हैंपशायर काउंटी हो या शेफील्ड शील्ड में साउथ ऑस्ट्रेलिया, इन टीमों के लिए जब भी बैरी ऐंडरसन रिचर्ड्स क्रिकेट पिच पर उतरे, तब तब उनके प्रशंसकों के मन में एक बात अवश्य रही कि रिचर्ड्स का टेस्ट करियर कैसा हो सकता था।
21 जुलाई 1945 को Durban के Natal में जन्मे बैरी रिचर्ड्स ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण से पहले ही इंग्लिश काउंटी क्रिकेट में ख्याति प्राप्त कर ली थी। 1968 के इंग्लिश क्रिकेट सीजन में उन्होंने हैम्पशायर के लिए खेलते हुए 2395 रन बनाए थे। जिसमें 5 शतक और 18 अर्धशतक थे। Wisden ने रिचर्ड्स की तकनीक और कौशल की बड़ी प्रशंसा की और उनकी कवर ड्राइव की तुलना इंग्लैंड के दो महान बल्लेबाजों Leonard Hutton और Walter Hammond से की। डॉनल्ड ब्रैडमैन ने बैरी रिचर्ड्स को इंग्लिश क्रिकेट के महानतम बल्लेबाजों में से एक जैक हॉब्स के स्तर का बल्लेबाज बताया।
1969-70: Springboks कही जाने वाली दक्षिण अफ्रीका की टीम आगामी क़ई वर्षों के लिए टेस्ट क्रिकेट की महान टीम बनने के लिए पूर्ण रूप से तैयार थी। जब ऑस्ट्रेलिया ने दक्षिण अफ्रीका का दौरा किया तब इसे वर्ल्ड चैंपियनशिप कहा गया। बैरी रिचर्ड्स को पहली बार दक्षिण अफ्रीकी टीम में स्थान प्राप्त हुआ था।
केपटाउन में अपने डेब्यू टेस्ट में मात्र 29 और 32 के स्कोर पर आउट होने के बाद अपने होम ग्राउंड किंग्समीड-डरबन में हुए दूसरे टेस्ट में बैरी रिचर्ड्स ने अपनी क्षमताओं का परिचय दिया। पहले दिन लंच से पहले वो 94 पर खेल रहे थे। कप्तान अली बाकर ने सिंगल लेकर रिचर्ड्स को स्ट्राइक देने का प्रयास किया ताकि वो लंच से पूर्व ही शतक बना सकें, पर इस प्रयास में बाकर बोल्ड हो गए और यहीं लंच की घोषणा हो गई।
लंच के बाद नम्बर 4 पर रिचर्ड्स का साथ देने आए ग्रैम पॉलक जो टेस्ट क्रिकेट में एक बड़ा नाम बन चुके थे। ESPN की सीरीज “Legends Of Cricket” में इयन चैपल कहते हैं, “उस ओवर में 3-4 गेंदें बची थीं, ग्रैम पॉलक नम्बर 4 पर आए और उन्होंने दो चौके लगाए, मैंने स्लिप्स में अपने साथ खड़े कीथ स्टैकपोल से कहा, बड़ी समस्या हो गई है यहाँ, अब यह (पॉलक) बस ये देखेगा कि बैरी ने कितने रन बनाए हैं और उसका दोगुना करेगा”
इयन चैपल आगे कहते हैं, “मैं गलत था, बैरी ने 140 बनाए और ग्रैम पॉलक ने 274”
(ग्रैम पॉलक विस्तृत चर्चा किसी अन्य पोस्ट में)
लंच के बाद अगले 60 मिनट में रिचर्ड्स और पॉलक की जोड़ी ने 103 रन जोड़े और इस एक घण्टे में जो बल्लेबाजी हुई वो दक्षिण अफ्रीकी क्रिकेट की लोक गाथाओं का हिस्सा बन गई। कप्तान अली बाकर ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि इस देश ने इससे पहले कभी ऐसी बल्लेबाजी देखी है।”
दक्षिण अफ्रीका ने पहली पारी में 622 रनों का स्कोर खड़ा किया और यह टेस्ट पारी और 129 रनों से जीता।
जोहानेसबर्ग और पोर्ट एलिज़ाबेथ में हुए तीसरे और चौथे टेस्ट में बैरी रिचर्ड्स के स्कोर थे, 65, 35, 81, 126. पूरी सीरीज में उन्होंने 7 पारियों में 72.57 की औसत से 508 रन बनाए और दक्षिण अफ्रीका ने ऑस्ट्रेलिया को 4-0 से वाईटवॉश किया।
इस सीरीज में ऑस्ट्रेलियन टीम अपने साथ जॉन ग्लीसन नामक “मिस्ट्री स्पिनर” लेकर आई थी। जो ऐक्शन में कोई विशेष बदलाव किए बिना ऑफ स्पिन और लेग स्पिन दोनों करते थे और यह समझ पाना कठिन था कि कौन सी गेंद लेग स्पिन होगी और कौन सी ऑफ स्पिन। अभ्यास मैचों में भी जब भी कोई प्रमुख दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाज क्रीज पर आता तो ग्लीसन को आक्रमण से हटा लिया जाता था ताकि उनकी गेंदों का रहस्य बना रहे। टेस्ट सीरीज में ग्लीसन ने अपनी विविधताओं से क़ई बल्लेबाजों को तंग किया, विशेषकर कप्तान अली बाकर को।
केपटाउन टेस्ट की पहली पारी के बाद बैरी रिचर्ड्स (जो अपना पहला टेस्ट खेल रहे थे) ने टीम मीटिंग में ग्लीसन को खेलने का तरीका समझाया, उन्होंने कहा कि गेंद के टॉप को देखो, यदि केवल अंगूठा और एक उंगली दिखाई पड़ रही है तो यह लेग ब्रेक है और यदि अधिक उंगलियाँ दिख रही हैं तो ऑफ ब्रेक। बैरी रिचर्ड्स पूरी सीरीज में जॉन ग्लीसन पर भारी रहे, उन्होंने कदमों का प्रयोग करते हुए क़ई बार ग्लीसन की गेंदों पर बाउंड्री लगाई। ग्लीसन ने 4 टेस्ट में 18 विकेट लिए जिसमें ग्रैम पॉलक, एडी बारलॉ, ली अरवाइन और अली बाकर शामिल थे पर एक भी बार उन्हें बैरी का विकेट नहीं मिला।
(सोर्स: ESPN)
इस सीरीज के बाद बैरी रिचर्ड्स ने कभी टेस्ट क्रिकेट नहीं खेली क्योंकि दक्षिण अफ्रीकी सरकार की रंगभेद की नीतियों के कारण इस क्रिकेट टीम पर प्रतिबंध लग गया था। जो टीम टेस्ट क्रिकेट की अगली Dynasty हो सकती थी उसके खिलाड़ी दूसरे देशों की घरेलू क्रिकेट खेलने को विवश थे।
बैरी ने 1970 के काउंटी सीजन में हैम्पशायर के लिए 53.77 की औसत से 1667 रन बनाए। हैम्पशायर में गॉर्डन ग्रीनिज के साथ उनकी ओपनिंग जोड़ी काउंटी क्रिकेट की महान जोड़ियों में से एक है। 1968 से 1977 तक काउंटी क्रिकेट में बैरी रिचर्ड्स ने 51 की औसत से 15,843 रन बनाए और 1977 के अतिरिक्त हर सीजन में 1000 से अधिक रन बनाए।
नवम्बर 1970 में शेफील्ड शील्ड में साउथ ऑस्ट्रेलिया के लिए खेलते हुए उन्होंने वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध एक दिन में 325 रन बना दिए थे। ये कोई मामूली गेंदबाजी आक्रमण नहीं था, इसमें डेनिस लिली और ग्रैम मैकेंजी जैसे गेंदबाज थे।
हज़ारों रन बनाने के बाद भी बैरी के मन में एक कसर थी कि इतने क्षमतावान बल्लेबाज होने के बाद भी वे सर्वोच्च स्तर की क्रिकेट का हिस्सा नहीं बन पा रहे थे। इस बारे में उनके हमवतन रॉबिन जैकमैन ने कहा है, “When you’re that talented you want the world to see it, not a few guys watching at Southampton.” यही कारण था कि जून के महीने में रिचर्ड्स कोई न कोई “इंजरी” खोज लेते थे ताकि आराम से विम्बलडन देख सकें। काउंटी क्रिकेट उनके लिए अब कोई चैलेंज नही थी और वो इससे बोर हो चुके थे।

1977 में बैरी रिचर्ड्स को पुनः अवसर मिला विश्वस्तर पर विश्व के टॉप क्रिकेटरों के विरुद्ध अपना दम दिखाने का। यह अवसर था केरी पैकर की “World Series Cricket (WSC)” में World XI के लिए खेलने का। WSC में बैरी रिचर्ड्स ने 5 SUPERTEST खेले और 79.14 की औसत से दो शतक सहित 554 रन बनाए।
WSC के 1977-78 सीजन के 5वें Supertest में Gloucester Park, Perth में World XI की ओर से WSC Australia XI विरूद्ध खेलते हुए बैरी रिचर्ड्स ने अपने हैम्पशायर के साथी ओपनर गॉर्डन ग्रीनिज के साथ ओपनिंग की और दोनों ने पहले विकेट के लिए 234 रन जोड़ लिए। ग्रीनिज की इंजरी के बाद क्रीज पर आए वेस्ट इंडियन सुपरस्टार विवियन रिचर्ड्स।
प्रसिद्ध ऑस्ट्रेलियाई लेखक और क्रिकेट पत्रकार Gideon Haigh अपनी किताब “The Cricket War” में लिखते हैं कि अखबारों में प्रश्न उठते थे कि इन दोनों में बेहतर रिचर्ड्स कौन है? बैरी या विव ? श्वेत या अश्वेत। दोनों में से इस समय विश्व का सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज कौन था, यह बता पाना कठिन था। जब विव बल्लेबाजी करने आए तो बैरी पहले ही 114 पर थे। अतः Max Walker यह मान रहे थे कि विव कम से कम दोहरा शतक तो बनाएंगे।
इस साझेदारी में बैरी की बल्लेबाजी ऐसी थी कि विव भी उनके सामने हल्के नज़र आ रहे थे। इस साझेदारी में बैरी रिचर्ड्स ने 93 रन बनाए और विव ने 41. 207 रन के व्यक्तिगत स्कोर पर एक छक्का लगाने के प्रयास में Barry ने ग्रेग चैपल को कैच दे दिया। उनके 136 रन सिर्फ चौके छक्के से आए थे। (28 चौके, 4 छक्के). दिन का खेल खत्म होने तक World XI का स्कोर था 433/1. World XI ने यह मैच पारी और 73 रनों से जीता।
बैरी रिचर्ड्स की पारी देखने वाले इस बात पर विचार कर रहे थे यदि दक्षिण अफ्रीका पर प्रतिबंध न लगा होता तो बैरी रिचर्ड्स के टेस्ट रिकॉर्ड कितने शानदार होते। 1964 से 1983 तक चले प्रथम श्रेणी करियर में बैरी रिचर्ड्स ने 54.74 की औसत से 80 शतक सहित 28,358 रन बनाए। 80 में से 9 शतक उन्होंने लंच के पहले ही बना दिए।
World Series Cricket में खेलने के बारे में बैरी ने कहा, “The money was only incidental to a last opportunity to play in the company of world-class cricketers again.”

1969 के Wisden Cricket of the year रहे बैरी ऐंडरसन रिचर्ड्स मात्र 4 टेस्ट खेलने के बाद भी विश्व के महानतम बल्लेबाजों में से एक गिने जाते हैं, उन्हें 2009 में ICC हॉल ऑफ फेम में शामिल किया गया।