The Godfather of Indian Batsmanship.

सितम्बर 1979. ओवल में खेले जा रहे चौथे टेस्ट में भारत के सामने लक्ष्य था 438 रनों का। भारतीय टीम इस सीरीज में 0-1 से पीछे चल रही थी।

यह सुनील गावस्कर के करियर का 50वाँ टेस्ट था। इस रन चेज शुरु होने से पूर्व अबतक इस सीरीज में गावस्कर के स्कोर थे 61, 68, 42, 59, 78 और 13. चौथे दिन का खेल खत्म होने तक भारत ने बिना कोई विकेट गँवाए 76 रन बना लिए, गावस्कर 42 और चेतन चौहान 32 पर खेल रहे थे।

आखिरी दिन भारतीय टीम को 362 रनों की आवश्यकता थी, अर्थात एक रन प्रति मिनट। पाँचवें दिन के पहले सत्र में दोनों ओपनर्स ने बहुत संभलकर बल्लेबाजी की, लंच तक भारत का स्कोर था 169/0. लंच के बाद अगले एक घण्टे में भी बल्लेबाजी धीमी ही रही और स्कोर हुआ 213/0. अभी तक यह मैच एक बोरिंग ड्रॉ की ओर बढ़ता दिखाई पड़ रहा था। चेतन चौहान ड्रिंक्स ब्रेक के तुरंत बाद 80 रन के स्कोर पर बॉब विलिस को गेंद पर आउट हो गए। नम्बर 3 पर गावस्कर का साथ देने आए दिलीप वेंगसरकर। अगले एक घण्टे में सुनील गावस्कर ने गियर बदला और चायकाल तक स्कोर हो गया 304 रन पर 1 विकेट। गावस्कर रिस्क लिए बिना भी आक्रामक बल्लेबाजी कर रहे थे। अचानक से 438 रनों का लक्ष्य सम्भव लगने लगा था। 4 साल पहले 1975 विश्वकप में एक वन डे मैच में पूरे 60 ओवर टिककर मात्र 60 रन बनाने वाले सुनील गावस्कर का यह रूप सबको भा रहा था। वे अब अपनी फ्लॉपी हैट उतारकर खेल रहे थे।

आखिरी सत्र में भारत को जीत के लिए 134 रनों की आवश्यकता थी। स्थिति को देखते हुए इंग्लिश कप्तान Michael Brearley ने अपने गेंदबाजों से ओवर रेट धीमी कर देने को कहा। चाय के अगले आधे घण्टे में इंग्लिश गेंदबाजों ने मात्र 6 ओवर फेंके।

सुनील गावस्कर ने अपना दोहरा शतक पूरा किया, स्कोर हो चुका था 366 पर 1, अगले 12 ओवरों में 76 रन चाहिए थे। इसी समय दिलीप वेंगसरकर 52 रन बनाकर आउट हो गए। 6 से ऊपर की आवश्यक रन गति को देखकर कप्तान श्रीनिवास वेंकटराघवन ने यहाँ नम्बर 4 पर अनुभवी और फॉर्म में चल रहे गुंडप्पा विश्वनाथ को भेजने की बजाय युवा कपिल देव को भेज दिया। ( विश्वनाथ ने पिछले टेस्ट में शतक लगाया था और इसी मैच की पहली पारी में 62 रन बनाए थे।) तीन साल पहले पोर्ट ऑफ स्पेन में जब भारत ने 403 रनों का लक्ष्य प्राप्त किया था तो गावस्कर और विश्वनाथ दोनों ने शतक बनाए थे। कप्तान वेंकट का यह प्रयोग असफल रहा और कपिल 0 पर आउट हो गए। कपिल के आउट होने पर भी विश्वनाथ की बजाए यशपाल शर्मा क्रीज पर आए।

389 रन के स्कोर पर सुनील गावस्कर के रूप में भारत का चौथा विकेट गिरा। 8 घण्टे तक बल्लेबाजी करके 221 रन बनाकर वे टीम को विजय के द्वार तक ले जा चुके थे। उनके आउट होने के बाद टीम को अगली 46 गेंदों में 49 रनों की आवश्यकता थी, पर टीम विजय से मात्र 9 रन दूर रह गई। फाइनल स्कोर रहा 429/8. सुनील गावस्कर की यह पारी टेस्ट क्रिकेट में रन चेज में खेली गई सर्वश्रेष्ठ पारियों में से एक मानी जाती है।

इस पारी के बाद वे रेटिंग में 900 से अधिक पॉइंट प्राप्त करने वाले वे भारत के पहले बल्लेबाज बन गए। भारतीय बल्लेबाजों में उनके बाद यह उपलब्धि 4 दशक बाद विराट कोहली ने प्राप्त की।

बैंगलोर 1987. भारत बनाम पाकिस्तान सीरीज का 5वाँ और सुनील गावस्कर के करियर का आख़िरी टेस्ट। यह एक टर्निंग पिच थी। चौथी पारी में भारत के सामने लक्ष्य था 221 रन का। अपने करियर में आखिरी बार बल्लेबाजी कर रहे गावस्कर ने अकेले दम पर भारत की उम्मीदें जीवित रखीं। भारत के पहले दो विकेट 15 पर गिर जाने के बाद उन्होंने दिलीप वेंगसरकर के साथ 49 और फिर पाँचवें विकेट के लिए युवा अज़हर के साथ 43 और 6ठे विकेट के लिए रॉजर बिनी के साथ 32 रन जोड़े। लेकिन उनके अलावा कोई भी बल्लेबाज बताने योग्य योगदान न दे पाया। टीम का स्कोर 180 पर 7, सुनील गावस्कर 96 पर खेल रहे थे, अपने करियर की आखिरी पारी में वे टीम को जीत दिलाने की ओर बढ़ रहे थे पर उनकी किस्मत में आखिरी टेस्ट में न जीत लिखी न शतक। 180 के स्कोर पर वह 8वें विकेट के रूप में इकबाल कासिम की गेंद पर आउट हुए और टीम 204 पर ऑल आउट हो गई। सुनील गावस्कर की यह पारी भी उनकी यादगार पारियों में से एक है।

टेस्ट मैच की चौथी पारी में सुनील गावस्कर के नाम एक बेहद शानदार रिकॉर्ड है। उन्होंने 33 पारियों में 4 शतक और 8 अर्धशतक के साथ 58.25 की औसत से 1398 बनाए हैं। कोई भी भारतीय बल्लेबाज इस रिकॉर्ड में आसपास भी नहीं। ओवल में 221 और बैंगलोर में 96 रन की पारी के अतिरिक्त उन्होंने अपनी डेब्यु सीरीज में ही 1971 Barbados टेस्ट में 117 रन बनाकर टीम को 103 ओवर खेलकर मैच बचाने में योगदान दिया। वे ओपन करने आए थे और अंत तक टिके रहे। अप्रैल 1976 में ऐतिहासिक पोर्ट ऑफ स्पेन टेस्ट में उन्होंने 403 की सफल रन चेज में 102 रन बनाए। 1986 में ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध चेन्नई में टाई हुए टेस्ट में 348 के चेज में 90 रन बनाए थे।

सुनील गावस्कर सही अर्थों में भारतीय बैटिंग के Godfather हैं। उन्होंने एक पूरी जेनरेशन को प्रेरित किया। टेस्ट क्रिकेट में 30 शतक और 10 हज़ार रन बनाने वाले वे पहले बल्लेबाज हुए। उन्होंने अपने पहले 1 हज़ार रन मात्र 6 टेस्ट में पूरे कर लिए थे। डेब्यु सीरीज में ही 4 टेस्ट में बनाए गए उनके 774 रन आज भी विश्व के किसी भी बल्लेबाज द्वारा डेब्यु टेस्ट सीरीज में बनाए गए सर्वाधिक रन हैं। उन्होंने दो बार एक टेस्ट सीरीज में सात सौ से अधिक रन बनाए हैं, उनके अतिरिक्त किसी भी भारतीय बल्लेबाज ने एक बार भी नहीं।

क्रिकेट इतिहास के महानतम बल्लेबाजों में से एक सुनील गावस्कर को जन्मदिन की शुभकामनाएँ।

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