“When Virender Sehwag’s disorderly magnificence flipped the game on its head.”

26/11 के बाद अपना भारतीय टूर बीच में छोड़कर जाने वाली इंग्लैंड टीम 11 दिसम्बर 2008 को चेन्नई में पहला टेस्ट मैच खेल रही थी।

इंग्लैंड के दोनों ओपनर्स Andrew Strauss और Alastair Cook (दोनों अब Sir हो चुके हैं) ने पहले विकेट के लिए 118 रनों की साझेदारी की। Andrew Strauss ने शतक (118) बनाया और इंग्लैंड की टीम ने अपनी पहली पारी 316 रन पर समाप्त की। हरभजन सिंह और अमित मिश्र को 3-3 विकेट मिले।

भारतीय बल्लेबाजी की शुरुआत बेहद खराब रही, वीरेंद्र सेहवाग 9, गौतम गंभीर 19 और राहुल द्रविड़ मात्र 3 रन बनाकर आउट हो गए। 37 रन पर। 44वें ओवर में भारतीय टीम ने 137 रन पर छठा विकेट खो दिया। कप्तान MS धोनी और हरभजन सिंह के बीच 75 रनों की साझेदारी ने स्कोर को 212 तक पहुँचाया। धोनी (53) इस पारी में 50 पार करने वाले अकेले बल्लेबाज रहे और टीम 241 पर ऑल आउट हो गई।

पहली पारी में 75 रन की अच्छी लीड के साथ दूसरी पारी खेलने उतरी इंग्लैंड की शुरुआत भी खराब रही और पहले तीन विकेट मात्र 43 रन पर गिर गए पर यहाँ से चौथे विकेट के लिए 214 रनों की साझेदारी हुई, पहली पारी के शतकवीर Andrew Strauss और Paul Collingwood के बीच। दोनों ने शतक लगाए।

311/9 के स्कोर पर 386 की लीड के साथ इंग्लिश कप्तान Kevin Pietersen ने पारी घोषित कर दी और भारत को चार सेशन में 387 का विशाल लक्ष्य चेज करने को मिला।

अधिकांश टीमें यहाँ क्या करतीं ? अधिकांश बल्लेबाज क्या करते ? ड्रॉ के लिए खेलते, पर भारतीय टीम के विस्फोटक ओपनर वीरेंद्र सेहवाग के विचार कुछ अलग थे। सेहवाग यहाँ मैच जीतने के लिए खेल रहे थे, ड्रॉ के लिए नहीं। कोई ऐसा न समझे कि ऐसी स्थिति में ड्रॉ के लिए खेलना गलत या कायरता है, बात बस यह है कि वीरेंद्र सेहवाग को विश्वास था कि यह लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।

पारी के दूसरे ओवर में जेम्स ऐंडरसन की चौथी गेंद पर सेहवाग ने बल्ले का मुँह खोला और गेंद को Gully के पास से चार रनों के लिए भेजकर अपना खाता खोला। जेम्स ऐंडरसन की अगली गेंद, शॉर्ट, ऑफ स्टम्प के बाहर, “Hammered”. शरीर का सारा भार सेहवाग ने बैकफुट पर डाला और गेंद को पॉइंट बाउंड्री के बाहर भेज दिया। पहली पाँच गेंदों में 2 चौके लगाकर सेहवाग ने दो-दो संदेश दे दिए थे, एक अपने ड्रेसिंग रूम के लिए और एक इंग्लिश टीम के लिए। अगले ओवर में Stephen Harmison के ओवर में भी दो चौके लगे और स्कोर हो गया 3 ओवर में 25/0.

Stephen Harmison फिर से पारी का 5वाँ ओवर लेकर आए। पहली ही गेंद पर सेहवाग ने मिड ऑन से बगल से गेंद को ड्राइव कर दिया, 5वीं गेंद को गली में खेलने के प्रयास में उन्हें एक जीवनदान मिला जब उनका शॉट Alastair Cook की उंगलियों को छूता हुआ निकल गया, जिन्होंने कैच के लिए जाने में थोड़ी सी देर कर दी थी। ऐसे जीवनदान के बाद आमतौर पर बल्लेबाज थोड़े अधिक सावधान हो जाते हैं, विकेट की कीमत बढ़ा देते हैं, पर सेहवाग तो मानो कह रहे थे, “हमको घण्टा फर्क नहीं पड़ता”. (इसी ऐटिट्यूड से उन्होंने करियर में बहुत बार विकेट भी फेंका है पर इस पारी में वे सफल रहे।) Harmison की अगली गेंद फिर से शॉर्ट, ऑफ स्टम्प के बाहर, सेहवाग का Upper Cut, बैकवर्ड पॉइंट बाउंड्री के ऊपर से 6 रन. 5 ओवर के बाद टीम का स्कोर हो चुका था 5 ओवर में 45/0. सेहवाग 20 गेंद में 36 पर खेल रहे थे और Stephen Harmison के पहले 3 ओवर में 28 रन आ चुके थे।

इंग्लिश कप्तान केविन पीटरसन ने गेंदबाजी में परिवर्तन करते हुए 6ठे ओवर में ही मोंटी पैनेसर को लगाया। ओवर की तीसरी गेंद पर सेहवाग को स्ट्राइक मिली, मोंटी ने अराउंड द विकेट से “आ बैल मुझे मार” का आचरण करते हुए लेग स्टंप पर फुलटॉस फेंक दी, सेहवाग ने इस Juicy Full-Toss को बड़े प्रेम से स्वीकार करते हुए मिडविकेट बाउंड्री के बाहर स्टैंड में भेज दिया और इसी छक्के के साथ भारत की पारी के 50 रन पूरे हो गए। शुरुआती 54 में से 42 रन वीरेंद्र सेहवाग के थे। दसवें ओवर की पहली गेंद पर एक रन के साथ सेहवाग ने 32 गेंदों में अपने 50 रन पूरे किए। कपिल देव का 1982-83 में पाकिस्तान के विरुद्ध बनाया गया भारत के लिए सबसे तेज टेस्ट अर्धशतक (30 गेंदों में) का रिकॉर्ड बच गया था।

12वें ओवर में मोंटी की पहली गेंद पर चौका लगाने के बाद सेहवाग ने अगली गेंद पर एक टांग बाहर निकाली, गेंद की पिच तक गए और उसे लॉन्ग ऑन बाउंड्री के पार फिर से 6 रनों के लिए भेज दिया। 18वें ओवर में फ्लिंटॉफ की गेंद पर सेहवाग के चौके के साथ भारत के 100 रन पूरे हो गए, जिसमें से 73 सेहवाग के थे।

जैसे जैसे दिन का खेल समाप्त होने का समय आ रहा था, सेहवाग और गंभीर ने एकग्रता बढ़ा दी थी, लेकिन 23वें ओवर में Graeme Swann की एक आगे फेंकी हुई गेंद, ऑफ स्टम्प की लाइन के बाहर, सेहवाग ने फिर से एक पैर बाहर निकाला और इस गेंद को मिडविकेट बाउंड्री के पार स्टैंड्स में पहुँचा दिया। 3 फील्डर डीप में थे, पर सेहवाग को फर्क नहीं पड़ा। यह उनकी पारी का चौथा छक्का था। टीम का स्कोर हो चुका था 117 रन बिना किसी विकेट के। Swann के ओवर की आखिरी गेंद को उन्होंने फाइन लेग की ओर खेलकर सिंगल लेना चाहा, इस बार गेंद और बल्ले के बीच कोई संपर्क नहीं हुआ, गेंद पैड पर लगी, इंग्लैंड के सारे खिलाड़ी एक साथ चिल्ला उठे, “How’s that ?” अंपायर रॉजर हार्पर की उंगली उठी और वीरेंद्र सेहवाग की तूफानी पारी अंत हुआ। आउट होने से पूर्व उन्होंने एक ऐसे मैच में भारतीय टीम को विजय की ओर अग्रसर कर दिया था, जिसमें टीम ड्रॉ के साथ भी संतुष्ट रह सकती थी।

शाम के 5 बजे जब दिन का खेल समाप्त हुआ तो स्कोर था 29 ओवर में 131/1. गौतम गम्भीर 41 और राहुल द्रविड़ 2 पर टिके हुए थे। शुरुआती 3 दिनों में जहाँ भारत की जीत के कोई आसार नहीं थे, चौथे दिन की शाम तक वीरेंद्र सेहवाग की पारी के कारण न सिर्फ जीत की उम्मीदें जाग चुकी थीं, बल्कि भारत का पलड़ा थोड़ा सा भारी हो चुका था। “The Guardian” अखबार ने लिखा था, “Sehwag’s blitz threatens England’s impregnable position.”

पाँचवें दिन भारत को 256 रनों की आवश्यकता थी और 9 विकेट हाथ में थे। भारत ने राहुल द्रविड़ का विकेट सस्ते में खो दिया, गंभीर चौथे दिन की शाम के अपने व्यक्तिगत स्कोर में 25 रन जोड़कर आउट हो गए। लंच तक भारत का स्कोर हो गया था, 53 ओवर में 213 पर 3. अगले दो सेशन में 174 रनों की आवश्यकता। सचिन 27 और लक्ष्मण 20 पर खेल रहे थे। दूसरे सत्र के चौथे ही ओवर में VVS लक्ष्मण Graeme Swann की गेंद पर फॉरवर्ड शॉर्ट लेग पर कैच दे बैठे। स्कोर था 224/4, अब इंग्लैंड को अपनी वापसी की उम्मीदें साफ दिखने लगी थीं, इस समय एक और विकेट गिरना मैच में इंग्लैंड का पलड़ा भारी कर देता पर टेस्ट टीम में वापसी कर रहे युवराज सिंह ने यहाँ 87 रन की पारी खेली और पाँचवें विकेट के लिए सचिन तेंदुलकर के साथ 163 रनों की साझेदारी की। पारी के 99वें ओवर में सचिन ने Graeme Swann की गेंद पर स्वीप शॉट खेलकर दो दो कार्य सम्पन्न किए, टीम की जीत के लिए आवश्यक 4 रन भी पूरे हुए और उनका 41वाँ शतक भी। यह पारी सचिन के करियर की सर्वश्रेष्ठ पारियों में से एक थी। इसके बाद भी मैन ऑफ द मैच का पुरस्कार उन्हें नहीं बल्कि वीरेंद्र सेहवाग को मिला क्योंकि सेहवाग की पारी ने ही इस मैच में भारत की जीत की संभावना बनाई, उनकी इस पारी के बिना मैच में दो परिणाम सम्भव थे, या तो ड्रॉ या इंग्लैंड की जीत।

1976 में पोर्ट ऑफ स्पेन में वेस्ट इंडीज़ के विरुद्ध 4 विकेट पर 403 चेज करने के बाद यह टेस्ट मैचों में भारत की सबसे बड़ी रन चेज थी। उस जीत की तरह यह जीत भी एक सामूहिक प्रयास का परिणाम थी, और इसके सबसे बड़े नायक वीरेंद्र सेहवाग थे।

कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने कहा, “Sehwag was the play maker and without him we would have been defending this match.”

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