When Laxman and Dravid Stopped The Aussie Juggernaut.

आज से ठीक दो दशक पूर्व, 13 मार्च 2001-

वेंकटेश प्रसाद और वी.वी.एस लक्ष्मण अभी पवेलियन में लौटे ही थे। ऑस्ट्रेलिया ने भारत को 60 ओवरों के अंदर 171 पर ऑल आउट करके फॉलो-ऑन दिया था। लक्ष्मण आउट होने वाले अंतिम बल्लेबाज थे और पैड उतारने के लिए बैठे थे कि तभी उनके कंधे पर किसी ने हाथ रखा और कहा, “Don’t take your pads off Lax.” यह कोच जॉन राइट के शब्द थे। लक्ष्मण को अपने कानों पर विश्वास नहीं हो रहा था, उन्होंने प्रश्न किया, “‘Oh! Why, John?” जॉन का उत्तर था, “‘You are going in at No. 3.”

लक्ष्मण को यह स्वप्न जैसा लग रहा था, कोच के शब्द उनके कानों के लिए मानो संगीत थे। उनकी प्रसन्नता का पारावार न था। नम्बर 3 लक्ष्मण का सबसे प्रिय बल्लेबाजी क्रमांक था। वे रणजी ट्रॉफी में पिछले 5 वर्षों से इसी क्रमांक पर खेल रहे थे पर भारतीय टीम में राहुल द्रविड़ इस क्रमांक पर खेलते थे और सफलतापूर्वक अपनी भूमिका का निर्वहन कर रहे थे।

स्टीव वॉ की विश्वविजयी ऑस्ट्रेलिया ने पिछले 16 टेस्ट मैच लगातार जीते थे, वानखेड़े स्टेडियम में हुआ पिछला टेस्ट मात्र 3 दिन में 10 विकेट से जीत लिया था और ईडन गार्डन्स में हो रहे इस दूसरे टेस्ट में पहली पारी में 274 रनों की बढ़त ले ली थी। ऑस्ट्रेलिया के पास एक सशक्त गेंदबाजी आक्रमण था, ग्लेन मक्ग्रा, जेसन गिलेस्पी, शेन वॉर्न और माइकल कैस्प्रोविच। श्रृंखला की पहली तीन पारियों में भारत के स्कोर थे 176, 219 और 171, अतः जब शिवसुन्दर दास और सदागोपन रमेश ने पहले विकेट के लिए 52 रन जोड़ दिए तो भारतीय ड्रेसिंग रूम में कुछ स्थिरता का वातावरण बन चुका था।

लक्ष्मण ने अभी तक टेस्ट क्रिकेट में मात्र दो अवसरों पर नम्बर 3 पर बल्लेबाजी की थी, 1999-2000 ऑस्ट्रेलिया दौरे पर एडिलेड टेस्ट की दोनों पारियों में। पहली पारी में 41 और दूसरी पारी में गोल्डन डक।

जब सदागोपन रमेश के रूप में भारत का पहला विकेट गिरा तो लक्ष्मण अपने स्थान से उठे, आउट होकर लौट रहे रमेश राहुल द्रविड़ के स्थान पर लक्ष्मण को नम्बर 3 पर आता देख चौंक गए थे। दास और लक्ष्मण ने एक अच्छी साझेदारी आरम्भ की। लक्ष्मण गेंद को बड़े आराम से टाइम कर रहे थे, गेंद बल्ले के बिल्कुल मध्य में लग रही थी, विशेषकर शेन वॉर्न के विरुद्ध। पैरों की मूवमेंट भी उत्कृष्ट। इस समय पुरानी असफलताएँ लक्ष्मण के मस्तिष्क से निकल चुकी थीं। यही कारण था कि जब जल्दी जल्दी शिवसुन्दर दास और सचिन के विकेट गिरे और स्कोर 115/3 हो गया तब भी लक्ष्मण विचलित नहीं हुए।

श्रृंखला में अबतक बल्ले से असफल रहे कप्तान सौरव और लक्ष्मण ने तीसरे दिन भोजनावकाश के पश्चात शतकीय साझेदारी की और ऑस्ट्रेलिया की बढ़त को कुछ कम किया, दिन के अंतिम घण्टे में जब सौरव 48 रन पर आउट हुए तब भी ऑस्ट्रेलिया 42 रनों से आगे थी। ईडन गार्डन्स के दर्शक अपने भूमिपुत्र की पवेलियन वापसी के पश्चात स्टेडियम छोड़कर जाने लगे और जबतक राहुल द्रविड़ क्रीज पर पहुँचे, आधा स्टेडियम खाली हो चुका था।

Day 4:
भारतीय टीम अभी भी 20 रन पीछे थी और 4 विकेट गिर चुके थे पर चौथे दिन सवेरे जब लक्ष्मण और द्रविड़ बल्लेबाजी के लिए आए तब ईडन के दर्शक उत्साह से भरे हुए थे। लक्ष्मण इस मैच में अबतक 8 घण्टे बल्लेबाजी कर चुके थे और थोड़े क्लान्त भी थे पर एड्रेनलिन-प्रवाह किसी भी छोटी मोटी क्लान्ति को इस समय लक्ष्मण का मार्ग रोकने की आज्ञा देने को तैयार न था।

परिस्थितियाँ अब और कठिन होने वाली थीं क्योंकि दूसरी नई गेंद का समय हो चला था। मक्ग्रा और गिलेस्पी पूर्ण रूप से तैयार थे, यहाँ अधिक स्विंग नहीं थी पर दोनों गेंदबाज अनिश्चितता के कॉरिडोर में गेंद करने की कला में दक्ष थे। लक्ष्मण की योजना थी, अधिक से अधिक “V” में खेलना और आड़े बल्ले वाले शॉट्स की संख्या अत्यल्प रखना। लक्ष्मण पुल शॉट अच्छा खेलते थे इसलिए बीच बीच में आने वाले बाउंसर के लिए भी वो तैयार थे। इस समय उनके शरीर और मस्तिष्क में ऐसा तालमेल था कि वे वह कर पा रहे थे जो उन्होंने सोच रखा था। मक्ग्रा और गिलेस्पी के स्पेल सफलतापूर्वक निकालने के बाद अब अगली परीक्षा शेन वॉर्न और कैस्प्रोविच के रूप में सामने थी। कैस्पर रिवर्स स्विंग के अच्छे गेंदबाज थे, उनकी गेंद इस प्रकार अंदर आती थी कि उनके विरुद्ध शॉट्स मिड ऑफ के दाएँ से लेकर मिडविकेट के बाएँ ही खेले जा सकते थे, मानो मैदान का शेष भाग अस्तित्व में ही न हो और शेन वॉर्न के बारे में कुछ कहने की आवश्यकता है ही कहाँ !

साझेदारी के दौरान जहाँ भी लक्ष्मण की एकाग्रता भंग होती दिखती (जैसा कोलकाता में मार्च की गर्मी में क़ई बार होता है) राहुल द्रविड़ तत्काल उनसे कहते, “Job not done.” अभी काम पूरा नहीं हुआ और बिना काम पूरा किए क्षण भर के लिए भी शिथिलता नहीं बरतनी है। “Job not done.” इस लंबी साझेदारी में सर्वाधिक प्रयोग किया जाने वाला वाक्य बनने वाला था। लक्ष्मण और द्रविड़ ने बिना स्कोरबोर्ड की ओर देखे 10-10 ओवर के छोटे छोटे लक्ष्य निर्धारित करते हुए खेल को आगे बढ़ाने का निश्चय किया। इस समय उद्देश्य विजय नहीं बल्कि मैच में बने रहना था। जितनी देर तक ऑस्ट्रेलियाई टीम से गेंदबाजी कराई जाएगी, ड्रॉ की संभावना उतनी ही प्रबल होती जाएगी।

पहले सत्र में दोनों ने 29 ओवर में 122 रन जोड़ लिए थे और सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि भारत की बढ़त 102 की हो चुकी थी। लक्ष्मण ने अपने पिछले दिन के स्कोर 109 में 62 रन और जोड़ लिए थे। स्कोर 376/4.

Laxman Vs Warne:
लक्ष्मण घरेलू सत्र से ही बहुत अच्छी फॉर्म में थे, अतः उन्होंने शेन वॉर्न के विरुद्ध आक्रमण किया। लक्ष्मण जानते थे कि ऐसा करते हुए उनका फुटवर्क उच्चस्तरीय होना चाहिए। जैसे ही वॉर्न गेंद को आगे फेंकते, लक्ष्मण पलक झपकते ही बाहर आ चुके होते थे और गेंद को या तो स्पिन के विरुद्ध मिड ऑन की दाईं ओर या स्पिन के साथ ऑफ साइड में ड्राइव कर रहे थे। बीच बीच में पीछे जाकर पुल शॉट भी खेल रहे थे। उद्देश्य था शेन वॉर्न को लय में न आने देना। लक्ष्मण इस उद्देश्य में सफल होते दिख रहे थे, वॉर्न जितनी अधिक गेंदबाजी करते गए उनकी गेंदों में घुमाव कम होता गया और जैसे जैसे उनका कंधा थकता गया, गेंदों की गति भी कम होती गई।

(इस पारी में वॉर्न को 34 ओवरों में साढ़े चार की औसत से 152 रन पड़े। इयन चैपल कहते हैं, लेग स्पिनर के विरुद्ध ऑन ड्राइव क्रिकेट में सबसे कठिन शॉट है। वी.वी.एस लक्ष्मण ने इस पारी में शेन वॉर्न की लेग स्पिन को जिस प्रकार खेला, लेग स्पिन के विरुद्ध इस स्तर की बल्लेबाजी उन्होंने कभी नहीं देखी। बाद में चैपल ने वॉर्न ने पूछा कि अपनी गेंदबाजी के बारे में उनका क्या कहना है, इसपर वॉर्न ने यह उत्तर दिया कि उन्होंने बुरी गेंदबाजी नहीं की। चैपल ने उनसे सहमत होते हुए कहा कि आप सही कह रहे हैं लेकिन जब कोई बल्लेबाज तीन कदम आगे निकलकर आपकी गेंद को मिड ऑन के दाएँ से चौका मार रहा है वो भी ऐसी पिच पर जिसपर पर्याप्त टर्न मिल रहा हो और यदि आप हल्की सी शॉर्ट गेंद करके चकमा देने का प्रयास करें तो पिछले पैर पर जाकर पुल कर रहा हो तो आप भला क्या कर सकते हैं! यह बुरी गेंदबाजी नहीं बल्कि उत्कृष्ट फुटवर्क है।)

शाम तक खेलेंगे तो इनकी :

चायकाल से पूर्व लक्ष्मण ने मार्क वॉ की गेंद को घुटनों पर बैठकर कवर ड्राइव करके अपना दोहरा शतक पूरा किया। इसके बाद राहुल द्रविड़ ने भी अपना शतक पूरा किया। राहुल के सेलिब्रेशन से लग रहा था कि उनके लिए इस पारी का क्या महत्व था। उन्होंने आगे निकलकर वॉर्न की गेंद को ऑन ड्राइव करके हेलमेट निकाला और गुस्से में अपने बल्ले और हेलमेट को कॉमेंट्री बॉक्स की ओर दिखाया। राहुल द्रविड़ का यह पक्ष पहले किसी ने देखा नहीं था।

दिन का खेल समाप्त होने पर जब दोनों बल्लेबाज पवेलियन में लौटे तो वहाँ अब कोई नर्वस चेहरे नहीं थे, कोई नकारात्मक विचार शेष नहीं था, अब केवल उल्लास था क्योंकि भारतीय टीम की बढ़त 300 के पार जा चुकी थी। पूरे दिन गर्मी से पार पाने के लिए दोनों ने ठंडे तौलिए गर्दन पर लपेटे हुए थे और स्टम्प्स का समय होते होते लगभग ऊर्जाहीन हो चुके थे। चेंज रूम में आते ही दोनों ने बड़ी कठिनाई से पैड उतारे और मसाज टेबल पर लेट गए। लेकिन यह सब स्वीकार था क्योंकि स्कोर था 589/4, लक्ष्मण 275, द्रविड़ 155. दिन के खेल में 315-0 रन बने थे, इसी अवधि में लक्ष्मण सुनील गावस्कर का 236 रनों का स्कोर पार करके एक पारी में सर्वाधिक रन बनाने वाले भारतीय बल्लेबाज बने।

Day 5:
विचार यह था कि 5वें दिन एक घण्टा खेलकर पराजय की सम्भवनाएँ समाप्त की जाएँ और ऑस्ट्रेलिया से बल्लेबाजी कराई जाए। लक्ष्मण के पास पर्याप्त समय था 25 रन और जोड़कर भारत की ओर से पहला तिहरा शतक लगाने का, पर नियति को यह स्वीकार नहीं था। लक्ष्मण 281 के स्कोर पर मक्ग्रा की गेंद पर आउट हुए और लक्ष्मण और द्रविड़ के बीच चली ये 376 रनों की ऐतिहासिक साझेदारी समाप्त हो गई। राहुल द्रविड़ 180 पर रन आउट हो गए और भारतीय टीम ने 657/7 पर पारी घोषित कर दी। लक्ष्मण के मन में तनिक भी दुःख नहीं था 300 न बना पाने का। उन्होंने अपनी टीम को संकट से निकालकर विजय पाने की स्थिति में पहुँचा दिया था।

ऑस्ट्रेलिया के सामने लक्ष्य था ढाई सत्र में 384 रनों का। चायकाल तक स्कोर 161 पर 3 था, मैथ्यू हेडेन और कप्तान स्टीवेन वॉ क्रीज पर थे और मैच ड्रॉ की अग्रसर दिख रहा था। चाय के बाद हरभजन को 14 गेंदें लगीं स्टीव वॉ का विकेट लेने में, रिकी पॉन्टिंग इस श्रृंखला में हरभजन के सामने वॉकिंग विकेट थे, वे मात्र 4 गेंद टिके। इसके तुरंत बाद सचिन की गेंद को स्वीप करने के प्रयास में गिलक्रिस्ट इस मैच में अपने दूसरे गोल्डन डक पर आउट हो गए। इस श्रृंखला में भारतीय टीम के लिए समस्या बने हुए मैथ्यू हेडेन भी इसी प्रकार सचिन की गेंद पर आउट हुए। स्टम्प्स से कुछ मिनट पूर्व हरभजन सिंह ने ग्लेन मक्ग्रा के रूप में अपना इस पारी का छठा और मैच का 13वाँ विकेट लेकर मैच समाप्त किया।

भारतीय टीम की यह अप्रत्याशित टेस्ट विजय भारतीय क्रिकेट की लोककथाओं का हिस्सा बनने वाली थी। कोच जॉन राइट ने लक्ष्मण से कहा, “I always knew that you had the potential. I am glad you showed this to the world.”

(वी.वी.एस लक्ष्मण की आत्मकथा “281 And Beyond” से।)

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