Rajinder Goel: Highest Wicket-taker in the history of Ranji-Trophy but never played test cricket.

हर खेल में कुछ खिलाड़ी होते हैं जिनकी क्षमता और महानता के बारे में इस कारण भी पता नहीं लग पाता क्योंकि वे ऐसे दौर में पैदा होते हैं जिसमें उनसे बड़े नाम होते हैं। दुर्भाग्यवश उन्हें वह प्रसिद्धि नहीं मिल पाती जिसके वे अधिकारी होते हैं।

साठ और सत्तर के दशक में भारतीय टीम की स्पिन चौकड़ी विश्व प्रसिद्ध थी। लेफ्ट आर्म स्पिनर बिशन सिंह बेदी, राइट आर्म ऑफ स्पिनर इरापल्ली प्रसन्ना, राइट आर्म लेग स्पिनर भागवत चंद्रशेखर और राइट आर्म ऑफ स्पिनर श्रीनिवास वेंकटराघवन। यह स्पिन चौकड़ी बहुत सफल रही।

भारत vs वेस्ट इंडीज़ टेस्ट सीरीज 1974-75 में टेस्ट इतिहास के दो महान बल्लेबाजों ने बैंगलोर में टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया, इनके नाम थे गॉर्डन ग्रीनिज और विवियन रिचर्ड्स। इसी मैच में एक और महान खिलाड़ी का पदार्पण हो सकता था पर टीम कॉम्बिनेशन ऐसा था कि उस खिलाड़ी को अवसर न मिल सका। यह खिलाड़ी थे लेफ्ट आर्म स्पिनर राजिंदर गोयल।

विश्व क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ लेफ्ट आर्म स्पिनर्स में से एक बिशन सिंह बेदी अनुशासनात्मक कारणों से बैंगलोर टेस्ट से ड्रॉप हो गए थे। उनके स्थान पर दूसरे लेफ्ट आर्म स्पिनर राजिंदर गोयल को चुनने के बजाय मैनेजमेंट ने लेग स्पिनर भागवत चंद्रशेखर और दो ऑफ स्पिनर प्रसन्ना और वेंकटराघवन के साथ जाना उचित समझा। सुनील गावस्कर ने अपनी किताब “Idols” में लिखा है कि गोयल नई किट और नए जूते भी ले आए थे पर अंत में उन्हें पता चला कि वे 12वें खिलाड़ी ही रहेंगे। अगले टेस्ट में बिशन सिंह बेदी वापस आ गए और गोयल को फिर कभी टीम में नहीं चुना गया।

राजिंदर गोयल ने बाद में कहा, “जब भारतीय टीम दो ऑफ स्पिनर (प्रसन्ना और वेंकट) लेकर खेल सकती है, तो उन्हें दो लेफ्ट आर्म स्पिनर के साथ खेलने से कौन रोक रहा था ? मुझे लगता है वे मुझे टीम में लेना ही नहीं चाहते थे, कारण चाहे जो रहा हो। देश के सर्वश्रेष्ठ स्पिनर्स में से एक होने के बाद भी मैं देश के लिए नहीं खेल सका, यह निराशा मृत्यु तक मेरे साथ रहेगी। 1980s में दो लेफ्ट आर्म स्पिनर रवि शास्त्री और दिलीप दोषी एक साथ खेले हैं, ऐसा विचार 1970s में क्यों नहीं किया गया, ये नहीं पता।” (सोर्स: Deccan Herald)

गोयल से पूछा गया कि इतने बढ़िया प्रदर्शन के बाद भी टीम में न चुने जाने पर उन्होंने लगातार खेलना जारी कैसे रखा तो उनका उत्तर था, “मैं बढ़िया गेंदबाजी करने के अतिरिक्त और कर भी क्या सकता था ? क्रिकेट मेरा जीवन है, पर जीवन में हमें सबकुछ नहीं मिलता। आपको बस अपना काम करते रहना है, मैंने भी अपनी क्षमताओं के हिसाब से सदैव अपना सर्वश्रेष्ठ करने का प्रयास किया।”

राजिंदर गोयल (पद्माकर शिवालकर के साथ) उन दो ऐसे खिलाड़ियों में से एक हैं जिन्होंने कभी टेस्ट क्रिकेट नहीं खेली परंतु सुनील गावस्कर उन्हें अपना आदर्श मानते हैं।

1958-59 में गोयल का प्रथम श्रेणी करियर पटियाला (बाद में इसे दक्षिणी पंजाब कहा गया) से आरम्भ हुआ। 1964-65 में गोयल ने श्रीलंका (तब इसे CEYLON कहा जाता था) के विरुद्ध एक Unofficial टेस्ट खेला था। 1958-59 से 1984-85 तक चले घरेलू करियर में गोयल ने दक्षिणी पंजाब, दिल्ली, हरियाणा के लिए रणजी ट्रॉफी और North Zone के लिए दलीप ट्रॉफी खेली।

(सोर्स: http://www.CricketCountry.Com ) 1962 में गोयल ने पंजाब छोड़कर दिल्ली के लिए खेलना आरम्भ किया। पहले ही सीजन में उन्होंने 25 विकेट लिए, उनकी इकॉनमी मात्र 1.49 रही। अपनी पुरानी टीम दक्षिणी पंजाब के विरुद्ध एक मैच में उनके आँकड़े थे, 31.4 ओवर में 24 मेडेन, 17 रन देकर 5 विकेट।अगले सीजन में उत्तरी पंजाब के विरुद्ध एक मैच में उनकी टक्कर थी बिशन सिंह बेदी से, गोयल इस मैच में भारी पड़े, उन्होंने इस मैच में 59 रन देकर 10 विकेट लिए। 1973-74 में गोयल ने हरियाणा से खेलना आरम्भ किया और पहले ही मैच में रेलवे के विरुद्ध 55 रन देकर 8 विकेट लिए। ये पहली बार था जब हरियाणा के किसी गेंदबाज ने पारी में 8 विकेट लिए थे।

1975-76 दलीप ट्रॉफी फाइनल में North Zone का मुकाबला था South Zone से। South Zone की ओर से खेल रहे थे भारत की प्रसिद्ध स्पिन चौकड़ी में से तीन स्पिनर… चंद्रशेखर, प्रसन्ना और वेंकट, और North Zone की ओर से खेल रहे थे, बेदी और गोयल। यह मैच स्पिन गेंदबाजों के बीच एक युद्ध था। पहली पारी में साउथ जोन ने 390 रन बनाए, नॉर्थ ज़ोन के लिए बेदी ने 1 और गोयल ने 7 विकेट लिए। नॉर्थ ज़ोन की पहली पारी 291 पर सिमटी, चंद्रशेखर ने 5, प्रसन्ना और वेंकट ने 2-2 विकेट लिए। साउथ ज़ोन ने दूसरी पारी में 134 रन बनाए, बेदी और गोयल ने 5-5 विकेट लिए। 234 रनों का पीछा करने उतरी नॉर्थ ज़ोन की टीम वेंकट के सामने टिक नहीं पाई और 196 पर निपट गई। वेंकट ने 5, प्रसन्ना और चन्द्रशेखर ने 2-2 विकेट लिए। (सोर्स: http://www.CricketCountry.Com )

गोयल के समय में हरियाणा की टीम तीन बार रणजी ट्रॉफी सेमीफाइनल में पहुँची पर हर बार वहीं से बाहर होना पड़ा। गोयल के सन्यास लेने के कई वर्ष बाद जब 1991 में कपिल देव के नेतृत्व में हरियाणा ने वानखेड़े स्टेडियम में मुम्बई को 2 रन से पराजित करके रणजी ट्रॉफी जीती तो गोयल उस टीम के मुख्य चयनकर्ता थे।

गोयल ने घरेलू क्रिकेट में 157 मैचों में 18.58 की औसत से कुल 750 विकेट लिए, 59 बार उन्होंने पारी में 5 विकेट और 18 बार मैच में दस विकेट लिए। गोयल के 750 में से 637 विकेट रणजी ट्रॉफी में आए, यह एक रिकॉर्ड है।

राजिंदर गोयल का कल 77 वर्ष की आयु में निधन हो गया। दिवंगत आत्मा को नमन।

ॐ शांतिः।

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