24 जून 1983 को समाचार आया कि क्लाइव लॉयड 25 जून को लॉर्ड्स में होने वाले वर्ल्ड कप फाइनल के बाद वेस्ट इंडीज़ की कप्तानी छोड़ देंगे। उनके साथी अपने महान कप्तान को वर्ल्ड कप की हैट्रिक से बड़ा फेयरवेल उपहार दे नहीं सकते थे।
प्रैक्टिस सत्र में बलविंदर सिंह संधू ने अपने सीनियर मदन लाल से पूछा, “पाजी, आप जब मर्जी तब ऑफ कटर कैसे फेंक लेते हैं?” मदन लाल ऑफ कटर समझाने की कला में उतने निपुण नहीं थे जितने वे ऑफ कटर डालने की कला में थे। नेट्स में संधू को एक के बाद एक इनस्विंगर डालते देख कप्तान कपिल ने कहा, “ओये सरदार, अपनी आउटस्विंग पर ध्यान दे। इंटरनेशनल लेवल पर विकेट आउटस्विंग से ही मिलेंगे।”
गावस्कर और श्रीकांत कपिल की लास्ट मिनट सलाह सुनकर मैदान में आए थे। कपिल ने कहा था, यह पिच 70% गेंदबाजों और 30% बल्लेबाजों के पक्ष में है। अतः तेज गेंदबाजों को बहुत सावधानी से खेलना है और रन बनाने के लिए विव रिचर्ड्स और लैरी गोम्स की पार्ट टाइम ऑफ स्पिन की प्रतीक्षा करो। गावस्कर सेट होने का प्रयास कर रहे थे और दूसरे छोर पर खड़े श्रीकांत अपना मनपसंद गाना “तेरे मेरे बीच में कैसा है ये बंधन अनजाना” गुनगुना रहे थे। रॉबर्ट्स की तेज आउटस्विंगर गावस्कर के बल्ले का बाहरी किनारा लेकर विकेटकीपर जेफरी डूजॉन के हाथों में चली गई।
Swashbuckling Cheeka took on the best set of fast bowlers ever assembled: 23 वर्षीय कृष्णमाचारी श्रीकांत “चीका” ने 6 फुट 8 इंच के “Big Bird” जोएल गार्नर की एक गेंद को फ्रंटफुट पर डिफेंड करने का प्रयास किया। गेंद ने खतरनाक उछाल लिया और श्रीकांत के ग्लब्स पर लगी। श्रीकांत इस चोट से तिलमिला उठे, उन्होंने स्वयं से कहा, भाँड़ में गई कप्तान की सलाह, अब मैं अपने तरीके से खेलूंगा। “The skipper’s advice be damned, it’s time for Plan B.” ऐंडी रॉबर्ट्स की एक शॉर्टपिच गेंद पर उन्होंने बैकफुट पर ज़ाक़र पुल किया और गेंद को मिडविकेट बाउंड्री के पार कर दिया। चीका ने चिंताओं को खिड़की से बाहर फेंक दिया था। रॉबर्ट्स ने इससे भी शॉर्ट गेंद फेंकी, पहले से तेज. जवाब में चीका का बैट स्विंग इससे भी तेज। स्क्वेयर लेग बाउंड्री से बाहर, 6 रन। गुंडप्पा विश्वनाथ श्रीकांत के हीरो थे। रॉबर्ट्स की ही गेंद पर बिल्कुल विश्वनाथ के ही स्टाइल में घुटने पर बैठकर श्रीकांत ने एक स्क्वेयर ड्राइव खेली। गेंद विज्ञापन की होर्डिंग से टकराई।

श्रीकांत ने अपना पोज होल्ड किया, दायाँ घुटना पिच पर, शर्ट के ऊपरी दो बटन खुले, निगाहें सीमारेखा की ओर जा रही गेंद की दिशा में, बैट ऊपर की ओर, बल्ले के पीछे Black Panther का स्टिकर और मैदान में उपस्थित 14 अन्य लोग एकदम स्तब्ध। महान फोटोग्राफर Patrick Eager ने इस शॉट की एक बहुत ही सुंदर फोटो ली है। श्रीकांत अबतक कट, पुल, हुक, ड्राइव हर शॉट खेल चुके थे। क्रिकेट इतिहास में एक साथ खेलने वाले सबसे महान गेंदबाजों की यूनिट चीका के खेलने के अंदाज़ से अधिक परिचित नहीं थी। लम्बे स्पेल के बाद रॉबर्ट्स और होल्डिंग को आराम दिया गया पर भारतीय बल्लेबाजों के लिए कोई आराम नहीं था क्योंकि नए गेंदबाज थे माइकल होल्डिंग और मैल्कम मार्शल।
मोहिंदर “जिमी” अमरनाथ पर एक के बाद बाउंसरों की बौछार हो रही थी। कुछ महीने पहले Barbados टेस्ट में मार्शल की एक गेंद ने उनके ऊपरी होंठ को ऐसा घायल किया था कि कई टाँके लगे थे। मार्शल की गेंद एक बार फिर से उसी दिशा में बढ़ रही थी। लेकिन इस बार जिमी का बल्ला बीच में आ गया। जिमी ने अपना ट्रेडमार्क नटराज पुल खेला था।

20वें ओवर में स्कोर जा पहुँचा था 59/1, इसमें से 38 रन श्रीकांत के बल्ले से आए थे। मैल्कम मार्शल की गेंद आड़े बल्ले से खेलने के प्रयास में श्रीकांत एलबीडबल्यू हो गए। सात चौके और एक छक्के के साथ 57 गेंद में 38 रन का यह स्कोर इस पारी में प्रदर्शित की गई हिम्मत और इस पारी का इम्पैक्ट नहीं दिखा रहा था। अंत में यह मैच का सर्वाधिक स्कोर सिद्ध हुआ।


जिमी के आउट होने के बाद स्कोर को 90 पर 2 से 130 पर 7 होने में अधिक देरी नहीं लगी। मदन लाल, किरमानी और संधू के छोटे छोटे पर महत्वपूर्ण योगदानों के कारण स्कोर 183 तक पहुँचा। इस दौरान एक घटना घटी, उस समय के शायद सबसे तेज गेंदबाज मैल्कम मार्शल की एक बाउंसर सीधी बलविंदर सिंह संधू के हेलमेट पर लगी। संधू खड़े रहे लेकिन वो कष्ट में दिख रहे थे, उनका सिर घूमने लगा था। विकेटकीपर जेफरी डूजॉन ने उनका हालचाल लेने का प्रयास किया। कॉमेंट्री बॉक्स से लेकर फील्ड अंपायर डिकी बर्ड कोई भी मार्शल की इस हरकत से प्रसन्न नहीं हुआ। आज जैसे हेलमेट की अनुपलब्धता के कारण एक नम्बर 11 के विरुद्ध इस प्रकार का बाउंसर फेंकना उस समय उचित नहीं माना जाता था। डिकी बर्ड ने मार्शल से क्षमा माँगने को कहा, मार्शल ने बड़े अनमने ढंग से अपना हाथ ऊपर कर दिया।
भारत के 183 पर आउट हो जाने के बाद वेस्ट इंडीज़ के नम्बर 10 (बैटिंग ऑर्डर में) जोएल गार्नर ने नम्बर 8 मार्शल से पूछा, “तुम्हें लगता है, आज तुम्हें बैटिंग करनी होगी?” मार्शल ने कहा, “हाँ, और तुम्हें भी करनी होगी। जब हम किसी छोटे लक्ष्य का पीछा करते हैं तो हर व्यक्ति दूसरे से ही काम खत्म करने की आशा करता है।”
जब भारतीय टीम फील्डिंग के लिए मैदान में प्रवेश कर रही थी तो वेस्ट इंडीज़ के दर्शकों की ओर से लगातार मजाक उड़ाया जा रहा था। गावस्कर उनकी बातों का उत्तर अपनी त्रिनिडाडियन ऐक्सेंट में दे रहे थे जो उन्होंने वेस्ट इंडीज़ में काफी समय तक खेलने के दौरान सीखी थी।
बलविंदर सिंह संधू ने कुछ महीने पहले वेस्टइंडीज में हुई टेस्ट सीरीज के दौरान पोर्ट ऑफ स्पेन टेस्ट में वेस्ट इंडीज़ के दोनों ओपनर्स ग्रीनिज और हेन्स को पहले ही स्पेल में आउट कर दिया था। संधू को यह बात आज भी याद आ रही थी। कपिल ने संधू को सख्त निर्देश दिए थे, बस इसपर नज़र रखना कि संदीप पाटील कहाँ खड़ा है। यदि वह थर्डमैन पर है तो इनस्विंगर फेंकना और यदि फाइन लेग पर है तो आउटस्विंगर, यदि गेंद उसकी तरफ गई तो वह मिस्फील्ड करेगा और हम हार जाएंगे। संधू को प्रैक्टिस के दौरान अपने कप्तान की कही हुई बात भी याद थी, “ओये सरदार, अपनी आउटस्विंग पर ध्यान दे।” गॉर्डन ग्रीनिज अपनी इस पारी की 12वीं गेंद खेल रहे थे, उन्होंने इस बार भी आउटस्विंग की अपेक्षा करते हुए गेंद को छोड़ दिया। लेकिन ये इनस्विंगर निकली और स्टम्प पर जा लगी।


Arrival of the King: ग्रीनिज के विकेट के बाद क्रीज पर आए गेंदबाजों के मन में सबसे ज्यादा भय पैदा करने वाले आइजैक विवियन अलेक्जैंडर रिचर्ड्स। कपिल की एक आउटस्विंगर पर एक कदम बाहर निकालकर विव ने स्ट्रेट ड्राइव से चौका जड़ दिया। कपिल की अगली गेंद फिर उसी लेंथ पर गिरी लेकिन इस बार यह इनस्विंगर थी। विव ने इसे स्क्वेयर लेग की ओर घुमा दिया, एक और चौका। वेस्ट इंडियन बालकनी में ऑस्ट्रेलिया के महान तेज गेंदबाज डेनिस लिली भी विव की बल्लेबाजी का आनंद ले रहे थे। कपिल ने मदन लाल को गेंद सौंपी। इस ओवर में विव ने तीन चौके जड़े। तीनों मैदान के अलग अलग हिस्से में, मिडविकेट, एक्स्ट्रा कवर और पॉइंट। वेस्ट इंडियन दर्शक स्टेडियम में कैरिबियन संगीत और Lager (बीयर) के साथ साथ अपने हीरो की विस्फोटक पारी का आनंद ले रहे थे।
विव के इस अंदाज को देखकर स्टेडियम में मैच देख रही भारतीय खिलाड़ियों की पत्नियों को अंदाज़ा लग गया कि अब ये मैच थोड़ी देर का ही है, इन सबने अपनी अपनी शॉपिंग बुक बाहर निकाल ली। थर्ड मैन बाउंड्री पर खड़े संदीप पाटील को मिसेज गावस्कर ने कहा, “हम लोग ऑक्सफ़ोर्ड स्ट्रीट की ओर निकल रहे हैं। सुनील को बता देना।” मिसेज गावस्कर, मिसेज कपिल देव और मिसेज मदन लाल, ये तीनों खरीददारी के लिए निकल पड़ीं। गार्ड ने कहा इन टिकटों पर दुबारा एंट्री नहीं मिलेगी। लेकिन इन महिलाओं को ऐसा एकतरफा मैच देखने का अब और मन नहीं था।
डेसमंड हेन्स 13 रन बनाकर आउट हो गए और आखिरी बार वन डे में कप्तानी कर रहे क्लाइव लॉयड Standing Ovation के बीच क्रीज पर आए। मदन लाल हेन्स का विकेट लेकर काफी उत्साहित थे और अब वो विव को एक और ओवर करना चाहते थे। लेकिन विव द्वारा एक ओवर में 3 चौके पड़ने के कारण कप्तान उन्हें एक और ओवर देने को तैयार नहीं थे। अब वे रन रोकना चाहते थे। कपिल ने कहा, “मद्दी पा, अब आप थोड़ा ब्रेक लो, कुछ देर फिर से आपको ओवर दिया जाएगा।” मद्दी पा (मदन लाल) बोले, “कप्तान, मुझे गेंद दो, मैंने Berbice (Guyana) में भी विव को आउट किया है, यहाँ भी कर दूँगा, प्लीज़ एक ओवर बस।”
The Catch: मदन लाल की एक गेंद शॉर्ट गिरी। विव ने गेंद की उपेक्षा सी करते हुए पुल शॉट खेला, लेकिन गेंद बल्ले के ऊपरी हिस्से पर लग गई और आकाश में बहुत ऊपर गई। लॉर्ड्स में समय रुक गया था। आइजैक विवियन अलेक्जैंडर रिचर्ड्स का विकेट मिलना मैच की पूरी दिशा बदल सकता था। यशपाल शर्मा डीप स्क्वेयर लेग पर खड़े थे, वे भी कैच के लिए आगे आने लगे। थर्डमैन पर खड़े टीम के संभवतः सबसे खराब फील्डर संदीप पाटील इस बात के लिए भगवान को धन्यवाद दे रहे थे कि वे वहाँ नहीं खड़े जहाँ कपिल खड़े हैं, वरना उन्हें कैच के लिए दौड़ना पड़ता। कपिल मिडविकेट पर खड़े थे, उन्होंने उल्टी दौड़ लगानी शुरु की। कैच के लिए हाथ बढाने के पहले कपिल ने यशपाल को चिल्लाकर स्पष्ट कर दिया, “यश रुक जाओ, ये मेरा है।” 20 यार्ड की दौड़ के बाद गेंद कपिल के हाथों में गिरी। कपिल द्वारा लिए गए इस अकल्पनीय कैच से स्टेडियम में उपस्थित भारतीय दशकों में अचानक से ऊर्जा आ गई। उल्लास का वातावरण बन गया। “Viv c Dev b Lal” शॉपिंग के लिए निकल चुकीं मिसेज देव और मिसेज लाल को इस बात की कोई खबर नहीं थी। डेढ़ साल पहले जनवरी 1982 में अमेरिकन फुटबॉल कॉन्फ्रेंस (AFC) चैंपियनशिप मैच में Joe Montana के थ्रो पर Dwight Clark का कैच इतना प्रसिद्ध हुआ कि उसे “The Catch” का नाम दे दिया गया था। कपिल का कैच इससे कम इससे कम महत्वपूर्ण नहीं था।
विव के आउट होते ही अचानक से कॉमेंटेटर भारत की विजय की संभावनाओं पर चर्चा करने लगे। लैरी गोम्स के विकेट के बाद वेस्ट इंडीज़ का स्कोर हो चुका था 66 पर 4. लेकिन कपिल को पता था कप्तान क्लाइव लॉयड अभी भी मैच जीताने की क्षमता रखते हैं, 1975 के विश्वकप फाइनल में मैन ऑफ द मैच रहे लॉयड ने 102 रन बनाकर वेस्ट इंडीज़ को न सिर्फ संकट से निकाला था बल्कि एक बड़े स्कोर तक पहुँचाया था। कपिल ने रॉजर बिनी से कहा, फुल और स्ट्रेट रखो गेंद को। बिनी ने यही किया, लॉयड की ड्राइव सीधी कपिल के हाथों में चली गयी। 66 पर 5. लॉयड के विकेट के बाद पहली बार इस मैच में वेस्ट इंडीज़ के कैम्प में पैनिक आरम्भ हुआ। 76 रन पर छठा विकेट गिरा तो विकेटकीपर किरमानी भी कष्ट में थे, विकेट का जश्न मनाने के चक्कर में श्रीकांत अपनी Spikes के साथ उनके जूते पर चढ़ गए थे, जिससे किरमानी के पैर से खून निकल गया था। एक शानदार कैच का ऐसा पुरस्कार कम ही मिलता है।
अब 108 रन चाहिए थे और मात्र 4 विकेट शेष थे। BCCI के अधिकारियों को जीत दिखाई पड़ने लगी थी। जश्न के लिए ड्रेसिंग रूम से बेहतर स्थान क्या हो सकता था। लेकिन जेफरी डूजॉन और मैल्कम मार्शल अभी फाइट करने को तैयार थे। दोनों ने एक-एक, दो-दो रन लेने शुरु किए। एक शॉर्ट पिच गेंद पर डूजॉन के छक्के ने वेस्ट इंडीज़ का स्कोर 100 के पार पहुँचा दिया। शान्त हो चुके कैरेबियाई दर्शकों में अचानक से जोश का संचार हो गया। कपिल भी अब दबाव में थे, गेंदबाज संधू को लाइन लेंथ बताने के दौरान दोनों में बहस होने लगी। संधू ने उपकप्तान जिमी से शिकायत की। जिमी ने कपिल को बाउंड्री पर भेजा और स्वयं उनके स्थान पर खड़े हो गए।
ड्रेसिंग रूम में उपस्थित रिजर्व खिलाड़ियों रवि शास्त्री और दिलीप वेंगसरकर ने टीम मैनेजर मान सिंह से शिकायत करते हुए कहा कि ये BCCI वाले जबसे घुसे हैं ड्रेसिंग रूम में, तब से पनौती लग गई है। इनको हटवाया जाए। ये काम मान सिंह के अधिकार क्षेत्र से बहुत ऊपर था।
मार्शल और डूजॉन के बीच 7वें विकेट के लिए 43 रन की साझेदारी हो चुकी थी। 114 गेंदों पर मात्र 65 रनों की आवश्यकता थी। सुनील गावस्कर ने कप्तान से कहा, जिमी अमरनाथ को लगाया जाना चाहिए अटैक पर। अभी तक उन्होंने ज्यादा रन नहीं दिए। जिमी की गेंद अंदर आई, डूजॉन तय नहीं कर पाए कि इस गेंद को खेलना है या छोड़ना है। अंत में उन्होंने इसे छोड़ दिया। गेंद स्टम्प पर जा लगी। 5 रन के बाद मैल्कम मार्शल भी जिमी की गेंद पर आउट हो गए। कप्तान कपिल ने जब ऐंडी रॉबर्ट्स को आउट किया तो वेस्ट इंडीज़ को जीत के लिए 58 रन चाहिए थे और केवल एक विकेट शेष था। 52वें ओवर में जिमी अमरनाथ की आखिरी गेंद माइकल होल्डिंग के पैड पर लगी। अंपायर डिकी बर्ड ने तुरन्त उंगली ऊपर कर दी। वेस्ट इंडीज़ लक्ष्य से 43 रन पीछे रह गयी थी। जिमी एक विकेट उखाड़कर पवेलियन की ओर दौड़े, डिकी बर्ड ने भी एक विकेट के साथ दौड़ लगा दी। सुनील गावस्कर ने गेंद जेब में रखी और अपने जीवन की सबसे तेज दौड़ लगाई।

26 बनाने के साथ साथ 7 ओवर में 12 रन पर 3 विकेट लेने वाले जिमी अमरनाथ मैन ऑफ द फाइनल थे।

मैच से पहले कॉमेंटेटर Richie Benaud के अनुसार भारत की विजय के Odds थे, 66:1. टीम चयन पर हुआ विवाद, कप्तानी पर हुआ विवाद, गावस्कर से मतभेद, ज़िम्बाब्वे के विरुद्ध 17 पर 5, विशेषज्ञों द्वारा भारतीय टीम के इस विश्वकप में जीतने के चांस नगण्य बताया जाना… ट्रॉफी उठाते समय कपिल के मन में यह सारे विचार तैर रहे थे। पिछले दो विश्वकप मिलाकर केवल एक मैच (पूर्वी अफ्रीका के विरुद्ध) जीतने वाली टीम आज विश्व चैम्पियन थी।


सर गारफील्ड सोबर्स भी स्टैंड में उपस्थित थे। जब उनसे ऑटोग्राफ मांगे जा रहे थे तब उन्होंने कहा, “Not today, this is India’s day”
क्लाइव लॉयड से जब मैच पर उनके विचार पूछे गए तो उन्होंने कहा “Indian cricket has arrived. And it’s here to stay.”
(एकाध बातों के अतिरिक्त लगभग सारा कंटेंट निखिल नाज़ की किताब “Miracle Men” से)