Kevin Pietersen’s 186 in Mumbai: One of the greatest knocks of all time.
केविन पीटरसन एक साल पहले कप्तान ऐन्ड्रू स्ट्राउस के साथ दक्षिण अफ्रीका के विरुद्ध होम सीरीज में हुए विवाद के कारण टीम से बाहर कर दिए थे। नए कप्तान एलेस्टर कुक ने भारत दौरे के लिए केविन को टीम के साथ “Re-Intigrate” होने का अवसर दिया था। पहला टेस्ट भारत ने आसानी से 9 विकेट से जीत लिया। KP ने दो पारियों में 17 और 2 रन बनाए और दोनों ही बार प्रज्ञान ओझा की लेफ्ट आर्म स्पिन का शिकार बने। ओझा ने इस मैच में 9 विकेट लिए थे।
स्पिन के सामने इंग्लिश बल्लेबाजों की स्थिति सही नहीं थी। दूसरे टेस्ट में मुम्बई में भारत तीन स्पिनर्स के साथ उतरा। हरभजन को भी टीम में शामिल किया गया था। लेकिन इंग्लैंड के पास भी दो बहुत अच्छे स्पिनर थे, ग्रैम स्वॉन और मोंटी पैनेसर।
टॉस जीतकर बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम ने 40वें ओवर में सिर्फ 119 रन पर पाँच विकेट गँवा दिए। मोंटी की एक गेंद लेग स्टंप की लाइन में पिच हुई, सचिन फॉरवर्ड डिफेंस के लिए आगे गए। गेंद ने जबरदस्त टर्न लिया और सचिन के बैट को बीट करके ऑफ स्टंप पर लगी। लेफ्ट आर्म स्पिनर की Dream Ball. टेस्ट क्रिकेट में 51 शतक बनाने वाले मास्टर पैनेसर की इस गेंद के सामने बिल्कुल असहाय दिखे। चेतेश्वर पुजारा ने धोनी के साथ 50 और अश्विन के साथ 111 की साझेदारी करके भारत को 200 के अंदर ऑल आउट होने से बचा लिया। भारत के कुल स्कोर 327 में से 135 रन पुजारा के थे। पहले ओवर में आए पुजारा 114वें ओवर तक खेले। जिमी ऐंडरसन द्वारा पहले ओवर में गौतम गंभीर का विकेट लिए जाने के बाद भारत के अगले 9 विकेट स्वॉन और मोंटी ने लिए थे।
जब इंग्लैंड के स्पिनर ऐसा कर सकते हैं तो भारतीय स्पिनर भी कर सकते हैं। भारतीय टीम के फैन्स इसी बात को लेकर आशावान थे। पिच स्पिनर्स के लिए इतनी अच्छी थी कि भारत की गेंदबाजी की शुरुआत अश्विन और ओझा ने की। दूसरे दिन पारी के 34वें ओवर में 68 पर इंग्लैंड का दूसरा विकेट गिरने के बाद क्रीज पर आए केविन पीटरसन। चायकाल से कुछ मिनट पहले KP ने अपनी पहली गेंद खेली। हरभजन की यह गेंद ऑफ स्टंम्प के बाहर रफ में गिरी, धूल उड़ी और KP ने अपनी Slap-Drive कवर्स में खेल दी। यह ऐसा शॉट था जो बल्लेबाज आमतौर पर सेट हो जाने के बाद खेलते हैं, यह एक संदेश था KP की ओर से कि इस मैच में क्या होने वाला है।
चाय के बाद हरभजन की शॉर्ट गेंद स्क्वेयर के पीछे की ओर चौके के लिए कट कर दी गई। इसके बाद फुलर लेंथ की गेंद पर मिडविकेट की ओर चौका। पिछले मैच की दोनों पारियों में आउट करने वाले प्रज्ञान ओझा की गेंद मिडऑफ के पास से ड्राइव कर दी गई। चार ओवर बाद उसी फील्डर के सिर के ऊपर से चार रन।
KP ने स्वीप शॉट का बहुत प्रभावी इस्तेमाल किया। कदमों का प्रयोग करके आगे निकलकर सीधे शॉट भी खेले। 62 गेंदों पर KP का अर्धशतक पूरा हुआ। दूसरे दिन के अंत तक इंग्लैंड का स्कोर था 178 पर 2. तीसरे दिन पारी के 71वें ओवर में ओझा की पहली तीन गेंदों को ब्लॉक किया। चौथी गेंद बहुत अधिक स्पिन हुई और बल्ले के बाहरी किनारे को छोड़ती हुई निकल गई। पाँचवी पर KP ने पैड अड़ाने का प्रयास किया। KP ने छठी गेंद की पिच तक पहुँचने का प्रयास किया पर वे काफी दूर रहे फिर भी उन्होंने इसे मिड ऑन के ऊपर से चौके के लिए भेज दिया। ओझा के अगले ओवर की पहली गेंद शॉर्ट और वाइड थी जो पॉइंट के पास से कट कर दी गई। अश्विन की कैरम बॉल पर KP के जोरदार ड्राइव ने गेंद को कवर बाउंड्री की ओर भेज दिया। हरभजन की ऑफ ब्रेक स्क्वेयर के पीछे स्वीप कर दी गई। 77वें ओवर में हरभजन की पहली गेंद को KP ने स्लिप के पास से रिवर्स स्वीप कर दिया और अपना शतक पूरा किया। कोई बड़ा सेलिब्रेशन नहीं। बस दोनों हाथ ऊपर किए, कप्तान एलेस्टर कुक को गले लगाया। केविन पीटरसन का शतक मात्र 127 गेंदों में बना था।
शतक के बाद पीटरसन की आक्रामकता और बढ़ गई। लेग साइड में बाउंड्री पर तीन फील्डर थे, इसलिए अश्विन की ऑफ स्पिन को KP ने जगह बनाकर मिड ऑफ के ऊपर से 6 रनों के लिए स्टैंड्स में भेज दिया। पारी के 101वें ओवर में ओझा की गेंद पर KP ने एक स्लॉग स्वीप किया, गेंद स्टैंड में और इस प्रकार KP के 150 रन पूरे हुए। इंग्लैंड के लिए सबसे अधिक बार 150 बनाने का Wally Hammond और Sir Leonard Hutton का रिकॉर्ड KP ने बराबर कर लिया था। एक Rank Turner पर भारतीय स्पिनर्स को इस प्रकार डॉमिनेट करने का काम न जाने इससे पिछली बार कब देखा गया था।
केविन पीटरसन की इस ऐतिहासिक पारी का सर्वश्रेष्ठ स्ट्रोक आना अभी शेष था। KP इस समय 159 पर थे, यह पारी का 107वाँ ओवर था, प्रज्ञान ओझा की अराउंड द विकेट से फ्लाइट की हुई गेंद को KP ने एक्सट्रा कवर बाउंड्री के ऊपर से 6 रन के लिए दर्शक दीर्घा में पहुँचा दिया।
111वें ओवर में प्रज्ञान ओझा की गेंद पर KP ने फिर से अपना स्लॉग स्वीप खेला और परिणाम है वही, 6 रन। ओझा के अगले ओवर में जब पीटरसन 186 के स्कोर पर आउट हुए तो वे सीरीज की दिशा बदल चुके थे। मात्र 232 गेंदों में खेली गई 186 रनों की इस पारी में 20 चौके और 4 छक्के थे। ( कप्तान एलेस्टर कुक के साथ उन्होंने तीसरे विकेट के लिए 204 रनों की साझेदारी की थी। कुक ने भी 122 रनों का योगदान दिया था।)
अगले दिन स्वॉन और पैनेसर के सामने भारतीय बल्लेबाज फिर से पूरी तरह नाकाम रहे। पहली पारी में 9 विकेट लेने वाली इस जोड़ी ने दूसरी पारी में 10 विकेट लिए। स्वॉन ने 4 और पैनेसर ने 6। गंभीर और अश्विन के अतिरिक्त कोई भारतीय बल्लेबाज दहाई अंकों में भी नहीं पहुँचा। इंग्लैंड ने यह मैच 10 विकेट से बड़ी आसानी से जीतकर सीरीज बराबर कर दी। चौथे टेस्ट के बाद इंग्लैंड ने यही सीरीज 2-1 अपने नाम करके इतिहास रचा।
इस विजय में KP की 186 रन की पारी बहुत महत्वपूर्ण थी। Wisden ने केविन पीटरसन की इस पारी को 2010 से 2019 के दशक की तीसरी सर्वश्रेष्ठ टेस्ट पारी माना है। 104 टेस्ट में 8181 रन और 23 शतक बनाने वाले केविन इस पारी को अपने करियर की टॉप 3 पारियों में रखते हैं।
क्रिकेट इतिहास के महान बल्लेबाजों में से एक केविन पीटरसन को जन्मदिन की शुभकामनाएँ।