Flashback: Mike Gatting के नेतृत्व में इंग्लैंड की टीम ने 1986-87 में ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया और 2-1 से ऐशेज़ सीरीज इंग्लैंड के नाम कर दी। 1989 में महान ऑस्ट्रेलियाई कप्तान Allan Border के नेतृत्व में ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड ज़ाक़र ऐशेज़ 4-0 से जीत ली। इसके उपरांत ऑस्ट्रेलिया की टीम खेल के हर क्षेत्र में अपनी कुशलता में वृद्धि करती गई और इंग्लैंड को हर ऐशेज़ में एक के बाद पटखनी देती रही।
18 वर्षों तक अनवरत यह ऐशेज ट्रॉफी इंग्लैंड की टीम से दूर रही। इसी कालखंड में क्रिकेट इतिहास के महानतम गेंदबाज (Arguably) शेन वॉर्न ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया। स्टीव वॉ एक महान बल्लेबाज बने। मार्क टेलर, मार्क वॉ, माइकल स्लेटर, जस्टिन लैंगर, रिकी पॉन्टिंग, मैथ्यू हेडेन, डेमियन मार्टिन जैसे बल्लेबाज और ग्लेन मक्ग्रा, जेसन गिलेस्पी, ब्रेट ली जैसे गेंदबाज टीम में आए। टेस्ट क्रिकेट इतिहास के महानतम विकेटकीपर बल्लेबाज ऐडम गिलक्रिस्ट का पदार्पण भी इसी कालखंड में हुआ। ऑस्ट्रेलिया ने 1989-90 से लेकर 2002-03 तक हुई 8 ऐशेज़ सीरीज लगातार जीती, 4-0, 3-0, 4-1, 3-1, 3-2, 3-1, 4-1-4-1 से।

New England: इंग्लैंड में होने वाली ऐशेज़ सीरीज 2005-06 के समय ऑस्ट्रेलिया विश्व की नम्बर 1 टेस्ट टीम थी और इंग्लैंड नम्बर 2. माइकल वॉन के नेतृत्व वाली इस इंग्लिश टीम में अधिकतर खिलाड़ी ऐसे थे, जिन्हें ऐशेज़ सीरीज हारने का अनुभव नहीं था, क्रिकेटिंग टर्म्स में कहें तो कोई “Past Baggage” नहीं था। इंग्लैंड के पास एक उच्च कोटि का तेज गेंदबाजी आक्रमण था। स्टीफन हार्मिसन, मैथ्यू हॉगार्ड, ऐन्ड्रू फ्लिंटॉफ और साइमन जोन्स। बल्लेबाजी में केविन पीटरसन जैसे आक्रामक बल्लेबाज को इस टीम का हिस्सा बनाया गया था। ऐशेज़ आरम्भ होने पूर्व इंग्लैंड ने अपने पिछले 18 में से 14 टेस्ट जीते थे और लगातार 6 टेस्ट सीरीज जीती थीं।

ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पॉन्टिंग ने सीरीज आरम्भ होने से पूर्व ही कह दिया था 1989 के बाद यह Closest Ashes Series होगी। रिकी पॉन्टिंग के नेतृत्व में ऑस्ट्रेलिया पहली बार ऐशेज़ खेल रही थी। उनके पूर्ववर्ती दो कप्तानों मार्क टेलर और स्टीव वॉ ने अपनी कप्तानी में कभी ऐशेज़ हारी नहीं थी।
The fun begins: 21 जुलाई 2005। सीरीज का पहला टेस्ट लॉर्ड्स में खेला जा रहा था। स्टेडियम बिल्कुल हाउसफुल। रिकी पॉन्टिंग ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का निर्णय लिया और पहले दिन ही ऑस्ट्रेलिया की टीम 40.2 ओवरों में मात्र 190 पर चायकाल से पूर्व ऑल आउट हो गई। स्टीफन हार्मिसन ने 43 रन देकर पाँच विकेट लिए। मैच की दूसरी ही गेंद जस्टिन लैंगर की कोहनी में लगी, लैंगर और मैथ्यू हेडन शॉर्ट पिच बॉलिंग और बाउंसरों के सामने असहज दिखे, हेडन के आउट होने पर आए रिकी पॉन्टिंग को स्टीफन हार्मिसन की गेंद लगी और उनके गाल से खून बहने लगा। सीरीज के पहले ही सत्र में इस New England ने संदेश दे दिया था कि इस टीम को पहले वाली इंग्लैंड न समझा जाए।

Number 500 for the great man:
गेंदबाज तो ऑस्ट्रेलिया के पास भी थे। चायकाल के बाद फेंकी गई पहली गेंद के साथ ही क्रिकेट इतिहास के महानतम तेज गेंदबाजों में से एक ग्लेन मक्ग्रा ने पारी के सातवें ओवर में मार्कस ट्रेसकॉथिक को पवेलियन भेज दिया और करियर का 500वाँ टेस्ट विकेट पूरा किया। इसी ओवर में उन्होंने दूसरे ओपनर ऐन्ड्रू स्ट्राउस का विकेट भी लिया। 17वें ओवर में इंग्लैंड के स्कोर था 21 रन पर 5 विकेट, सभी 5 ग्लेन मक्ग्रा के नाम। ट्रेसकॉथिक 4, स्ट्राउस 2, कप्तान माइकल वॉन 3, इयन बेल 4 और स्टार ऑल राउंडर ऐन्ड्रू फ्लिंटॉफ 0 पर वापस लौट चुके थे।

The Arrival of Kevin Pietersen (KP): केविन पीटरसन जैसा कोई बल्लेबाज इंग्लैंड की क्रिकेट में अभी तक नहीं आया था। लॉर्ड्स में ऐशेज़ सीरीज में अपना टेस्ट डेब्यू कर रहे पीटरसन ने विकेटकीपर गेरेन्ट जोन्स के साथ 6ठे विकेट के लिए 58 रन जोड़े। यह इस पारी की सबसे बड़ी साझेदारी सिद्ध हुई। दूसरे दिन के पहले सत्र में शेन वॉर्न की गेंद पर जब 101 के स्कोर पर इंग्लैंड का 8वाँ विकेट गिरा तब KP ने आक्रमण का विचार किया। अभी तक वे 81 गेंदों में 36 पर खेल रहे थे। अगले ही ओवर में उन्होंने ग्लेन मक्ग्रा को एक क्लब लेवल के बॉलर की भाँति ट्रीट करते हुए लगातार 3 बाउंड्री लगाई, 4,6,4. पहली गेंद को KP ने गेंदबाज के पास के स्ट्रेट बाउंड्री के बाहर भेज दिया, दूसरी गेंद पर आया इस पारी का सबसे शानदार शॉट, KP ने गेंद की पिच तक पहुँचकर उसे मक्ग्रा के सिर के ऊपर से उठा दिया, गेंद आकाश में बहुत ऊपर तक गई और सीमारेखा के पार हो गई। तीसरी गेंद पर केविन ने कवर ड्राइव करके चौका लगाया और अपनी पहली ही ऐशेज़ पारी में पचास रन पूरे कर लिए। अगले ओवर में KP ने शेन वॉर्न को मिडविकेट के ऊपर से छक्का जड़ा, अगली गेंद को फिर से दर्शक दीर्घा में भेजने के प्रयास में KP का शॉट मिडविकेट और Long On के बीच सीमारेखा से कुछ मीटर पहले कैच कर लिया गया।

दसवें विकेट के लिए 33 रन की साझेदारी के बाद इंग्लैंड की टीम 155 रनों पर ऑल आउट हो गई। 35 रन की लीड के साथ उतरी ऑस्ट्रेलिया ने दूसरी पारी में भी अपना पहला विकेट शीघ्र ही गँवा दिया। मैथ्यू हेडेन (34) और कप्तान रिकी पॉन्टिंग (42) के योगदानों ने स्कोर को 100 तक पहुँचाया।
Michael Clarke answers his critics:
माइकल क्लार्क को लॉर्ड्स में सीरीज का पहला ही टेस्ट खेलने का अवसर तो मिल गया था पर पहली पारी में वे मात्र 11 रन पर आउट हो गए थे। ऑस्ट्रेलियाई टीम में उनका स्थान संकट में था और ब्रैड हॉज को उनके स्थान पर लाने की बातें होने लग गई थीं। माइकल क्लार्क ने दूसरी पारी में नम्बर 5 पर खेलते हुए दबाव में होते हुए भी आक्रामक बल्लेबाजी की, 106 गेंदों में उन्होंने 15 चौकों के साथ 91 रन बनाए और डेमियन मार्टिन (65) के साथ चौथे विकेट के लिए 155 रन जोड़कर इस मैच में ऑस्ट्रेलिया को ड्राइविंग सीट पर बिठा दिया। साइमन कैटिच ने भी 67 रनों का योगदान दिया और ऑस्ट्रेलिया की पारी 384 पर समाप्त हुआ।

इंग्लैंड को यह मैच जीतने के लिए विश्व रिकॉर्ड बनाने की आवश्यकता थी। आजतक टेस्ट क्रिकेट में चौथी पारी में कभी 420 रन चेज नहीं हुए थे। ट्रेसकॉथिक और स्ट्राउस ने पहले विकेट के लिए 80 रन जोड़े पर शेन वॉर्न के एक शानदार स्पेल के बाद स्कोर शीघ्र ने 119 पर 5 हो चुका था। इस पारी में भी केविन पीटरसन इंग्लैंड के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज रहे, उन्होंने 79 गेंदों में 64 रन बनाए और नॉट आउट रहे। पहली पारी में शुरुआती 5 विकेट लेने वाले मक्ग्रा ने दूसरी पारी में पुछल्ले बल्लेबाजों का सफाया किया और फिर से 4 विकेट लिए। पारी के 59वें ओवर में मक्ग्रा की गेंद पर शेन वॉर्न ने फर्स्ट स्लिप में इंग्लैंड के नम्बर 11 साइमन जोन्स के कैच पकड़ा और ऑस्ट्रेलिया को 239 रनों से टेस्ट मैच जीता दिया। ऑस्ट्रेलियाई टीम एक बार फिर से ऐशेज़ सीरीज में 1-0 की बढ़त ले चुकी थी।
मैच में 9 विकेट लेने वाले ग्लेन मक्ग्रा मैन ऑफ द मैच चुने गए। महान कॉमेंटेटर और पत्रकार Peter Roebuck ने इस टेस्ट के पहले दिन 5 विकेट लेने वाले मक्ग्रा के लिए लिखा था, “In theory he cannot blow out a candle. And yet he might as well have been sending down hand grenades.”

माइकल वॉन की New England को एक करारा झटका लग चुका था, पर उनकी इस टीम में वापसी करने की क्षमता थी।
To be continued.