
शिखर धवन ने ICC चैंपियंस ट्रॉफी 2013 से पहले मात्र 5 वन डे मैच खेले थे और कुल 69 रन बनाए थे 13.8 की औसत से। रोहित शर्मा की वन डे टीम में जगह अभी भी पक्की नहीं थी और उन्हें चैंपियंस ट्रॉफी में ओपनिंग करने का दायित्व मिला था। वन डे क्रिकेट इतिहास की सबसे महान ओपनिंग जोड़ियों में से एक की शुरुआत 6 जून 2013 को इंग्लैंड में सोफ़िया गार्डन्स में दक्षिण अफ्रीका के विरुद्ध हुई। दोनों ने पहले विकेट के लिए 127 रन जोड़े। रोहित ने 65 और शिखर ने 114 रन बनाए। इस मैच में जीत के साथ महेन्द्र सिंह धोनी के नेतृत्व वाली भारतीय टीम ने एक और ICC टूर्नामेंट जीतने की ओर कदम बढ़ा दिया।

2013 शिखर धवन का साल था। धवन ने अगले मैच में वेस्ट इंडीज़ के विरुद्ध भी एक शतक लगा दिया। भारत ने यह मैच 8 विकेट से जीत लिया। बारिश से प्रभावित तीसरे और अंतिम लीग मैच में पाकिस्तान को 8 विकेट से पीटकर भारतीय टीम सेमीफाइनल में पहुँची। इशांत शर्मा के 3 विकेट और कोहली-धवन के अर्धशतकों के दम पर भारत ने सेमीफाइनल भी आसानी से 8 विकेट से जीत लिया।
फाइनल तक आने में भारत को कोई खास संघर्ष नहीं करना पड़ा था। फाइनल एजबेस्टन में खेला जा रहा था। सामने थी अपने घरेलू मैदान पर खेल रही इंग्लैंड की टीम। बहुत देर तक बारिश होती रही। भारत में तो प्रतीक्षा करते करते रात के 9 बज गए थे। अंत में 20-20 ओवर का मैच शुरु हुआ। टॉस में कोई विलंब नहीं हुआ था, टॉस पहले ही हो गई थी, इंग्लैंड ने गेंदबाजी चुनी थी। 13 ओवर के बाद भारत का स्कोर था 66 रन पर 5 विकेट। इसमें से 31 रन शिखर धवन के थे। जीतने वाले लक्षण तो कतई नहीं दिख रहे थे, पर विराट कोहली अभी भी क्रीज पर थे और उनके साथ थे रवींद्र जडेजा। भारतीय खेमे में माहौल गंभीर था। विराट और जडेजा की साझेदारी ने स्कोर को 100 के पार पहुँचाया, दोनों ने 33 गेंद में 47 रन जोड़े। ये रन बहुत ज्यादा नहीं थे पर इस मैच के संदर्भ में इनका महत्व अधिक था। विराट भारत की ओर से टॉप स्कोरर रहे उन्होंने 34 गेंद में 43 रन बनाए। जडेजा ने भी अंत में 2 छक्के और 2 चौके के साथ 25 गेंद में 33 रन बनाए और स्कोर को 129 तक पहुँचाया।
अब कम से कम फाइट तो दी ही जा सकती थी। कप्तान ने ड्रेसिंग रूम में अपनी टीम से यही कहा कि आकाश की ओर बारिश की उम्मीद से मत देखो। वहाँ से कोई सहायता नहीं आने वाली। हम नम्बर 1 ODI टीम हैं इसलिए इन 130 रनों के लिए फाइट करनी है। 8.4 ओवर के बाद इंग्लैंड का स्कोर था 46 रन पर 4 विकेट। अश्विन और जडेजा के सामने इंग्लिश बल्लेबाज कुछ कर नहीं पा रहे थे। अश्विन के पहले स्पेल के आँकड़े थे- 3 ओवर, 1 मेडेन, 6 रन और 2 विकेट।


अभी कुछ दिन पूर्व लॉकडाउन के दौरान अश्विन और सुरेश रैना की इंस्टाग्राम चैट के दौरान एक रोचक बात पता चली। अश्विन ने बताया कि जब धोनी ने उन्हें उनका पहला ओवर करने के लिए गेंद दी तो जॉनाथन ट्रॉट बल्लेबाजी कर रहे थे। धोनी ने कहा था कि ट्रॉट को ओवर द विकेट से गेंद मत करना, अराउंड द विकेट से करना। वो लेग साइड पर खेलने जाएगा, गेंद घूमी तो स्टम्प हो जाएगा। हुआ भी बिल्कुल यही, अश्विन ने लेग साइड में वाइड फेंकी और ट्रॉट को धोनी ने स्टम्प कर दिया। अश्विन ने इस चैट में कहा कि उन्हें नहीं पता कि धोनी को ये सब कैसे पता था। जो रूट के लिए भी कुछ ऐसी ही योजना थी, अश्विन अराउंड द विकेट से गेंदबाजी कर रहे थे। सुरेश रैना बैकवर्ड शॉर्टलेग पर खड़े थे, धोनी ने उनसे कहा था बस वहीं खड़े रहो ताकि ये यहाँ से सिंगल का प्रयास न करे और उठाकर खेले। रुट ने उठाकर ही मारा और फाइन लेग पर इशांत शर्मा को कैच दे बैठे। (इस चैट का वीडियो कॉमेंट में है)
भारत ने मैच को कंट्रोल करना आरम्भ कर दिया था पर खेल फिर से पलटा, ऑइन मॉर्गन और रवि बोपारा की जोड़ी ने सम्भलकर खेलते हुए 14 ओवर में स्कोर को 71 तक पहुँचाया। अब 6 ओवर में 59 रन चाहिए थे, 6 विकेट हाथ में थे और दो सेट बल्लेबाज क्रीज पर थे। अगले तीन ओवरों में मॉर्गन और बोपारा ने 31 रन बना दिए। अब स्कोर था 17 ओवर में 102 रन। 3 ओवर में 28 रन कोई बड़ी बात नहीं थी। कप्तान धोनी ने 18वें ओवर के लिए जब इशांत शर्मा को गेंद सौंपी तो हर ओर यही प्रश्न था, इशांत ही क्यों ? आप CricInfo पर कॉमेंट्री पढ़ें तो इस प्रकार के प्रश्न दिख जाएंगे वहाँ। लेकिन इसके लगभग 6 साल पहले Bullring, Johannesburg में भी इसी तरह के प्रश्न लोगों के दिमाग में थे। सेमीफाइनल में मैन ऑफ द मैच रहे इशांत शर्मा को इसके पहले 3 ओवर में 27 रन पड़ चुके थे। उनके इस ओवर की पहली गेंद डॉट रही, दूसरी गेंद शॉर्ट, लेग स्टम्प पर। मॉर्गन ने इस बेहद वाहियात डिलीवरी को फाइन लेग सीमारेखा के पार कर दिया, 6 रन। इसके बाद दो लगातार वाइड। कप्तान कितना भी कूल हो, ऐसे में तो वो भी आपा खो ही देगा, लेकिन MS धोनी ने नहीं खोया।
रविचंद्रन अश्विन मिडविकेट पर खड़े थे सर्कल में। 16 गेंदों में मात्र 20 रन चाहिए थे। इशांत शर्मा की एक स्लोअर गेंद पर मॉर्गन जल्दी शॉट खेल गए और गेंद सीधी अश्विन के हाथों में चली गई। अश्विन की जगह बदल दी गई थी, अब वो सर्कल में स्क्वेयर लेग पर खड़े थे। इशांत की एक और शॉर्ट गेंद, बोपारा का शॉट सीधा अश्विन के हाथों में। दो गेंद के अंदर इशांत शर्मा ज़ीरो से हीरो बन चुके थे। दो गेंद में दोनों सेट बल्लेबाज पवेलियन में। अगले दो ओवर कप्तान के दो भरोसेमंद गेंदबाजों अश्विन और जडेजा के थे।
2 ओवरों में 19 रन की आवश्यकता। गेंद रवींद्र जडेजा के हाथों में। जडेजा ने दूसरी गेंद पर बटलर को आउट किया और इस ओवर में मात्र 4 रन दिए। उनके आँकड़े थे 4 ओवर में 24 रन देकर 2 विकेट। स्कोर 115 पर 8.
कप्तान यदि रन न बनाए या विकेट न ले तब भी उसका एक काम शेष रहता है, वो है कप्तानी। बारिश हुई थी, इसके बाद भी पिच सूखी थी, इसलिए धोनी ने 3 ओवर सुरेश रैना से करा लिए। प्रमुख गेंदबाजों उमेश यादव और भुवनेश्वर कुमार को मिलाकर 5 ओवर ही मिले। स्पिन गेंदबाजों के समय दो या तीन फील्डर हमेशा बैट्समैन के आस पास खड़े रहे। चाहे स्लिप, लेग स्लिप, फॉरवर्ड या बैकवर्ड शॉर्टलेग। गार्डियन अखबार ने लिखा है, ये मात्र एक संयोग तो नहीं हो सकता कि इंग्लैंड के निचले क्रम में लेफ्ट हैंडर ज्यादा थे और उन्हें ऑफ स्पिनर अश्विन को खेलना पड़ा जिसकी गेंद उनके लिए बाहर निकलेगी।
अंतिम ओवर में इंग्लैंड को 15 रन चाहिए थे, टूर्नामेंट का आखिरी ओवर लेकर इस मैच के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज रविचंद्रन अश्विन चले। पहली गेंद डॉट, अगली फुलटॉस और चार रन। 4 गेंद में 11 रन, अगली तीन गेंद पर 1,2,2। आखिरी गेंद पर 6 रनों की आवश्यकता, छक्के से इंग्लैंड की विजय, सुपर ओवर के लिए 5 और इससे कम कुछ भी आया तो भारत चैंपियन। जेम्स ट्रेडवेल स्ट्राइक पर, अश्विन की गेंद, प्रॉपर ऑफ स्पिन, ट्रेडवेल ने बैट घुमाया पर मिस कर गए। गेंद विकेटकीपर कप्तान के ग्लब्स से लगकर नीचे गिरी। भारत ने यह मैच 5 रन से जीत लिया था। हर्ष भोगले ने कॉमेंट्री बॉक्स में कहा, “Tredwell misses. Dhoni misses but it doesn’t matter. England capitulate. It’s been a tremendous bowling performance and Mahendra Singh Dhoni… well… this was the one trophy he didn’t have. He’s got it now.”

आप यदि मैच की हाइलाइट्स देखें तो आखिरी गेंद डॉट होने के बाद कप्तान की जो भाव भंगिमा दिखेगी वो उनके चेहरे पर बहुत कम दिखाई देती है। इससे पता चलता है उनकी मनोदशा क्या थी इस समय। पिछले डेढ़-दो वर्ष में दो टेस्ट सीरीज में 0-8 का पूरा ब्लेम उन्हें ही मिला था। तीन महीने पहले भारत द्वारा ऑस्ट्रेलिया को 4-0 से टेस्ट सीरीज हराकर बदला लेने की चर्चा भी कम हुई थी (न जाने क्यों)। इस ICC चैंपियंस ट्रॉफी में वे एक युवा टीम लेकर आए थे, टॉप 7 में से केवल 3 बल्लेबाज ऐसे थे जिन्होंने 2011 विश्वकप खेला था।

33 रन बनाने के साथ साथ 4 ओवर में 24 रन देकर दो विकेट लेने वाले रवींद्र जडेजा मैन ऑफ़ द फाइनल रहे। 90.75 की औसत और 101.4 की स्ट्राइक रेट से 363 रन बनाने वाले शिखर धवन मैन ऑफ द टूर्नामेंट हुए।

यह टूर्नामेंट विजय टीम वर्क का परिणाम थी। शिखर धवन और रोहित शर्मा के रूप में भारत को एक नई ओपनिंग जोड़ी मिली, जो अभी भी चल रही है। भुवनेश्वर कुमार पिछले साल इंजरी होने से पहले तक भारत के प्रमुख वन डे गेंदबाजों में रहे। अश्विन और जडेजा अगले साढ़े तीन – चार साल तक भारत के लिए मैच विनर साबित होते रहे। जडेजा अभी भी वन डे टीम का हिस्सा है। यह टीम इस टूर्नामेंट की सर्वश्रेष्ठ फील्डिंग टीम भी थी। ट्रॉफी कैबिनेट में तीसरी ICC ट्रॉफी आने के बाद कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी की लेगेसी पर कोई प्रश्नचिह्न (यदि रहा हो) तो वो अब शेष नहीं बचा था।

MS निर्विवाद रूप से अब भारतीय क्रिकेट इतिहास के महानतम कप्तान बन चुके थे। हालाँकि ये काम 2011 में हो चुका था, पर 2011 वाली टीम में जहाँ एक से बढ़कर एक सुपरस्टार थे, वहीं 2013 वाली टीम बिल्कुल अलग थी। भारतीय क्रिकेट को यहाँ से आगे ले जाने का काम अब इस युवा टीम के जिम्मे था। इस समय शिखर धवन 27, रोहित 26, विराट 24, रैना 26, भुवनेश्वर 23, अश्विन 26, जडेजा 24 साल के थे। कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी के अतिरिक्त इस टीम के 4-5 खिलाड़ी भारत की ऑल टाइम ग्रेट वन डे टीम में हो सकते हैं।


आज इस चैंपियंस ट्रॉफी की विजय के सात वर्ष पूरे हो गए।