“Magnificent Mahendra. He’s unbelievable in so many ways.”

“Twenty nine for five and the skipper comes out. He must have known he’s lost a big toss there. But wouldn’t have expected to be batting inside the first 10 overs.” चेन्नई में दिसम्बर 2012 में हुए भारत- पाकिस्तान मैच के दौरान कही गई कॉमेंटेटर रवि शास्त्री की पहली लाइन और अगले 40 ओवर भारतीय क्रिकेट में महेंद्र सिंह धोनी का महत्व दर्शाते हैं। अपने करियर में टीम को कई बार संकट से उबारने वाले कप्तान ने इस मैच में भी दसवें ओवर में मात्र 29 रन पर 5 विकेट गिर जाने के बाद आकर 125 गेंदों में 113 नाबाद रन बनाए और टीम को 227 तक पहुँचाया।

2005 में राहुल द्रविड़ के कप्तान बनने के बाद भारतीय टीम रन चेज में एक बेहतरीन टीम बनकर उभरी। पूर्व कप्तान सौरव गांगुली के कार्यकाल में अनेक सफलताओं के बाद भी जहाँ रन चेज में भारत का रिकॉर्ड 23-37 (23 विजय और 37 पराजय) था, वहीं राहुल द्रविड़ के समय यह रिकॉर्ड 23-14 हो गया। इस दौरान भारतीय टीम ने लगातार 15 रन चेज में विजय पाई। इसके सबसे बड़े कारणों में से एक था टीम में महेंद्र सिंह धोनी का होना। इन 15 मैचों की दस पारियों में धोनी ने 3, 4, 5, 6 हर नम्बर पर बल्लेबाजी की और 134 की एवरेज एवं 113 की स्ट्राइक रेट से 537 रन बनाए। राहुल द्रविड़ के कार्यकाल में ही महेंद्र सिंह धोनी एक नैचुरल बॉल स्ट्राइकर होने के साथ साथ एक भरोसेमंद बल्लेबाज के रूप में उभरकर सामने आए। जो जल्दी विकेट गिर जाने पर स्थिति सम्भाल सकता था और अंतिम ओवरों में तेज रन बना सकता था।

रन चेज में महेंद्र सिंह धोनी की क्षमताओं का पहला परिचय 31 अक्टूबर 2005 को जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में मिला। कुमार संगाकारा के 139 नॉटआउट के बलपर श्रीलंका ने 298 रन बना लिए थे। रन चेज के दौरान चामिंडा वास ने पहले ही ओवर में सचिन तेंदुलकर को मात्र 2 रन पर पवेलियन भेज दिया। मैदान में पिन ड्रॉप सायलेन्स, नम्बर 3 पर आए अपना 22वाँ वन डे खेल रहे महेंद्र सिंह धोनी। वास के अगले ओवर की तीसरी गेंद को धोनी ने कवर के ऊपर से सीमारेखा के पार कर दिया, कॉमेंट्री बॉक्स में बैठे रवि शास्त्री के शब्द “He’s a powerful striker of the ball.”  यह बात तो कुछ माह पूर्व सबको विशाखापट्टनम में पता चल चुकी थी। असल प्रश्न था, “Can he chase ?”  वास ने अपने अगले ओवर में एक और गेंद ऑफ स्टंम्प के बाहर की, परिणाम वही, कवर के ऊपर से छक्का।

12वें ओवर में वास की ही गेंद पर उनके सिर के उठाकर मारे गए चौके से धोनी ने अपने 50 रन पूरे कर लिए। वीरेंद्र सेहवाग के साथ हुई 92 रन की साझेदारी ने रन चेज को पटरी पर ला खड़ा किया था। एक चीज़ जो बदली हुई नजर आ रही थी, वह थी कि विशाखापट्टनम में जहाँ सेहवाग-धोनी की साझेदारी में सेहवाग डॉमिनेंट पार्टनर थे, वहीं जयपुर में डॉमिनेंट पार्टनर धोनी थे।

25वें ओवर की पहली गेंद पर MS धोनी ने अपना शतक पूरा कर लिया। टीम का स्कोर था 169/2. कप्तान राहुल द्रविड़ के साथ हुई 86 रन की साझेदारी के बाद यह मैच पूरी तरह भारत के नियंत्रण में था। 47वें ओवर की पहली गेंद पर लगे धोनी के दसवें छक्के के साथ भारत ने यह मैच 6 विकेट से जीत लिया। किसी भी विकेटकीपर बल्लेबाज के द्वारा बनाया गया यह अबतक का सबसे बड़ा स्कोर था। 2013 में रोहित शर्मा द्वारा लगाए गए 16 छक्कों से पहले एक पारी में सर्वाधिक छक्के लगाने का भारतीय रिकॉर्ड MS धोनी के नाम था।

विश्वदीप घोष की किताब के अनुसार कप्तान राहुल द्रविड़ ने इस पारी की तुलना सचिन तेंदुलकर की शारजाह में खेली गई 143 की पारी से की और कहा, “Anyone who watched it at the ground and on television will agree that it is one of the greatest one-day innings of all time.”

तत्कालीन कोच ग्रेग चैपल ने कुछ दिनों पहले PlayWrite Foundation से Youtube पर हुई बातचीत में बताया कि पुणे में अगले मैच से पहले धोनी से हुई बात में उन्होंने कहा यदि तुम सिर्फ बाउंड्री लगाने के प्रयास में रहोगे तो तुम वह उपलब्धियाँ प्राप्त नहीं कर सकते जो तुम्हें प्राप्त करनी चाहिए। चैपल ने कहा कि वे जानना चाहते थे कि क्या धोनी बिना गेंद को हवा में मारे भी रन बना सकते हैं, वो निश्चित रूप से गेंद को हिट करने में सक्षम थे पर खेल के उनके इस तरीके में रिस्क अधिक था। चैपल मानते थे कि यदि रिस्क कुछ कम कर दिया जाए तो धोनी विश्व क्रिकेट के बेहतरीन फिनिशर्स बन सकते हैं। अगले मैच में धोनी को 6 नम्बर पर भेजा गया, उस समय भारत को 80 से अधिक रन चाहिए थे। चैपल ने धोनी को चैलेंज दिया था कि उन्हें रन गेंद को नीचे खेलकर ही बनाने हैं, तबतक हवा में नहीं खेलना जबतक जीत पक्की न हो जाए। चैपल ने कहा, तुम्हें बेस्ट बाउंड्री हिटर के बजाय बेस्ट फिनिशर बनना है और तुम गेम के इतिहास के बेस्ट फिनिशर बन सकते हो। धोनी ने यह चैलेंज स्वीकार किया। चैपल आगे बताते हैं कि जब 20 के आसपास रन चाहिए थे तो 12th मैन RP सिंह ने उनसे कहा, MS जानना चाहते हैं कि क्या अब वो गेंद को हवा में मार सकते हैं। धोनी ने लगातार दो छक्के लगाकर यह मैच समाप्त किया और कोच के पास से गुजरते हुए कहा, “Is that alright coach ?” कोच ने कहा, “That’s fine.”

कॉमेंटेटर हर्ष भोगले उन दिनों को याद करते हुए  कहते हैं, उन्होंने राहुल द्रविड़ से पूछा कि आप धोनी को इतना नीचे क्यों भेजते हैं, जब नम्बर 3 पर उन्होंने करियर की इतनी शानदार शुरुआत की है, राहुल ने कहा वो धोनी को एक अच्छे फिनिशर के रूप में देखते हैं। “I asked Rahul Dravid why they bat Dhoni down the order and not up at number three where he had made such a spectacular start, Rahul said that they really rated him as a finisher.”

लाहौर 2006, भारत vs पाकिस्तान. तीसरा वन डे। यह वन डे सीरीज 1-1 से बराबर थी। 289 का पीछा करते हुए भारतीय टीम 190 पर 5 हो चुकी थी और संकट में थी। MS धोनी ने यहाँ युवराज के साथ 13 ओवरों में 99 रन की साझेदारी की। इसमें से 72 रन धोनी के थे जो मात्र 46 गेंद में आए थे। (इसी पारी में धोनी ने अपने वन डे करियर में 1000 रन पूरे किए।) यह रन चेज में भारतीय टीम की बढ़ती कुशलता का एक और प्रमाण था। अगले कई वर्षों तक धोनी और युवराज को जोड़ी ने कई यादगार साझेदारियाँ कीं।  अप्रैल 2006 में महेंद्र सिंह धोनी ने अपने वन डे करियर में पहली बार ICC रैंकिंग में नम्बर 1 स्थान प्राप्त किया। इस समय तक उन्होंने 42 मैच खेले थे, उनकी एवरेज 52.76 और स्ट्राइक रेट 103 की थी, वे 2 शतक और 8 अर्धशतक बना चुके थे।

2008 में महेंद्र सिंह धोनी को ICC ODI प्लेयर ऑफ द यर चुना गया, 2009 में उन्होंने पुनः यह पुरस्कार जीता। इस साल धोनी ने 70 की औसत से 24 मैचों में 1198 रन बनाए थे। इसी साल वो ICC में रैंकिंग में एक बार पुनः नम्बर एक पर पहुँचे। धोनी के अतिरिक्त केवल दो खिलाड़ी ऐसे हैं जिन्होंने लगातार दो बार ICC ODI प्लेयर ऑफ द यर का अवार्ड जीता है, विराट कोहली और AB डिविलियर्स। 2007 वर्ल्ड T20, 2011 वर्ल्ड कप, 2013 ICC चैंपियन्स ट्रॉफ़ी की बातें सबको पता हैं।

2013 में वेस्ट इंडीज़ में हुई ट्राई सीरीज के फाइनल में श्रीलंका के सामने 202 रनों के लक्ष्य के सामने भी भारतीय टीम 152 पर 7, 167 पर 8 और फिर 182 पर 9 हो चुकी थी। आखिरी ओवर में 15 रन चाहिए थे। मैच जीतने के लिए लगाए गए धोनी के बल्ले से निकले आखिरी छक्के के साथ साथ कॉमेंटेटर इयन बिशप की एक लाइन भी यादगार हो गई,” Magnificent Mahendra… He’s unbelievable in so many ways.”

इयन बिशप की बात सही है, “He’s unbelievable in so many ways.” उनके पहले भारतीय टीम के पास कभी भी ऐसा विकेटकीपर नहीं रहा था जो प्रॉपर बैट्समैन की भाँति खेल सके, अपने दम पर मैच जीता सके। आज आप देख सकते हैं, पिछले कुछ समय से जितने भी युवा विकेटकीपर उभरकर सामने आ रहे हैं, उनमें से ज्यादातर बेहतरीन बल्लेबाज भी हैं, चाहे संजू सैमसन हों, ऋषभ पंत हों, ईशान किशन हों। महेंद्र सिंह धोनी के आने से पहले भारतीय क्रिकेट में ये स्थिति नहीं थी। विवशता में काफी मैचों में राहुल द्रविड़ को विकेटकीपिंग करनी पड़ी, जो काम उन्हें कुछ खास पसंद नहीं था। महेंद्र सिंह धोनी नाम है उस प्रतीक्षा का जो भारतीय क्रिकेट टीम के फैन्स ने नयन मोंगिया, MSK प्रसाद, विजय दहिया, दीप दास गुप्ता, अजय रात्रा, पार्थिव पटेल को देखते हुए किया।

वन डे में सबसे कम पारियों में दस हज़ार रन पूरे करने वाले बल्लेबाजों में महेंद्र सिंह धोनी छठे स्थान पर हैं। इस लिस्ट में धोनी इसलिए यूनीक हैं क्योंकि लिस्ट में उनसे ऊपर जितने भी बल्लेबाज हैं (विराट, सचिन, सौरव, पोंटिंग और कैलिस) सभी टॉप 3 (या तो ओपनर या वन डाउन) के बल्लेबाज हैं, जबकि धोनी ने अपनी 80% से अधिक पारियाँ नम्बर 5, 6, 7 पर खेली हैं।

भारतीय क्रिकेट इतिहास के महानतम कप्तान और महानतम वन डे बल्लेबाजों में से एक महेंद्र सिंह को जन्मदिन की शुभकामनाएँ।

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