27 जुलाई 1948. आज से 72 वर्ष पूर्व टेस्ट क्रिकेट इतिहास के महानतम बल्लेबाज सर डॉनल्ड जॉर्ज ब्रैडमैन ने अपने करियर का 29वाँ और अंतिम शतक Headingley में लगाया था। डॉन के इस अंतिम शतक से टेस्ट क्रिकेट में पहली बार 400+ का स्कोर चेज हुआ।
ऑस्ट्रेलियाई अखबार “The Sydney Morning Herald” में 20 मार्च 2019 को Malcolm Knox का एक लेख छपा “How Australia became the Invincibles at wild, woolly Headingley”. इस पोस्ट का Content उसी लेख से लिया गया है।
सर डॉनल्ड ब्रैडमैन के नेतृत्व वाली ऑस्ट्रेलिया ने 1948 में इंग्लैंड का दौरा किया। ट्रेंटब्रिज में 8 विकेट से और लॉर्ड्स में 409 रनों से ऑस्ट्रेलिया ने विजय प्राप्त की थी। ओल्ड ट्रैफर्ड मैनचेस्टर में तीसरा टेस्ट ड्रॉ रहा था। यहाँ वर्षा ने ऑस्ट्रेलिया को पराजय से बचा लिया था। ब्रैडमैन ऑस्ट्रेलिया से यह सोचकर आए थे कि वे अपनी टीम को इंग्लैंड दौरे पर अजेय रहकर लौटने वाली पहली टीम बनाएंगे, जो न तो टेस्ट मैच हारेगी और न ही काउंटी टीमों से हुए मैच। ओल्ड ट्रैफर्ड में हुए ड्रॉ ने उन्हें शंका में डाल दिया था।
Headingley में चौथा टेस्ट जीतकर ऑस्ट्रेलिया इस सीरीज में 3-0 की अजेय बढ़त ले सकती थी, पर यह इतना आसान नहीं होने वाला था। इंग्लैंड की टीम ने चौथे दिन की संध्या तक 8 विकेट पर 362 रन बना लिए थे और उनकी लीड 403 की हो चुकी थी, इंग्लिश कप्तान सुबह बिना एक गेंद खेले भी पारी घोषित कर सकते थे पर इंग्लिश टीम ने दो ओवर और खेले क्योंकि कप्तान एक नियम का लाभ उठाना चाहते थे। दिन के खेल से पूर्व एक बार पिच पर रोलर चलाया जाता था और दोनों टीमों की इनिंग के बीच एक बार और। इंग्लैंड ने सुबह “Heavy Roller” लिया, दो ओवर खेल कर उन्होंने जब पारी घोषित की तब नियम के अनुसार एक और बार पिच पर Roller चला। इंग्लैंड के कप्तान Norman Yardley की सोच थी कि ऐसा करने से पाँचवें दिन की पिच अधिक टूटेगी और बिखरेगी और उनके स्पिनर ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों के लिए अधिक समस्या खड़ी करेंगे।
27 जुलाई 1948, यानी टेस्ट मैच के अंतिम दिन ऑस्ट्रेलिया को चौथी पारी में लक्ष्य मिला था 404 रनों का। टेस्ट क्रिकेट इतिहास में इससे पूर्व कभी 350 से अधिक रन चेज नहीं हुए थे। वो भी मात्र एक दिन में, 344 मिनट के खेल में।
डॉन ब्रैडमैन ने अपनी डायरी में लिखा है कि उस दिन उन्होंने अपने दोनों ओपनरों Lindsay Hassett और Arthur Morris से कहा, “Come on boys, we can win this match, we can do it,”
ऑस्ट्रेलिया का पहला विकेट ओपनिंग बल्लेबाज Lindsay Hassett के रूप में 57 रनों के स्कोर पर गिर गया। दूसरे ओपनर Arthur Morris इस सीरीज में सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज रहे थे। Morris का साथ देने आए इस मैदान पर अपना अंतिम टेस्ट खेल रहे 40 वर्षीय डॉन ब्रैडमैन, यह डॉन का 51वाँ टेस्ट मैच था।
पहले सत्र में इंग्लैंड के फील्डरों ने डॉन के दो कैच ड्रॉप किए। विकेटकीपर Godfrey Evans स्टम्पिंग के दो अवसर भी चूके। इस सत्र में ऑस्ट्रेलिया ने 121 रन बनाए और अगले दो सत्र में 283 रनों की आवश्यकता थी। ब्रैडमैन और मॉरिस घड़ी की सुई का ध्यान रखे हुए थे। इंग्लिश कॉमेंटेटर John Arlott ने कहा, ‘like well-planned trains to their time-runs schedule”
सुबह दो बार Heavy Roller लिए जाने से पिच बिखरी थी और काफी टर्न हो रही थी पर इंग्लैंड के पास कोई विशेषज्ञ Wrist स्पिनर नहीं था। कप्तान Norman Yardley ने Len Hutton और Dennis Compton की पार्ट टाइम स्पिन पर आवश्यकता से अधिक विश्वास कर लिया था। Arthur Morris ने लंच के बाद Compton की गेंदों पर कुछ अधिक ही निर्दयता दिखानी आरम्भ की। इंग्लैंड के महान गेंदबाजों में से एक सर एलेक बेडसर ने कहा, “Ate the unhappiest lunch of my career”
Lunch और Tea के बीच वाले सत्र में ऑस्ट्रेलिया का एक भी विकेट नहीं गिरा और 178 रन बने। ब्रैडमैन और मॉरिस दोनों के शतक पूरे हो चुके थे। ऑस्ट्रेलियाई लेजेंड Bill O’Reilly ने कहा कि यदि इंग्लैंड ने पहले घण्टे में ब्रैडमैन को आउट करने के अवसर न गँवाए होते तो चायकाल तक इंग्लैंड की टीम यह टेस्ट जीत जाती। अंतिम सत्र में ऑस्ट्रेलिया को 105 मिनट में 112 रनों की आवश्यकता थी।
When the impossible became inevitable- 404 रनों का असंभव माना जा रहा लक्ष्य अब कुछ ही समय में पूरा होने वाला था। ब्रैडमैन और आर्थर मॉरिस दूसरे विकेट के लिए 301 रनों की साझेदारी कर चुके थे। जब मॉरिस 182 रन के व्यक्तिगत स्कोर पर आउट हुए तब ऑस्ट्रेलिया का स्कोर था 358/2. जीत के लिए 50 से भी कम रनों की आवश्यकता रह गई थी। इंग्लिश कॉमेंटेटर John Arlott ने कहा, “Can’t believe it is possible for a cricket brain to conceive of any innings which could be greater.”
डॉन ब्रैडमैन और नील हार्वी ने खेल समाप्ति के तय समय से 15 मिनट पूर्व ऑस्ट्रेलिया को विजय दिला दी, हार्वी ने चौका लगाकर यह मैच समाप्त किया। डॉन ने 173 रन बनाए और अंत तक टिके रहे। इस रन चेज के बाद डॉन ब्रैडमैन की इस टीम को “Invincibles” कहा गया। सबको विश्वास हो गया था कि यह ऑस्ट्रेलियाई टीम किसी भी स्थिति से मैच जीत सकती है।
Headingley सर डॉन ब्रैडमैन के प्रिय क्रिकेट मैदानों में से एक रहा। यहाँ उन्होंने 192.60 की औसत से 963 रन बनाए हैं। उनके दोनों तिहरे शतक (334 और 304) इसी मैदान पर आए और करियर का अंतिम शतक भी।
अगला टेस्ट London के ओवल में था, जो उनका 52वाँ और अंतिम टेस्ट था। वे अबतक 6996 रन बना चुके थे। यहाँ सर डॉन को टेस्ट क्रिकेट में 100 की औसत के साथ रिटायर होने के लिए मात्र 4 रन बनाने थे, पर वे लेग स्पिनर Eric Hollies की गेंद पर शून्य पर आउट हो गए और उनकी औसत 99.94 रही।
नील हार्वी को बाद में पश्चाताप होता रहा कि क्यों उन्होंने Headingley में विजयी चौका लगाया, यदि वह डॉन को यह विजयी चौका लगाने देते तो टेस्ट क्रिकेट में डॉन 100 की एवरेज से रिटायर हुए होते, पर हार्वी की भी क्या गलती, उन्हें कैसे पता होता कि ओवल टेस्ट में डॉन 4 रन भी नहीं बना पाएंगे।