट खेला। हालाँकि इसका मूल्य उन्हें चुकाना पड़ा, श्रृंखला जीतकर ऑस्ट्रेलिया लौटते समय फ्लाइट में उन्हें “Blood Clots” की समस्या हुई जिसके कारण उन्हें “Deep Vein Thrombosis” का उपचार कराना पड़ा पर स्टीव वॉ के लिए यह टेस्ट जीतना और ओवल की बालकनी पर ऐशेज ट्रॉफी उठाना अधिक महत्वपूर्ण था।
[स्टीव वॉ “ब्रिटिश जर्नल ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन” द्वारा छापे गए शोधपत्र के सह लेखक भी हैं। इस शोध का विषय ट्रेंट ब्रिज टेस्ट में वॉ की “Calf Injury” थी। शोधपत्र का लिंक कॉमेंट बॉक्स में है।]
साभार:
1. “The Sydney Morning Herald” में 10 सितंबर 2019 को प्रकाशित खेल पत्रकार Andrew Vu का लेख “The calf, the dive and that raised bat: Steve Waugh’s 2001 medical miracle”
2. क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया का यूट्यूब वीडियो “Waugh’s ton of pain.”
3. The Age में जुलाई 2002 में छपा लेख “Waugh scores with the medicos.”
चित्र- Getty Images