The Fall of West Indian Empire and Rise of Australia

ऐलन बॉर्डर रिटायर हो चुके थे। एक कमजोर ऑस्ट्रेलियन टीम को वर्ल्ड कप चैंपियन बनाने के बाद उनका सपना था वेस्टइंडीज को टेस्ट सीरीज में हराना, तमाम प्रयासों के बाद भी वो पूरा न हो सका था। 1993 में एडिलेड में एक रन से टेस्ट मैच हारना उनका सपना तोड़ गया था।

1995 में मार्क टेलर की ऑस्ट्रेलिया वेस्ट इंडीज़ दौरे पर आई चार टेस्ट मैचों की सीरीज के लिए। वेस्ट इंडीज़ की टीम अभी भी खासी मजबूत थी भले ही कुछ बड़े नाम रिटायर हो चुके थे। टीम में रिची रिचर्डसन, ब्रायन लारा, कार्ल हूपर, वाल्श और एम्ब्रोस जैसे बड़े नाम थे। कप्तान रिची रिचर्डसन ने सीरीज से पहले कहा था कि ये ऑस्ट्रेलियाई टीम वेस्टइंडीज़ आने वाली सबसे कमजोर ऑस्ट्रेलियाई टीम है। उन्होंने क्या सोचकर ऐसा कहा था पता नहीं क्योंकि ऑस्ट्रेलिया की बैटिंग अच्छी खासी थी…. मार्क टेलर, माइकल स्लेटर, डेविड बून, दो दो वॉ… गेंदबाजी जरूर थोड़ी कम अनुभवी थी। रिची को पता नहीं था कि इस सीरीज में क्या होने वाला है।

पहला टेस्ट ब्रिजटाउन में था…. ऑस्ट्रेलिया ने मात्र 3 दिनों में ये टेस्ट दस विकेट से जीत लिया। टेस्ट क्रिकेट में उस समय की बेस्ट टीम के लिए ये एक बहुत बड़ा झटका था। दूसरा टेस्ट ड्रॉ रहा।

सीरीज जीत की उम्मीद बनाये रखने के लिए वेस्ट इंडीज़ का तीसरा टेस्ट मैच जीतना बहुत जरूरी था। तीसरा टेस्ट मैच पोर्ट ऑफ स्पेन की हरी पिच पर था। वाल्श और एम्ब्रोस की जोड़ी ने कहर ढा दिया। ऑस्ट्रेलिया पहले ही दिन मात्र 47 ओवरों में 128 पर ऑल आउट हो गई, स्टीव वॉ ने 65 नाबाद रन बनाए, उनके अलावा कोई भी एम्ब्रोस के सामने खड़ा नहीं हो पा रहा था।

एक ओवर में एम्ब्रोस को लगा कि स्टीव वॉ ने उन्हें गाली दी है, वो स्टीव वॉ की ओर बढ़े, उस समय के TV फुटेज देखकर आपको ऐसा लगेगा मानो वो किसी भी क्षण स्टीव वॉ को पीटना शुरू कर सकते हैं। रिची रिचर्डसन ने एम्ब्रोस को खींचकर अलग किया, एम्ब्रोस ने कुछ साल बाद एक इंटरव्यू में (मजाक करते हुए) कहा कि उस दिन वो स्टीव वॉ को इतना पेलते कि ऑस्ट्रेलिया एक महान क्रिकेटर खो देता।

अब वापस आते हैं खेल पर, इस पारी में कोई और खिलाड़ी 20 रन भी नहीं बना सका। एम्ब्रोस ने 5 विकेट लिए, वाल्श ने तीन। अब बारी थी वेस्ट इंडीज़ की, इनका भी यही हाल रहा, मात्र 60 ओवरों में 136 पर ऑल आउट, ग्लेन मैक्ग्रा 6 विकेट….. ऑस्ट्रेलिया की दूसरी पारी भी 105 पर ही निपट गई, एम्ब्रोस 4 विकेट…. वेस्ट इंडीज़ ने 98 रन का टारगेट एक विकेट पर ही पूरा कर लिया….

बाकी था जमैका में चौथा और ऐतिहासिक टेस्ट मैच, ऐतिहासिक इस लिहाज से नहीं कि ये कोई रोमांचक टेस्ट मैच था या दोनों टीमों के बीच बड़ी जोरदार टक्कर हुई, बल्कि इस लिहाज से कि इस मैच ने विश्व क्रिकेट में वेस्ट इंडीज़ की दो दशक से चली आ रही डॉमिनेन्स को समाप्त कर दिया। एक बल्लेबाज के रूप में स्टीव वॉ का कद बहुत ज्यादा बढ़ गया। मैच की शुरुआत बड़ी जबरदस्त हुई थी, वेस्ट इंडीज़ ने 103 रन तक केवल एक विकेट खोया था, यहाँ से ब्रायन लारा का आउट होना वेस्ट इंडीज़ की उम्मीदों के लिए बहुत बुरा साबित हुआ। कप्तान रिची ने हर सम्भव प्रयास किया और शतक बनाया लेकिन इंडीज़ 265 पर सिमट गई।

ऑस्ट्रेलिया की बल्लेबाजी ने भी अभी तक सीरीज में कोई बड़ा स्कोर नहीं बनाया था, इसलिए 265 का स्कोर बहुत कम नहीं माना जा रहा था। 73 पर 3 विकेट खो चुकी ऑस्ट्रेलियाई टीम भी संकट में थी।

यहाँ क्रीज़ पर एक साथ थे दो भाई, मार्क और स्टीव….. दोनों ने जबरदस्त बल्लेबाजी करते हुए 230 रन जोड़े और वेस्ट इंडीज़ को मैच से बाहर कर दिया। मार्क 126 रन बनाने के बाद एक उटपटांग शॉट खेलने में आउट हो गए, मार्क वॉ हमेशा काम खत्म होने के बाद आउट होने के नए नए तरीके इज़ाद करने के लिए प्रसिद्ध रहे। शायद यही कारण रहा कि वो कभी दोहरा शतक नहीं बना पाए। मार्क हमेशा से अपने भाई स्टीव से ज्यादा आकर्षक बल्लेबाज थे। बेहद स्टाइलिश और गिफ्टेड स्ट्रोकप्लेयर…. लेकिन स्टीव वॉ एक फाइटर थे…. उन्होंने पिछले टेस्ट में भी अकेले लड़ाई लड़ी थी और यहाँ भी 200 रन बनाए जो उनके करियर के अंत तक उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर रहा।

266 की लीड लेने के बाद ऑस्ट्रेलिया 531 पर ऑल आउट हो गई। वेस्ट इंडीज़ के बल्लेबाज हार मान चुके थे, टीम 213 पर सिमट गई। पारी और 53 रनों से टेस्ट जीतकर मार्क टेलर की टीम ने वो काम कर दिखाया था जो पिछले 15 साल में कोई टीम न कर सकी थी, ये काम था वेस्ट इंडीज़ को टेस्ट सीरीज में हराना।

रिची रिचर्डसन के पास शब्द नहीं थे कहने को, उनके अनुसार मार्क टेलर की जो टीम वेस्ट इंडीज़ आने वाली सबसे कमजोर ऑस्ट्रेलियन टीम थी उसने वेस्ट इंडीज़ को 2-1 से हरा दिया था। इस हार के बाद वेस्ट इंडीज़ कभी भी क्रिकेट में वो ताकत नहीं रह गई जो पिछले 15 सालों में थी। ब्रायन लारा, कार्ल हूपर और चंद्रपॉल के अलावा कोई भी बल्लेबाज वेस्ट इंडीज़ की महान बल्लेबाजी परंपरा को आगे नहीं बढ़ा सका। हर चीज़ का अंत होता है, वेस्ट इंडीज़ की डॉमिनेंस का अंत भी होना ही था। ऐलन बॉर्डर न सही मार्क टेलर सही।

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